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परिचय: भारत का पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ

अप्रैल 2024 में भारत ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग के एक हिस्से पर अपना पहला बिना बैरियर वाला टोल बूथ शुरू किया। इस व्यवस्था में टोल प्लाजा पर भौतिक बैरियर हटाए गए हैं और FASTag इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली का इस्तेमाल कर वाहनों को बिना रुके गुजरने की सुविधा दी गई है। इसका मकसद जाम को कम करना, प्रतीक्षा समय घटाना और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर माल व यात्री परिवहन की दक्षता बढ़ाना है।

यह प्रणाली सरकार के डिजिटल गवर्नेंस और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लक्ष्य से मेल खाती है और पारंपरिक टोल संग्रह विधियों से एक बड़ा बदलाव है, जो राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 (संशोधित 2017) के तहत संचालित होती हैं। साथ ही, यह पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करती है क्योंकि टोल प्लाजाओं पर वाहनों की अनावश्यक रुकावट और प्रदूषण कम होता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन – परिवहन में डिजिटल पहल, टोल संग्रह का कानूनी ढांचा
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – बुनियादी ढांचे की दक्षता, परिवहन अर्थशास्त्र, पर्यावरणीय प्रभाव
  • निबंध: बुनियादी ढांचे और शासन में तकनीकी सुधार

बिना बैरियर टोलिंग के कानूनी और नियामक ढांचे

बिना बैरियर टोल संग्रह प्रणाली राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3 और 4 के तहत आती है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूलने का अधिकार देती हैं। 2017 के संशोधन ने इलेक्ट्रॉनिक टोलिंग को पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए कानूनी मान्यता दी।

केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 (2021 में संशोधित) के तहत नियम 138E सभी वाहनों के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर FASTag का उपयोग अनिवार्य करता है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह संस्थागत हो गया है। MoRTH समय-समय पर इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ETC) के मानकीकरण के लिए दिशानिर्देश जारी करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने Indian Oil Corporation Ltd. बनाम NEPC India Ltd. (2019) मामले में टोल संग्रह में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया, जिससे बिना बैरियर टोलिंग की कानूनी मजबूती बढ़ी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया गया।

आर्थिक प्रभाव और दक्षता में सुधार

MoRTH के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, बिना बैरियर टोल बूथ ने टोल प्लाजा पर औसत प्रतीक्षा समय को करीब 50% घटाकर 5 मिनट से 2.5 मिनट कर दिया है। इससे सालाना लगभग 1.5 अरब मानव-घंटे की बचत होती है, जो लॉजिस्टिक्स और यात्री आवागमन में सुधार लाता है।

  • मार्च 2024 तक 1.5 करोड़ से अधिक FASTag उपयोगकर्ता हैं, जो सालाना 10,000 करोड़ रुपये से अधिक टोल राजस्व का प्रबंधन करते हैं (NHAI रिपोर्ट)।
  • वित्त मंत्रालय ने 2023-24 के बजट में टोल प्लाजाओं के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्नयन के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
  • तेज टोल संग्रह से माल परिवहन की दक्षता में 15% सुधार होने का अनुमान है, जो आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार GDP वृद्धि में 0.2% का योगदान देगा।
  • टोल पर कम रुकावट के कारण सालाना 200 मिलियन लीटर ईंधन की बचत होती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में लगभग 1.5 मिलियन टन की कमी आती है (MoEFCC अनुमान)।

संस्थागत भूमिकाएं और तकनीकी ढांचा

MoRTH नीतियां बनाता है और क्रियान्वयन की निगरानी करता है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) टोल प्लाजाओं का संचालन और बिना बैरियर तकनीक का प्रबंधन करता है।

राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) FASTag लेनदेन को सुचारू रूप से संचालित करता है। इंडियन ब्रिज एंड बैरियर इंस्टिट्यूट (IBBI) बिना बैरियर टोल संरचना के लिए तकनीकी मानक तय करता है, जिसमें सुरक्षा और इंटरऑपरेबिलिटी पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

डेटा विश्लेषण: FASTag की पहुंच और टोल प्लाजा प्रदर्शन

परिमाणमूल्यस्रोत
भारत में टोल प्लाजाओं की संख्या1,200+NHAI, 2024
FASTag से लैस टोल प्लाजाएं70%NHAI, 2024
राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों में FASTag की पहुंच85%MoRTH रिपोर्ट, 2024
टोल प्लाजा पर औसत प्रतीक्षा समय में कमी5 मिनट से घटकर 2.5 मिनटMoRTH, 2024
कम रुकावट के कारण सालाना ईंधन बचत200 मिलियन लीटरआर्थिक सर्वेक्षण 2023-24
कार्बन उत्सर्जन में कमी1.5 मिलियन टन/वर्षMoEFCC अनुमान
डिजिटल टोल राजस्व हिस्सा98%NHAI वार्षिक रिपोर्ट, FY 2023-24

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम चीन बिना बैरियर टोल सिस्टम

पहलूभारतचीन
लागू करने का वर्ष2024 (पायलट चरण)2019 (सर्वव्यापी)
प्रयुक्त तकनीकFASTag (RFID आधारित)RFID + ANPR (स्वचालित नंबर प्लेट पहचान)
जाम में कमी50% औसत प्रतीक्षा समय की कटौतीटोल प्लाजा जाम में 60% कमी
माल परिवहन दक्षता में सुधार15%20%
परिमाण1,200+ टोल प्लाजा, 85% FASTag पहुंचसर्वव्यापी कवरेज, लगभग 100% डिजिटल टोलिंग

