ज्ञान भारतम मिशन का परिचय
सांस्कृतिक मंत्रालय ने 2026 में ज्ञान भारतम मिशन के तहत तीन महीने की राष्ट्रीय सर्वेक्षा शुरू की, जिसका मकसद देश की व्यापक पांडुलिपि विरासत का समग्र मानचित्रण, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और प्रसार करना है। इसे 2025-26 के केंद्रीय बजट में घोषित किया गया था। मिशन का लक्ष्य 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में विभिन्न भाषाओं और लिपियों में मौजूद पांडुलिपियों को एक राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में समाहित करना है। इस पहल के लिए 2025-2031 की अवधि में स्थायी वित्त समिति ने 491.66 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जो सरकार की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
- भारत में 5 करोड़ से अधिक पांडुलिपियाँ मौजूद हैं, लेकिन केवल लगभग 10% ही डिजिटलीकृत और सूचीबद्ध हैं (NMM रिपोर्ट, 2023)।
- यह मिशन 2003 में स्थापित राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के संस्थागत ढांचे पर आधारित है।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) और पुरातत्व सर्वेक्षण भारत (ASI) तकनीकी विशेषज्ञता और संरक्षण सहायता प्रदान करते हैं।
पांडुलिपि संरक्षण के लिए संवैधानिक और कानूनी आधार
भारत की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण के लिए संवैधानिक प्रावधान और क़ानूनी नियम मौजूद हैं। अनुच्छेद 29(1) अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा करता है ताकि वे अपनी भाषा और लिपि को संरक्षित रख सकें, जबकि अनुच्छेद 51A(e) नागरिकों पर देश की विरासत की रक्षा की मौलिक जिम्मेदारी थोपता है। प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 मुख्यतः भौतिक विरासत स्थलों के संरक्षण से संबंधित है, जबकि पांडुलिपि संरक्षण संस्कृति मंत्रालय के दायरे में आता है।
- राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन पांडुलिपि संरक्षण के लिए कानूनी और संस्थागत आधार प्रदान करता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (धारा 43A) डिजिटलीकरण के दौरान डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करता है, जिससे डिजिटल पांडुलिपि अभिलेखों की गोपनीयता और अखंडता बनी रहती है।
- निजी पांडुलिपि संग्रहों को कानूनी सुरक्षा की कमी के कारण क्षति और हानि का खतरा बना रहता है।
पांडुलिपि डिजिटलीकरण के आर्थिक पहलू
ज्ञान भारतम मिशन के लिए 2025-2031 की अवधि में 491.66 करोड़ रुपये का बजट सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में एक महत्वपूर्ण निवेश है, जिसका आर्थिक प्रभाव भी हो सकता है। सांस्कृतिक पर्यटन भारत की GDP में लगभग 5.45% योगदान देता है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24), और बेहतर डिजिटलीकरण से विरासत पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है क्योंकि इससे पहुंच और जागरूकता बढ़ती है। साथ ही, वैश्विक डिजिटल विरासत बाजार 2030 तक 12.1% की CAGR से बढ़ने का अनुमान है (MarketsandMarkets, 2024), जो भारत के लिए शैक्षिक प्रकाशन, डिजिटल अभिलेखागार और सांस्कृतिक निर्यात के अवसर खोलता है।
- डिजिटलीकृत पांडुलिपियाँ नए शोध, शैक्षिक सामग्री और बौद्धिक संपदा सृजन में मदद करेंगी।
- पांडुलिपियों तक बेहतर पहुंच से विदेशी विद्वानों को आकर्षित किया जा सकता है, जिससे भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति मजबूत होगी।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय से IT, अभिलेखीय विज्ञान और सांस्कृतिक प्रबंधन क्षेत्रों में रोजगार सृजन हो सकता है।
प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका
मिशन के कार्यान्वयन और विशेषज्ञता के लिए कई संस्थानों का सहयोग लिया जा रहा है:
- संस्कृति मंत्रालय (MoC): नीति निर्धारण, वित्तपोषण और समन्वय की शीर्ष संस्था।
- स्थायी वित्त समिति (SFC): सांस्कृतिक परियोजनाओं के लिए वित्तीय मंजूरी प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन (NMM): पांडुलिपि संरक्षण और सूचीकरण के लिए संस्थागत आधार।
- राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी (NDR): पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में संग्रहित और प्रसारित करने का मंच।
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA): दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण मानकों में विशेषज्ञता प्रदान करता है।
- पुरातत्व सर्वेक्षण भारत (ASI): पांडुलिपि से जुड़ी विरासत स्थलों और भौतिक संरक्षण में सहायता करता है।
भारत बनाम फ्रांस: डिजिटलीकरण प्रयासों की तुलना
| पहलू | भारत (ज्ञान भारतम मिशन) | फ्रांस (Bibliothèque nationale de France - BnF) |
|---|---|---|
| डिजिटलीकरण का पैमाना | 5 करोड़ पांडुलिपियाँ; वर्तमान में 10% डिजिटलीकृत | गैलिका के तहत 1.5 करोड़ से अधिक दस्तावेज डिजिटलीकृत |
| संस्थागत ढांचा | संस्कृति मंत्रालय, NMM, IGNCA, ASI | BnF एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय पुस्तकालय है जिसमें समर्पित डिजिटल लाइब्रेरी विभाग है |
