परिचय: भारत का सेमीकंडक्टर मिशन और उसकी सीमा
साल 2023 में भारत सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी चिप निर्माण मिशन के पहले चरण में 12 सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स को मंजूरी दी। यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के नेतृत्व में है, जिसका मकसद देश में सेमीकंडक्टर निर्माण का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है ताकि भारत की वर्तमान में 90% से अधिक चिप्स की आयात निर्भरता को कम किया जा सके। यह मिशन PLI योजना 2020 के तहत आता है और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC) योजना से भी समर्थित है। इसका लक्ष्य 2030 तक सार्वजनिक-निजी भागीदारी और रणनीतिक नीति प्रोत्साहनों के जरिए आत्मनिर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर बनाना है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: शासन – औद्योगिक नीति, PLI योजना, संघ सूची (Article 246)
- GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, आयात निर्भरता
- निबंध: तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा
कानूनी और संवैधानिक ढांचा
सेमीकंडक्टर मिशन का संचालन Article 246 के तहत होता है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को संघ सूची में रखता है और संसद को संबंधित नीतियां बनाने और लागू करने का अधिकार देता है। MeitY द्वारा 2020 में अधिसूचित PLI योजना के तहत 76,000 करोड़ रुपये (लगभग 10 अरब डॉलर) के वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं ताकि बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण में निवेश आकर्षित किया जा सके। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC) योजना इलेक्ट्रॉनिक्स पार्कों के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने में मदद करती है, जो इस मिशन को पूरा करने में सहायक है।
- PLI योजना (2020): सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और डिस्प्ले निर्माण में निवेश को प्रोत्साहित करती है।
- EMC योजना: राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर्स के लिए आधारभूत संरचना प्रदान करती है।
- Article 246: इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण पर केंद्र सरकार की विधायी अधिकारिता सुनिश्चित करता है।
आर्थिक पहलू और बाजार क्षमता
भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2026 तक 63 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2023 से 2026 के बीच 20% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ेगा (India Electronics and Semiconductor Association, 2023)। इस बढ़ोतरी के बावजूद भारत अपनी सेमीकंडक्टर जरूरतों का 90% से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिससे सालाना लगभग 24 अरब डॉलर का आयात बिल बनता है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। सरकार की 76,000 करोड़ रुपये की PLI योजना घरेलू निर्माण को बढ़ावा देकर इस प्रवृत्ति को पलटने की कोशिश कर रही है, जिससे 2030 तक 50,000 प्रत्यक्ष और 2,00,000 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
- सेमीकंडक्टर बाजार का अनुमानित आकार: 2026 तक 63 अरब डॉलर (IESA, 2023)।
- वर्तमान आयात निर्भरता: 90% से अधिक, सालाना 24 अरब डॉलर की लागत (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)।
- सरकारी प्रोत्साहन: PLI के तहत 76,000 करोड़ रुपये (बजट 2022-23)।
- रोजगार लक्ष्य: 2030 तक 50,000 प्रत्यक्ष और 2,00,000 अप्रत्यक्ष रोजगार।
मिशन संचालित करने वाले प्रमुख संस्थान
मिशन के क्रियान्वयन में कई संस्थान शामिल हैं जो नीति निर्धारण, उद्योग सहभागिता और अनुसंधान एवं विकास का समन्वय करते हैं। MeitY नीति निर्माण और लागू करने का नेतृत्व करता है। India Electronics and Semiconductor Association (IESA) उद्योग हितधारकों का प्रतिनिधित्व करता है और बाजार विश्लेषण प्रदान करता है। सरकारी स्वामित्व वाली Semiconductor Laboratory (SCL), चंडीगढ़ चिप निर्माण और शोध पर केंद्रित है। NITI आयोग रणनीतिक समन्वय करता है, जबकि टेलीकॉम विभाग (DoT) डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए आवश्यक स्पेक्ट्रम आवंटन और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करता है।
- MeitY: केंद्रीय नीति और क्रियान्वयन एजेंसी।
- IESA: उद्योग प्रतिनिधित्व और डेटा विश्लेषण।
- SCL चंडीगढ़: सरकारी सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं निर्माण।
- NITI आयोग: रणनीतिक योजना और मंत्रालयों के बीच समन्वय।
- DoT: स्पेक्ट्रम और कनेक्टिविटी समर्थन।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम दक्षिण कोरिया का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम
दक्षिण कोरिया की सेमीकंडक्टर सफलता का आधार सरकार की समन्वित नीतियां और सैमसंग व SK Hynix जैसे बड़े निजी निवेशक हैं, जिनकी वजह से 2023 तक उनका वैश्विक बाजार हिस्सा लगभग 20% है। कोरियाई वाणिज्य, उद्योग और ऊर्जा मंत्रालय ने कच्चे माल की आपूर्ति से लेकर उन्नत उपकरण निर्माण तक एक व्यापक इकोसिस्टम तैयार किया है। भारत का वर्तमान मिशन हालांकि महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसमें इस तरह की पूरी सप्लाई चेन का अभाव है और यह कच्चे माल व उपकरणों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, जो विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बाधा डालता है।
| पहलू | भारत | दक्षिण कोरिया |
|---|---|---|
| वैश्विक बाजार हिस्सा (2023) | <1% | लगभग 20% |
| सरकारी नीति | PLI योजना और EMC, असंगठित सप्लाई चेन | मंत्रालय-नेतृत्व वाली समन्वित रणनीति और निजी क्षेत्र |
