भारत 2024 में एल नीनो जलवायु घटना के कारण गर्मियों में बिजली की चरम मांग में 8-10% की वृद्धि को पूरा करने के लिए अपनी बढ़ी हुई सौर क्षमता और कोयले के बेहतर उपयोग का सहारा लेने जा रहा है। मार्च 2024 तक देश की स्थापित सौर क्षमता 65 GW पहुंच चुकी है और वित्त वर्ष 2024-25 में 40 GW और जोड़ने की योजना है, जो 2010 में शुरू हुए राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत हो रहा है। बिजली उत्पादन में कोयला अभी भी मेरुदंड की भूमिका निभाता है और लगभग 1,000 GW की कुल स्थापित क्षमता में से 70% का योगदान देता है, जिससे सौर उत्पादन में उतार-चढ़ाव के दौरान ग्रिड स्थिर रहता है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), और पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (POSOCO) जैसी प्रमुख संस्थाएं मिलकर एल नीनो के कारण बढ़ी मांग के बीच नवीकरणीय ऊर्जा और कोयला आधारित उत्पादन के संतुलन को बनाए रखने में सहयोग कर रही हैं।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: पर्यावरण (जलवायु परिवर्तन के प्रभाव), अर्थव्यवस्था (ऊर्जा क्षेत्र, अवसंरचना)
- GS पेपर 3: आपदा प्रबंधन (एल नीनो का बिजली मांग पर प्रभाव)
- निबंध: ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास
भारत की ऊर्जा मिश्रण और विद्युत क्षेत्र का कानूनी ढांचा
विद्युत अधिनियम, 2003 (सेंट्रल एक्ट 36 ऑफ 2003) के तहत धारा 61 में टैरिफ नियंत्रण और धारा 86 में राज्य विद्युत नियामक आयोगों के कार्य निर्धारित किए गए हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा के समावेशन को संभव बनाते हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 सरकार को पर्यावरण संरक्षण के उपाय करने का अधिकार देता है, जो कोयले के उपयोग के साथ उत्सर्जन नियंत्रण में अहम है। विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 में नवीकरणीय ऊर्जा के समावेशन और ग्रिड लचीलेपन को बढ़ाने के प्रावधान शामिल किए गए हैं। राष्ट्रीय सौर मिशन, जो राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) का हिस्सा है, 2030 तक 500 GW सौर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखता है, जो भारत के पावर सेक्टर को कार्बन मुक्त करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
मांग पूरी करने में सौर और कोयले की आर्थिक व परिचालन भूमिका
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र ने 2023 में 20 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जो क्षमता विस्तार की मजबूती का संकेत है। इसके बावजूद, ग्रिड विश्वसनीयता और ऊर्जा भंडारण की कमी के कारण कोयला आधारित संयंत्र 70% बिजली उत्पादन करते हैं। घरेलू कोयला उत्पादन वित्त वर्ष 2023 में 7% बढ़कर 800 मिलियन टन हो गया, जिससे कोयला आयात में 15% की कमी आई। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने 2024 में चरम गर्मी की मांग में 8-10% की वृद्धि का अनुमान लगाया है, जिसका कारण एल नीनो की उच्च तापमान वाली स्थिति है। इस दौरान बिजली कटौती से 10,000 करोड़ रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है, जो संतुलित ऊर्जा पोर्टफोलियो की जरूरत को रेखांकित करता है।
जलवायु दबाव के दौरान ऊर्जा आपूर्ति प्रबंधन में संस्थागत भूमिकाएं
- MNRE: नवीकरणीय ऊर्जा नीतियां बनाता है और सौर क्षमता विस्तार की निगरानी करता है।
- CEA: बिजली मांग का पूर्वानुमान करता है, उत्पादन क्षमता और ग्रिड प्रबंधन योजनाएं बनाता है।
- CERC: टैरिफ और बाजार संचालन को नियंत्रित करता है ताकि नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन मिले।
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL): कोयला आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करता है और घरेलू उत्पादन बढ़ाता है।
- POSOCO: राष्ट्रीय ग्रिड का संचालन करता है, सौर उत्पादन में उतार-चढ़ाव के साथ कोयला आधारित उत्पादन का संतुलन बनाता है।
- IMD: एल नीनो घटनाओं की निगरानी करता है और समयपूर्व चेतावनी व मांग पूर्वानुमान प्रदान करता है।
ग्रिड अवसंरचना और ऊर्जा भंडारण की चुनौतियां
भारत की ग्रिड अवसंरचना और ऊर्जा भंडारण क्षमता अभी भी पर्याप्त नहीं है, जिससे चरम मांग के दौरान अस्थिर सौर ऊर्जा का पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता है और कोयला आधारित संयंत्रों पर निर्भरता बनी रहती है। यह अवसंरचनात्मक कमी सौर ऊर्जा की उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए आवश्यक परिचालन लचीलापन सीमित करती है, खासकर एल नीनो के कारण बढ़ी गर्मी की लहरों में। मौजूदा नीतियां मुख्यतः क्षमता विस्तार पर केंद्रित हैं, जबकि ग्रिड आधुनिकीकरण और बड़े पैमाने पर भंडारण समाधानों की जरूरत को नजरअंदाज कर रही हैं, जो कोयले की निर्भरता को कम करने में मददगार होंगे।
