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भारत के अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को समझना: खंडित से एकीकृत विकास की ओर

भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाएँ उसकी अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की प्रभावशीलता से आंतरिक रूप से जुड़ी हुई हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह क्षेत्र खंडित रहा है, जिससे अक्षमताएँ, लॉजिस्टिक्स लागत में वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में बाधा उत्पन्न हुई है। हालिया नीतिगत हस्तक्षेप, विशेष रूप से राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) 2022 और PM गति शक्ति – मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान, एक एकीकृत, बहु-मॉडल और डिजिटल रूप से सक्षम लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैचारिक बदलाव को दर्शाते हैं।

इस रणनीतिक बदलाव का उद्देश्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में योजना और क्रियान्वयन में सामंजस्य स्थापित करना है, जिससे संसाधन उपयोग को अनुकूलित किया जा सके और परियोजना वितरण में तेजी लाई जा सके। कनेक्टिविटी, गति और लागत-प्रभावशीलता पर जोर भारत की विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने, निर्यात को बढ़ावा देने और देश को एक वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो प्रणालीगत परिवर्तन प्राप्त करने के लिए वृद्धिशील सुधारों से आगे बढ़ रहा है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS-III: भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, संसाधनों के जुटाने, वृद्धि, विकास और रोजगार से संबंधित मुद्दे। अवसंरचना: ऊर्जा, पत्तन, सड़कें, हवाई अड्डे, रेलवे आदि।
  • GS-II: विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप तथा उनके डिजाइन और कार्यान्वयन से उत्पन्न होने वाले मुद्दे।
  • GS-I: अर्थव्यवस्था पर उदारीकरण का प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव।
  • निबंध: आर्थिक विकास के लिए एक प्रवर्तक के रूप में अवसंरचना; 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स।

एकीकृत लॉजिस्टिक्स के लिए नीतिगत संरचना

भारत के अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने वाला संस्थागत ढाँचा अभिसरण को बढ़ावा देने और परियोजना कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें पारंपरिक सीमाओं को तोड़ने के उद्देश्य से समर्पित मंच और अंतर-मंत्रालयी समन्वय तंत्र शामिल हैं।

  • PM गति शक्ति – राष्ट्रीय मास्टर प्लान (2021): यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो 16 मंत्रालयों (रेलवे, सड़क, पत्तन, बिजली, विमानन सहित) को एकीकृत करता है ताकि अवसंरचना परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन को सक्षम किया जा सके। इसका उद्देश्य विभागीय सीमाओं को तोड़ना और भू-स्थानिक मानचित्रण के माध्यम से परियोजना की अवधारणा को अनुकूलित करना है।
  • राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) 2022: लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए एक व्यापक अंतर-अनुशासनात्मक, क्रॉस-सेक्टोरल और बहु-न्यायिक ढाँचा प्रदान करती है, जिसका लक्ष्य 2030 तक लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के ~13-14% से घटाकर 8% के वैश्विक औसत तक लाना है।
  • सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह (EGoS): कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में, यह समूह PM गति शक्ति ढाँचे के कार्यान्वयन की देखरेख करता है, अंतर-मंत्रालयी समन्वय सुनिश्चित करता है और विशिष्ट परियोजना-संबंधी मुद्दों का समाधान करता है।
  • नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (NPG): विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों से मिलकर बना NPG, समग्र नेटवर्क योजना के लिए PM गति शक्ति सिद्धांतों के आधार पर परियोजनाओं की समीक्षा और सिफारिश करता है।
  • यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP): NLP के तहत एक डिजिटल पोर्टल जिसे लॉजिस्टिक्स मूल्य श्रृंखला में विभिन्न डिजिटल प्रणालियों को एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो कागज़ रहित EXIM व्यापार, एकल-खिड़की निकासी और कार्गो आवाजाही की वास्तविक समय दृश्यता को सक्षम बनाता है।

