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परिचय: भारत में पहला राष्ट्रीय चमगादड़ संरक्षण मूल्यांकन

साल 2024 में, बॉम्बे नैचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने भारत के चमगादड़ संरक्षण की पहली व्यापक रिपोर्ट जारी की, जिसमें 130 से अधिक प्रजातियों को गंभीर खतरे में पाया गया और कई क्षेत्रों में डेटा की भारी कमी उजागर हुई। यह अध्ययन जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) के सहयोग से और पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के समर्थन से किया गया। इसमें आवास की हानि, कीटनाशकों का उपयोग और मानव-वन्यजीव संघर्ष को मुख्य खतरे बताया गया है। साथ ही पूर्वोत्तर और मध्य भारत में डेटा की कमी ने संरक्षण की योजना बनाने में बड़ी बाधा पैदा की है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण कानून, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ
  • GS पेपर 1: भूगोल (जैव विविधता हॉटस्पॉट, क्षेत्रीय पारिस्थितिक चुनौतियाँ)
  • निबंध: भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष और संरक्षण की चुनौतियाँ

चमगादड़ संरक्षण के लिए कानूनी ढांचा

भारत में चमगादड़ संरक्षण कई पर्यावरण कानूनों के अंतर्गत आता है, लेकिन इसके लिए कोई विशेष कानून नहीं है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (WPA) की धारा 9 के तहत केवल 12% चमगादड़ प्रजातियाँ अनुसूची I में शामिल हैं, जिससे उनकी कानूनी सुरक्षा सीमित है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (धारा 3 और 5) पर्यावरणीय खतरों को नियंत्रित करता है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से चमगादड़ों के आवासों की रक्षा होती है। जैव विविधता अधिनियम, 2002 (धारा 36 और 37) संरक्षण और सतत उपयोग सुनिश्चित करता है, जिसका पालन राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) करता है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले, जैसे T.N. Godavarman Thirumulpad v. Union of India (1996), आवास संरक्षण को प्राथमिकता देते हैं, जो चमगादड़ों के लिए बेहद जरूरी है।

  • WPA अनुसूची I में चमगादड़ों का कवरेज: 12% प्रजातियाँ (MoEFCC, 2023)
  • NBA का जैव विविधता संरक्षण और नियमन में महत्वपूर्ण योगदान
  • सुप्रीम कोर्ट के वन और आवास संरक्षण के आदेश

भारत में चमगादड़ों का पारिस्थितिक और आर्थिक महत्व

भारत में 130 से अधिक चमगादड़ प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो विश्व की कुल चमगादड़ विविधता का लगभग 10% हैं (ZSI, 2023)। चमगादड़ परागण, बीज प्रसार और कीट नियंत्रण जैसी पारिस्थितिक सेवाएं प्रदान करते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अनुसार, कीट नियंत्रण से चमगादड़ हर साल भारतीय कृषि को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान बचाते हैं। इसके अलावा, इनके आवासों पर आधारित इको-टूरिज्म से कुछ क्षेत्रों में सालाना लगभग 50 करोड़ रुपये की आमदनी होती है (MoEFCC, 2023)। कृषि क्षेत्रों में चमगादड़ की संख्या में पिछले दशक में 25% तक गिरावट आई है, जो इन आर्थिक लाभों के लिए खतरा है।

  • भारत में 130+ चमगादड़ प्रजातियाँ, विश्व विविधता का 10% (ZSI, 2023)
  • कीट नियंत्रण से कृषि बचत: 2,500 करोड़ रुपये वार्षिक (ICAR, 2022)
  • इको-टूरिज्म से संभावित आय: 50 करोड़ रुपये प्रति वर्ष (MoEFCC, 2023)
  • चमगादड़ जनसंख्या में गिरावट: कृषि क्षेत्रों में 25% (ICAR, 2022)

मुख्य खतरे और डेटा की कमी वाले क्षेत्र

BNHS के मूल्यांकन के अनुसार, चमगादड़ों के लिए आवास हानि 45%, कीटनाशकों का प्रभाव 30%, और मानव-वन्यजीव संघर्ष 15% प्रमुख खतरे हैं। शहरीकरण और वनों की कटाई से इनके रहने और भोजन खोजने की जगहें कम हो रही हैं। कृषि में कीटनाशकों के उपयोग से चमगादड़ों के स्वास्थ्य और भोजन पर नकारात्मक असर पड़ता है। साथ ही, अंधविश्वास और डर के कारण मानव हिंसा से मृत्यु दर बढ़ रही है। पूर्वोत्तर और मध्य भारत में चमगादड़ों के वितरण और जनसंख्या के आंकड़ों की कमी है, जिससे संरक्षण के लिए लक्षित कदम उठाना मुश्किल हो रहा है।