| डिजिटल बुनियादी ढांचा | राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी विकसित हो रही है; एकीकृत मेटाडेटा मानक की कमी | स्थापित मेटाडेटा मानक; इंटरऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म |
| सार्वजनिक पहुंच | NDR के माध्यम से ऑनलाइन पहुंच योजना में; वर्तमान में सीमित | गैलिका मुफ्त, व्यापक सार्वजनिक पहुंच प्रदान करता है |
| वित्तपोषण | 2025-2031 के लिए 491.66 करोड़ रुपये | लंबी अवधि की सरकारी फंडिंग और निजी साझेदारी |
भारत में पांडुलिपि संरक्षण की प्रमुख चुनौतियाँ
भारत की समृद्ध पांडुलिपि विरासत के बावजूद कई समस्याएं बनी हुई हैं:
- एकीकृत मेटाडेटा मानक और इंटरऑपरेबल डिजिटल ढांचे की कमी के कारण डेटा विखंडित और पहुंच सीमित है।
- कई पांडुलिपियाँ, खासकर निजी संग्रहों में, सूचीबद्ध नहीं हैं और कानूनी सुरक्षा या डिजिटलीकरण प्राथमिकता से वंचित हैं।
- पांडुलिपि संरक्षण और डिजिटल अभिलेखन के लिए प्रशिक्षित कर्मी की कमी।
- सार्वजनिक जागरूकता कम है और पांडुलिपियों का मुख्यधारा की शिक्षा और शोध में सीमित समावेशन।
महत्व और आगे का रास्ता
- ज्ञान भारतम मिशन भारत की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो नाजुक पांडुलिपियों को डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण के माध्यम से संरक्षित करता है।
- इंटरऑपरेबल मेटाडेटा मानक बनाना और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना डेटा की पहुंच और शोध को बेहतर बनाएगा।
- कानूनी ढांचे का विस्तार करना आवश्यक है ताकि निजी स्वामित्व वाली पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्रोत्साहन मिल सके।
- संरक्षण तकनीकों और डिजिटल तकनीकों में क्षमता निर्माण सतत संरक्षण के लिए जरूरी है।
- डिजिटलीकृत पांडुलिपियों का उपयोग सांस्कृतिक पर्यटन और शैक्षिक प्रकाशन में कर आर्थिक लाभ और वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव बढ़ाया जा सकता है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 1: भारतीय संस्कृति, विरासत, कला रूप और साहित्य संरक्षण।
- GS पेपर 2: संस्कृति मंत्रालय, राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन जैसे संस्थानों की भूमिका।
- GS पेपर 3: सांस्कृतिक पर्यटन और डिजिटल विरासत बाजार का आर्थिक प्रभाव।
- निबंध: भारत की सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में परंपरा और तकनीक का संतुलन।
- प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 पांडुलिपि संरक्षण को सीधे नियंत्रित करता है।
- राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए स्थापित किया गया था।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 में पांडुलिपि डिजिटलीकरण के दौरान डिजिटल डेटा सुरक्षा के प्रावधान शामिल हैं।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- इसका उद्देश्य भारत की पांडुलिपि विरासत का डिजिटलीकरण और प्रसार है।
- मिशन को शिक्षा मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित किया जाता है।
- राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी मिशन का एक प्रमुख घटक है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मेन प्रश्न
भारत के ज्ञान भारतम मिशन के उद्देश्य और महत्व पर चर्चा करें। पांडुलिपि विरासत के संरक्षण में डिजिटलीकरण किस प्रकार मददगार हो सकता है और इसका सांस्कृतिक तथा आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ता है? (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 1 - भारतीय संस्कृति और विरासत
- झारखंड का पहलू: झारखंड में दुर्लभ आदिवासी पांडुलिपियाँ और लिपियाँ हैं, जो भारत की विविध पांडुलिपि विरासत का हिस्सा हैं और जिन्हें इस मिशन के तहत दस्तावेजीकृत किया जा सकता है।
- मेन पॉइंटर: झारखंड में आदिवासी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में ज्ञान भारतम मिशन की भूमिका पर प्रकाश डालें।
भारत में अनुमानित पांडुलिपियों की कुल संख्या कितनी है?
राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विभिन्न भाषाओं और लिपियों में 5 करोड़ से अधिक पांडुलिपियाँ होने का अनुमान है।
भारत में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए कौन-से संवैधानिक प्रावधान हैं?
अनुच्छेद 29(1) अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक और भाषाई अधिकारों की रक्षा करता है, जबकि अनुच्छेद 51A(e) नागरिकों पर देश की विरासत की रक्षा की मौलिक जिम्मेदारी लगाता है।
भौतिक विरासत स्थलों के संरक्षण के लिए कौन-सा अधिनियम लागू है?
प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 भौतिक विरासत स्थलों के संरक्षण से संबंधित है, पांडुलिपियों के लिए नहीं।
पांडुलिपि डिजिटलीकरण में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की क्या भूमिका है?
IT अधिनियम, 2000 की धारा 43A संवेदनशील डेटा की सुरक्षा अनिवार्य करती है, जिससे डिजिटलीकरण के दौरान डिजिटल पांडुलिपियों की अनधिकृत पहुँच और दुरुपयोग से रक्षा होती है।
ज्ञान भारतम मिशन के लिए कितनी वित्तीय सहायता दी गई है?
स्थायी वित्त समिति ने 2025-2031 की अवधि के लिए ज्ञान भारतम मिशन हेतु 491.66 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 17 March 2026 | अंतिम अपडेट: 8 April 2026
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