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परिचय: INS SAGAR की म्यांमार के यांगून में तैनाती

जून 2024 में भारतीय नौसेना का जहाज INS SAGAR म्यांमार के यांगून बंदरगाह पर पहुंचा, जो समुद्री कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। रक्षा मंत्रालय के निर्देशन में भारतीय नौसेना द्वारा की गई यह तैनाती हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की भारत की निरंतर कोशिशों का हिस्सा है। इस दौरे का मकसद म्यांमार के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाना है, जो बंगाल की खाड़ी का एक अहम तटीय राज्य है, साथ ही क्षेत्र में चीन के बढ़ते समुद्री प्रभाव का संतुलन बनाए रखना भी है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारत और उसके पड़ोसी देशों के संबंध, द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूह
  • GS पेपर 3: सुरक्षा चुनौतियां, भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा में भूमिका
  • निबंध: भारत की समुद्री कूटनीति और हिंद-प्रशांत में रणनीतिक स्वायत्तता

INS SAGAR की तैनाती के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार

यह तैनाती Navy Act, 1957 के अनुरूप है, जो भारतीय नौसेना को भारत के समुद्री हितों की रक्षा और विदेश मिशन चलाने का अधिकार देता है। रक्षा मंत्रालय की Overseas Deployment of Indian Armed Forces (ODIAF) नीति, जो Defence of India Rules, 1962 के तहत तैयार की गई है, ऐसी तैनातियों के लिए प्रक्रिया निर्धारित करती है। साथ ही, भारत का United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS), 1982 के प्रति प्रतिबद्ध रहना, विशेष रूप से Part VII जो Exclusive Economic Zones (EEZs) से संबंधित है, बंगाल की खाड़ी और आस-पास के जलक्षेत्र में नौसैनिक उपस्थिति और सहयोग को वैध बनाता है।

  • Navy Act, 1957: भारतीय नौसेना के संचालन और तैनाती के लिए कानूनी आधार।
  • Defence of India Rules, 1962: विदेश में तैनाती की मंजूरी के लिए ढांचा।
  • UNCLOS, 1982: समुद्री क्षेत्र, EEZ अधिकार और नौवहन की स्वतंत्रता को नियंत्रित करता है।

बंगाल की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा का आर्थिक महत्व

भारत का लगभग 90% से अधिक व्यापार समुद्री मार्गों के जरिए होता है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। अकेले बंगाल की खाड़ी लगभग 400 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार का केंद्र है (विश्व बैंक, 2023), जो इसे आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। भारतीय नौसेना के लिए वित्त वर्ष 2023-24 का बजट ₹1.42 लाख करोड़ (~18 अरब डॉलर) निर्धारित होना सरकार की समुद्री सुरक्षा और कूटनीति को प्राथमिकता देने को दर्शाता है। सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना और म्यांमार के साथ क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाना भारत के आर्थिक हितों की रक्षा में सीधे सहायक है।

  • भारत के कुल व्यापार का 90% से अधिक हिस्सा हिंद महासागर के रास्ते गुजरता है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)।
  • बंगाल की खाड़ी में वार्षिक व्यापार लगभग 400 अरब डॉलर का है (विश्व बैंक, 2023)।
  • भारतीय नौसेना का बजट FY 2023-24 के लिए ₹1.42 लाख करोड़ (~18 अरब डॉलर) है (रक्षा बजट 2023-24)।

INS SAGAR के दौरे और समुद्री कूटनीति में शामिल प्रमुख संस्थान

भारतीय नौसेना (IN) समुद्री सुरक्षा और कूटनीतिक मिशनों को अंजाम देती है, जिनमें SAGAR तैनातियां शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय (MoD) नीतियां बनाता है और विदेश में नौसैनिक ऑपरेशनों को मंजूरी देता है। विदेश मंत्रालय (MEA) म्यांमार के साथ कूटनीतिक संपर्कों का समन्वय करता है। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) हिंद महासागर क्षेत्र में तटीय निगरानी के जरिए नौसेना के प्रयासों को पूरा करता है। क्षेत्रीय स्तर पर ASEAN समुद्री सुरक्षा के माहौल को प्रभावित करता है, जबकि UNCLOS समुद्री क्षेत्राधिकार के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

  • भारतीय नौसेना: SAGAR तैनातियों का संचालन।
  • रक्षा मंत्रालय: नौसैनिक मिशनों की नीति और निगरानी।
  • विदेश मंत्रालय: म्यांमार के साथ कूटनीतिक समन्वय।
  • भारतीय तटरक्षक बल: तटीय सुरक्षा और निगरानी।
  • ASEAN: क्षेत्रीय बहुपक्षीय मंच जो समुद्री सुरक्षा को प्रभावित करता है।
  • UNCLOS: समुद्री क्षेत्राधिकार के लिए कानूनी आधार।

समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक उपस्थिति पर डेटा

विश्व की लगभग 80% समुद्री व्यापार मात्रा हिंद महासागर के जरिए होती है (International Maritime Organization, 2023)। भारत और म्यांमार के बीच 2020 से संयुक्त नौसैनिक अभ्यासों में 30% की वृद्धि हुई है (भारतीय नौसेना वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत म्यांमार में निवेश 2023 तक 2 अरब डॉलर से अधिक है (Asian Development Bank, 2023)। भारत-म्यांमार द्विपक्षीय व्यापार 2022-23 में 1.3 अरब डॉलर था, जो सालाना 12% बढ़ रहा है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)। INS SAGAR की तैनातियां 2019 में 2 से बढ़कर 2023 में 7 हो गई हैं (भारतीय नौसेना प्रेस रिलीज, 2023)। म्यांमार की समुद्री सीमा लगभग 1,930 किलोमीटर है, जो बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर से जुड़ी है (CIA World Factbook, 2023)।

  • विश्व का 80% समुद्री व्यापार हिंद महासागर से गुजरता है (IMO, 2023)।
  • 2020 से भारत-म्यांमार नौसैनिक अभ्यासों में 30% की वृद्धि (भारतीय नौसेना वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।
  • चीन का BRI निवेश म्यांमार में >2 अरब डॉलर (ADB, 2023)।
  • भारत-म्यांमार द्विपक्षीय व्यापार: 2022-23 में 1.3 अरब डॉलर, 12% वार्षिक वृद्धि (वाणिज्य मंत्रालय, 2023)।
  • SAGAR तैनातियां 2019 में 2 से 2023 में 7 हुईं (भारतीय नौसेना प्रेस रिलीज, 2023)।
  • म्यांमार की समुद्री सीमा: लगभग 1,930 किलोमीटर (CIA World Factbook, 2023)।

भारत की SAGAR तैनातियों की तुलना चीन की म्यांमार में समुद्री रणनीति से

पहलू भारत की SAGAR तैनाती चीन की समुद्री रणनीति
लक्ष्य क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण, समुद्री कूटनीति स्थायी रणनीतिक ठिकाने, बुनियादी ढांचे का नियंत्रण, शक्ति प्रदर्शन
भौगोलिक फोकस बंगाल की खाड़ी, म्यांमार के बंदरगाह (जैसे यांगून) जिबूती बेस, म्यांमार के क्योक्प्यू बंदरगाह
निवेश स्तर क्रमिक नौसैनिक तैनाती, संयुक्त अभ्यास 2017 से 10 अरब डॉलर से अधिक का बंदरगाह बुनियादी ढांचा (CSIS, 2023)
उपस्थिति का स्वरूप अस्थायी, मिशन आधारित नौसैनिक दौरे स्थायी नौसैनिक अड्डे और बुनियादी ढांचे का नियंत्रण
रणनीतिक प्रभाव बहुपक्षीय क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा, प्रभाव का संतुलन दबंग समुद्री प्रभुत्व, भारत की क्षेत्रीय प्रधानता को चुनौती

भारत की समुद्री कूटनीति में रणनीतिक कमियां

भारत की समुद्री कूटनीति, विशेषकर SAGAR जैसी नौसैनिक तैनातियों में मजबूत होने के बावजूद, एक समग्र हिंद-प्रशांत रणनीति की कमी है जो नौसैनिक, आर्थिक और बुनियादी ढांचे की पहल को एकीकृत करे। इस खंडित दृष्टिकोण के कारण भारत चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के मुकाबले एक व्यापक विकल्प प्रस्तुत करने में असमर्थ है, खासकर म्यांमार और व्यापक IOR में। इससे भारत का बंगाल की खाड़ी में महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे और आर्थिक गलियारों पर प्रभाव सीमित होता है।

