मिरव तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण
जून 2024 में भारत ने मिरव (Multiple Independently Targeted Re-Entry Vehicle) प्रणाली से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया, जो देश के रणनीतिक मिसाइल कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है (स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, भारत सरकार)। इस परीक्षण का नेतृत्व रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने एक निर्दिष्ट परीक्षण स्थल पर किया। यह तकनीक एक ही मिसाइल से कई स्वतंत्र लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम बनाती है, जिससे सटीकता, मिसाइल की जीवित रहने की क्षमता और दूसरी स्ट्राइक क्षमता में सुधार होता है, जो बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल में अहम भूमिका निभाता है।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियाँ, रक्षा तकनीक, परमाणु नीति
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध, संधियाँ और रणनीतिक साझेदारी
- निबंध: भारत की रक्षा आधुनिकीकरण और रणनीतिक स्वायत्तता
मिरव तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि के तकनीकी पहलू और रणनीतिक प्रभाव
एडवांस्ड अग्नि मिसाइल की मारक दूरी 5,000 से 8,000 किमी के बीच है, जो इसे मध्य दूरी से लेकर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) की श्रेणी में लाती है, और यह एशिया समेत उससे बाहर के रणनीतिक लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है (स्रोत: DRDO आधिकारिक डेटा)। मिरव तकनीक के जुड़ने से यह मिसाइल 3 से 10 स्वतंत्र लक्ष्यों पर वारहेड तैनात कर सकती है, जो विरोधी मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित होती है (स्रोत: DRDO तकनीकी ब्रीफ 2024)। मिरव कई वारहेड्स के जरिए मिसाइल रक्षा कवच को पार करने की क्षमता बढ़ाता है।
- सटीक निशाना: विभिन्न वारहेड्स के स्वतंत्र लक्ष्य निर्धारण से हमले में लचीलापन आता है।
- जीवित रहने की क्षमता: वारहेड्स के फैलाव से पूर्व-आक्रमण के जोखिम कम होते हैं।
- दूसरी स्ट्राइक क्षमता: पहली हमले के बाद भी विश्वसनीय जवाबी कार्रवाई की गारंटी देता है।
मिसाइल विकास के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा
भारत का मिसाइल कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन बनाते हुए संचालित होता है। संविधान के अनुच्छेद 51 में अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने का प्रावधान है, जिसमें परमाणु अप्रसार संधियाँ भी शामिल हैं। Weapons of Mass Destruction and their Delivery Systems (Prohibition of Unlawful Activities) Act, 2005 के तहत हथियारों और उनके वितरण प्रणालियों से जुड़ी अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाती है। Defence of India Act, 1962 राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आपातकालीन शक्तियाँ प्रदान करता है। भारत Missile Technology Control Regime (MTCR) का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन इसके दिशा-निर्देशों का पालन करता है ताकि मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोका जा सके (स्रोत: रक्षा मंत्रालय कानूनी दस्तावेज)।
स्वदेशी मिसाइल विकास के आर्थिक पहलू
वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत ने रक्षा के लिए लगभग ₹5.94 लाख करोड़ (~$80 बिलियन) का बजट आवंटित किया, जिसमें से लगभग 25 प्रतिशत पूंजीगत व्यय के लिए है, जिसमें मिसाइल विकास भी शामिल है (स्रोत: रक्षा मंत्रालय बजट 2023-24)। अग्नि जैसे स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करते हैं, जिससे हर साल अरबों रुपये की बचत होती है। DRDO के मिसाइल कार्यक्रम का बजट 2018 से 2023 के बीच 15% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है (स्रोत: DRDO वार्षिक रिपोर्ट 2022-23)। मिसाइल निर्माण क्षेत्र में 10,000 से अधिक कुशल रोजगार उपलब्ध हैं, जो रक्षा उद्योग और 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूती देते हैं।
- बजट वृद्धि: 2018-2023 के बीच मिसाइल विकास के लिए 15% CAGR।
- रोजगार: 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कुशल नौकरियाँ।
- आयात प्रतिस्थापन: विदेशी मिसाइल तकनीक पर निर्भरता में भारी कमी।
- निर्यात संभावना: रणनीतिक नियंत्रण के कारण सीमित, लेकिन भविष्य में वृद्धि की उम्मीद।
भारत के रणनीतिक मिसाइल कार्यक्रम के प्रमुख संस्थान
मिसाइल कार्यक्रम कई संस्थानों के सहयोग से चलता है जिनके अलग-अलग कार्य हैं:
- DRDO: डिजाइन, विकास और परीक्षण की मुख्य एजेंसी।
- Defence Research and Development Laboratory (DRDL): मिसाइल डिजाइन और प्रणोदन प्रणाली में विशेषज्ञ।
- भारतीय वायु सेना (IAF): ऑपरेशनल उपयोगकर्ता और रणनीतिक तैनाती एजेंसी।
- Strategic Forces Command (SFC): परमाणु सक्षम मिसाइलों की तैनाती, कमांड और परिचालन तत्परता की जिम्मेदारी।
- रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्माण, बजट आवंटन और निगरानी।
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत का एडवांस्ड अग्नि बनाम चीन का DF-41
| विशेषता | भारत का एडवांस्ड अग्नि (मिरव) | चीन का DF-41 (मिरव) |