चुनौतियां और समावेशन के अंतर

तेजी से FASTag अपनाने के बावजूद, ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे वाहनों के उपयोगकर्ताओं को डिजिटल भुगतान में दिक्कतें आती हैं, जो जागरूकता और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण हैं। यह डिजिटल विभाजन बिना बैरियर टोलिंग की सार्वभौमिक सफलता में बाधा डालता है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बाहर कर सकता है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए लक्षित जागरूकता अभियान, FASTag पर सब्सिडी, और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी है ताकि सभी तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

महत्व और आगे का रास्ता

  • बिना बैरियर टोलिंग से लॉजिस्टिक्स की बाधाएं कम होती हैं, जिससे माल और यात्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेजी से चल सकते हैं।
  • यह सरकार के डिजिटल इंडिया के विजन को सशक्त बनाता है, इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को संस्थागत करता है और नकद लेनदेन घटाता है।
  • पर्यावरणीय लाभों में ईंधन की बचत और वाहन प्रदूषण में कमी शामिल है, जो जलवायु लक्ष्यों में मददगार है।
  • ग्रामीण और शहरी डिजिटल अंतर को पाटने वाली नीतियों के साथ इसे पूरे देश में फैलाना प्रभाव को अधिकतम करेगा।
  • ANPR और AI आधारित ट्रैफिक प्रबंधन जैसी उभरती तकनीकों के साथ एकीकरण से दक्षता और सुरक्षा और बेहतर हो सकती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
FASTag और बिना बैरियर टोलिंग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. FASTag का उपयोग केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 138E (संशोधित 2021) के तहत अनिवार्य है।
  2. बिना बैरियर टोलिंग का मतलब राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क का पूरी तरह से समाप्त होना है।
  3. सुप्रीम कोर्ट ने Indian Oil Corporation Ltd. बनाम NEPC India Ltd. मामले में टोल संग्रह में पारदर्शिता पर जोर दिया।

इनमें से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि FASTag नियम 138E के तहत अनिवार्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि बिना बैरियर टोलिंग में भौतिक बैरियर हटाए जाते हैं, लेकिन टोल शुल्क समाप्त नहीं होता। कथन 3 सही है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शी टोल संग्रह पर जोर दिया।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
बिना बैरियर टोल बूथ के आर्थिक प्रभाव के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. बिना बैरियर टोल बूथ वाहनों के औसत प्रतीक्षा समय को 50% तक कम कर देते हैं।
  2. टोल पर कम रुकावट के कारण सालाना 500 मिलियन लीटर ईंधन की बचत होती है।
  3. तेज टोल संग्रह से माल परिवहन की दक्षता 15% तक बढ़ती है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 MoRTH के आंकड़ों के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि ईंधन बचत 200 मिलियन लीटर अनुमानित है। कथन 3 आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सही है।

मेन प्रश्न

FASTag तकनीक के जरिए बिना बैरियर टोल बूथ की शुरुआत किस प्रकार भारत की राजमार्ग परिवहन प्रणाली को बदल सकती है? इसके कानूनी ढांचे, आर्थिक लाभ, चुनौतियों और राष्ट्रीय उत्पादकता पर संभावित प्रभाव पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – शासन और बुनियादी ढांचा विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्गों पर कई टोल प्लाजा हैं जहां FASTag की पहुंच बढ़ रही है; बिना बैरियर टोलिंग राज्य की खनिज और औद्योगिक माल की लॉजिस्टिक्स में सुधार कर सकती है।
  • मेन पॉइंटर: झारखंड की खनन लॉजिस्टिक्स पर प्रभाव, परिवहन लागत में कमी की संभावना, और आदिवासी तथा दूरदराज के क्षेत्रों में FASTag अपनाने के लिए ग्रामीण जागरूकता की जरूरत पर जोर दें।
बिना बैरियर टोलिंग क्या है?

बिना बैरियर टोलिंग में टोल प्लाजाओं पर भौतिक गेट हटा दिए जाते हैं, जिससे FASTag जैसे इलेक्ट्रॉनिक टैग वाले वाहन बिना रुके गुजर सकते हैं और जाम व प्रतीक्षा समय कम होता है।

FASTag के उपयोग के लिए कौन-कौन से कानूनी प्रावधान हैं?

FASTag का उपयोग केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 138E (संशोधित 2021) के तहत अनिवार्य है, और टोल संग्रह राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 (संशोधित 2017) की धारा 3 और 4 के तहत होता है।

बिना बैरियर टोलिंग पर्यावरण के लिए कैसे लाभकारी है?

टोल प्लाजाओं पर वाहनों के रुकने के समय में कमी से सालाना लगभग 200 मिलियन लीटर ईंधन बचता है और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 1.5 मिलियन टन की कमी आती है (MoEFCC अनुमान)।

देशव्यापी बिना बैरियर टोलिंग लागू करने में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

ग्रामीण और छोटे वाहन धारकों में डिजिटल भुगतान की समझ और बुनियादी ढांचे की कमी, जागरूकता की कमी मुख्य बाधाएं हैं, जिन्हें लक्षित नीतियों और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों से दूर किया जाना चाहिए।

भारत की बिना बैरियर टोल प्रणाली की तुलना चीन से कैसे की जा सकती है?

चीन ने 2019 में RFID और ANPR तकनीकों के साथ सर्वव्यापी बिना बैरियर टोलिंग लागू की, जिससे 60% जाम में कमी और 20% माल परिवहन दक्षता बढ़ी, जो भारत के 50% जाम कमी और 15% दक्षता सुधार से थोड़ा बेहतर है।

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