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परिचय: PFBR की क्रिटिकलिटी प्राप्ति

21 अगस्त 2024 को कल्पक्कम में भारत के स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकलिटी हासिल की, जो देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) के संचालन में, जो परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अधीन है, यह 500 मेगावाट थर्मल (250 मेगावाट विद्युत) क्षमता वाला रिएक्टर यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है। क्रिटिकलिटी का मतलब है कि रिएक्टर में आत्म-स्थायी नाभिकीय विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया चल रही है, जो भारत की फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक की सफलता का प्रमाण है।

UPSC से जुड़ाव

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा, और रणनीतिक तकनीकें
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – परमाणु कूटनीति और रणनीतिक स्वायत्तता
  • निबंध: प्रौद्योगिकी और भारत का ऊर्जा संक्रमण

PFBR की तकनीकी विशेषताएँ और संचालन के सिद्धांत

PFBR एक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, जो पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों से अलग होता है क्योंकि यह विखंडन के लिए तेज न्यूट्रॉन का उपयोग करता है, जबकि थर्मल रिएक्टर धीमे न्यूट्रॉन पर निर्भर करते हैं। यह उपजाऊ यूरेनियम-238 को विखंडनशील प्लूटोनियम-239 में बदलकर अपने से अधिक fissile सामग्री पैदा करता है। MOX ईंधन के इस्तेमाल से ईंधन चक्र बंद रहता है, जिससे ईंधन की दक्षता बढ़ती है और प्राकृतिक यूरेनियम पर निर्भरता कम होती है।

  • तेज न्यूट्रॉन उच्च ब्रीडिंग अनुपात (>1.0) संभव बनाते हैं, जैसा कि IAEA तकनीकी रिपोर्ट, 2022 में पुष्टि हुई है।
  • PFBR की डिजाइन में एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) द्वारा नियंत्रित उन्नत सुरक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं।
  • क्रिटिकलिटी का मतलब है कि रिएक्टर में बाहरी न्यूट्रॉन स्रोत के बिना आत्म-स्थायी विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया चल रही है।

भारत के तीन-चरण परमाणु कार्यक्रम में PFBR का महत्व

होमी भाभा द्वारा कल्पित भारत का तीन-चरण परमाणु कार्यक्रम सीमित यूरेनियम और प्रचुर थोरियम संसाधनों का उपयोग कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य रखता है। PFBR इस कार्यक्रम का दूसरा चरण है, जो तेज ब्रीडर रिएक्टरों के माध्यम से प्लूटोनियम उत्पादन करता है, जो तीसरे चरण के थोरियम आधारित रिएक्टरों के लिए ईंधन तैयार करता है।

  • पहला चरण: प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) प्राकृतिक यूरेनियम से प्लूटोनियम बनाते हैं।
  • दूसरा चरण (PFBR): यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम-239 पैदा करता है, जो थोरियम रिएक्टरों के लिए ईंधन है।
  • तीसरा चरण: थोरियम-232 को fissile यूरेनियम-233 में बदलना, जो भारत के लगभग 9,60,000 टन थोरियम भंडार को ऊर्जा में बदलने का रास्ता खोलता है (Atomic Minerals Directorate, 2023)।

PFBR के लिए कानूनी और नियामक ढांचा

भारत में परमाणु ऊर्जा विकास Atomic Energy Act, 1962 के तहत आता है, जो सेक्शन 3 के अंतर्गत केंद्र सरकार को परमाणु ऊर्जा गतिविधियों का नियंत्रण देता है। PFBR जैसे परमाणु प्रतिष्ठानों के पर्यावरणीय संरक्षण के लिए Environment Protection Act, 1986 (सेक्शन 6 और 7) लागू होते हैं। संचालन सुरक्षा और लाइसेंसिंग Atomic Energy Regulatory Board (AERB) द्वारा देखरेख की जाती है। PFBR परियोजना Government of India (Allocation of Business) Rules, 1961 के तहत DAE के निर्देशों के अनुरूप है। जबकि PFBR से जुड़े सीधे सुप्रीम कोर्ट के मामले नहीं हैं, BARC सुविधाओं के पर्यावरण मंजूरी के मामले National Green Tribunal Act, 2010 के तहत सुने गए हैं।

