भारत में श्रमशक्ति का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत है। Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2019-20 के अनुसार लगभग 90% श्रमिक अनौपचारिक रोजगार में लगे हैं। संवैधानिक निर्देशों और हाल की विधायी सुधारों के बावजूद, यह विशाल वर्ग श्रम कानूनों और सामाजिक सुरक्षा तंत्र के तहत पर्याप्त सुरक्षा से वंचित है। मई दिवस 2024 पर ध्यान इस "बिना आधार वाली श्रमशक्ति" पर केंद्रित है — ऐसे श्रमिक जिन्हें न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा और औपचारिक रोजगार अधिकारों की गारंटी नहीं मिली है, जो समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय को कमजोर करता है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 1: भारतीय समाज (श्रम और रोजगार)
- GS पेपर 2: शासन (श्रम कानून और सामाजिक सुरक्षा)
- GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था (अनौपचारिक क्षेत्र, श्रम सुधार)
- निबंध: समावेशी विकास और सामाजिक न्याय
श्रम सुरक्षा के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा
Article 43 जो राज्य नीति के निर्देशात्मक सिद्धांतों में है, राज्य को सभी श्रमिकों के लिए जीवित वेतन और मानवीय कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने का निर्देश देता है। हाल ही में श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है, जिनमें Code on Wages, 2019 और Code on Social Security, 2020 प्रमुख हैं। Code on Wages के Sections 6 और 7 न्यूनतम वेतन प्रावधानों को सभी क्षेत्रों में एकीकृत करते हैं ताकि प्रवर्तन सरल हो सके। Code on Social Security के Sections 2 और 3 के तहत अनौपचारिक और गिग श्रमिकों सहित सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज देने का प्रस्ताव है, जिसमें स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व लाभ और पेंशन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने Olga Tellis v. Bombay Municipal Corporation (1985) मामले में Article 21 के तहत आजीविका के अधिकार को मान्यता दी, जिससे राज्य की अनौपचारिक श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मजबूत हुई।
- इन प्रावधानों के बावजूद प्रवर्तन कमजोर है क्योंकि अधिकार क्षेत्र बंटा हुआ है, सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन अनिवार्य नहीं है और निरीक्षण तंत्र अपर्याप्त हैं।
- श्रम संहिताएं अभी तक सभी अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योगदान अनिवार्य नहीं करतीं, जिससे कवरेज में बड़ा अंतर बना हुआ है।
भारत की अनौपचारिक श्रमशक्ति की आर्थिक हकीकत
अनौपचारिक क्षेत्र भारत की GDP में लगभग 45% योगदान देता है (Economic Survey 2023-24), लेकिन यह 90% श्रमिकों को रोजगार देता है, जो कम उत्पादकता और खराब श्रम मानकों को दर्शाता है। न्यूनतम वेतन कवरेज केवल 17% श्रमिकों तक सीमित है (Labour Bureau, 2022), जो व्यापक वेतन असुरक्षा को दर्शाता है। सामाजिक सुरक्षा कवरेज और भी कम है, अनौपचारिक श्रमिकों के लिए 10% से नीचे (ILO Report 2023), जिससे वे बीमारी, वृद्धावस्था और बेरोजगारी जैसे जोखिमों के सामने असुरक्षित हैं।
- सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) पेंशन योजना के लिए ₹7,500 करोड़ आवंटित किए, जो अनौपचारिक श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था आय सुरक्षा प्रदान करती है।
- 2023 में बेरोजगारी दर 7.2% रही (CMIE डेटा), जो अनौपचारिक श्रमिकों को अधिक प्रभावित करती है क्योंकि उनके पास बेरोजगारी लाभ नहीं है।
- अनौपचारिक श्रमिकों को अक्सर वेतन चोरी, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और शिकायत निवारण तंत्र की कमी का सामना करना पड़ता है।
श्रम और सामाजिक सुरक्षा के प्रमुख संस्थान
श्रम और रोजगार मंत्रालय (MoLE) श्रम नीतियां बनाता है और श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की देखरेख करता है। Labour Bureau वेतन और रोजगार डेटा एकत्र करता है, जो नीति निर्धारण के लिए जरूरी है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) सामाजिक सुरक्षा कोषों का प्रबंधन करता है, लेकिन मुख्य रूप से औपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के लिए। International Labour Organization (ILO) तकनीकी सहायता प्रदान करता है और वैश्विक श्रम मानकों को बढ़ावा देता है। Central Statistics Office (CSO) PLFS संचालित करता है, जो श्रम बाजार डेटा का मुख्य स्रोत है।
- MoLE और राज्य श्रम विभागों के बीच समन्वय की कमी प्रवर्तन को कमजोर करती है।
- EPFO की सीमित पहुंच अधिकांश अनौपचारिक श्रमिकों को बाहर रखती है, जिससे वैकल्पिक सामाजिक सुरक्षा तंत्र की जरूरत है।
- अनौपचारिक रोजगार में डेटा की कमी और कम रिपोर्टिंग सबूत आधारित नीति निर्माण में बाधा डालती है।
तुलनात्मक दृष्टिकोण: ब्राजील की Bolsa Familia और औपचारिककरण प्रोत्साहन
ब्राजील की Bolsa Familia शर्तीय नकद हस्तांतरण योजना और औपचारिक रोजगार के प्रोत्साहनों ने एक दशक में सामाजिक सुरक्षा कवरेज को 20% से बढ़ाकर 60% किया (World Bank Report 2022)। इस समेकित रणनीति ने गरीबी और अनौपचारिक रोजगार को काफी हद तक कम किया।
| पहलू | भारत | ब्राजील |
|---|---|---|
| अनौपचारिक श्रमशक्ति (%) | ~90% (PLFS 2019-20) | ~40% (World Bank 2022) |
