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2025-26 में भारत में पवन ऊर्जा की अब तक की सबसे बड़ी क्षमता वृद्धि

वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में 6.05 GW की नई क्षमता जोड़ी, जो 2024-25 के 4.14 GW की तुलना में 46% की उल्लेखनीय बढ़ोतरी है, यह जानकारी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने दी है। इस वृद्धि के साथ देश की कुल पवन ऊर्जा क्षमता 56 GW से ऊपर पहुंच गई है, जो केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 509.6 GW में महत्वपूर्ण योगदान देती है। गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्य इस विकास में सबसे आगे रहे हैं, जिन्होंने नई क्षमता का 60% से अधिक हिस्सा जोड़ा। यह उपलब्धि भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक बदलाव का संकेत देती है और देश को वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: ऊर्जा - नवीकरणीय ऊर्जा विकास, विद्युत अधिनियम 2003, ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001
  • GS पेपर 3: पर्यावरण - जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताएं, उत्सर्जन कटौती लक्ष्य
  • निबंध: भारत का ऊर्जा संक्रमण और जलवायु नेतृत्व

पवन ऊर्जा विस्तार के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

विद्युत अधिनियम, 2003 नवीकरणीय ऊर्जा के प्रचार के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है, विशेषकर धारा 61 और 86 जो केंद्रीय और राज्य विद्युत नियामक आयोगों (CERC और SERCs) को टैरिफ निर्धारित करने और नवीकरणीय खरीद बाध्यताओं को लागू करने का अधिकार देते हैं। राष्ट्रीय विद्युत नीति, 2005 सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लक्ष्यों को निर्धारित करती है। विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2022 खुला एक्सेस और ग्रिड लचीलापन बढ़ाकर नवीकरणीय ऊर्जा के समेकन को बढ़ावा देता है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) ऊर्जा दक्षता मानकों को लागू करता है जो मांग पक्ष पर दबाव कम करने में अहम हैं। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों जैसे Centre for Environmental Law, WWF India बनाम भारत संघ (2017) ने पर्यावरण न्यायशास्त्र के तहत नवीकरणीय ऊर्जा बाध्यताओं को मजबूत किया है।

  • MNRE: नीतियां बनाता है और नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन की निगरानी करता है।
  • CEA: डेटा उपलब्ध कराता है, ग्रिड समेकन योजना बनाता है और क्षमता का आकलन करता है।
  • SECI: नवीकरणीय ऊर्जा के टेंडर और परियोजना निष्पादन में मदद करता है।
  • SERCs: टैरिफ नियंत्रित करते हैं और राज्य स्तर पर नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं लागू करते हैं।
  • CERC: अंतरराज्यीय टैरिफ और नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्रों को नियंत्रित करता है।
  • BEE: ऊर्जा दक्षता मानक लागू करता है और संरक्षण को बढ़ावा देता है।

पवन ऊर्जा विकास को दर्शाते आर्थिक और क्षमता आंकड़े

2025 में भारत की कुल स्थापित विद्युत क्षमता 509.6 GW तक पहुंच गई है, जिसमें गैर-जीवाश्म स्रोतों का हिस्सा 262.74 GW या 51.5% है, जो नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शाता है। पवन ऊर्जा की संचयी क्षमता 56 GW से अधिक हो गई है, जबकि सौर ऊर्जा क्षमता 132.85 GW तक पहुंच चुकी है। हालांकि, कोयला आधारित क्षमता 244.80 GW (कुल क्षमता का 49%) है, लेकिन यह लगभग 74% विद्युत उत्पादन करता है, जो वास्तविक उत्पादन में संक्रमण की धीमी गति को दिखाता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) इंडिया एनर्जी आउटलुक 2025 के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 2025 में 15 अरब डॉलर से अधिक का निवेश हुआ। प्रतिस्पर्धात्मक टैरिफ ने पवन ऊर्जा की कीमतें 2.5 रुपये प्रति यूनिट से नीचे ला दी हैं, जिससे यह पारंपरिक स्रोतों के बराबर किफायती हो गई है।