PFBR और परमाणु ऊर्जा विस्तार के आर्थिक पहलू

PFBR परियोजना की अनुमानित लागत ₹13,000 करोड़ है (DAE बजट दस्तावेज, 2023)। भारत 2031 तक 22,480 मेगावाट परमाणु बिजली क्षमता का लक्ष्य रखता है (Draft National Electricity Plan, CEA 2022), जिसमें फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों का महत्वपूर्ण योगदान होगा। PFBR की ब्रीडिंग क्षमता यूरेनियम आयात को कम कर सकती है, जो 2022-23 में 3,000 टन था (Nuclear Fuel Report, DAE)। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

  • फास्ट ब्रीडर रिएक्टर उच्च ईंधन उपयोग और संसाधन दक्षता प्रदान करते हैं।
  • वैश्विक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर बाजार की CAGR 5.8% अनुमानित है (2023-2030), जो इसकी रणनीतिक आर्थिक अहमियत दर्शाता है (Global Market Insights, 2023)।
  • लंबे समय की तैयारी और उच्च पूंजी लागत व्यावसायिक विस्तार में बाधा हैं।

PFBR विकास और संचालन में मुख्य संस्थान

  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC): PFBR के लिए अनुसंधान और तकनीकी विकास।
  • भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI): फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों का संचालन और परियोजना क्रियान्वयन।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE): नीति निर्धारण, वित्त पोषण और निगरानी।
  • एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB): सुरक्षा नियमन और लाइसेंसिंग।
  • सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA): राष्ट्रीय ग्रिड में परमाणु ऊर्जा का समन्वय।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत का PFBR बनाम फ्रांस के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर

पहलूभारत का PFBRफ्रांस के Phénix और Superphénix
संचालन अवधि2024 में क्रिटिकलिटी, जारीPhénix (1973–2009), Superphénix (1985–1997)
ईंधन प्रकारयूरेनियम-प्लूटोनियम MOXप्लूटोनियम-यूरेनियम MOX
क्षमता500 MW थर्मल, 250 MW विद्युतSuperphénix: 1,200 MW विद्युत
चुनौतियाँउच्च पूंजी लागत, अपशिष्ट प्रबंधन, विस्तारआर्थिक गैर-व्यवहार्यता, सुरक्षा चिंताएं, राजनीतिक विरोध
तकनीकी स्थितिस्वदेशी विकास, उन्नत सुरक्षा समावेशनसंचालन में समस्याएं, अंततः बंद

भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम की चुनौतियाँ और महत्वपूर्ण अंतर

  • उच्च पूंजी निवेश और लंबी तैयारी अवधि व्यावसायिक क्रियान्वयन में देरी करती है।
  • परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन नीतियाँ अभी विकसित हो रही हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग सीमित होने से उन्नत ईंधन पुनर्प्रक्रिया तकनीकों तक पहुंच में बाधा।
  • प्रोटोटाइप से व्यावसायिक स्तर पर विस्तार के लिए निरंतर नीति और वित्तीय समर्थन जरूरी।

रणनीतिक और ऊर्जा सुरक्षा के मायने

PFBR की सफलता भारत की परमाणु तकनीक में रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाती है, जिससे आयातित यूरेनियम और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होती है। यह थोरियम आधारित रिएक्टरों के विकास की नींव मजबूत करता है, जो देश के विशाल थोरियम भंडार को ऊर्जा में बदलने की क्षमता रखते हैं। यह भारत के विविध, टिकाऊ ऊर्जा मिश्रण के लक्ष्य से मेल खाता है और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद करता है, जहां 2023 में परमाणु ऊर्जा का योगदान 3.2% था (CEA वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।