  • आवास हानि: 45% खतरे (BNHS, 2024)
  • कीटनाशकों का प्रभाव: 30% खतरा
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष: 15% खतरा
  • डेटा की कमी वाले क्षेत्र: पूर्वोत्तर और मध्य भारत (ZSI, 2023)

संस्थागत भूमिकाएं और वर्तमान संरक्षण प्रयास

MoEFCC वन्यजीव संरक्षण के लिए नीति निर्माण और कार्यान्वयन का नेतृत्व करता है, जिसमें चमगादड़ भी शामिल हैं। ZSI जीव सर्वेक्षण और प्रजाति वर्गीकरण करता है। NBA जैव विविधता संरक्षण और सतत उपयोग का नियमन करता है। BNHS शोध और जागरूकता अभियान चलाता है। ICAR पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के आंकड़े प्रदान करता है। बावजूद इसके, चमगादड़ों पर केंद्रित शोध के लिए फंडिंग सीमित है और कोई राष्ट्रीय मानकीकृत निगरानी प्रणाली नहीं है।

  • MoEFCC: नीति निर्माण और फंडिंग (वन्यजीव संरक्षण के लिए सालाना 1,000 करोड़ रुपये)
  • ZSI: जीव सर्वेक्षण और प्रजाति दस्तावेजीकरण
  • NBA: जैव विविधता नियमन और संरक्षण निरीक्षण
  • BNHS: शोध और जनजागरूकता
  • ICAR: पारिस्थितिकी तंत्र सेवा मूल्यांकन

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया के चमगादड़ संरक्षण

पहलूभारतऑस्ट्रेलिया
प्रजाति कवरेज130+ प्रजातियाँ, 12% WPA अनुसूची I में80 से अधिक प्रजातियाँ, EPBC Act के तहत व्यापक कानूनी सुरक्षा
कानूनी ढांचाखंडित; कोई विशेष चमगादड़ संरक्षण कानून नहींEnvironment Protection and Biodiversity Conservation Act, 1999 (EPBC Act)
निगरानीअमानकीकृत; डेटा की कमी के क्षेत्र मौजूदNational Bat Monitoring Program (NBMP) जिसमें ध्वनिक सर्वे और नागरिक विज्ञान शामिल
डेटा सटीकताकम; 40% प्रजातियाँ संकट में या डेटा अपर्याप्तसिस्टमेटिक निगरानी से 15% सुधार
नीति प्रभावसीमित लक्षित हस्तक्षेपडेटा-आधारित संरक्षण नीतियाँ और आवास संरक्षण

भारत के चमगादड़ संरक्षण में प्रमुख कमियाँ

भारत में राष्ट्रीय चमगादड़ संरक्षण रणनीति का अभाव है और WPA के तहत कानूनी सुरक्षा सीमित है। प्रजाति-विशेष शोध के लिए फंडिंग कम है और मानकीकृत निगरानी प्रणाली नहीं होने से डेटा की कमी बनी हुई है। ये कमियाँ सबूत-आधारित नीति निर्माण और खतरे कम करने में बाधा हैं। अनुसूची I में कवरेज बढ़ाना और चमगादड़ों को व्यापक जैव विविधता कार्ययोजनाओं में शामिल करना जरूरी है।

  • राष्ट्रीय चमगादड़ संरक्षण रणनीति का अभाव
  • WPA में सीमित कानूनी सुरक्षा
  • चमगादड़ शोध के लिए अपर्याप्त फंडिंग
  • मानकीकृत जनसंख्या निगरानी प्रणाली का अभाव
  • डेटा की कमी वाले क्षेत्र संरक्षण योजना में बाधा

