अपडेट

परिचय: भारत की ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति

भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% जरूरतें आयात करता है, जिसमें से 60% आयात पश्चिम एशिया से होता है (इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी, 2023)। वित्तीय वर्ष 2022-23 में देश का कच्चे तेल का आयात बिल लगभग 180 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया (पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय)। इस भारी निर्भरता के कारण भारत भू-राजनीतिक संघर्षों के दौरान, खासकर पश्चिम एशिया में, आपूर्ति बाधाओं और कीमतों में उतार-चढ़ाव के जोखिम से जूझता है। सरकार ने इस खतरे से निपटने के लिए स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स (SPR) बढ़ाने, ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने जैसे कदम उठाए हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (ऊर्जा सुरक्षा, अवसंरचना), पर्यावरण (नवीकरणीय ऊर्जा)
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध (ऊर्जा कूटनीति, भू-राजनीति)
  • निबंध: वैश्विक संघर्षों का भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

ऊर्जा सुरक्षा के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत में ऊर्जा सुरक्षा कई कानूनों और संवैधानिक प्रावधानों के तहत नियंत्रित होती है। विद्युत अधिनियम, 2003 (धारा 61 और 62) केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग को टैरिफ नियंत्रित करने का अधिकार देता है, जिससे बिजली की किफायती और स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड अधिनियम, 2006 प्राकृतिक गैस बाजारों और अवसंरचना के विकास को पारदर्शी बनाने में मदद करता है। ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 ऊर्जा दक्षता मानक तय करता है ताकि मांग पक्ष पर दबाव कम हो। अनुच्छेद 246 और संघ सूची की प्रविष्टि 54 संघ सरकार को तेल क्षेत्रों और खनिज तेलों पर कानून बनाने का अधिकार देती है, जिससे नीति नियंत्रण केंद्रित होता है। आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 संकट के समय ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए लागू किया जाता है, जिससे बाजार स्थिर रहता है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा का आर्थिक पहलू

ऊर्जा आयात पर निर्भरता भारत के व्यापार संतुलन पर दबाव डालती है और अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बनाती है। वित्त वर्ष 2022-23 में 180 बिलियन डॉलर के कच्चे तेल के आयात बिल ने आर्थिक भार दिखाया। सरकार ने बजट 2023-24 में SPR क्षमता बढ़ाने के लिए 35,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसका लक्ष्य 2025 तक 15 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचना है (MoPNG)। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 2019 में 50 GW से बढ़कर मार्च 2024 तक 110 GW हो चुकी है, और 2030 तक इसे 500 GW तक ले जाने का लक्ष्य है (MNRE वार्षिक रिपोर्ट)। 2023 में बिजली की मांग 6.4% बढ़ी है, जो उपभोग में वृद्धि को दर्शाती है (CEA 2024)। LNG आयात में 2023 में 15% की वृद्धि हुई, जिसमें कतर और अमेरिका ने क्रमशः 40% और 25% की आपूर्ति की (Petronet LNG वार्षिक रिपोर्ट 2023), जो विविधीकरण की कोशिशों को दर्शाता है।

ऊर्जा सुरक्षा में प्रमुख संस्थान

  • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE): नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने की नीतियां बनाता है।
  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG): तेल और गैस क्षेत्र की नीतियों और SPR विस्तार की देखरेख करता है।
  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA): बिजली की मांग-आपूर्ति संतुलन और अवसंरचना योजना की निगरानी करता है।
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB): प्राकृतिक गैस बाजारों और पाइपलाइन अवसंरचना को नियंत्रित करता है।
  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL): परिष्करण और विपणन में सबसे बड़ा सार्वजनिक उपक्रम, जो आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता के लिए अहम है।
  • स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स (SPR): आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार बनाए रखता है ताकि आपूर्ति में अचानक व्यवधानों को सहारा दिया जा सके।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत और जापान की ऊर्जा सुरक्षा रणनीतियाँ

पहलू भारत जापान
आयात निर्भरता 85% कच्चे तेल का आयात; 60% पश्चिम एशिया से उच्च LNG आयात; अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस से विविध
ऊर्जा स्रोत विविधीकरण बढ़ती नवीकरणीय क्षमता (110 GW), LNG आयात में वृद्धि फुकुशिमा के बाद LNG विविधीकरण और परमाणु ऊर्जा पुनः चालू करना
स्ट्रैटेजिक रिजर्व्स 2025 तक SPR क्षमता 15 MMT तक पहुंचाने की योजना बड़े SPR; LNG और तेल के लिए कई भंडारण स्थल
आपूर्ति व्यवधान जोखिम कम करना सीमित एकीकृत ऊर्जा भंडारण; घरेलू गैस का कम उपयोग 2022 तक 30% जोखिम कमी विविधीकरण से (IEA)

भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में प्रमुख कमियां

  • घरेलू प्राकृतिक गैस भंडार का कम उपयोग ईंधन मिश्रण में लचीलापन कम करता है और कच्चे तेल के झटकों के खिलाफ बचाव सीमित करता है।
  • मजबूत एकीकृत ऊर्जा भंडारण अवसंरचना का अभाव लंबे समय तक बाहरी आपूर्ति व्यवधानों के प्रति लचीलापन कम करता है।
  • पश्चिम एशिया पर भारी निर्भरता भारत को भू-राजनीतिक जोखिमों के लिए कमजोर बनाती है, जबकि पर्याप्त वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग नहीं हैं।
  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ग्रिड इंटीग्रेशन और भंडारण अभी भी चुनौतियां हैं।

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • घरेलू प्राकृतिक गैस अन्वेषण और उत्पादन को तेज करें ताकि आयात निर्भरता कम हो और ऊर्जा मिश्रण में विविधता आए।
  • SPR क्षमता को 15 MMT से बढ़ाएं और रणनीतिक LNG भंडारण सुविधाएं विकसित करें ताकि आपूर्ति झटकों को सहारा दिया जा सके।
  • ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण और स्मार्ट ग्रिड तकनीकों में निवेश करें ताकि अस्थिर नवीकरणीय ऊर्जा को प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सके।
  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कूटनीति को मजबूत करें ताकि पश्चिम एशिया से परे विविध और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
  • विद्युत अधिनियम और PNGRB अधिनियम के तहत नियामक ढांचे को मजबूत करें ताकि ऊर्जा दक्षता और बाजार पारदर्शिता को बढ़ावा मिल सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स (SPR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. SPR की क्षमता 2025 तक 15 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंचाने की योजना है।
  2. SPR के भंडार केवल वाणिज्यिक ट्रेडिंग के लिए उपयोग किए जाते हैं ताकि कीमतों को स्थिर किया जा सके।
  3. SPR का प्रबंधन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत होता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 MoPNG की योजनाओं के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है; SPR के भंडार आपातकालीन आपूर्ति व्यवधानों के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं, वाणिज्यिक ट्रेडिंग के लिए नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि SPR का प्रबंधन MoPNG के अंतर्गत होता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के ऊर्जा आयात स्रोतों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85% जरूरतें आयात करता है।
  2. पश्चिम एशिया भारत के कच्चे तेल आयात का 60% हिस्सा है।
  3. जापान अपने LNG आयात के लिए मुख्य रूप से पश्चिम एशिया पर निर्भर है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 IEA और MoPNG के आंकड़ों के अनुसार सही हैं। कथन 3 गलत है; जापान LNG आयात के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस से विविधता अपनाता है, न कि मुख्य रूप से पश्चिम एशिया से।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अर्थव्यवस्था और अवसंरचना), पेपर 3 (पर्यावरण और ऊर्जा)
  • झारखंड से जुड़ा पहलू: झारखंड के पास बड़े कोयला भंडार और उभरते नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट्स हैं; ऊर्जा सुरक्षा नीतियां स्थानीय औद्योगिक विकास और रोजगार पर प्रभाव डालती हैं।
  • मेन प्वाइंट: झारखंड की घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता को उजागर करते हुए जवाब तैयार करें और राज्य स्तर के नवीकरणीय प्रयासों को राष्ट्रीय रणनीति के साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दें।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा में स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स (SPR) की भूमिका क्या है?

SPR आपातकालीन कच्चे तेल के भंडार रखता है ताकि भू-राजनीतिक संघर्षों या बाजार झटकों के कारण आपूर्ति में व्यवधान आने पर उसे पूरा किया जा सके। भारत 2025 तक SPR क्षमता 15 मिलियन मीट्रिक टन तक बढ़ाने की योजना बना रहा है, जिसका प्रबंधन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है।

विद्युत अधिनियम, 2003 ऊर्जा सुरक्षा में कैसे योगदान देता है?

विद्युत अधिनियम, 2003 केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग को टैरिफ नियंत्रित करने का अधिकार देता है (धारा 61 और 62), जिससे बिजली की किफायती और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित होती है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत की पश्चिम एशिया पर कच्चे तेल की निर्भरता क्यों चिंता का विषय है?

पश्चिम एशिया भारत के कच्चे तेल आयात का 60% हिस्सा है, जिससे भारत भू-राजनीतिक जोखिमों जैसे संघर्ष और आपूर्ति बाधाओं के प्रति संवेदनशील हो जाता है, जो कीमतों में अस्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को खतरा पहुंचा सकते हैं।

भारत की ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा के समावेशन में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में ग्रिड इंटीग्रेशन, नवीकरणीय ऊर्जा की अनियमितता, बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण का अभाव और अवसंरचना की सीमाएं शामिल हैं, जो नवीकरणीय ऊर्जा को स्थिर आपूर्ति स्रोत बनने से रोकती हैं।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) ऊर्जा सुरक्षा में कैसे मदद करता है?

PNGRB प्राकृतिक गैस बाजारों और पाइपलाइन अवसंरचना को नियंत्रित करता है, पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और कुशल आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देता है, जिससे ईंधन स्रोतों में विविधता आती है और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us