आगे का रास्ता

  • फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के व्यावसायीकरण को तेज करना, लागत नियंत्रण और तकनीकी सुधार के साथ।
  • परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन ढांचे और नियामक तंत्र को मजबूत करना।
  • प्रौद्योगिकी साझा करने और ईंधन चक्र उन्नति के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाना।
  • PFBR और अगले चरण के थोरियम रिएक्टरों को राष्ट्रीय ऊर्जा योजना में शामिल कर सतत विकास सुनिश्चित करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. PFBR विखंडन के लिए भारी पानी द्वारा moderated थर्मल न्यूट्रॉन का उपयोग करता है।
  2. क्रिटिकलिटी का मतलब है कि रिएक्टर में आत्म-स्थायी नाभिकीय विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया चल रही है।
  3. PFBR उपजाऊ यूरेनियम-238 से fissile प्लूटोनियम-239 पैदा करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि PFBR तेज न्यूट्रॉन का उपयोग करता है, थर्मल न्यूट्रॉन नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के तीन-चरण परमाणु कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. पहला चरण फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों से प्लूटोनियम बनाता है।
  2. दूसरे चरण में प्राकृतिक यूरेनियम से चलने वाले प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर होते हैं।
  3. तीसरा चरण थोरियम का उपयोग कर यूरेनियम-233 बनाता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर दूसरा चरण है, पहला चरण PHWR है। कथन 2 और 3 सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) की क्रिटिकलिटी प्राप्ति का देश के तीन-चरण परमाणु कार्यक्रम और ऊर्जा सुरक्षा के संदर्भ में महत्व पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC से जुड़ाव

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, ऊर्जा क्षेत्र
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में यूरेनियम खनन केंद्र हैं जो परमाणु ईंधन आपूर्ति में योगदान देते हैं; PFBR की सफलता स्थानीय यूरेनियम मांग और खनन नीतियों को प्रभावित कर सकती है।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर तैयार करते समय झारखंड के खनिज संसाधनों की राष्ट्रीय परमाणु रणनीति में भूमिका और ब्रीडर रिएक्टर तकनीक के क्षेत्रीय ऊर्जा योजना पर प्रभाव को उजागर करें।
परमाणु रिएक्टर में क्रिटिकलिटी का क्या मतलब है?

क्रिटिकलिटी वह स्थिति है जब रिएक्टर में आत्म-स्थायी नाभिकीय विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया चल रही हो, जिसमें बाहरी न्यूट्रॉन स्रोत की जरूरत न हो।

PFBR किस ईंधन का उपयोग करता है और क्यों?

PFBR यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है, जिससे उपजाऊ यूरेनियम-238 से fissile प्लूटोनियम-239 पैदा होता है, जो ईंधन दक्षता बढ़ाता है और बंद ईंधन चक्र को संभव बनाता है।

PFBR भारत के तीन-चरण परमाणु कार्यक्रम में कैसे फिट होता है?

PFBR दूसरा चरण है जो यूरेनियम-238 से प्लूटोनियम-239 पैदा करता है, जो तीसरे चरण में थोरियम से यूरेनियम-233 उत्पादन के लिए आवश्यक है।

भारत में परमाणु ऊर्जा विकास के लिए कौन सा कानूनी ढांचा लागू है?

Atomic Energy Act, 1962 परमाणु ऊर्जा विकास को नियंत्रित करता है, पर्यावरण संरक्षण Environment Protection Act, 1986 के तहत होता है, और सुरक्षा नियमन Atomic Energy Regulatory Board (AERB) के जिम्मे है।

भारत के फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम के मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में उच्च पूंजी लागत, लंबी तैयारी अवधि, परमाणु अपशिष्ट प्रबंधन, और उन्नत ईंधन पुनर्प्रक्रिया तकनीकों में सीमित अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं।

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