आगे का रास्ता: नीति और शोध प्राथमिकताएँ

  • WPA की अनुसूची I में अधिक संकटग्रस्त चमगादड़ प्रजातियों को शामिल करें।
  • जैव विविधता लक्ष्यों के अनुरूप एक समर्पित राष्ट्रीय चमगादड़ संरक्षण रणनीति बनाएं।
  • चमगादड़-विशेष शोध और निगरानी कार्यक्रमों के लिए फंडिंग बढ़ाएं।
  • ऑस्ट्रेलिया के NBMP जैसे नागरिक विज्ञान मॉडल का उपयोग कर मानकीकृत ध्वनिक और आवास सर्वे लागू करें।
  • सुप्रीम कोर्ट के वन संरक्षण आदेशों को सख्ती से लागू कर आवास सुरक्षा मजबूत करें।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने और भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान चलाएं।
  • कीटनाशकों के प्रभाव को कम करने के लिए कृषि नीतियों में चमगादड़ संरक्षण को शामिल करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में चमगादड़ संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में केवल 12% भारतीय चमगादड़ प्रजातियाँ शामिल हैं।
  2. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 में सीधे चमगादड़ों को संरक्षित प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  3. भारत के चमगादड़ों को होने वाले खतरों में आवास हानि लगभग आधा हिस्सा है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि केवल 12% चमगादड़ प्रजातियाँ WPA की अनुसूची I में हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम सीधे प्रजातियों को सूचीबद्ध नहीं करता बल्कि पर्यावरणीय खतरों को नियंत्रित करता है। कथन 3 सही है; आवास हानि 45% खतरे के लिए जिम्मेदार है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. NBA जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत गठित है।
  2. NBA सीधे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 को लागू करता है।
  3. NBA जैविक संसाधनों और संबंधित ज्ञान तक पहुँच को नियंत्रित करता है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है; NBA जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत स्थापित है। कथन 2 गलत है; NBA वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू नहीं करता। कथन 3 सही है; NBA जैविक संसाधनों और ज्ञान के उपयोग को नियंत्रित करता है।

मुख्य प्रश्न

भारत के पहले व्यापक चमगादड़ संरक्षण मूल्यांकन के मुख्य निष्कर्षों पर चर्चा करें और मौजूदा पर्यावरण कानूनों के तहत चमगादड़ संरक्षण में आने वाली चुनौतियों और नीतिगत खामियों का विश्लेषण करें। भारत में चमगादड़ संरक्षण सुधारने के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी), पेपर 3 (कृषि और वन)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के वन और कृषि क्षेत्र कई चमगादड़ प्रजातियों के आवास हैं; यहां डेटा की कमी है, जिसके लिए लक्षित सर्वेक्षण आवश्यक हैं।
  • मुख्य बिंदु: स्थानीय आवास खतरों, कीटनाशकों के प्रभाव और झारखंड की वन और कृषि नीतियों में चमगादड़ संरक्षण के समावेशन पर जोर दें।
भारत में कितनी चमगादड़ प्रजातियाँ पाई जाती हैं और ये विश्व की कुल चमगादड़ विविधता का कितना हिस्सा हैं?

भारत में 130 से अधिक चमगादड़ प्रजातियाँ हैं, जो विश्व की कुल चमगादड़ विविधता का लगभग 10% हिस्सा हैं (ZSI, 2023)।

पहले राष्ट्रीय मूल्यांकन में चमगादड़ों के लिए प्रमुख खतरे क्या बताए गए हैं?

मुख्य खतरे हैं: आवास हानि (45%), कीटनाशकों का उपयोग (30%), और मानव-वन्यजीव संघर्ष (15%) (BNHS, 2024)।

भारत के पर्यावरण कानूनों के तहत चमगादड़ों को क्या कानूनी सुरक्षा मिलती है?

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में केवल 12% चमगादड़ प्रजातियाँ शामिल हैं, जिससे उनकी कानूनी सुरक्षा सीमित है। जैव विविधता अधिनियम, 2002 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 अप्रत्यक्ष संरक्षण प्रदान करते हैं।

भारत में चमगादड़ संरक्षण के लिए कौन-कौन से संस्थान जिम्मेदार हैं?

मुख्य संस्थान हैं: MoEFCC, ZSI, NBA, BNHS, और ICAR, जो नीति, शोध, नियमन और पारिस्थितिकी तंत्र सेवा मूल्यांकन में योगदान देते हैं।

भारत के चमगादड़ संरक्षण की तुलना ऑस्ट्रेलिया से कैसे होती है?

ऑस्ट्रेलिया का National Bat Monitoring Program ध्वनिक सर्वेक्षण और नागरिक विज्ञान का उपयोग करता है, जिससे डेटा की सटीकता में 15% सुधार हुआ है। वहीं भारत में ऐसी मानकीकृत निगरानी और व्यापक कानूनी सुरक्षा का अभाव है।

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