अपडेट

साल 2023 में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 2047 तक की व्यापक रणनीतिक दृष्टि पेश की, जो भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी के अवसर पर लक्षित है। इस दृष्टि में ऐतिहासिक युद्धों से मिली सीख और देशी नवाचारों जैसे सिंदूर मिसाइल सिस्टम को शामिल किया गया है, ताकि आत्मनिर्भरता, संयुक्त संचालन और आधुनिकीकरण को बढ़ावा दिया जा सके। इस रोडमैप का उद्देश्य बेहतर रक्षा क्षमताओं और संस्थागत सुधारों के माध्यम से भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में स्थापित करना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा आधुनिकीकरण, सुरक्षा चुनौतियाँ, रक्षा खरीद
  • GS पेपर 2: केंद्र-राज्य संबंध (संघ सूची के तहत रक्षा), राष्ट्रीय सुरक्षा
  • निबंध: भारत की रक्षा तत्परता और रणनीतिक स्वायत्तता

रणनीतिक आधार: संवैधानिक और कानूनी ढांचा

भारतीय संविधान में रक्षा कार्य विशेष रूप से केंद्र सरकार को सौंपा गया है, जो Article 246 (संघ सूची) के तहत आता है। Article 51A(d) के तहत नागरिकों पर देश की रक्षा की जिम्मेदारी भी तय की गई है। सशस्त्र बलों की अनुशासन और कमान संरचना Army Act 1950 (धारा 3-5), Air Force Act 1950 और Navy Act 1957 में स्पष्ट रूप से निर्धारित है। रक्षा खरीद नीतियों को Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 नियंत्रित करता है, जो पारदर्शिता पर जोर देता है, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के Union of India v. Association for Democratic Reforms (2002) मामले में भी रेखांकित हुआ। आंतरिक सुरक्षा के लिए National Security Act 1980 (धारा 3) में निवारक हिरासत की शक्तियां शामिल हैं, जो रक्षा तत्परता से जुड़ी हैं।

  • Article 246 के तहत रक्षा नीति निर्माण और खरीद केंद्र सरकार के नियंत्रण में है।
  • आर्मी, नेवी और एयर फोर्स एक्ट सेवा आचरण, अनुशासन और कमान संरचना को परिभाषित करते हैं।
  • DPP 2020 में प्रक्रियात्मक सुधार किए गए हैं ताकि खरीद में देरी कम हो और देशी खरीद को बढ़ावा मिले।
  • न्यायिक निगरानी से रक्षा अनुबंधों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।

आर्थिक पहलू: बजट, देशी उत्पादन और रक्षा निर्यात

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए रक्षा बजट ₹5.94 लाख करोड़ (~$79 बिलियन) निर्धारित किया गया है, जो GDP का 1.5% है और पिछले वर्ष से 8.5% अधिक है (रक्षा मंत्रालय, बजट 2023-24)। देशी रक्षा उत्पादन कुल खरीद का 65% है, जो Make in India पहल के तहत प्रगति को दर्शाता है, जिसमें 2015 से 300 से अधिक निजी कंपनियां शामिल हैं (DIPP रिपोर्ट 2023)। पूंजीगत व्यय में 10% की वृद्धि हुई है, जो आधुनिकीकरण और अनुसंधान एवं विकास को प्राथमिकता देता है। रक्षा निर्यात का लक्ष्य 2025 तक $5 बिलियन तक पहुंचाना है, जिसे रक्षा स्टार्टअप्स में 25% की रणनीतिक निवेश वृद्धि से समर्थन मिला है (Invest India रिपोर्ट)।

  • ₹5.94 लाख करोड़ का बजट प्लेटफॉर्म और तकनीक में निरंतर पूंजी निवेश को दर्शाता है।
  • 65% देशी खरीद आयात पर निर्भरता कम करती है और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाती है।
  • 2015 से निजी क्षेत्र की भागीदारी 12% CAGR से बढ़ी है, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाएं विविध हो रही हैं।
  • निर्यात लक्ष्य भारत को वैश्विक रक्षा आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने की योजना दर्शाते हैं।

