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भारत में यूरिया की खपत और आयात निर्भरता का परिचय

आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 36 मिलियन टन यूरिया की खपत होती है, जिसमें करीब 90% हिस्सा आयात या आयातित कच्चे माल पर निर्भर है। यूरिया कुल उर्वरक खपत का 56% हिस्सा है और घरेलू इस्तेमाल होने वाले नाइट्रोजन उर्वरकों में इसका लगभग 80% हिस्सा है (फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया वार्षिक रिपोर्ट 2023)। भारत के घरेलू यूरिया उत्पादन में 80% से अधिक हिस्सा आयातित प्राकृतिक गैस पर आधारित है, जिससे यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा मूल्य उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है (रसायन और उर्वरक मंत्रालय डेटा, 2023)। इस निर्भरता से भारत की उर्वरक सुरक्षा और कृषि उत्पादन में रणनीतिक कमजोरी उत्पन्न होती है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – उर्वरक सब्सिडी नीति, कृषि इनपुट, ऊर्जा निर्भरता
  • GS पेपर 3: पर्यावरण और कृषि – उर्वरक उपयोग का मिट्टी और पर्यावरण पर प्रभाव
  • निबंध: भारत में कृषि स्थिरता और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियां

यूरिया उत्पादन और सब्सिडी पर कानूनी एवं संस्थागत ढांचा

फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985, जो एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 के तहत जारी किया गया है, उर्वरकों के उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करता है। इस अधिनियम की धारा 3 सरकार को आपूर्ति और कीमतों को नियंत्रित करने का अधिकार देती है ताकि उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। रसायन और उर्वरक मंत्रालय (MoCF) के अंतर्गत फर्टिलाइजर विभाग (DoF) सब्सिडी योजना का संचालन करता है, जो उत्पादकों और आयातकों को सब्सिडी प्रदान करता है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) उद्योग के हितधारकों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) प्रमुख घरेलू यूरिया उत्पादक है। गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) प्राकृतिक गैस की आपूर्ति करता है, जो यूरिया उत्पादन के लिए जरूरी है।

  • फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत सब्सिडी व्यवस्था में बाजार आधारित मूल्य निर्धारण नहीं है, जिससे मांग विकृत होती है और कार्यक्षमता कम होती है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ (2017) जैसे फैसलों में सब्सिडी वितरण और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता पर जोर दिया है।
  • नियामक नियंत्रण के बावजूद, घरेलू उत्पादन पुराने संयंत्रों और आयातित कच्चे माल पर निर्भरता के कारण सीमित है।

यूरिया आपूर्ति में आर्थिक और उत्पादन संबंधी चुनौतियां

भारत के घरेलू यूरिया संयंत्रों की औसत आयु 25 साल से अधिक है और उनकी संचालन क्षमता वैश्विक मानकों से 15-20% कम है (नीति आयोग रिपोर्ट, 2022)। इससे उत्पादन में कमी आती है और आयात पर निर्भरता बढ़ती है, जो कुल यूरिया खपत का लगभग 20-25% है (विदेश व्यापार महानिदेशालय, 2023)। उत्पादन प्रक्रिया में प्राकृतिक गैस की भारी भूमिका है, जिसका 80% से अधिक हिस्सा आयातित होता है, जिससे लागत वैश्विक LNG कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाती है।

  • वित्तीय वर्ष 2023 में यूरिया सब्सिडी बिल ₹1.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ा (संघीय बजट 2024-25)।
  • आयातित यूरिया मुख्य रूप से कतर, रूस और ईरान से आता है, जिन देशों में भू-राजनीतिक जोखिम सप्लाई स्थिरता को प्रभावित करते हैं।
  • घरेलू उत्पादन की अक्षमताएं और सब्सिडी विकृतियां यूरिया के अत्यधिक उपयोग को प्रोत्साहित करती हैं, जिससे पर्यावरणीय क्षरण होता है।

यूरिया: रासायनिक गुण और कृषि में महत्व

यूरिया का रासायनिक सूत्र CO(NH₂)₂ है, जिसमें लगभग 46% नाइट्रोजन होता है, जो ठोस उर्वरकों में सबसे अधिक है। यह धान, गेहूं और मक्का जैसे प्रमुख फसलों में पत्तियों के विकास और प्रोटीन संश्लेषण को बढ़ावा देता है, जो भारत की कृषि का आधार हैं।

  • इसके कम मूल्य और उच्च नाइट्रोजन सामग्री के कारण भारत में यह सबसे पसंदीदा नाइट्रोजन उर्वरक है।
  • हालांकि, अत्यधिक उपयोग से नाइट्रोजन का बहाव, मिट्टी का अम्लीकरण और भूजल प्रदूषण होता है।

चीन के उर्वरक उत्पादन मॉडल से तुलना

पहलूभारतचीन
यूरिया आयात निर्भरताकुल खपत का लगभग 20-25% आयातित20% से कम
यूरिया उत्पादन के लिए कच्चा माल80% से अधिक प्राकृतिक गैस (मुख्यतः आयातित)विविध: कोयला गैसीकरण, प्राकृतिक गैस, अन्य स्रोत
घरेलू संयंत्र दक्षताऔसत संयंत्र आयु >25 वर्ष; वैश्विक मानकों से 15-20% कम दक्षताआधुनिक संयंत्र, उन्नत तकनीक के साथ उच्च दक्षता
नीति दृष्टिकोणसब्सिडी आधारित, सीमित बाजार मूल्य निर्धारण; फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985तकनीकी निवेश और कच्चे माल विविधीकरण; बाजार आधारित मूल्य निर्धारण

