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परिचय: स्वदेशी समुद्री हमले की क्षमता का परिचय

दिसंबर 2023 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बंगाल की खाड़ी में भारत की नई हेलीकॉप्टर-लॉन्चेड नौसैनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। HAL ध्रुव Mk III नौसैनिक हेलीकॉप्टर से लॉन्च के लिए विकसित इस मिसाइल की रेंज 150 किमी और सुपरसोनिक गति मैक 2.5 है, जो भारत की जहाज-विरोधी युद्ध क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार दर्शाती है। यह मिसाइल स्वदेशी मल्टी-मोड सीकर तकनीक से लैस है जो समुद्री लक्ष्यों पर सटीक प्रहार संभव बनाती है। इस विकास से भारत की नौसैनिक हमले की क्षमता में कमी को पूरा करते हुए भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में समुद्री प्रभुत्व के रणनीतिक लक्ष्य को बल मिलता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा
  • GS पेपर 2: संघ सूची - अनुच्छेद 246 के तहत रक्षा, रक्षा खरीद प्रक्रिया
  • निबंध: स्वदेशी रक्षा नवाचार के जरिए भारत की रणनीतिक स्वायत्तता

मिसाइल कार्यक्रम के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

मिसाइल के विकास और तैनाती का संचालन Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के तहत होता है, जो स्वदेशी सामग्री पर जोर देते हुए खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करता है। Defence of India Act, 1915 सरकार को युद्धकाल में रक्षा उत्पादन और तैनाती को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। संवैधानिक रूप से, अनुच्छेद 246 और संघ सूची के प्रविष्टि 54 के तहत केंद्र सरकार के पास रक्षा मामलों का विशेष अधिकार है, जिससे नीति और संचालन एकीकृत होते हैं। DRDO Act, 1989 के अंतर्गत DRDO को मिसाइल और अन्य रक्षा प्रणालियों के अनुसंधान एवं विकास का मुख्य एजेंसी बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय (MoD) नीति निर्धारण और खरीद प्रक्रिया देखता है, भारतीय नौसेना मिसाइल का संचालन करती है, और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इसे नौसैनिक हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म पर एकीकृत करता है।

तकनीकी विशेषताएं और परिचालन लाभ

150 किमी की रेंज हेलीकॉप्टर को दुश्मन के जहाजों पर दूर से हमला करने की सुविधा देती है, जिससे हेलीकॉप्टर को दुश्मन की वायु रक्षा क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना पड़ता। मैक 2.5 की सुपरसोनिक गति लक्ष्य के प्रतिक्रिया समय को कम करती है और उन्नत नौसैनिक काउंटरमेजर्स को पार करने में मदद करती है। स्वदेशी मल्टी-मोड सीकर तकनीक सक्रिय रडार, इन्फ्रारेड और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेजर (ECCM) क्षमताओं को जोड़ती है, जो जटिल समुद्री माहौल में लक्ष्य की सटीक पहचान में सहायक है। यह मिसाइल लॉन्च तैयारी समय को 30% तक घटाती है, जिससे ऑपरेशन की गति और लॉन्च प्लेटफॉर्म की सुरक्षा बढ़ती है। ये सभी विशेषताएं भारत की जहाज-विरोधी हमले की क्षमता को रणनीतिक स्तर तक ले जाती हैं।

  • रेंज: 150 किमी (Indian Express, 2024)
  • गति: मैक 2.5 (DRDO प्रेस रिलीज, 2023)
  • प्लेटफॉर्म: HAL ध्रुव Mk III नौसैनिक हेलीकॉप्टर
  • मार्गदर्शन: स्वदेशी मल्टी-मोड सीकर
  • लॉन्च तैयारी समय: 30% कमी (भारतीय नौसेना डेटा)
  • परीक्षण सफलता: बंगाल की खाड़ी में 100% हिट सटीकता (MoD रिपोर्ट)