|---|---|---|
| मारक दूरी | 5,000-8,000 किमी | 12,000-15,000 किमी |
| मिरव वारहेड्स | 3-10 स्वतंत्र लक्ष्य | 10 तक स्वतंत्र लक्ष्य |
| परिचालन स्थिति | परीक्षण सफल, तैनाती जारी | परिचालन तैनाती |
| मिसाइल प्रकार | मध्य दूरी से ICBM | ICBM |
| रणनीतिक प्रभाव | विश्वसनीय निवारण बढ़ाता है, चीन के साथ अंतर कम करता है | परिमाणात्मक और गुणात्मक श्रेष्ठता बनाए रखता है |
भारत का मिरव से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल चीन के मुकाबले रणनीतिक अंतर को कम करता है, लेकिन चीन अभी भी दूरी, मिसाइल संख्या और तैनाती तत्परता में बढ़त बनाए हुए है (स्रोत: SIPRI Yearbook 2024)।
मिरव तैनाती और कमांड-कंट्रोल समाकलन की चुनौतियाँ
तकनीकी सफलता के बावजूद, भारत को मिरव प्रणाली को मजबूत कमांड और कंट्रोल (C2) फ्रेमवर्क के साथ जोड़ने और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों के खिलाफ जीवित रहने की क्षमता सुनिश्चित करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका और चीन के विपरीत, जिनकी मिसाइल रक्षा और हाइपरसोनिक डिलीवरी क्षमताएँ विकसित हैं, भारत की मिसाइल रक्षा संरचना अभी विकास के चरण में है। प्रभावी C2 समाकलन सुरक्षित लॉन्च प्राधिकरण, लक्ष्य निर्धारण और आकस्मिक या अनधिकृत उपयोग के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक है (स्रोत: रक्षा विश्लेषक, 2024)।
रणनीतिक महत्व और आगे का रास्ता
- मिरव उड़ान परीक्षण से भारत की दूसरी स्ट्राइक क्षमता मजबूत होती है, जो नो-फर्स्ट-यूज परमाणु नीति को मजबूती देता है।
- स्वदेशी विकास विदेशी तकनीक पर निर्भरता से जुड़ी कमजोरियों को कम करता है।
- मिरव के फायदों को पूरी तरह से हासिल करने के लिए मिसाइल रक्षा और C2 सिस्टम का उन्नयन जरूरी है।
- हाइपरसोनिक तकनीकों और स्टेल्थ क्षमताओं में निरंतर निवेश जीवित रहने की क्षमता की खामियों को दूर करेगा।
- कूटनीतिक प्रयास मिसाइल नियंत्रण और हथियार नियंत्रण पर तकनीकी प्रगति के साथ संतुलित रहना चाहिए ताकि रणनीतिक स्थिरता बनी रहे।
- MIRV एक ही मिसाइल को कई वारहेड्स लेकर अलग-अलग स्थानों को निशाना बनाने की अनुमति देता है।
- MIRV तकनीक मुख्यतः मिसाइल की दूरी 10,000 किमी से अधिक बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है।
- MIRV मिसाइल रक्षा को जटिल बनाता है क्योंकि यह कई वारहेड्स के साथ इंटरसेप्टर्स को अभिभूत कर देता है।
- भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (MTCR) का औपचारिक सदस्य है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 परमाणु अप्रसार सहित अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने का निर्देश देता है।
- Weapons of Mass Destruction and their Delivery Systems (Prohibition of Unlawful Activities) Act, 2005 भारत में WMD से संबंधित गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?
मेन प्रश्न
क्षेत्रीय सुरक्षा और परमाणु निवारण के संदर्भ में मिरव तकनीक से लैस भारत के एडवांस्ड अग्नि मिसाइल के सफल उड़ान परीक्षण के रणनीतिक महत्व पर चर्चा करें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – सुरक्षा और रक्षा, पेपर 4 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी
- झारखंड का पहलू: झारखंड में कई रक्षा निर्माण इकाइयाँ और DRDO प्रयोगशालाएँ हैं जो मिसाइल तकनीक विकास में योगदान देती हैं।
- मेन पॉइंटर: स्वदेशी रक्षा क्षमताओं, झारखंड में रोजगार सृजन और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दें।
भारत के एडवांस्ड अग्नि मिसाइल की मारक दूरी क्या है?
एडवांस्ड अग्नि मिसाइल की मारक दूरी 5,000 से 8,000 किमी के बीच है, जो इसे मध्य दूरी से लेकर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी में रखती है (स्रोत: DRDO आधिकारिक डेटा)।
मिरव तकनीक बैलिस्टिक मिसाइलों में क्या सक्षम बनाती है?
मिरव तकनीक एक ही बैलिस्टिक मिसाइल को कई स्वतंत्र वारहेड्स लेकर चलने और एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम बनाती है (स्रोत: DRDO तकनीकी ब्रीफ 2024)।
क्या भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (MTCR) का सदस्य है?
नहीं, भारत MTCR का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन मिसाइल प्रसार को रोकने के लिए इसके दिशा-निर्देशों का पालन करता है (स्रोत: रक्षा मंत्रालय)।
मिरव तकनीक भारत की परमाणु निवारक क्षमता को कैसे बढ़ाती है?
मिरव तकनीक हमले की सटीकता बढ़ाती है, दुश्मन की मिसाइल रक्षा को जटिल बनाती है, और दूसरी स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करती है, जिससे विश्वसनीय जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित होती है (स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो, जून 2024)।
मिरव से लैस मिसाइलों की तैनाती में मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
मुख्य चुनौतियाँ हैं सुरक्षित कमांड और कंट्रोल प्रणाली के साथ समाकलन और उन्नत मिसाइल रक्षा कवच के खिलाफ जीवित रहने की क्षमता सुनिश्चित करना, जिनमें भारत अभी विकास कर रहा है (स्रोत: रक्षा विश्लेषक, 2024)।
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