महत्वपूर्ण नीति खामियां और प्रभाव

फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 के तहत सब्सिडी व्यवस्था घरेलू उत्पादन को कुशल बनाने और वैकल्पिक नाइट्रोजन स्रोतों को प्रोत्साहित करने में असफल रही है। इससे मांग में विकृति, यूरिया के अत्यधिक उपयोग और निंबू-लेपित यूरिया या जैव उर्वरकों में निवेश की कमी हुई है। बाजार आधारित मूल्य निर्धारण के अभाव में संयंत्रों के आधुनिकीकरण और कच्चे माल के विविधीकरण को प्रोत्साहन नहीं मिला है।

  • सब्सिडी विकृतियां अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा देती हैं, जिससे पर्यावरणीय नुकसान और मिट्टी का क्षरण होता है।
  • आयातित प्राकृतिक गैस और यूरिया पर निर्भरता भारत को वैश्विक आपूर्ति झटकों और कीमत अस्थिरता के प्रति संवेदनशील बनाती है।
  • उच्च पूंजी लागत और नियामक जड़ता के कारण घरेलू उत्पादन क्षमता विस्तार सीमित है।

आगे का रास्ता: नीति और उत्पादन सुधार

  • सब्सिडी योजनाओं को बाजार संकेतों से जोड़कर उत्पादन को कुशल बनाने के लिए पुनर्गठित करना चाहिए।
  • घरेलू यूरिया संयंत्रों के आधुनिकीकरण में निवेश बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करनी चाहिए।
  • पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए निंबू-लेपित यूरिया और जैव उर्वरकों को बढ़ावा देना चाहिए।
  • आयातित प्राकृतिक गैस के अलावा कोयला गैसीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की खोज कर कच्चे माल का विविधीकरण करना चाहिए।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ानी चाहिए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में यूरिया खपत और आयात निर्भरता से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत अपनी कुल यूरिया खपत का लगभग 90% आयात करता है।
  2. घरेलू यूरिया उत्पादन का 80% से अधिक हिस्सा आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भर है।
  3. यूरिया भारत की कुल उर्वरक खपत का आधे से अधिक है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत अपनी कुल यूरिया खपत का लगभग 20-25% ही आयात करता है, 90% नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि घरेलू यूरिया उत्पादन का 80% से अधिक हिस्सा आयातित प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। कथन 3 सही है क्योंकि यूरिया कुल उर्वरक खपत का 56% है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. यह यूरिया सहित उर्वरकों के उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करता है।
  2. यह आदेश एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 के तहत जारी किया गया है।
  3. यह सभी उर्वरकों के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण अनिवार्य करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 और 2 सही हैं। फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करता है और यह एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट के तहत जारी किया गया है। कथन 3 गलत है क्योंकि यह आदेश बाजार आधारित मूल्य निर्धारण अनिवार्य नहीं करता; सब्सिडी और मूल्य नियंत्रण बाजार संकेतों को विकृत करते हैं।

मेन प्रश्न

भारत की घरेलू उर्वरक उत्पादन में आयातित यूरिया और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता के प्रभावों पर चर्चा करें। इस निर्भरता को कम करने और उर्वरक सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए नीति उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की कृषि अर्थव्यवस्था यूरिया उर्वरकों पर भारी निर्भर है; आयात निर्भरता से राज्य में उर्वरक की कीमत और उपलब्धता प्रभावित होती है।
  • मेन पॉइंटर: राष्ट्रीय उर्वरक नीति को राज्य स्तर की कृषि उत्पादकता और सब्सिडी प्रभाव से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
भारत में घरेलू उत्पादन होते हुए भी यूरिया आयात क्यों किया जाता है?

भारत अपनी यूरिया खपत का लगभग 20-25% आयात करता है क्योंकि घरेलू उत्पादन क्षमता अपर्याप्त है, संयंत्र पुराने और कम दक्षता वाले हैं, और प्राकृतिक गैस आयात पर निर्भरता उत्पादन लागत बढ़ाती है और विस्तार को सीमित करती है।

फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985 की भूमिका क्या है?

फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985, एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 के तहत उर्वरकों के उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करता है। यह सब्सिडी योजनाओं को संचालित करता है लेकिन बाजार आधारित मूल्य निर्धारण व्यवस्था नहीं है।

आयातित प्राकृतिक गैस का भारत में यूरिया उत्पादन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

घरेलू यूरिया उत्पादन में 80% से अधिक प्राकृतिक गैस आयातित होती है, जिससे उत्पादन लागत वैश्विक LNG कीमतों के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील हो जाती है, जिससे सब्सिडी बोझ बढ़ता है।

यूरिया के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरणीय समस्याएं क्या हैं?

अत्यधिक यूरिया उपयोग से नाइट्रोजन का बहाव, मिट्टी का अम्लीकरण, भूजल प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता में कमी होती है, जो स्थायी कृषि को प्रभावित करता है।

चीन के उर्वरक उत्पादन में भारत से क्या अंतर है?

चीन ने कोयला गैसीकरण सहित कच्चे माल के स्रोतों को विविधीकृत किया है और आधुनिक संयंत्रों में निवेश किया है, जिससे यूरिया आयात निर्भरता 20% से कम है, जबकि भारत आयातित प्राकृतिक गैस और पुराने संयंत्रों पर अधिक निर्भर है।

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