परिचय: भारत में ड्रोन निर्माण की तेजी
2023 के बाद से भारत में ड्रोन निर्माण क्षेत्र सरकार की रणनीतिक प्राथमिकता बन गया है। सरकार का उद्देश्य आयात पर निर्भरता घटाकर रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है। ड्रोन नियम, 2021 जो एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के तहत जारी किए गए हैं, नागरिक ड्रोन संचालन के लिए नियामक ढांचा प्रदान करते हैं, जबकि रक्षा खरीद नीतियां स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देती हैं। AI और 5G तकनीकों से प्रेरित वैश्विक UAV बाजार की तेजी भारत को घरेलू निर्माण प्रणाली का लाभ उठाकर बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने का मौका देती है।
फरवरी 2026 तक भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र में 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन और लगभग 40,000 DGCA-प्रमाणित रिमोट पायलट शामिल हैं, जो एक परिपक्व नियामक और परिचालन माहौल को दर्शाता है। 2025-26 के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI) के तहत ₹1,200 करोड़ का आवंटन इस क्षेत्र में मजबूत वित्तीय प्रतिबद्धता का संकेत है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: रक्षा उत्पादन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था
- GS पेपर 2: सरकारी नीतियां, नियामक ढांचे
- निबंध: रक्षा निर्माण में तकनीक और आत्मनिर्भरता
भारत में ड्रोन संचालन के लिए नियामक और कानूनी ढांचा
ड्रोन नियम, 2021 एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के तहत सिविल एविएशन निदेशालय (DGCA) को ड्रोन संचालन, पंजीकरण, पायलट प्रमाणन और अनुमति से संबंधित अधिकार देते हैं। नीति कार्यान्वयन के लिए सिविल एविएशन मंत्रालय (MoCA) मुख्य मंत्रालय है। इनमें ड्रोन के लिए अनिवार्य यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) और रिमोट पायलटों का प्रमाणन शामिल है।
डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2023 'मेक इन इंडिया' के सिद्धांत को मजबूत करता है, जिसमें रक्षा खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दी जाती है, जिसमें UAV भी शामिल हैं। ड्रोन संचालन से जुड़े डेटा सुरक्षा मुद्दे इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 (सेक्शन 69) के अंतर्गत आते हैं, जो संवेदनशील ड्रोन डेटा की सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रॉनिक डेटा की निगरानी और इंटरसेप्शन को नियंत्रित करता है।
- DGCA नागरिक ड्रोन संचालन का नियंत्रण करता है: पंजीकरण, पायलट लाइसेंसिंग, प्रशिक्षण संस्थान।
- MoCA ड्रोन नीतियां बनाता है और सरकारी योजनाओं (जैसे SVAMITVA, PMFBY) में ड्रोन को शामिल करता है।
- DPP 2023 रक्षा खरीद में स्वदेशी ड्रोन को प्राथमिकता देता है।
- IT एक्ट, 2000 (सेक्शन 69) ड्रोन डेटा सुरक्षा और साइबर निगरानी से संबंधित है।
आर्थिक पहलू और बाजार संभावनाएं
वैश्विक ड्रोन बाजार 2025 में 30 अरब डॉलर से अधिक था और 2030 तक 90-100 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें AI-सक्षम स्वायत्त सिस्टम और 5G कनेक्टिविटी मुख्य कारण हैं (Frost & Sullivan, 2025)। भारत का घरेलू ड्रोन बाजार अभी शुरुआती अवस्था में है लेकिन तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें फरवरी 2026 तक 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन और 244 DGCA-स्वीकृत प्रशिक्षण संस्थान हैं।
सरकार की ₹1,200 करोड़ की PLI योजना घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करने और 5 वर्षों में $300 मिलियन वार्षिक ड्रोन आयात बिल को 60% तक घटाने का लक्ष्य रखती है। इससे भारत के व्यापार संतुलन में सुधार होगा और विदेशी निर्भरता से जुड़ी रणनीतिक कमजोरियां कम होंगी।