आर्थिक प्रभाव और रणनीतिक स्वायत्तता

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ₹5.25 लाख करोड़ (~$70 बिलियन) के रक्षा बजट आवंटन से स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को प्राथमिकता मिलती है। यह मिसाइल कार्यक्रम Make in India पहल के अनुरूप है, जो विदेशी आयात पर निर्भरता कम करता है और सालाना लगभग $500 मिलियन की बचत करता है (MoD रिपोर्ट 2023)। स्वदेशी मिसाइल उद्योग रक्षा निर्माण क्षेत्र का समर्थन करता है, जिसका 2027 तक 15% CAGR से विकास होने का अनुमान है (IBEF 2023), जो कुशल रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा देता है। यह आत्मनिर्भरता रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करती है, जिससे भारत क्षेत्रीय खतरे के अनुसार समुद्री रक्षा प्रणालियों को बिना बाहरी बाधा के अनुकूलित कर सकता है।

वैश्विक मिसाइलों से तुलना

विशेषताभारत की हेलीकॉप्टर-लॉन्चेड नौसैनिक मिसाइलअमेरिकी AGM-114 Hellfire मिसाइल
रेंज150 किमी8 किमी
गतिसुपरसोनिक (मैक 2.5)सबसोनिक (~मैक 0.9)
प्लेटफॉर्मHAL ध्रुव Mk III नौसैनिक हेलीकॉप्टरAH-64 Apache, MH-60 Seahawk हेलीकॉप्टर
मार्गदर्शनमल्टी-मोड स्वदेशी सीकर (रडार + IR + ECCM)लेजर-गाइडेड
भूमिकारणनीतिक जहाज-विरोधी हमलाटैक्टिकल एंटी-आर्मर और जहाज-विरोधी

यह तुलना दर्शाती है कि भारत ने टैक्टिकल मिसाइल भूमिकाओं से रणनीतिक समुद्री हमले की क्षमता की ओर कदम बढ़ाया है, जिससे दुश्मन के नौसैनिक गठन में गहराई से घुसपैठ और IOR में प्रभावी निवारण संभव हो पाया है।

महत्वपूर्ण क्षमता अंतर और एकीकरण चुनौतियां

तकनीकी प्रगति के बावजूद, मिसाइल का नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली के साथ एकीकरण सीमित है। वास्तविक समय डेटा लिंक क्षमताएं, जो बहु-प्लेटफॉर्म लक्षित कार्रवाई और गतिशील खतरे के जवाब के लिए जरूरी हैं, अभी पूरी तरह विकसित नहीं हैं। इससे मिसाइल की संयुक्त नौसैनिक टास्क फोर्स में पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाता और UAV, सतह जहाजों व पनडुब्बियों जैसे अन्य समुद्री संसाधनों के साथ तालमेल प्रभावित होता है। इन अंतरालों को दूर करने के लिए सुरक्षित संचार नेटवर्क, सेंसर फ्यूजन और कमांड-एंड-कंट्रोल इंटरऑपरेबिलिटी में निवेश जरूरी है।