प्रमुख कार्यान्वयन एजेंसियाँ और परियोजनाएँ

विभिन्न सरकारी एजेंसियाँ महत्वाकांक्षी अवसंरचना विकास एजेंडा को क्रियान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जिनमें से प्रत्येक परिवहन के विशिष्ट तरीकों पर ध्यान केंद्रित करती है, जबकि मल्टीमॉडल एकीकरण के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ संरेखित होती है।

  • भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI): राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए जिम्मेदार। लक्ष्य: वित्त वर्ष 2022-23 में 25,000 किमी राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास (सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के आँकड़े)।
  • भारतीय रेलवे (IR): नेटवर्क विस्तार, विद्युतीकरण और पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) जैसे समर्पित माल गलियारों (DFCs) पर ध्यान केंद्रित करता है ताकि माल ढुलाई क्षमता और गति को बढ़ाया जा सके।
  • भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI): नेविगेशन और शिपिंग के लिए अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास और विनियमन के लिए अनिवार्य। भारत में 111 घोषित राष्ट्रीय जलमार्ग (NWs) हैं।
  • भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI): नागरिक हवाई अड्डों और हवाई यातायात सेवाओं का प्रबंधन करता है। भारत के 2024 तक तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनने का अनुमान है (IATA अनुमान)।
  • सागरमाला कार्यक्रम (2015): पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की एक पहल जो पत्तन-आधारित विकास पर केंद्रित है, जिसमें पत्तन आधुनिकीकरण, नए पत्तन विकास, पत्तन कनेक्टिविटी और तटीय समुदाय विकास शामिल है।

लॉजिस्टिक्स अनुकूलन में चुनौतियाँ और बाधाएँ

महत्वपूर्ण नीतिगत प्रोत्साहन के बावजूद, कई संरचनात्मक और परिचालन चुनौतियाँ बनी हुई हैं, जो भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता की पूर्ण प्राप्ति में बाधा डाल रही हैं। ये अक्सर ऐतिहासिक कम निवेश और जटिल प्रशासनिक संरचनाओं से उत्पन्न होती हैं।

  • खंडित लॉजिस्टिक्स लागत संरचना: विकसित अर्थव्यवस्थाओं (जैसे, USA 8-9%, जर्मनी 8%) की तुलना में उच्च लॉजिस्टिक्स लागत (आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 के अनुसार GDP का ~13-14%) अक्षमताओं को इंगित करती है, जिसमें खराब इन्वेंट्री प्रबंधन, वेयरहाउसिंग और परिवहन शामिल हैं।
  • अंतिम-मील कनेक्टिविटी के मुद्दे: औद्योगिक केंद्रों और उपभोग केंद्रों तक अपर्याप्त सड़क और रेल संपर्क, विशेषकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में, व्यवसायों के लिए पारगमन समय और परिचालन लागत में वृद्धि करते हैं।
  • अवसंरचनात्मक अंतराल: मल्टी-मॉडल अवसंरचना में निरंतर अपर्याप्तता, जिसमें एकीकृत लॉजिस्टिक्स पार्क (ILPs), कोल्ड चेन सुविधाएँ और टर्मिनल अवसंरचना शामिल हैं, निर्बाध माल ढुलाई में बाधा डालती है।
  • नियामक जटिलता और कई स्वीकृतियाँ: ULIP जैसे प्रयासों के बावजूद, माल ढुलाई और वेयरहाउसिंग के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्रीय विभागों में विभिन्न परमिट और स्वीकृतियाँ प्राप्त करना एक समय लेने वाली प्रक्रिया बनी हुई है।
  • कौशल की कमी: लॉजिस्टिक्स प्रबंधन, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक लॉजिस्टिक्स प्रौद्योगिकियों को संभालने में कुशल जनशक्ति की कमी, परिचालन दक्षता और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने पर प्रभाव डालती है।
मापदंड भारत का लॉजिस्टिक्स परिदृश्य (NLP/गति शक्ति से पहले) वैश्विक मानक (विकसित अर्थव्यवस्थाएँ)
लॉजिस्टिक्स लागत (GDP का %) ~13-14% (आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22) ~8-9% (जैसे, USA, जर्मनी)
लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI) रैंकिंग (2023) 139 देशों में से 38वाँ (विश्व बैंक LPI 2023) उच्च रैंकिंग वाले देश लगातार 10 से नीचे (जैसे, सिंगापुर, फिनलैंड, डेनमार्क)
औसत ट्रक गति (किमी/घंटा) ~25-40 किमी/घंटा (उद्योग अनुमान, समर्पित गलियारों से पहले) ~60-80 किमी/घंटा (विकसित सड़क नेटवर्क)
मॉडल मिश्रण (सड़क बनाम रेल/जलमार्ग) सड़क का प्रभुत्व (लगभग 60-70% माल ढुलाई हिस्सेदारी) महत्वपूर्ण रेल/जलमार्ग हिस्सेदारी के साथ संतुलित मॉडल मिश्रण (जैसे, EU में ~40-50% गैर-सड़क)
डिजिटल एकीकरण सीमित, खंडित डिजिटल प्लेटफॉर्म आपूर्ति श्रृंखला दृश्यता के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, IoT, AI का उच्च स्तर पर अपनाया जाना

