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परिचय: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का विस्तार और महत्व

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह (2024) के अनुसार, भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2014 में लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में अनुमानित 195 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के Department of Biotechnology (DBT) का अनुमान है कि यह क्षेत्र 2030 तक 300 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगा। इस विकास के पीछे जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-फार्मा, जैव-कृषि और जैव-औद्योगिक क्षेत्रों में हुई प्रगति है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर सतत जैव-आधारित आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – जैव-प्रौद्योगिकी, जैव-अर्थव्यवस्था, सतत विकास
  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – जैव-प्रौद्योगिकी पहलें और नियामक ढांचे
  • निबंध: भारत की आर्थिक और सतत विकास में जैव-प्रौद्योगिकी की भूमिका

जैव-अर्थव्यवस्था की परिभाषा और इसके उप-क्षेत्र

जैव-अर्थव्यवस्था का तात्पर्य जैविक संसाधनों के ज्ञान-आधारित उत्पादन और उपयोग से है, जो आर्थिक क्षेत्रों में उत्पाद, प्रक्रियाएं और सेवाएं सतत रूप से प्रदान करता है। इसमें कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन, खाद्य उत्पादन, जैव-प्रौद्योगिकी और जैव-ऊर्जा शामिल हैं।

  • जैव-फार्मा: दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और जैव-प्रौद्योगिकी आधारित मेडिकल उत्पादों का विकास और निर्माण।
  • जैव-कृषि: जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें और पशु, प्रिसिजन कृषि, और जैव-आधारित कृषि उत्पाद जैसे बीटी कपास, जो 2023 के ISAAA के अनुसार 12 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाया जाता है।
  • जैव-औद्योगिक: एंजाइम, रीकॉम्बिनेंट डीएनए और जैवसंश्लेषणीय प्रक्रियाओं द्वारा जैव-आधारित रसायन और सामग्री का उत्पादन।

विकास की गति और आर्थिक प्रभाव

पिछले एक दशक में भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का बाजार आकार लगभग 20 गुना बढ़ा है, जो लगभग 25% की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है। यह भारत की GDP में लगभग 5% का योगदान देती है, जो इसके बढ़ते मैक्रोइकॉनॉमिक महत्व को दर्शाता है। 2014 से 2023 के बीच इस क्षेत्र ने लगभग 3.5 अरब डॉलर का FDI आकर्षित किया है (DPIIT डेटा), जबकि जैव-फार्मास्यूटिकल निर्यात 2023 में 24 अरब डॉलर तक पहुंच गया है (Pharmexcil)।

  • जैव-अर्थव्यवस्था के उप-क्षेत्रों का योगदान: जैव-औद्योगिक (47%), जैव-फार्मा (35%), जैव-कृषि (8%), जैव-शोध (9%)।
  • सरकारी निवेश में राष्ट्रीय जैव-फार्मा मिशन (2020-2025) के लिए 3,000 करोड़ रुपये का आवंटन शामिल है, जो नवाचार और उत्पादन को बढ़ावा देता है।
  • जैव-कृषि की सफलता का उदाहरण बीटी कपास है, भारत की पहली वाणिज्यिक रूप से स्वीकृत जेनेटिकली मॉडिफाइड फसल, जो व्यापक रूप से 12 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाती है।

जैव-अर्थव्यवस्था पर लागू कानूनी और नियामक ढांचा

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था कई कानूनों और नीतियों के अंतर्गत संचालित होती है, लेकिन एक एकीकृत नियामक प्राधिकरण अभी तक स्थापित नहीं हुआ है:

  • Biotechnology Regulatory Authority of India (प्रस्तावित): अनुमोदन और निगरानी को सुव्यवस्थित करने के लिए प्रस्तावित, लेकिन अभी लागू नहीं हुआ।
  • The Environment Protection Act, 1986: धारा 3 के तहत केंद्र सरकार को पर्यावरण पर प्रभाव डालने वाले जैव-प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों को नियंत्रित करने का अधिकार।
  • The Biological Diversity Act, 2002: धारा 3-7 के तहत जैविक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुँच नियंत्रित।
  • The Drugs and Cosmetics Act, 1940: जैव-फार्मास्यूटिकल उत्पादों की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करता है।
  • The Seeds Act, 1966: बीटी कपास जैसे जेनेटिकली मॉडिफाइड बीजों का नियंत्रण।
  • National Biotechnology Development Strategy 2015-2020: क्षेत्रीय विकास और नवाचार के लिए नीति ढांचा।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के प्रमुख संस्थान

  • Department of Biotechnology (DBT): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की नीति निर्धारण और वित्तपोषण संस्था।
  • Biotechnology Industry Research Assistance Council (BIRAC): जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप और नवाचार के लिए समर्थन।
  • Indian Council of Agricultural Research (ICAR): जैव-कृषि अनुसंधान और विकास का नेतृत्व।
  • Council of Scientific and Industrial Research (CSIR): जैव-औद्योगिक क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास।
  • Indian Bioenergy Association (IBBI): जैव-ऊर्जा पहलों को बढ़ावा।
  • Pharmaceutical Export Promotion Council of India (Pharmexcil): जैव-फार्मा निर्यात को प्रोत्साहन।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम संयुक्त राज्य अमेरिका की जैव-अर्थव्यवस्था

