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2023-24 में भारत की ड्यूटी कटौती और इनपुट सप्लाई उपायों का अवलोकन

रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक भू-राजनीतिक टकरावों के कारण आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के जवाब में, भारत सरकार ने 2023 की शुरुआत से कस्टम ड्यूटी में संतुलित कटौती और इनपुट सप्लाई को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। ये उपाय मुख्य रूप से केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा वित्त मंत्रालय के अधीन जारी नोटिफिकेशन के जरिए लागू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बढ़ती इनपुट लागत को कम करना और औद्योगिक विकास को बनाए रखना है। ड्यूटी कटौती मुख्य रूप से इस्पात और पेट्रोकेमिकल जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल पर केंद्रित हैं, जिससे आयात शुल्क में 5-10% की कमी आई है। साथ ही सरकार घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए FY24 में 1.5 लाख करोड़ रुपये के प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का प्रावधान कर रही है। यह दोहरी रणनीति मुद्रास्फीति नियंत्रण और प्रतिस्पर्धात्मकता के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – व्यापार नीति, अप्रत्यक्ष कराधान, औद्योगिक विकास
  • GS पेपर 2: संस्थानों की भूमिका – CBIC, DGFT, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
  • निबंध: वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों का भारत की आर्थिक नीतियों पर प्रभाव

ड्यूटी समायोजन के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

कस्टम ड्यूटी लगाने और उसमें बदलाव करने का अधिकार केंद्र सरकार को कस्टम एक्ट, 1962 की सेक्शन 25, 28, और 28AA से प्राप्त है, जो संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत केंद्र को यह विशेष अधिकार देता है। विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार निर्यात-आयात नीति में बदलाव करने का कानूनी आधार प्रदान करता है। इसके अलावा, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट, 2017 इनपुट्स पर अप्रत्यक्ष करों को नियंत्रित करता है, जिससे कस्टम ड्यूटी में बदलाव GST प्रणाली के साथ तालमेल में होता है। CBIC द्वारा जारी नोटिफिकेशन इन कानूनी प्रावधानों को क्रियान्वित करते हैं, जो त्वरित टैरिफ समायोजन की सुविधा देते हैं और घरेलू वित्तीय कानूनों के अनुरूप होते हैं।

  • कस्टम एक्ट, 1962: सेक्शन 25, 28, 28AA ड्यूटी लगाने और छूट देने का अधिकार देते हैं।
  • विदेश व्यापार अधिनियम, 1992: व्यापार नीति संशोधन और लाइसेंसिंग का प्रावधान।
  • GST एक्ट, 2017: इनपुट्स पर अप्रत्यक्ष करों को नियंत्रित करता है और कस्टम ड्यूटी के साथ समन्वय करता है।
  • अनुच्छेद 246: कस्टम ड्यूटी पर केंद्र को विशिष्ट विधायी अधिकार देता है।

आर्थिक तर्क और ड्यूटी कटौती का उद्योग और मुद्रास्फीति पर प्रभाव

FY23 में भारत का व्यापारिक आयात 726 बिलियन डॉलर तक पहुंचा, जबकि विनिर्माण इनपुट लागत में मुद्रास्फीति 8.2% दर्ज की गई (CMIE डेटा)। सरकार ने इस्पात, पेट्रोकेमिकल और अन्य कच्चे माल पर 5-10% तक कस्टम ड्यूटी में कटौती की, जिससे उद्योग को सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये की बचत हुई (इकोनॉमिक सर्वे 2024)। हालांकि, Q4 FY23 में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि 4.5% तक धीमी रही (CSO डेटा), जो आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों को दर्शाता है। PLI योजनाओं के तहत FY24 में 1.5 लाख करोड़ रुपये का आवंटन ड्यूटी कटौती के साथ मिलकर घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करता है, जिससे आयात निर्भरता कम करने और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाने का लक्ष्य है।

  • व्यापारिक आयात: FY23 में 726 बिलियन डॉलर (वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय)।
  • विनिर्माण इनपुट लागत मुद्रास्फीति: FY23 में 8.2% (CMIE)।
  • प्रमुख कच्चे माल पर ड्यूटी कटौती: 2023 में 5-10% (CBIC नोटिफिकेशन)।
  • सालाना उद्योग बचत का अनुमान: 10,000 करोड़ रुपये (इकोनॉमिक सर्वे 2024)।
  • विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि: Q4 FY23 में 4.5% (CSO)।
  • PLI योजना आवंटन: FY24 में 1.5 लाख करोड़ रुपये (संघ बजट 2023-24)।