पैरामीटरभारत (2025)चीन (2025)
वार्षिक पवन क्षमता वृद्धि6.05 GW (पिछले वर्ष से 46% वृद्धि)लगभग 50 GW (स्थिर वृद्धि, केंद्रीकृत योजना)
संचयी पवन क्षमता56+ GW300+ GW (वैश्विक अग्रणी)
स्थापित विद्युत क्षमताकुल 509.6 GW; 51.5% गैर-जीवाश्मलगभग 2,300 GW; >30% गैर-जीवाश्म
नीति दृष्टिकोणराज्य-प्रेरित, प्रतिस्पर्धात्मक टैरिफ, नियामक सुधारकेंद्रीकृत योजना, घरेलू विनिर्माण प्रभुत्व
टैरिफ स्तर2.5 रुपये/किलोवाट घंटे से कमपरिवर्तनशील, पैमाने के कारण सामान्यतः प्रतिस्पर्धात्मक

ग्रिड एकीकरण और उपयोग में चुनौतियां

रिकॉर्ड क्षमता वृद्धि के बावजूद भारत को ग्रिड एकीकरण में कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संसाधन संपन्न राज्यों से पवन ऊर्जा के ट्रांसमिशन में बाधाएं हैं, साथ ही पवन उत्पादन में अस्थिरता के कारण बेहतर पूर्वानुमान और संतुलन तंत्र की जरूरत है। ऊर्जा भंडारण के संसाधन अभी भी अपर्याप्त हैं, जिससे आपूर्ति में उतार-चढ़ाव को समतल करना मुश्किल हो रहा है। राज्य स्तर पर नीतिगत कार्यान्वयन में देरी और नियामक अड़चनें भी पवन ऊर्जा के बेहतर उपयोग में बाधक हैं। ये कमियां भारत को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के मुकाबले अपनी पवन क्षमता का पूर्ण लाभ उठाने से रोकती हैं, जहां समेकित ग्रिड प्रबंधन और भंडारण समाधान अधिक विकसित हैं।

  • तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में ट्रांसमिशन बाधाएं पवन ऊर्जा निकासी को सीमित करती हैं।
  • ग्रिड लचीलापन और पूर्वानुमान उपकरणों की कमी से कटौती जोखिम बढ़ता है।
  • भारत में ऊर्जा भंडारण क्षमता नवीकरणीय क्षमता का 1% से भी कम है।
  • राज्य स्तर पर नवीकरणीय खरीद बाध्यताओं के लागू होने में नियामक देरी परियोजना व्यवहार्यता को प्रभावित करती है।

महत्व और आगे का रास्ता

2025-26 में भारत की पवन ऊर्जा की रिकॉर्ड वृद्धि नवीकरणीय ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में निर्णायक कदम है, जो मजबूत नीतिगत ढांचे और सक्रिय राज्य भागीदारी से प्रेरित है। 50% से अधिक गैर-जीवाश्म क्षमता हासिल करना पेरिस समझौते और उत्सर्जन तीव्रता कटौती लक्ष्यों के अनुरूप एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हालांकि, ग्रिड एकीकरण की बाधाओं को दूर करना और ऊर्जा भंडारण को बढ़ाना पवन ऊर्जा के योगदान को अधिकतम करने के लिए जरूरी है। केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय मजबूत करना, ट्रांसमिशन अवसंरचना का तेजी से विकास करना, और भंडारण तकनीकों को प्रोत्साहित करना विकास को बनाए रखने और प्रणाली की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होगा।