- वैश्विक ड्रोन बाजार का विस्तार: $30B (2025) से $90–100B (2030), AI और 5G से प्रेरित।
- भारत का ड्रोन आयात बिल: लगभग $300 मिलियन वार्षिक, 2031 तक 60% कटौती का लक्ष्य।
- PLI योजना के तहत ₹1,200 करोड़ (2025-26) घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए।
- 38,500+ पंजीकृत ड्रोन और 39,890 प्रमाणित रिमोट पायलट परिचालन आधार बढ़ा रहे हैं।
भारत के ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र को संचालित करने वाले प्रमुख संस्थान
ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र कई संस्थानों के सहयोग से चलता है। DGCA नागरिक विमानन ड्रोन को नियंत्रित करता है, जबकि रक्षा मंत्रालय (MoD) सैन्य UAV विकास और खरीद की देखरेख करता है। स्वदेशी अनुसंधान और विकास DRDO और NAL द्वारा संचालित है। Invest India ड्रोन निर्माण में निवेश और व्यवसाय सुगमता को बढ़ावा देता है।
यह संस्थागत ढांचा नीति, नियमन, अनुसंधान एवं विकास और उद्योग संवर्धन को एकीकृत कर व्यापक ड्रोन निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का लक्ष्य रखता है।
- DGCA: नागरिक ड्रोन नियंत्रण, प्रमाणन, और प्रशिक्षण की निगरानी।
- MoD: रक्षा UAV खरीद और रणनीतिक तैनाती।
- DRDO और NAL: ड्रोन तकनीकों और घटकों में स्वदेशी अनुसंधान।
- Invest India: निवेश आकर्षित करता है, स्टार्टअप और MSME का समर्थन करता है।
ड्रोन निर्माण में भारत और चीन की तुलना
| पहलू | चीन | भारत |
|---|---|---|
| बाजार हिस्सेदारी | वैश्विक वाणिज्यिक ड्रोन बाजार का 70% (DJI के नेतृत्व में) | 5% से कम, प्रारंभिक घरेलू बाजार |
| सरकारी समर्थन | राज्य समर्थित R&D, निर्यात प्रोत्साहन, सब्सिडी | PLI योजना, DPP, नियामक सुधार |
| तकनीकी समावेशन | उन्नत AI, 5G-सक्षम स्वायत्त ड्रोन, एकीकृत सप्लाई चेन | AI और 5G एकीकरण प्रारंभिक स्तर पर, सीमित स्वदेशी घटक निर्माण |
| निर्यात क्षमता | मजबूत वैश्विक निर्यात, वाणिज्यिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों में प्रमुख | सीमित निर्यात, घरेलू और रक्षा जरूरतों पर ध्यान |
| सप्लाई चेन | सेंसर, चिप्स, बैटरी के लिए एकीकृत विनिर्माण प्रणाली | उच्च-सटीक सेंसर और AI चिप्स के लिए आयात निर्भरता |
भारत के ड्रोन निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण कमियां
भारत की सबसे बड़ी चुनौती उच्च-सटीक सेंसर, AI चिप्स और संचार मॉड्यूल जैसे महत्वपूर्ण घटकों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ाना है। इस कमी के कारण आयात पर निर्भरता बनी रहती है, जिससे सप्लाई बाधाओं का खतरा रहता है और निर्यात क्षमता सीमित होती है।
चीन की तरह राज्य समर्थित एकीकृत सप्लाई चेन के अभाव में भारत का पारिस्थितिकी तंत्र खंडित है, जहां सेमीकंडक्टर ग्रेड घटकों का घरेलू उत्पादन सीमित है। इस अंतर को पाटने के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण, AI अनुसंधान और सप्लाई चेन एकीकरण में निवेश जरूरी है।
- उच्च-सटीक सेंसर और AI चिप्स मुख्यतः आयातित, आत्मनिर्भरता कम।
- खंडित सप्लाई चेन लागत प्रतिस्पर्धा और उत्पादन विस्तार में बाधक।
- ड्रोन के लिए सेमीकंडक्टर और AI हार्डवेयर में सीमित स्वदेशी R&D।
- चीन जैसे राज्य समर्थित मॉडल की तरह पारिस्थितिकी तंत्र एकीकरण आवश्यक।
महत्व और आगे का रास्ता
ड्रोन निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता रक्षा में रणनीतिक स्वायत्तता और तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार में आर्थिक प्रतिस्पर्धा के लिए अहम है। आयात निर्भरता कम करने से भू-राजनीतिक सप्लाई शॉक के जोखिम घटेंगे और परिचालन तत्परता बढ़ेगी।