व्यापार और कर नीति लागू करने में संस्थागत भूमिकाएं

CBIC कस्टम और GST नीतियों को लागू करने वाली मुख्य एजेंसी है, जो ड्यूटी दरों में बदलाव के लिए नोटिफिकेशन जारी करती है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय व्यापार नीतियां बनाता है और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) का प्रबंधन करता है, जो व्यापार सुविधा और निर्यात-आयात लाइसेंसिंग देखता है। वित्त मंत्रालय राजकोषीय नीति और ड्यूटी संरचना में बदलाव का समन्वय करता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आर्थिक स्थिरता पर नजर रखता है और बाहरी दबावों से उत्पन्न मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति समायोजित करता है। इन संस्थानों के बीच समन्वय समय पर नीतिगत प्रतिक्रिया के लिए आवश्यक है।

  • CBIC: कस्टम ड्यूटी और GST नीति का क्रियान्वयन।
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय: व्यापार नीति निर्माण।
  • DGFT: निर्यात-आयात लाइसेंसिंग और व्यापार सुविधा।
  • वित्त मंत्रालय: राजकोषीय नीति और ड्यूटी संरचना का निरीक्षण।
  • RBI: आर्थिक और मुद्रास्फीति निगरानी।

भारत और यूरोपीय संघ की युद्ध के प्रति टैरिफ प्रतिक्रिया की तुलना

पहलूभारतयूरोपीय संघ
प्रेरक घटनारूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आपूर्ति बाधाएंरूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा/सामग्री की कमी
नीति प्रतिक्रियाप्रमुख कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी में 5-10% की क्रमिक कटौतीट्रेड डिफेंस इंस्ट्रूमेंट्स के तहत महत्वपूर्ण कच्चे माल पर आयात शुल्क का अस्थायी निलंबन
लागू करने की गतिCBIC द्वारा 2023 से चरणबद्ध नोटिफिकेशन2022 में तेजी से, अस्थायी टैरिफ निलंबन
विनिर्माण लागत पर प्रभावसालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये की बचत; इनपुट लागत मुद्रास्फीति अभी भी उच्चSMEs के लिए इनपुट लागत में लगभग 7% की कमी (यूरोपीय आयोग रिपोर्ट 2023)
पूरक उपायघरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये के PLI योजना आवंटनआपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा स्रोतों में विविधता पर ध्यान

भारत की नीति में अंतराल और चुनौतियां

भारत की टैरिफ समायोजन प्रक्रिया में वास्तविक समय डेटा एकीकरण और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के विकास के साथ समन्वय की कमी है, जिससे इनपुट उपलब्धता और लागत प्रतिस्पर्धा में देरी होती है। यूरोपीय संघ के तेज टैरिफ निलंबन तंत्र के विपरीत, भारत की चरणबद्ध ड्यूटी कटौती मुद्रास्फीति दबाव को तुरंत कम नहीं कर पाती। इसके अलावा, राजकोषीय सीमाएं ड्यूटी कटौती की सीमा को सीमित करती हैं ताकि राजस्व प्रभावित न हो। संस्थागत समन्वय मजबूत करना और नीति को गतिशील बनाने के लिए तकनीक का उपयोग करना बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • नीति प्रतिक्रिया के लिए वास्तविक समय डेटा का अभाव।
  • कस्टम ड्यूटी परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना के बीच सीमित समन्वय।
  • चरणबद्ध दृष्टिकोण के कारण मुद्रास्फीति और लागत राहत में विलंब।
  • राजकोषीय स्वास्थ्य सीमाएं आक्रामक ड्यूटी कटौती को रोकती हैं।

महत्त्व और आगे का रास्ता

वैश्विक व्यवधानों के जवाब में भारत की रणनीतिक ड्यूटी कटौती और इनपुट सप्लाई सुधार व्यावहारिक कदम हैं, जो मुद्रास्फीति नियंत्रण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाते हैं। प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए सरकार को कस्टम और व्यापार नीति के लिए वास्तविक समय डेटा एनालिटिक्स को संस्थागत करना चाहिए, CBIC, DGFT और उद्योग हितधारकों के बीच समन्वय बेहतर बनाना चाहिए, और ड्यूटी समायोजन को PLI योजनाओं के तहत घरेलू क्षमता विस्तार के साथ जोड़ना चाहिए। राजकोषीय अनुशासन बनाए रखते हुए ड्यूटी कटौती को उन क्षेत्रों पर केंद्रित करना चाहिए जहां अधिकतम गुणक प्रभाव हो। इस तरह की संतुलित नीति तालमेल भारत की विनिर्माण प्रतिस्पर्धा और आर्थिक मजबूती को मजबूत करेगा।