  • ट्रांसमिशन नेटवर्क विस्तार और अंतरराज्यीय ग्रिड मजबूत करना तेज करें।
  • उन्नत पूर्वानुमान और मांग प्रतिक्रिया तंत्र लागू करें।
  • नीति प्रोत्साहनों और पायलट परियोजनाओं के माध्यम से ऊर्जा भंडारण तकनीकों को बढ़ावा दें।
  • राज्य स्तर पर नवीकरणीय खरीद बाध्यताओं के नियामक प्रवर्तन को सुदृढ़ करें।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वित्त पोषण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का लाभ उठाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के पवन ऊर्जा क्षेत्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत राज्य विद्युत नियामक आयोगों द्वारा नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं अनिवार्य हैं।
  2. भारत में पवन ऊर्जा टैरिफ हाल ही में आपूर्ति बाधाओं के कारण 3.5 रुपये/किलोवाट घंटे से ऊपर बढ़े हैं।
  3. 2025 तक भारत कुल नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में विश्व में चौथे स्थान पर है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि विद्युत अधिनियम की धारा 86 SERCs को नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं लागू करने का अधिकार देती है। कथन 2 गलत है; प्रतिस्पर्धात्मक बोली के कारण पवन टैरिफ 2.5 रुपये/किलोवाट घंटे से नीचे आ गए हैं। कथन 3 सही है; 2025 के आंकड़ों के अनुसार भारत नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में चौथे स्थान पर है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
2025-26 में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. भारत ने 6 GW से अधिक पवन क्षमता जोड़ी, जो पिछले वर्ष से 46% अधिक है।
  2. कोयला भारत की विद्युत उत्पादन में 50% से कम योगदान देता है, भले ही उसकी क्षमता अधिक हो।
  3. गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने नई पवन क्षमता वृद्धि का 60% से अधिक योगदान दिया।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 MNRE के आंकड़ों के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; कोयला कुल क्षमता का 49% होते हुए भी विद्युत उत्पादन का लगभग 74% करता है। कथन 3 राज्य स्तर की क्षमता वृद्धि रिपोर्टों के अनुसार सही है।

मुख्य प्रश्न

2025-26 में भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में रिकॉर्ड वृद्धि के पीछे के कारणों की जांच करें और इस क्षमता के बेहतर उपयोग में बाधक चुनौतियों पर चर्चा करें। इन चुनौतियों को दूर करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 - ऊर्जा संसाधन और पर्यावरण प्रबंधन
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की पवन ऊर्जा क्षमता सीमित है, लेकिन राज्य ग्रिड एकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों से ऊर्जा मिश्रण में विविधता ला सकता है।
  • मुख्य बिंदु: चर्चा करें कि झारखंड राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों का लाभ उठाकर ऊर्जा सुरक्षा कैसे सुधार सकता है और कोयला निर्भरता कम कर सकता है।
विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत नवीकरणीय ऊर्जा के प्रचार के लिए कौन-कौन से कानूनी प्रावधान हैं?

विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 61 और 86 केंद्रीय और राज्य विद्युत नियामक आयोगों को टैरिफ निर्धारित करने और नवीकरणीय खरीद बाध्यताएं लागू करने का अधिकार देती हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा के प्रचार के लिए अहम हैं।

2025-26 में भारत में कितनी पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई?

MNRE के अनुसार, भारत ने 2025-26 में 6.05 GW पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जो पिछले वर्ष के 4.14 GW से 46% अधिक है।

भारत की विद्युत उत्पादन में कोयले का कितना योगदान है?

कोयला भारत की कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 74% योगदान देता है, जबकि स्थापित क्षमता में इसका हिस्सा 49% है।

2025-26 में पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि में किन राज्यों का सबसे अधिक योगदान रहा?

गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र ने 2025-26 में नई पवन ऊर्जा क्षमता का 60% से अधिक योगदान दिया है।

भारत के ग्रिड में पवन ऊर्जा के समेकन में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में ट्रांसमिशन बाधाएं, उत्पादन में अस्थिरता का प्रबंधन, अपर्याप्त ऊर्जा भंडारण अवसंरचना, और राज्य स्तर पर नीतिगत कार्यान्वयन में देरी शामिल हैं।

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