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भारत का हरित मार्ग: रणनीतिक अवलोकन

भारत का हरित मार्ग नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, सतत विकास नीतियों और अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं को जोड़ते हुए 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखता है। नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) नीतिगत रूपरेखा तैयार करता है, जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ऊर्जा क्षेत्र के आंकड़ों की निगरानी करता है। मार्च 2024 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 165 GW तक पहुंच चुकी है, जो कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 43% है (CEA रिपोर्ट, 2024)। 2023 में संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) को प्रस्तुत किए गए भारत के नेशनल्ली डिटरमाइंड कंट्रीब्यूशन्स (NDCs) के अनुसार 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य रखा गया है, जो विकास की आवश्यकताओं और जलवायु कार्रवाई के बीच संतुलित दृष्टिकोण दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण, ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन – नवीकरणीय ऊर्जा नीतियां, अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताएं, ऊर्जा सुरक्षा
  • GS पेपर 2: राजनीति विज्ञान – पर्यावरण पर संवैधानिक प्रावधान, पर्यावरणीय न्यायशास्त्र
  • निबंध: भारत का सतत विकास और जलवायु रणनीति

भारत के हरित मार्ग को संचालित करने वाला संवैधानिक और कानूनी ढांचा

संविधान के Article 48A के तहत राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार की जिम्मेदारी दी गई है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Sections 3, 5, 6) केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देता है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 (Sections 14, 15) ऊर्जा दक्षता के मानक और लेबलिंग प्रदान करता है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 पर्यावरणीय विवादों के त्वरित निपटान के लिए विशेष न्यायालय स्थापित करता है। वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और वन संरक्षण अधिनियम, 1980 वायु गुणवत्ता और वन भूमि उपयोग को नियंत्रित करते हैं। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले जैसे एमसी मेहता बनाम भारत संघ (1987) ने पर्यावरणीय न्यायशास्त्र को मजबूत किया और प्रदूषण नियंत्रण के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।

  • Article 48A: पर्यावरण संरक्षण के लिए निर्देशात्मक सिद्धांत
  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986: केंद्र सरकार के नियामक अधिकार
  • ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001: ऊर्जा दक्षता मानक
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010: विशेष पर्यावरण न्यायाधिकरण
  • एमसी मेहता बनाम भारत संघ (1987): पर्यावरणीय न्यायशास्त्र को सुदृढ़ किया

भारत के हरित संक्रमण के आर्थिक पहलू

राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए ₹35,000 करोड़ (~$4.5 बिलियन) आवंटित किए हैं (MNRE, 2023)। मार्च 2024 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की स्थापित क्षमता 165 GW तक पहुंच चुकी है, जो कुल विद्युत क्षमता का 43% है (CEA रिपोर्ट, 2024)। 2023 में ग्रीन बॉन्ड बाजार में $10 बिलियन से अधिक के जारी होने से भारत एशिया में चीन और जापान के बाद तीसरे स्थान पर है (SEBI वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। इस क्षेत्र का CAGR 2030 तक 12% रहने का अनुमान है (IEA India Energy Outlook 2023)। FY23 में स्वच्छ ऊर्जा निर्यात में 25% की वृद्धि हुई है (वाणिज्य मंत्रालय)। बजट 2024 ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी स्टोरेज के लिए ₹19,500 करोड़ आवंटित किए हैं, जिससे FAME-II योजना का विस्तार संभव होगा।

  • राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत ₹35,000 करोड़ आवंटन (MNRE, 2023)
  • 165 GW नवीकरणीय क्षमता (CEA, 2024), कुल स्थापित क्षमता का 43%
  • 2023 में $10 बिलियन ग्रीन बॉन्ड जारी (SEBI, 2023)
  • 2030 तक 12% CAGR का अनुमान (IEA, 2023)
  • FY23 में स्वच्छ ऊर्जा निर्यात में 25% वृद्धि (वाणिज्य मंत्रालय)
  • इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और स्टोरेज के लिए ₹19,500 करोड़ (केंद्र सरकार बजट 2024-25)