परिमाणभारतसंयुक्त राज्य अमेरिका
जैव-अर्थव्यवस्था का बाजार आकार (2025/2023)~195 अरब डॉलर (2025 अनुमान)~2 ट्रिलियन डॉलर (2023 अनुमान)
वार्षिक अनुसंधान एवं विकास निवेशराष्ट्रीय जैव-फार्मा मिशन के तहत 3,000 करोड़ रुपये (~400 मिलियन डॉलर)1 अरब डॉलर से अधिक वार्षिक (OSTP रिपोर्ट 2023)
नियामक ढांचाखंडित; प्रस्तावित Biotechnology Regulatory Authority अभी लागू नहींएकीकृत नियामक नियंत्रण FDA और USDA जैव-नीतियों के साथ
प्रमुख उप-क्षेत्रजैव-फार्मा, जैव-औद्योगिक, जैव-कृषिउन्नत जैव-फार्मा, सिंथेटिक बायोलॉजी, बायोइन्फॉर्मेटिक्स
वैश्विक रैंकिंगदुनिया में 12वां, एशिया-प्रशांत में 3रादुनिया में 1ला

चुनौतियां और महत्वपूर्ण अंतर

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का विकास नियामक खंडितता से प्रभावित है, जिससे जेनेटिकली मॉडिफाइड जीवों और जैव-फार्मास्यूटिकल नवाचारों के अनुमोदन में देरी होती है। एक एकीकृत Biotechnology Regulatory Authority के अभाव में वाणिज्यिकरण धीमा पड़ता है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमी आती है। इसके अलावा, उच्च स्तरीय अनुसंधान एवं विकास का विस्तार और निरंतर निवेश आकर्षित करना भी वैश्विक नेताओं की तुलना में चुनौतीपूर्ण है।

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • Biotechnology Regulatory Authority of India का गठन कर नियामक प्रक्रियाओं को एकीकृत और तेज़ करना।
  • वैश्विक मानकों के अनुरूप सार्वजनिक और निजी अनुसंधान एवं विकास निवेश बढ़ाना और नवाचार को प्रोत्साहित करना।
  • बौद्धिक संपदा अधिकारों के ढांचे को मजबूत करना ताकि जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप और विदेशी निवेशक प्रोत्साहित हों।
  • जैव-कृषि और जैव-औद्योगिक क्षेत्रों को जैव-फार्मा के साथ संतुलित विकास के लिए बढ़ावा देना।
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और बाजार पहुंच के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. 2025 तक भारत की जैव-अर्थव्यवस्था देश की GDP में लगभग 5% का योगदान देती है।
  2. Biotechnology Regulatory Authority of India लागू हो चुकी है और पूरी तरह कार्यरत है।
  3. बीटी कपास भारत में 12 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाने वाली जेनेटिकली मॉडिफाइड फसल है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि भारत की जैव-अर्थव्यवस्था GDP में लगभग 5% योगदान देती है। कथन 2 गलत है क्योंकि Biotechnology Regulatory Authority of India प्रस्तावित है लेकिन अभी लागू नहीं हुई। कथन 3 सही है क्योंकि बीटी कपास 12 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
जैव-अर्थव्यवस्था के उप-क्षेत्रों के बारे में विचार करें:
  1. BioPharma में जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों का उत्पादन शामिल है।
  2. BioIndustrial क्षेत्र में रीकॉम्बिनेंट डीएनए तकनीक का उपयोग कर जैव-आधारित रसायनों का उत्पादन होता है।
  3. BioAgri में प्रिसिजन कृषि और जेनेटिकली मॉडिफाइड पशु शामिल हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें BioAgri में आती हैं, BioPharma में नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं जो क्रमशः BioIndustrial और BioAgri क्षेत्रों का सही वर्णन करते हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था की तेज़ वृद्धि के कारकों की समीक्षा करें और 2030 तक 300 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किन प्रमुख नियामक चुनौतियों का समाधान आवश्यक है, इस पर चर्चा करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी), पेपर 3 (कृषि और अर्थव्यवस्था)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की समृद्ध जैव विविधता और खनिज संसाधन जैव-आधारित उद्योगों और जैव-ऊर्जा परियोजनाओं के लिए संभावनाएं प्रदान करते हैं, जो राष्ट्रीय जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
  • मुख्य बिंदु: जैव-कृषि, जैव-ऊर्जा में झारखंड की संभावनाओं को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें और जैव-प्रौद्योगिकी निवेश आकर्षित करने के लिए नियामक सहूलियत की आवश्यकता पर जोर दें।
भारत की जैव-अर्थव्यवस्था का 2030 तक अनुमानित आकार क्या है?

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के Department of Biotechnology के अनुसार, भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2030 तक लगभग 300 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था के मुख्य उप-क्षेत्र कौन से हैं?

मुख्य उप-क्षेत्र हैं: BioPharma (35%), BioIndustrial (47%), BioAgri (8%), और BioResearch (9%)।

Biotechnology Regulatory Authority of India की स्थिति क्या है?

यह एक प्रस्तावित एकीकृत नियामक प्राधिकरण है जो जैव-प्रौद्योगिकी उत्पादों और अनुसंधान के लिए है, लेकिन अभी तक इसे कानून के रूप में लागू नहीं किया गया है।

हाल ही में जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने कितना विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित किया है?

2014 से 2023 के बीच जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने लगभग 3.5 अरब डॉलर का FDI आकर्षित किया है, DPIIT के आंकड़ों के अनुसार।

भारत की जैव-अर्थव्यवस्था में बीटी कपास की क्या भूमिका है?

बीटी कपास भारत की पहली जेनेटिकली मॉडिफाइड फसल है, जो 12 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जाती है और BioAgri क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

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