  • अलग-अलग नौसैनिक और आर्थिक रणनीतियां रणनीतिक प्रभाव को कम करती हैं।
  • एकीकृत हिंद-प्रशांत नीति की कमी व्यापक जुड़ाव में बाधा है।
  • चीन के बुनियादी ढांचा निवेश भारत की समुद्री कूटनीति को पीछे छोड़ते हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • INS SAGAR का यांगून दौरा भारत-म्यांमार द्विपक्षीय समुद्री सहयोग को मजबूत करता है, जो बंगाल की खाड़ी में समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
  • भारत को नौसैनिक तैनातियों को आर्थिक और बुनियादी ढांचा पहलों के साथ समन्वित करना चाहिए ताकि चीन की आक्रामक समुद्री उपस्थिति का प्रभावी मुकाबला हो सके।
  • म्यांमार के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास और क्षमता निर्माण बढ़ाकर क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना को गहरा किया जा सकता है।
  • भारत को ASEAN ढांचे का उपयोग कर समुद्री सुरक्षा सहयोग को संस्थागत करना चाहिए और UNCLOS के सिद्धांतों को मजबूत करना चाहिए।
  • SAGAR तैनातियों को नौसैनिक कूटनीति से आगे बढ़ाकर मानवीय सहायता और आपदा राहत में भी शामिल किया जाना चाहिए, जिससे क्षेत्र में सद्भाव और प्रभाव बढ़ेगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारतीय नौसेना की SAGAR तैनातियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. SAGAR तैनातियां हिंद महासागर क्षेत्र में स्थायी नौसैनिक अड्डे स्थापित करने के लिए हैं।
  2. SAGAR का मतलब Sea Guardianship And Response है, जो भारतीय नौसेना के ऑपरेशनों से जुड़ा है।
  3. SAGAR तैनातियां UNCLOS, 1982 के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं के अनुरूप हैं।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि SAGAR तैनातियां अस्थायी नौसैनिक मिशन हैं, स्थायी अड्डे नहीं। कथन 2 सही है, SAGAR का मतलब Sea Guardianship And Response है। कथन 3 भी सही है क्योंकि ये तैनातियां UNCLOS के समुद्री क्षेत्र नियमों का सम्मान करती हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-चीन की म्यांमार में समुद्री रणनीतियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत की SAGAR तैनातियां क्षेत्रीय क्षमता निर्माण और कूटनीतिक जुड़ाव पर केंद्रित हैं।
  2. चीन की समुद्री रणनीति में म्यांमार में स्थायी नौसैनिक अड्डे और बड़े पैमाने पर बंदरगाह निवेश शामिल हैं।
  3. चीन का म्यांमार के क्योक्प्यू बंदरगाह में निवेश 2023 तक 10 अरब डॉलर से अधिक है।

इनमें से कौन सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 3 गलत है क्योंकि चीन का 10 अरब डॉलर का निवेश व्यापक बंदरगाह बुनियादी ढांचे से जुड़ा है, केवल क्योक्प्यू बंदरगाह से नहीं। कथन 1 और 2 भारत और चीन की समुद्री रणनीतियों का सही वर्णन करते हैं।

मेन प्रश्न

यह चर्चा करें कि भारतीय नौसेना के जहाज SAGAR की यांगून तैनाती कैसे भारत की हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक समुद्री कूटनीति को दर्शाती है। इसके क्षेत्रीय सुरक्षा और बंगाल की खाड़ी में भारत-चीन प्रतिस्पर्धा पर क्या प्रभाव पड़ते हैं, उनका विश्लेषण करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा अध्ययन
  • झारखंड का दृष्टिकोण: भले ही झारखंड भू-आबद्ध राज्य है, लेकिन उसकी औद्योगिक निर्यात समुद्री व्यापार मार्गों पर निर्भर है, जिनकी सुरक्षा भारतीय नौसेना की उपस्थिति से सुनिश्चित होती है।
  • मेन पॉइंटर: भारत की समुद्री कूटनीति को राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा से जोड़ते हुए उत्तर तैयार करें, जिसमें झारखंड जैसे अंतर्देशीय राज्यों को अप्रत्यक्ष लाभ भी शामिल हों।
नौसेना अधिनियम, 1957 के तहत भारतीय नौसेना का मुख्य दायित्व क्या है?

नौसेना अधिनियम, 1957 भारतीय नौसेना को भारत के समुद्री हितों की रक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नौसैनिक ऑपरेशनों सहित विदेश मिशनों का संचालन करने का दायित्व देता है।

UNCLOS, 1982 बंगाल की खाड़ी में भारत की नौसैनिक तैनातियों को कैसे प्रभावित करता है?

UNCLOS समुद्री क्षेत्रों जैसे EEZ और क्षेत्रीय समुद्र की परिभाषा करता है, जो भारत को म्यांमार जैसे तटीय राज्यों के साथ सहयोग और नौसैनिक उपस्थिति के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

भारत की SAGAR तैनातियां चीन की म्यांमार में समुद्री रणनीति से कैसे अलग हैं?

भारत की SAGAR तैनातियां अस्थायी हैं और सुरक्षा सहयोग तथा क्षमता निर्माण पर केंद्रित हैं, जबकि चीन स्थायी नौसैनिक अड्डे और बड़े पैमाने पर बंदरगाह बुनियादी ढांचे में निवेश करता है।

बंगाल की खाड़ी भारत के समुद्री व्यापार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

बंगाल की खाड़ी लगभग 400 अरब डॉलर के वार्षिक व्यापार को सक्षम करती है और भारत को दक्षिण पूर्व एशिया और उससे आगे जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।

भारत की वर्तमान समुद्री कूटनीति में IOR में क्या सीमाएं हैं?

भारत के पास नौसैनिक, आर्थिक और बुनियादी ढांचा पहलों को एकीकृत करने वाली एक समग्र हिंद-प्रशांत नीति की कमी है, जिससे वह चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं का प्रभावी मुकाबला करने में असमर्थ है।

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