भारत के हरित मार्ग के प्रमुख संस्थान

नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों को बनाता और लागू करता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता और उत्पादन की निगरानी करता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) प्रदूषण मानकों का पालन सुनिश्चित करता है। नीति आयोग सतत विकास के लिए रणनीतिक योजना और नीति सलाह देता है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ग्रीन बॉन्ड और सतत वित्त के नियमन का काम करता है। इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), जो भारत की पहल है, वैश्विक सौर ऊर्जा विस्तार को बढ़ावा देता है और भारत की अंतरराष्ट्रीय जलवायु कूटनीति को मजबूत करता है।

  • MNRE: नवीकरणीय ऊर्जा नीति और कार्यान्वयन
  • CEA: ऊर्जा क्षेत्र डेटा और निगरानी
  • CPCB: प्रदूषण नियंत्रण लागू करना
  • नीति आयोग: सतत विकास के लिए रणनीति निर्माण
  • SEBI: ग्रीन बॉन्ड और सतत वित्त का नियमन
  • ISA: अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा सहयोग

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और उत्सर्जन के रुझान

मार्च 2024 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 165 GW तक पहुंच चुकी है, जो कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 43% है (CEA, 2024)। ऊर्जा मिश्रण में कोयले का हिस्सा 2015 के 70% से घटकर 2024 में 55% रह गया है, जो स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है। भारत ने अपने NDCs के तहत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है (MoEFCC, 2023)। FY23 में इलेक्ट्रिक वाहन की बिक्री में 60% की बढ़ोतरी हुई, जिसे FAME-II योजना के ₹10,000 करोड़ बजट ने समर्थन दिया है (नीति आयोग EV रिपोर्ट, 2023)। प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 2023 में 1.9 टन CO2 था, जो वैश्विक औसत 4.8 टन से काफी कम है (IEA, 2024)।

  • 165 GW नवीकरणीय क्षमता (CEA, 2024)
  • कोयले का हिस्सा 70% (2015) से घटकर 55% (2024)
  • 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्य (MoEFCC, 2023)
  • FY23 में EV बिक्री में 60% वृद्धि (नीति आयोग, 2023)
  • प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 1.9 टन CO2 (IEA, 2024)

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और चीन का हरित ऊर्जा पर नजर

मापदंडभारतचीन
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (GW)165 (2024)1,200 (2024)
गैर-जीवाश्म ईंधन लक्ष्य2030 तक 500 GW2060 तक कार्बन तटस्थता
नेट-जीरो लक्ष्य वर्ष20702060
प्रति व्यक्ति CO2 उत्सर्जन (टन)1.9 (2023)7.1 (2023)
नीति दृष्टिकोणविकास और जलवायु का संतुलित मेलऔद्योगिक केंद्रित तेज विस्तार

भारत के हरित ऊर्जा संक्रमण में चुनौतियां

महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के बावजूद भारत को ग्रिड इंटीग्रेशन और ऊर्जा भंडारण में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा के पूर्ण उपयोग में बाधक हैं। विकेंद्रीकृत नवीकरणीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय साधन बड़े सौर और पवन फार्मों की तुलना में कम विकसित हैं, जिससे वितरणीय उत्पादन सीमित हो रहा है। नीतिगत ध्यान मुख्यतः बड़े पैमाने पर परियोजनाओं पर केंद्रित है, जिससे सामुदायिक और ऑफ-ग्रिड समाधानों की अनदेखी होती है। बुनियादी ढांचे की कमी और ऊर्जा के अस्थिर प्रवाह से नवीकरणीय ऊर्जा की पैठ प्रभावित हो रही है। इन खामियों को दूर करना भारत की हरित ऊर्जा क्षमता को पूरी तरह से साकार करने के लिए जरूरी है।