नीति कार्यान्वयन का समालोचनात्मक मूल्यांकन

PM गति शक्ति और NLP में निहित स्थापत्य परिवर्तन वैचारिक रूप से मजबूत है, जो खंडित विभागीय योजना से दूर होकर 'संपूर्ण-सरकार' दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहा है। हालाँकि, एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक चुनौती जटिल संघीय ढाँचे में निहित है, जहाँ भूमि अधिग्रहण और स्थानीय स्वीकृतियाँ अक्सर राज्य के अधिकार क्षेत्र में रहती हैं, जिससे केंद्रीय स्तर पर परिकल्पित परियोजनाओं के लिए संभावित बाधाएँ पैदा होती हैं। भारत की दोहरी नियामक संरचना—जहाँ केंद्रीय नीतियां दृष्टिकोण निर्धारित करती हैं, लेकिन राज्य-स्तरीय प्रवर्तन और जमीनी स्वीकृतियाँ महत्वपूर्ण हैं—अधिकार क्षेत्रों में परियोजना निष्पादन में समन्वय चुनौतियाँ पैदा करती है।

इसके अलावा, ULIP जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की सफलता विविध सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के हितधारकों के बीच व्यापक डेटा साझाकरण और मानकीकरण पर निर्भर करती है, जिसके लिए पर्याप्त संस्थागत क्षमता निर्माण और मजबूत डेटा शासन ढाँचे की आवश्यकता है। जबकि नीति डिजाइन स्पष्ट रूप से मल्टीमॉडल एकीकरण को संबोधित करता है, जमीनी परियोजना तालमेल में इसके प्रभावी अनुवाद को सुनिश्चित करना निरंतर निगरानी और अनुकूली शासन तंत्र की मांग करता है, विशेष रूप से अंतर-एजेंसी संघर्षों को हल करने में जो अक्सर अवसंरचना परियोजनाओं पर विभिन्न CAG ऑडिट रिपोर्टों में उजागर किए गए लागत और समय की अधिकता का कारण बनते हैं।