रणनीतिक महत्व और आगे का रास्ता

  • लंबी दूरी और उच्च गति वाली जहाज-विरोधी हमले की क्षमता से भारत की समुद्री निवारण शक्ति बढ़ती है।
  • विदेशी मिसाइल आयात पर निर्भरता कम होकर रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी रक्षा उद्योग मजबूत होता है।
  • भारतीय नौसेना की भारतीय महासागर क्षेत्र में प्रभुत्व बनाए रखने की नीति का समर्थन करता है, जो क्षेत्रीय नौसैनिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
  • भविष्य में मिसाइल का नेटवर्क-केंद्रित युद्ध ढांचे से बेहतर एकीकरण और बहु-प्लेटफॉर्म समन्वय के लिए वास्तविक समय डेटा साझा करने पर ध्यान देना होगा।
  • सीकर की इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रतिरोधकता बढ़ाने, रेंज और पेलोड की बहुमुखी प्रतिभा बढ़ाने के लिए निरंतर R&D जरूरी है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की नई हेलीकॉप्टर-लॉन्चेड नौसैनिक मिसाइल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. इसकी सुपरसोनिक गति मैक 2 से अधिक है।
  2. इसे HAL रुद्र अटैक हेलीकॉप्टर से लॉन्च किया जा सकता है।
  3. यह स्वदेशी मल्टी-मोड सीकर तकनीक का उपयोग करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि मिसाइल मैक 2.5 की गति प्राप्त करती है। कथन 2 गलत है; मिसाइल HAL ध्रुव Mk III नौसैनिक हेलीकॉप्टर से लॉन्च होती है, रुद्र से नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि इसमें स्वदेशी मल्टी-मोड सीकर है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह सभी रक्षा खरीदों के लिए न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य करता है।
  2. यह 'Make in India' श्रेणी के तहत तेजी से खरीद प्रक्रिया को सक्षम बनाता है।
  3. यह Defence of India Act, 1915 के तहत संचालित होता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; DPP 2020 स्वदेशी सामग्री पर जोर देता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि यह 'Make in India' के तहत खरीद प्रक्रिया को तेज करता है। कथन 3 गलत है; DPP एक नीति ढांचा है, जो Defence of India Act, 1915 के तहत नहीं आता।

मुख्य प्रश्न

भारत की नई हेलीकॉप्टर-लॉन्चेड नौसैनिक मिसाइल समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को कैसे मजबूत करती है, इस पर चर्चा करें। इसके तकनीकी उन्नति और परिचालन एकीकरण में बचे हुए चुनौतियों का मूल्यांकन करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 - रक्षा और सुरक्षा
  • झारखंड पहलू: झारखंड में DRDO और HAL की सुविधाएं मिसाइल अनुसंधान एवं हेलीकॉप्टर निर्माण में योगदान देती हैं, जिससे स्थानीय रोजगार और तकनीकी कौशल विकास होता है।
  • मुख्य बिंदु: स्वदेशी रक्षा उत्पादन की भूमिका क्षेत्रीय विकास और रणनीतिक क्षमता निर्माण में उजागर करें।
भारत की नई हेलीकॉप्टर-लॉन्चेड नौसैनिक मिसाइल की रेंज और गति क्या है?

इस मिसाइल की रेंज 150 किमी है और यह मैक 2.5 की सुपरसोनिक गति प्राप्त करती है, जो लंबी दूरी और उच्च गति से समुद्री हमले की क्षमता देती है।

यह मिसाइल किस हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म से लॉन्च होती है?

यह मिसाइल HAL ध्रुव Mk III नौसैनिक हेलीकॉप्टर से एकीकृत और लॉन्च की जाती है, जो स्वदेशी रूप से विकसित एक बहु-भूमिका प्लेटफॉर्म है।

मिसाइल की स्वदेशी सीकर तकनीक इसकी प्रभावशीलता कैसे बढ़ाती है?

मल्टी-मोड सीकर सक्रिय रडार, इन्फ्रारेड और ECCM क्षमताओं को जोड़ती है, जो जटिल समुद्री माहौल में लक्ष्य की पहचान और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के खिलाफ मजबूती प्रदान करती है।

मिसाइल के विकास और तैनाती को कौन से कानूनी प्रावधान नियंत्रित करते हैं?

Defence Procurement Procedure 2020 खरीद प्रक्रिया को नियंत्रित करता है; Defence of India Act, 1915 युद्धकालीन अधिकार प्रदान करता है; और अनुच्छेद 246 व संघ सूची की प्रविष्टि 54 केंद्र सरकार को रक्षा मामलों का विशेष अधिकार देती है।

मिसाइल के पूर्ण परिचालन के लिए मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली के साथ एकीकरण और वास्तविक समय डेटा लिंक क्षमताओं का विकास अधूरा है, जिससे बहु-प्लेटफॉर्म संचालन और गतिशील लक्ष्य निर्धारण सीमित होता है।

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