भारत की रक्षा नीति: एक निर्णायक बदलाव
2020 के दशक की शुरुआत से भारत की रक्षा रणनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां रक्षा नीति अधिकतर प्रतिक्रियात्मक थी, वहीं अब वह सक्रिय, समेकित और तकनीक-आधारित हो गई है। यह बदलाव मुख्य रूप से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य, चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा तनाव, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की जरूरतों, और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की महत्वाकांक्षा से प्रेरित है। रक्षा मंत्रालय का 2023-24 का बजट ₹5.94 लाख करोड़ (लगभग 79 अरब अमेरिकी डॉलर) है, जो पिछले वर्ष से 9.5% अधिक है और इस रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), भारतीय नौसेना (IN) और स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SCO) जैसे प्रमुख संस्थान इस बदलाव को लागू करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत की रणनीतिक रक्षा नीतियां और क्षेत्रीय सुरक्षा
- GS पेपर 3: रक्षा – रक्षा खरीद सुधार, स्वदेशी उत्पादन और तकनीकी समाकलन
- निबंध: भारत की बदलती रक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके प्रभाव
संवैधानिक और कानूनी ढांचा
संविधान के Article 246 और संघ सूची की Entry 2 के तहत संसद को रक्षा मामलों में कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है, जो केंद्र सरकार को सैन्य मामलों पर नियंत्रण देता है। Defence of India Act, 1962 युद्ध या बाहरी आक्रमण के समय आपातकालीन शक्तियां प्रदान करता है, जबकि Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 की Section 4 अस्थिर क्षेत्रों में विशेष शक्तियां देती है, जो आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के कानूनी आधार हैं। रक्षा खरीद प्रक्रिया Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 द्वारा नियंत्रित होती है, जो पारदर्शिता, स्वदेशी सामग्री और त्वरित अधिग्रहण पर जोर देती है। सुप्रीम कोर्ट के Union of India v. Raghunath Thakur (2015) मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिली है।
आर्थिक पहलू: बजट, स्वदेशी उत्पादन और निर्यात
2023-24 का रक्षा बजट ₹5.94 लाख करोड़ है, जो भारत के GDP का 2.15% है, यह विकास की अन्य मांगों के बीच रक्षा को प्राथमिकता देने का संकेत है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन अब खरीद का 65% हिस्सा है, जो 2015 में 40% था। यह वृद्धि DPP 2020 और आत्मनिर्भर भारत पहल की वजह से संभव हुई है। रक्षा निर्यात वित्तीय वर्ष 2022-23 में 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है और 2025 तक इसे 5 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। रक्षा क्षेत्र में FDI का 74% स्वचालित मार्ग से आता है, जिससे तकनीकी हस्तांतरण और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है। DRDO को 2023 में ₹13,000 करोड़ का R&D बजट मिला है, जो नवीनतम स्वदेशी नवाचार का समर्थन करता है।
- 2023-24 में रक्षा बजट में 9.5% की वृद्धि (MoD Budget 2023)
- स्वदेशी खरीद सामग्री 2015 में 40% से बढ़कर 2023 में 65% (DPP 2020)
- 2018-2023 के बीच रक्षा निर्यात में 20% की CAGR वृद्धि (Defence Ministry Annual Report 2023)
- स्वचालित मार्ग से FDI 74% तक पहुंचा (DPIIT, 2023)
- 2023 में DRDO का R&D बजट ₹13,000 करोड़ (DRDO Annual Report 2023)
रक्षा आधुनिकीकरण में प्रमुख संस्थान
DRDO स्वदेशी अनुसंधान और विकास की अगुआई करता है, 2022 में मिसाइल परीक्षणों में 90% सफलता दर हासिल की। भारतीय वायु सेना (IAF) रणनीतिक वायु रक्षा और शक्ति प्रदर्शन पर केंद्रित है, जिसमें राफेल और स्वदेशी तेजस जैसे उन्नत विमान शामिल हैं। भारतीय नौसेना (IN) के पास 150 से अधिक जहाज हैं, जिनमें दो विमान वाहक भी शामिल हैं, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। रक्षा मंत्रालय (MoD) नीतियां बनाता है और खरीद पर नजर रखता है, जबकि Directorate General of Aeronautical Quality Assurance (DGAQA) गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करता है। SCO भारत के न्यूक्लियर हथियारों का प्रबंधन करता है, जो विश्वसनीय निवारक शक्ति बनाए रखता है।
- DRDO की मिसाइल परीक्षण सफलता दर: 90% (2022)
- भारतीय नौसेना का बेड़ा: 150+ जहाज, जिसमें 2 विमान वाहक (Indian Navy Annual Report 2023)
- रक्षा साइबर सुरक्षा बजट में 2023 में 30% की वृद्धि (MoD Cybersecurity Division Report 2023)
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम चीन
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| रक्षा बजट (2023) | ₹5.94 लाख करोड़ (~USD 79 बिलियन) | USD 230 बिलियन |
| स्वदेशी रक्षा उत्पादन | 65% (DPP 2020) | 80% (Made in China 2025) |
| रक्षा निर्यात | USD 1.5 बिलियन (FY 2022-23), लक्ष्य USD 5 बिलियन 2025 तक | USD 15+ बिलियन (2023) |