भारत और चीन के सौर-कोयला समन्वय की तुलना
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| स्थापित सौर क्षमता (2023-24) | 65 GW (मार्च 2024) | 400 GW (2023) |
| बिजली उत्पादन में कोयले का हिस्सा | लगभग 70% | लगभग 60% |
| सौर क्षमता लक्ष्य | 2030 तक 500 GW | 2030 तक लगभग 600 GW (लक्षित) |
| कोयला खपत में कमी | ग्रिड/भंडारण की कमी के कारण अभी तक महत्वपूर्ण नहीं | सौर समावेशन के कारण 12% कमी |
| ग्रिड आधुनिकीकरण और भंडारण | सीमित, विकासशील | उन्नत स्मार्ट ग्रिड और भंडारण तैनाती |
महत्व और आगे का रास्ता
- सौर ऊर्जा के बेहतर उपयोग और चरम मांग में कोयला निर्भरता कम करने के लिए ग्रिड आधुनिकीकरण और ऊर्जा भंडारण को तेजी से बढ़ावा देना।
- MNRE, CEA और POSOCO के बीच समन्वय बढ़ाकर मांग पूर्वानुमान और कोयला-सौर संसाधनों के गतिशील प्रबंधन को सुदृढ़ करना।
- विद्युत अधिनियम और विद्युत (संशोधन) विधेयक के तहत लचीले उत्पादन और भंडारण समाधानों को प्रोत्साहित करने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करना।
- जलवायु दबाव के दौरान ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन को सतत तरीके से बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत उत्सर्जन नियंत्रण करना।
- IMD के एल नीनो पूर्वानुमानों का उपयोग कर बिजली आपूर्ति और मांग के संतुलन को सक्रिय रूप से प्रबंधित करना ताकि कटौती से होने वाले आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।
- मार्च 2024 तक भारत की सौर क्षमता 65 GW पहुंच चुकी है, जो कुल बिजली उत्पादन में 50% से अधिक योगदान देती है।
- कोयला आधारित बिजली संयंत्र सौर उत्पादन में उतार-चढ़ाव के दौरान ग्रिड स्थिरता प्रदान करते हैं।
- विद्युत (संशोधन) विधेयक 2022 में नवीकरणीय ऊर्जा समावेशन को बेहतर बनाने के प्रावधान शामिल हैं।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
- वित्त वर्ष 2023 में घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारत ने कोयला आयात में 15% कमी की है।
- भारत की बिजली उत्पादन में कोयले का हिस्सा 50% से कम है।
- कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) सबसे बड़ा कोयला उत्पादक है जो आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत की सौर क्षमता बढ़ाने और कोयले के बेहतर उपयोग की रणनीति कैसे एल नीनो के कारण गर्मियों में बढ़ी बिजली मांग की चुनौतियों को संबोधित करती है? इस रणनीति पर प्रभाव डालने वाले संस्थागत भूमिकाओं और अवसंरचनात्मक कमियों पर चर्चा करें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी), पेपर 3 (ऊर्जा और अवसंरचना)
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड देश का प्रमुख कोयला उत्पादक है, जो भारत की घरेलू कोयला आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित होती है।
- मुख्य उत्तर बिंदु: झारखंड के कोयला उत्पादन की भूमिका को राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा संक्रमण की चुनौतियों से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत की ऊर्जा रणनीति में राष्ट्रीय सौर मिशन का क्या महत्व है?
राष्ट्रीय सौर मिशन, जो 2010 में NAPCC के तहत शुरू हुआ, भारत की सौर क्षमता को 2030 तक 500 GW तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिले और कार्बन उत्सर्जन कम हो।
एल नीनो भारत की बिजली मांग को कैसे प्रभावित करता है?
एल नीनो के कारण गर्मियों में तापमान बढ़ जाता है, जिससे ठंडक की मांग बढ़ती है और चरम बिजली मांग में 8-10% की वृद्धि होती है, जैसा कि IMD और CEA के संयुक्त अध्ययन में दिखाया गया है।
सौर क्षमता बढ़ने के बावजूद भारत कोयले पर क्यों निर्भर है?
ग्रिड अवसंरचना और ऊर्जा भंडारण की कमी के कारण भारत को ग्रिड स्थिरता और चरम मांग को पूरा करने के लिए कोयला आधारित संयंत्रों पर निर्भर रहना पड़ता है।
POSOCO भारत के पावर ग्रिड प्रबंधन में क्या भूमिका निभाता है?
POSOCO राष्ट्रीय ग्रिड का संचालन करता है, जो वास्तविक समय में आपूर्ति और मांग का संतुलन बनाता है, और नवीकरणीय ऊर्जा के उतार-चढ़ाव के साथ कोयला आधारित उत्पादन का समन्वय करता है।
भारत ने हाल ही में कोयला आयात कैसे कम किया है?
भारत ने वित्त वर्ष 2023 में घरेलू कोयला उत्पादन में 7% की वृद्धि कर 800 मिलियन टन उत्पादन किया, जिससे कोयला आयात में 15% की कमी आई और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
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