स्वदेशी घटक निर्माण को मजबूत करना, निजी क्षेत्र के R&D को प्रोत्साहित करना, प्रशिक्षण संसाधनों का विस्तार और सार्वजनिक-निजी साझेदारी को बढ़ावा देना जरूरी है। MoD, MoCA और IT मंत्रालयों के बीच नीति समन्वय नवाचार, नियमन और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
- ड्रोन के लिए सेमीकंडक्टर और AI हार्डवेयर निर्माण में निवेश बढ़ाएं।
- R&D और उत्पादन विस्तार के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी मजबूत करें।
- कुशल कार्यबल के निर्माण हेतु DGCA-स्वीकृत प्रशिक्षण और प्रमाणन बढ़ाएं।
- ड्रोन नीतियों को डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा ढांचे के साथ संरेखित करें।
अभ्यास प्रश्न
- ड्रोन नियम, 2021 को एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के तहत अधिसूचित किया गया था।
- ड्रोन नियम लागू करने के लिए रक्षा मंत्रालय मुख्य मंत्रालय है।
- भारत में संचालित सभी ड्रोन के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UIN) अनिवार्य है।
- भारत का ड्रोन आयात बिल लगभग $300 मिलियन वार्षिक है।
- डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2023 आयातित ड्रोन को प्राथमिकता देता है।
- PLI योजना के तहत 2025-26 में ₹1,200 करोड़ का आवंटन ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।
मुख्य प्रश्न
ड्रोन निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता के लिए सरकार की पहल की रणनीतिक महत्ता पर चर्चा करें। वर्तमान नियामक और आर्थिक ढांचा इस उद्देश्य को कैसे समर्थन देता है? ड्रोन निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद प्रमुख कमियों को दूर करने के लिए सुझाव दें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: सामान्य अध्ययन पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था
- झारखंड दृष्टिकोण: उभरती ड्रोन तकनीक झारखंड में खनिज अन्वेषण, वन निगरानी और आपदा प्रबंधन में मदद कर सकती है।
- मुख्य बिंदु: स्थानीय स्तर पर ड्रोन के उपयोग, सरकारी योजनाओं का प्रचार और स्वदेशी निर्माण की आवश्यकता पर जोर देते हुए उत्तर तैयार करें।
भारत में ड्रोन के नियमन का कानूनी आधार क्या है?
भारत में ड्रोन ड्रोन नियम, 2021 के तहत नियंत्रित होते हैं, जो एयरक्राफ्ट एक्ट, 1934 के अंतर्गत आते हैं। DGCA ड्रोन पंजीकरण, पायलट प्रमाणन और संचालन की अनुमति देने वाली नियामक संस्था है।
डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2023 ड्रोन निर्माण को कैसे समर्थन देता है?
DPP 2023 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देता है और रक्षा खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देता है, जिसमें UAV शामिल हैं, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ती है।
भारत के ड्रोन निर्माण क्षेत्र की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
भारत को उच्च-सटीक सेंसर और AI चिप्स जैसे महत्वपूर्ण घटकों के स्वदेशी निर्माण में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता बनी रहती है और उत्पादन तथा निर्यात क्षमता सीमित होती है।
ड्रोन निर्माण में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना की क्या भूमिका है?
PLI योजना के तहत 2025-26 में ₹1,200 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो घरेलू ड्रोन निर्माण को प्रोत्साहित करने और आयात निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखती है।
फरवरी 2026 तक भारत में कितने ड्रोन और रिमोट पायलट पंजीकृत हैं?
फरवरी 2026 तक भारत में 38,500 से अधिक पंजीकृत ड्रोन और 39,890 DGCA प्रमाणित रिमोट पायलट हैं।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 20 March 2026 | अंतिम अपडेट: 8 April 2026
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