| निजी क्षेत्र की भूमिका | उभरती भागीदारी, सीमित पैमाना | सैमसंग, SK Hynix जैसे बड़े वैश्विक खिलाड़ी |
| सप्लाई चेन | कच्चे माल और उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर | प्रमुख सामग्री और उपकरणों का घरेलू उत्पादन |
| रोजगार प्रभाव | 2030 तक 50,000 प्रत्यक्ष रोजगार का लक्ष्य | सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में लाखों रोजगार |
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में महत्वपूर्ण कमियां
भारत के मिशन को पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन स्थापित करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्नत सेमीकंडक्टर उपकरण और कच्चे माल के घरेलू उत्पादन का अभाव आयात निर्भरता को बढ़ाता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति संकटों का खतरा रहता है। विश्वसनीय बिजली, पानी और लॉजिस्टिक्स जैसी आधारभूत सुविधाओं की कमी फैब्रिकेशन प्लांट्स के संचालन में बाधा डालती है। इसके अलावा, सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण में कुशल कर्मियों की कमी नवाचार और विस्तार को रोकती है।
- सेमीकंडक्टर ग्रेड सिलिकॉन वेफर्स, फोटोलिथोग्राफी मशीनें और रसायनों के लिए आयात निर्भरता।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी: बिजली की विश्वसनीयता, पानी की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स की समस्याएं।
- सेमीकंडक्टर निर्माण और अनुसंधान में कुशल कर्मचारियों की कमी।
- निजी-सरकारी भागीदारी और इकोसिस्टम विकास की जरूरत।
महत्व और आगे का रास्ता
भारत का चरणबद्ध चिप निर्माण मिशन आयात निर्भरता कम करने और मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम बनाने की रणनीतिक पहल है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए भारत को कच्चे माल और उपकरणों की घरेलू सप्लाई चेन विकसित करनी होगी, आधारभूत संरचना में निवेश बढ़ाना होगा। कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूत करना और निजी-सरकारी भागीदारी को बढ़ावा देना भी जरूरी होगा। MeitY, NITI आयोग और उद्योग के बीच नीति स्थिरता और समन्वय मिशन की सफलता तय करेंगे, जिससे भारत सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर सके।
- कच्चे माल और उपकरणों के लिए घरेलू सप्लाई चेन विकसित करें।
- फैब्रिकेशन प्लांट्स के लिए बिजली, पानी और परिवहन जैसी आधारभूत सुविधाएं बेहतर बनाएं।
- सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण में कौशल विकास को बढ़ावा दें।
- इकोसिस्टम निर्माण के लिए निजी-सरकारी भागीदारी को प्रोत्साहित करें।
- नीति स्थिरता और संस्थागत समन्वय सुनिश्चित करें।
- यह मिशन 2020 में अधिसूचित Production Linked Incentive (PLI) योजना के तहत समर्थित है।
- भारत वर्तमान में अपनी सेमीकंडक्टर जरूरतों का 50% से अधिक घरेलू उत्पादन करता है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स (EMC) योजना इलेक्ट्रॉनिक्स पार्कों के लिए आधारभूत संरचना प्रदान करती है।
- भारत के पास कच्चे माल उत्पादन सहित एक समग्र सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन मौजूद है।
- सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स के लिए विश्वसनीय बिजली और पानी की आपूर्ति आवश्यक है।
- सेमीकंडक्टर मिशन के लिए नीति निर्माण का समन्वय MeitY करता है।
मुख्य प्रश्न
PLI योजना के तहत शुरू किए गए भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के उद्देश्य और चुनौतियों पर चर्चा करें। भारत अपनी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में मौजूद खामियों को कैसे दूर करके 2030 तक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में शामिल हो सकता है? (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन) और पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास)
- झारखंड का कोण: झारखंड के औद्योगिक क्लस्टर्स में सेमीकंडक्टर निर्माण इकाइयों की संभावनाएं, खनिज संसाधनों का लाभ उठाना और रोजगार सृजन।
- मुख्य बिंदु: राज्य के खनिज संपदा, इन्फ्रास्ट्रक्चर चुनौतियां और कौशल विकास को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
सेमीकंडक्टर के लिए Production Linked Incentive (PLI) योजना क्या है?
PLI योजना, जिसे MeitY ने 2020 में अधिसूचित किया, भारत में बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए 76,000 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है, जिसका मकसद आयात निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन बढ़ाना है।
भारत के पहले चरण में कितने सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स को मंजूरी मिली?
PLI योजना के तहत 2023 तक भारत के पहले चरण में 12 सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स को मंजूरी दी गई है, जो घरेलू चिप निर्माण इकोसिस्टम बनाने की दिशा में पहला कदम है।
भारत की सेमीकंडक्टर आयात निर्भरता वर्तमान में कितनी है?
भारत अपनी सेमीकंडक्टर जरूरतों का 90% से अधिक आयात करता है, और सालाना लगभग 24 अरब डॉलर चिप्स के आयात पर खर्च करता है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का समन्वय कौन-कौन से संस्थान करते हैं?
प्रमुख संस्थानों में MeitY (नीति और क्रियान्वयन), IESA (उद्योग प्रतिनिधित्व), Semiconductor Laboratory Chandigarh (R&D), NITI आयोग (रणनीतिक समन्वय) और DoT (कनेक्टिविटी समर्थन) शामिल हैं।
भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में प्रमुख कमियां क्या हैं?
भारत के पास कच्चे माल और उन्नत उपकरणों के लिए घरेलू सप्लाई चेन नहीं है, आधारभूत संरचना कमजोर है और कुशल प्रतिभा की कमी है, जिससे विस्तार और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ता है।
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