लॉजिस्टिक्स परिवर्तन का संरचित मूल्यांकन

  • नीति डिजाइन गुणवत्ता: उच्च। नीतियां (PM गति शक्ति, NLP) रणनीतिक रूप से सुदृढ़ हैं, मल्टीमॉडल एकीकरण, डिजिटल परिवर्तन और लागत में कमी का लक्ष्य रखती हैं। वे प्रणालीगत अक्षमताओं की स्पष्ट समझ दर्शाती हैं और व्यापक समाधान प्रस्तावित करती हैं, जो अवसंरचना योजना के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हैं।
  • शासन/कार्यान्वयन क्षमता: मध्यम से सुधरती हुई। जबकि EGoS और NPG जैसे तंत्र समन्वय को बढ़ाते हैं, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और विविध राज्य और निजी संस्थाओं में निर्बाध डेटा प्रवाह सुनिश्चित करने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। ULIP जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म आशाजनक दिखते हैं, लेकिन उनकी पूरी क्षमता के लिए सार्वभौमिक अपनाने और अंतरसंचालनीयता की आवश्यकता है।
  • व्यवहारिक/संरचनात्मक कारक: मध्यम। नई तकनीकों और मल्टीमॉडल परिवहन को उद्योग द्वारा अपनाने के लिए अभी भी प्रोत्साहन और व्यवहारिक परिवर्तनों की आवश्यकता है। खंडित भूमि रिकॉर्ड, राज्य-विशिष्ट नियम और सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता के विरासत के मुद्दे संरचनात्मक बाधाएँ उत्पन्न करते हैं जिन्हें दूर करने के लिए निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति और सहयोगात्मक संघवाद की आवश्यकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
PM गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसका उद्देश्य 16 केंद्रीय मंत्रालयों में अवसंरचना परियोजनाओं की योजना और कार्यान्वयन को एकीकृत करना है।
  2. इस योजना का लक्ष्य 2030 तक भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के 8% से कम करना है।
  3. यह कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह (Empowered Group of Secretaries) के समग्र पर्यवेक्षण के तहत संचालित होता है।
  • a1 और 2 केवल
  • b2 और 3 केवल
  • c1 और 3 केवल
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास और विनियमन के लिए निम्नलिखित में से कौन सा निकाय मुख्य रूप से जिम्मेदार है?
  1. पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
  2. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)
  3. भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI)
  4. डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL)
  • aकेवल 1
  • bकेवल 3
  • c1 और 3 केवल
  • d2 और 4 केवल
उत्तर: (b)

मुख्य परीक्षा प्रश्न

“राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (2022) और PM गति शक्ति योजना भारत के अवसंरचना विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता के दृष्टिकोण में एक प्रतिमान बदलाव को दर्शाती हैं।” इस कथन का समालोचनात्मक मूल्यांकन करें, भारत में वास्तव में एक एकीकृत और लागत प्रभावी लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र प्राप्त करने में संभावित लाभों और लगातार बनी हुई चुनौतियों पर चर्चा करें। (250 शब्द)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM गति शक्ति क्या है?

PM गति शक्ति 2021 में शुरू किया गया एक राष्ट्रीय मास्टर प्लान है, जो 16 मंत्रालयों को अवसंरचना कनेक्टिविटी परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन के लिए एक साथ लाने हेतु एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। इसका उद्देश्य विभागीय सीमाओं को तोड़ना, संसाधन उपयोग को अनुकूलित करना और निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना है।

राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) 2022 के प्रमुख उद्देश्य क्या हैं?

NLP का लक्ष्य 2030 तक भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को GDP के लगभग 13-14% से घटाकर वैश्विक औसत 8% तक लाना, लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI) रैंकिंग में सुधार करना और एक कुशल लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र के लिए डेटा-संचालित निर्णय समर्थन तंत्र बनाना है। यह प्रक्रिया पुनर्रचना, डिजिटलीकरण और मल्टीमॉडल परिवहन पर केंद्रित है।

यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) लॉजिस्टिक्स दक्षता में कैसे योगदान देता है?

ULIP, NLP के तहत एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे लॉजिस्टिक्स मूल्य श्रृंखला में विभिन्न डिजिटल प्रणालियों को एकीकृत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह हितधारकों को वास्तविक समय की जानकारी तक पहुँचने, कार्गो आवाजाही को ट्रैक करने और कागज़ रहित लेनदेन को सुविधाजनक बनाने में सक्षम बनाता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है, देरी कम होती है और समग्र परिचालन दक्षता में सुधार होता है।

लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (LPI) में भारत की वर्तमान स्थिति क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

विश्व बैंक की LPI 2023 रिपोर्ट के अनुसार, भारत 139 देशों में से 38वें स्थान पर रहा, जो 2018 में 44वें स्थान से एक महत्वपूर्ण छलांग है। यह सुधार बेहतर सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, अवसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय शिपमेंट को इंगित करता है, जो लॉजिस्टिक्स दक्षता और वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए हालिया सरकारी पहलों के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है।

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