| सामाजिक सुरक्षा कवरेज (अनौपचारिक श्रमिक) | <10% (ILO 2023) | 60% (World Bank 2022) |
| न्यूनतम वेतन प्रवर्तन | 17% कवरेज (Labour Bureau 2022) | सर्वत्र न्यूनतम वेतन और बेहतर प्रवर्तन |
| प्रमुख हस्तक्षेप | PM-SYM पेंशन योजना, खंडित संहिताएं | Bolsa Familia + औपचारिककरण प्रोत्साहन |
भारत के श्रम सुरक्षा ढांचे में प्रमुख कमजोरियां
भारत की श्रम संहिताओं में मजबूत प्रवर्तन तंत्र की कमी है और ये अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन या व्यापक सामाजिक सुरक्षा अनिवार्य नहीं करतीं। केंद्र और राज्यों के बीच श्रम कानूनों की विविधता और खराब समन्वय कार्यान्वयन में बाधा डालते हैं। अधिकांश अनौपचारिक श्रमिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे से बाहर हैं, और वेतन चोरी या असुरक्षित कार्य परिस्थितियों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होती।
- सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन की अनुपस्थिति कई क्षेत्रों में वेतन की न्यूनतम सीमा अस्पष्ट छोड़ती है।
- PM-SYM जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में जागरूकता और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण नामांकन सीमित है।
- श्रम निरीक्षण अपर्याप्त हैं, निरीक्षण-से-फर्म अनुपात कम है और दंड कमजोर हैं।
आगे का रास्ता: श्रमिकों के लिए मजबूत आधार सुनिश्चित करना
- महंगाई और क्षेत्रीय जीवन यापन लागत के अनुसार सूचकांकित सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन लागू करें।
- अनौपचारिक श्रमिकों को योगदान और गैर-योगदान योजनाओं में शामिल कर सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाएं।
- MoLE, राज्य सरकारों और सामाजिक सुरक्षा संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बढ़ाएं ताकि प्रवर्तन सशक्त हो।
- तकनीक का उपयोग कर श्रमिक पंजीकरण, शिकायत निवारण और लाभ वितरण को आसान बनाएं।
- अनौपचारिक उद्यमों को लक्षित कर जागरूकता अभियान और प्रोत्साहन के माध्यम से औपचारिककरण को बढ़ावा दें।
- Code on Wages, 2019, Sections 6 और 7 के तहत न्यूनतम वेतन प्रावधानों को समेकित करता है।
- Code on Social Security, 2020, सभी अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज अनिवार्य करता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने Olga Tellis v. Bombay Municipal Corporation मामले में Article 21 के तहत आजीविका के अधिकार को मान्यता दी।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- अनौपचारिक श्रमिक भारत की कुल श्रमशक्ति का लगभग 90% हैं।
- अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज ILO 2023 के अनुसार 50% से अधिक है।
- न्यूनतम वेतन कवरेज Labour Bureau 2022 के अनुसार केवल 17% है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत की अनौपचारिक श्रमशक्ति को श्रम सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा तक पहुंच में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें। संवैधानिक निर्देशों और हाल के श्रम सुधारों के अनुरूप इस वर्ग के लिए न्यूनतम सुरक्षा का प्रावधान सुनिश्चित करने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – सामाजिक मुद्दे और श्रम कल्याण
- झारखंड का परिप्रेक्ष्य: झारखंड की बड़ी अनौपचारिक खनन और निर्माण श्रमशक्ति सामाजिक सुरक्षा की कमी और वेतन अनियमितताओं से जूझ रही है।
- मुख्य बिंदु: राज्य विशेष श्रम चुनौतियों, PM-SYM जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कार्यान्वयन की खामियों को उजागर करें और केंद्रीय संहिताओं के अनुरूप राज्य स्तर के सुधार प्रस्तावित करें।
श्रम कल्याण में Article 43 का क्या महत्व है?
Article 43 निर्देशात्मक सिद्धांतों के तहत राज्य को श्रमिकों के लिए जीवित वेतन और मानवीय कार्य परिस्थितियां सुनिश्चित करने का निर्देश देता है, जो श्रम सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा नीतियों को संवैधानिक आधार प्रदान करता है।
Code on Wages, 2019 श्रम कानून प्रवर्तन को कैसे सरल बनाता है?
यह न्यूनतम वेतन, वेतन भुगतान और बोनस से संबंधित कई कानूनों को एक कोड में समेकित करता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में अनुपालन और प्रवर्तन आसान हो जाता है।
अनौपचारिक श्रमिकों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज कम क्यों है?
अनिवार्य योगदान की कमी, प्रशासनिक चुनौतियां और जागरूकता की कमी के कारण ILO 2023 के अनुसार अनौपचारिक श्रमिकों में सामाजिक सुरक्षा कवरेज 10% से कम है।
PM-SYM पेंशन योजना की क्या भूमिका है?
PM-SYM अनौपचारिक श्रमिकों के लिए स्वैच्छिक वृद्धावस्था पेंशन प्रदान करती है, जिसमें सरकार भी योगदान देती है, ताकि इस कमजोर वर्ग को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सके।
ब्राजील की Bolsa Familia योजना भारत की अनौपचारिक श्रमशक्ति की समस्याओं से कैसे संबंधित है?
Bolsa Familia नकद हस्तांतरण और औपचारिककरण प्रोत्साहनों को मिलाकर सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने और अनौपचारिक रोजगार घटाने में सफल रही, जो भारत के श्रम सुधारों के लिए एक मॉडल प्रस्तुत करती है।
सरकारी स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
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