| R&D इकोसिस्टम | DRDO, निजी क्षेत्र और अकादमी में असंगठित समन्वय | एकीकृत नवाचार क्लस्टर, सुव्यवस्थित खरीद प्रक्रिया |
| रणनीतिक फोकस | सक्रिय, तकनीक-आधारित, क्षेत्रीय प्रभाव | तेज आधुनिकीकरण, वैश्विक शक्ति प्रदर्शन |
भारत के रक्षा क्षेत्र में अहम चुनौतियां
आत्मनिर्भर भारत के बावजूद, भारत का रक्षा R&D इकोसिस्टम अभी भी बिखरा हुआ है, जहां DRDO, निजी उद्योग और अकादमिक संस्थान के बीच तालमेल कम है। इससे देरी, लागत वृद्धि और तकनीक के प्रभावी उपयोग में बाधाएं आती हैं। चीन और अमेरिका के विपरीत, जहां नवाचार क्लस्टर और खरीद प्रक्रिया सुव्यवस्थित हैं, भारत को नौकरशाही और एजेंसियों के बीच समन्वय में दिक्कतें हैं। रक्षा निर्माण में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (DPSUs) का प्रभुत्व है, जो नवाचार और दक्षता में पीछे हैं। साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष रक्षा में तेजी से क्षमता निर्माण की जरूरत है ताकि उभरते हाइब्रिड खतरों से निपटा जा सके।
महत्व और आगे का रास्ता
- DRDO, निजी उद्योग और अकादमी के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए समर्पित नवाचार क्लस्टर और रक्षा कॉरिडोर विकसित करें।
- DPP 2020 को और सुधारकर खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाएं, डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाएं।
- 2030 तक स्वदेशी उत्पादन को कम से कम 80% तक बढ़ाएं, चीन की 'Made in China 2025' नीति से सीख लेकर।
- रक्षा R&D बजट ₹13,000 करोड़ से बढ़ाकर AI, हाइपरसोनिक और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी क्रांतिकारी तकनीकों को प्रोत्साहित करें।
- साइबर और अंतरिक्ष रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए बजट और संस्थागत समर्थन बढ़ाएं।
- निजी क्षेत्र और MSMEs की रक्षा निर्माण में भागीदारी बढ़ाकर आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविध और प्रतिस्पर्धी बनाएं।
- DPP 2020 सभी रक्षा खरीद में न्यूनतम 65% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य करता है।
- यह Defence Acquisition Procedure (DAP) की जगह पारदर्शिता और गति बढ़ाने के लिए आया।
- यह प्रक्रिया रक्षा निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी और FDI को प्रोत्साहित करती है।
- AFSPA केवल बाहरी आक्रमण के दौरान सीमा क्षेत्रों में सशस्त्र बलों को विशेष शक्तियां देता है।
- AFSPA की Section 4 अस्थिर क्षेत्रों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देती है।
- AFSPA रक्षा और आंतरिक सुरक्षा से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के तहत लागू किया गया है।
मुख्य प्रश्न
भारत की हालिया रणनीतिक और नीतिगत बदलावों का विश्लेषण करें कि कैसे ये रक्षा नीति में एक मील का पत्थर साबित हुए हैं। इस बदलाव में स्वदेशी उत्पादन, संस्थागत समन्वय और तकनीकी अपनाने की भूमिका पर चर्चा करें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और सुरक्षा, पेपर 3 – रक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड में रक्षा निर्माण इकाइयों और DRDO प्रयोगशालाओं का होना स्थानीय रोजगार और कौशल विकास में योगदान देता है।
- मुख्य बिंदु: झारखंड की राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन में भूमिका और नीतिगत बदलावों का क्षेत्रीय औद्योगिक विकास पर प्रभाव पर उत्तर तैयार करें।
केंद्र सरकार को रक्षा मामलों में कानून बनाने का संवैधानिक अधिकार किस प्रावधान के तहत मिलता है?
Article 246 और संघ सूची की Entry 2 के तहत संसद को रक्षा मामलों में कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है, जो केंद्र को सैन्य मामलों पर नियंत्रण देता है।
Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 का क्या महत्व है?
DPP 2020 रक्षा अधिग्रहण को नियंत्रित करता है, जिसमें स्वदेशी सामग्री, पारदर्शिता और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर दिया गया है, जिससे आत्मनिर्भरता और खरीद प्रक्रिया की दक्षता बढ़ती है।
भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन हाल में कैसे विकसित हुआ है?
स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी 2015 में 40% से बढ़कर 2023 में 65% हो गई है, जो नीतिगत सुधारों और आत्मनिर्भर भारत पहल का परिणाम है।
भारत की रक्षा नीति में Strategic Forces Command (SCO) की क्या भूमिका है?
SCO भारत के परमाणु हथियारों का प्रबंधन करता है, जो विश्वसनीय निवारक शक्ति और रणनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।
भारत की रक्षा R&D प्रणाली को क्यों असंगठित माना जाता है?
DRDO, निजी उद्योग और अकादमी के बीच समन्वय की कमी के कारण देरी और कम दक्षता होती है, जबकि चीन और अमेरिका जैसे देश एकीकृत नवाचार क्लस्टर का उपयोग करते हैं।
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