  • ग्रिड इंटीग्रेशन और अस्थिरता प्रबंधन की चुनौतियां
  • विकेंद्रीकृत नवीकरणीय परियोजनाओं के लिए अपर्याप्त वित्तीय साधन
  • नीति में बड़े सौर और पवन फार्मों की प्राथमिकता
  • बुनियादी ढांचे और भंडारण क्षमता की सीमाएं

महत्व और आगे का रास्ता

  • ग्रिड बुनियादी ढांचे को मजबूत करें और ऊर्जा भंडारण तकनीकों में निवेश बढ़ाएं ताकि नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर समावेश हो सके।
  • विकेंद्रीकृत और ऑफ-ग्रिड नवीकरणीय परियोजनाओं के लिए वित्तीय मॉडल और प्रोत्साहन बढ़ाएं।
  • प्रमुख संस्थानों (MNRE, CEA, CPCB, नीति आयोग) के बीच समन्वय बढ़ाकर समग्र नीति कार्यान्वयन सुनिश्चित करें।
  • ISA जैसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का लाभ उठाकर तकनीक और वित्त उपलब्ध कराएं।
  • परिवहन क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बैटरी स्टोरेज पर ध्यान दें।
  • पर्यावरण कानूनों का सख्ती से पालन कराएं और न्यायिक हस्तक्षेप से सतत विकास को सुनिश्चित करें।

प्रश्न अभ्यास

📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करना चाहता है।
  2. राष्ट्रीय सौर मिशन 2015 में शुरू किया गया था।
  3. भारत का नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य वर्ष 2070 है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 भारत के NDCs (MoEFCC, 2023) के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; राष्ट्रीय सौर मिशन 2010 में शुरू हुआ था, 2015 में नहीं। कथन 3 सही है; भारत का नेट-जीरो लक्ष्य 2070 है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के हरित मार्ग में प्रमुख संस्थानों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ग्रीन बॉन्ड जारी करने का नियमन करता है।
  2. नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) नवीकरणीय ऊर्जा नीतियां बनाता है।
  3. इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भारत की पहल है जो विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देती है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है; ग्रीन बॉन्ड का नियमन SEBI करता है, CEA नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत का हरित मार्ग आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच कैसे संतुलन बनाता है, इसे 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के संदर्भ में चर्चा करें। अपने उत्तर में संबंधित नीतियों, संस्थागत भूमिकाओं और चुनौतियों को शामिल करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी) – नवीकरणीय ऊर्जा और सतत विकास नीतियां
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के समृद्ध खनिज संसाधन और वन क्षेत्र खनन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की मांग करते हैं; राज्य में सौर पार्क और बायोमास परियोजनाएं शामिल हैं।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, वन संरक्षण की चुनौतियां और भारत की राष्ट्रीय हरित नीतियों के साथ समन्वय पर आधारित उत्तर तैयार करें।
भारत का 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लक्ष्य क्या है?

भारत ने 2023 में UNFCCC को प्रस्तुत अपने NDCs के तहत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

भारत में पर्यावरण संरक्षण का संवैधानिक प्रावधान कौन सा है?

संविधान का Article 48A राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार तथा वन और वन्यजीवों की सुरक्षा का निर्देश देता है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण भारत के हरित मार्ग में क्या भूमिका निभाता है?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 ने पर्यावरणीय विवादों के त्वरित निपटान और पर्यावरण कानूनों के प्रवर्तन के लिए विशेष न्यायालय स्थापित किया है।

हाल ही में भारत की ऊर्जा मिश्रण में कोयले का हिस्सा कैसे बदला है?

भारत में कोयले का ऊर्जा मिश्रण में हिस्सा 2015 के 70% से घटकर 2024 में 55% हो गया है, जो नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग को दर्शाता है।

भारत में ग्रीन बॉन्ड का नियमन कौन करता है?

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ग्रीन बॉन्ड और सतत वित्तीय उपकरणों का नियमन करता है।

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