  • गतिशील कस्टम ड्यूटी नीति के लिए वास्तविक समय डेटा सिस्टम लागू करें।
  • संस्थागत समन्वय (CBIC, DGFT, वाणिज्य मंत्रालय) बढ़ाएं।
  • ड्यूटी कटौती को घरेलू विनिर्माण प्रोत्साहनों (PLI योजनाओं) के साथ संरेखित करें।
  • औद्योगिक गुणक प्रभाव बढ़ाने के लिए ड्यूटी कटौती को लक्षित करें।
  • आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती के साथ राजकोषीय अनुशासन बनाए रखें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
आयात पर कस्टम ड्यूटी और GST के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. कस्टम ड्यूटी कस्टम एक्ट, 1962 के तहत लगाई जाती है, जबकि आयात पर GST GST एक्ट, 2017 के तहत नियंत्रित होता है।
  2. कस्टम ड्यूटी और आयात पर GST परस्पर अलग हैं और एक साथ लागू नहीं किए जा सकते।
  3. कस्टम ड्यूटी में बदलाव करने का एकाधिकार केंद्र सरकार को संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत प्राप्त है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि कस्टम ड्यूटी कस्टम एक्ट, 1962 के तहत लगाई जाती है और आयात पर GST GST एक्ट, 2017 के तहत आता है। कथन 2 गलत है क्योंकि कस्टम ड्यूटी और GST आयात पर एक साथ लागू होते हैं, परस्पर अलग नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि अनुच्छेद 246 केंद्र को कस्टम ड्यूटी पर एकाधिकार विधायी अधिकार देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. PLI योजनाओं का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित कर आयात निर्भरता कम करना है।
  2. PLI आवंटन वित्त मंत्रालय के राजकोषीय बजट का हिस्सा होता है।
  3. PLI योजनाएं सीधे आयातित कच्चे माल पर कस्टम ड्यूटी कम करती हैं।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि PLI योजनाएं घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित कर आयात निर्भरता कम करती हैं। कथन 2 सही है क्योंकि PLI आवंटन वित्त मंत्रालय के बजट के तहत किया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि PLI योजनाएं सीधे कस्टम ड्यूटी में कटौती नहीं करतीं, बल्कि उत्पादन आधारित प्रोत्साहन देती हैं।

मेन्स प्रश्न

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारत की कस्टम ड्यूटी कटौती और इनपुट सप्लाई सुधारों की नीति का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। ये उपाय घरेलू विनिर्माण और मुद्रास्फीति नियंत्रण को कैसे प्रभावित करते हैं? नीति समन्वय और प्रभावशीलता सुधार के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (भारतीय अर्थव्यवस्था और विकास), पेपर 3 (आर्थिक नीतियां और औद्योगिक विकास)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के इस्पात और खनिज उद्योग कच्चे माल पर आयात शुल्क कटौती से लाभान्वित होते हैं, जिससे स्थानीय विनिर्माण और रोजगार प्रभावित होता है।
  • मेन्स पॉइंटर: ड्यूटी कटौती के झारखंड के औद्योगिक विकास, आपूर्ति श्रृंखला सुधार और राज्य की वित्तीय स्थिति पर प्रभाव को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
केंद्र सरकार को कस्टम ड्यूटी में बदलाव करने का अधिकार किस कानूनी प्रावधान से प्राप्त होता है?

केंद्र सरकार को कस्टम ड्यूटी लगाने और उसमें बदलाव करने का अधिकार मुख्य रूप से कस्टम एक्ट, 1962 की सेक्शन 25, 28, और 28AA से मिलता है। साथ ही, संविधान के अनुच्छेद 246 के तहत कस्टम ड्यूटी पर केंद्र को विशेष विधायी अधिकार प्राप्त है।

कस्टम ड्यूटी कटौती विनिर्माण इनपुट लागत को कैसे प्रभावित करती है?

कस्टम ड्यूटी में कटौती से आयातित कच्चे माल की लागत कम होती है, जिससे उद्योग को सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपये की बचत होती है। इससे FY23 में 8.2% दर्ज इनपुट लागत मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद मिलती है और विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) व्यापार नीति में क्या भूमिका निभाता है?

DGFT, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन, निर्यात-आयात लाइसेंसिंग, व्यापार सुविधा प्रदान करता है और वैश्विक व घरेलू परिस्थितियों के अनुसार व्यापार नीति में आवश्यक समायोजन करता है।

भारत की टैरिफ समायोजन नीति की तुलना यूरोपीय संघ की यूक्रेन युद्ध प्रतिक्रिया से कैसे की जा सकती है?

भारत ने 5-10% तक चरणबद्ध कस्टम ड्यूटी कटौती अपनाई है, जबकि यूरोपीय संघ ने 2022 में अपने ट्रेड डिफेंस इंस्ट्रूमेंट्स के तहत महत्वपूर्ण कच्चे माल पर आयात शुल्क का त्वरित और अस्थायी निलंबन किया, जिससे SMEs के लिए इनपुट लागत में लगभग 7% की तेजी से कमी आई।

भारत की ड्यूटी कटौती और इनपुट सप्लाई सुधारों की प्रभावशीलता में कौन-कौन सी चुनौतियां बाधक हैं?

मुख्य चुनौतियों में वास्तविक समय डेटा का अभाव, कस्टम, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी, चरणबद्ध कार्यान्वयन से होने वाला विलंब और राजकोषीय सीमाएं शामिल हैं, जो ड्यूटी कटौती की सीमा को प्रभावित करती हैं।

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