संस्थागत संरचना और संचालन में एकीकरण

रक्षा मंत्रालय (MoD) नीति बनाता है और खरीद की निगरानी करता है। Integrated Defence Staff (IDS) सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त संचालन को बढ़ावा देता है, जो 2025 तक Integrated Theatre Commands के माध्यम से लागू किया जाएगा (MoD बयान 2023)। Defence Research and Development Organisation (DRDO) देशी अनुसंधान एवं विकास का नेतृत्व करता है, जबकि Armed Forces Special Operations Division (AFSOD) विशेष अभियानों और त्वरित प्रतिक्रिया का प्रबंधन करता है। खुफिया जानकारी Directorate General of Defence Intelligence (DGDI) से प्राप्त होती है। भारतीय नौसेना का ध्यान ब्लू-वाटर क्षमता पर है, सेना भूमि युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर, और वायुसेना वायु प्रभुत्व एवं रणनीतिक निरोध क्षमता पर केंद्रित है।

  • IDS और Integrated Theatre Commands संसाधनों के बेहतर उपयोग और संचालन समन्वय को सुनिश्चित करते हैं।
  • DRDO की नवाचार श्रृंखला में सिंदूर जैसी मिसाइल प्रणाली शामिल है, जो देशी सटीक हमले की क्षमता बढ़ाती है।
  • AFSOD त्वरित तैनाती और विशेष अभियानों की क्षमता मजबूत करता है।
  • DGDI आधुनिक युद्ध के लिए आवश्यक रणनीतिक और सामरिक खुफिया प्रदान करता है।

सिंदूर और ऐतिहासिक संघर्षों से मिली सीख

सिंदूर मिसाइल, जो एक देशी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, सशस्त्र बलों की अत्याधुनिक तकनीक की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक है। इसके विकास में आधुनिक युद्ध में सटीकता, गति और जीवित रहने की क्षमता की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। 1962 के चीन-भारत युद्ध और 1999 के कारगिल संघर्ष जैसे ऐतिहासिक युद्धों ने संयुक्त अभियानों, रियल-टाइम खुफिया और देशी तकनीकी क्षमताओं की अहमियत को रेखांकित किया। ये अनुभव 2047 की रणनीति में Integrated Theatre Commands और आत्मनिर्भरता पर जोर देने के पीछे की प्रेरणा हैं।

  • सिंदूर मिसाइल हाइपरसोनिक गति और सटीक मार्गदर्शन के साथ हमले की क्षमता बढ़ाती है।
  • 1962 के युद्ध ने रसद, खुफिया और संयुक्त संचालन में कमियों को उजागर किया, जिससे सुधार हुए।
  • कारगिल युद्ध ने संयुक्त हवाई-भूमि अभियानों और निगरानी के महत्व को दिखाया।
  • ये सबक देशी अनुसंधान एवं विकास और संचालन समन्वय को तेज करने में मददगार रहे।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन की सैन्य आधुनिकीकरण

पहलूभारतचीन (PLA)
रणनीतिक समयरेखादृष्टि 2047 (स्वतंत्रता की शताब्दी)सैन्य रणनीतिक दिशानिर्देश 2035
संयुक्त थिएटर कमांड2025 तक परिचालन में2016 से स्थापित
देशी खरीदकुल खरीद का 65% (2023)85%+ देशी उपकरण उपयोग
रक्षा निर्यात2025 तक $5 बिलियन का लक्ष्य2015 से 15% वृद्धि, वैश्विक प्रमुख आपूर्तिकर्ता
अनुसंधान एवं नवाचारDRDO नेतृत्व, नौकरशाही में देरीसैन्य-नागरिक नवाचार प्रणाली एकीकृत

भारत के रक्षा आधुनिकीकरण में प्रमुख चुनौतियां

प्रगति के बावजूद, भारत को नौकरशाही जड़ता और रक्षा अनुसंधान में निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो तकनीक अपनाने में धीमापन पैदा करती हैं। उन्नत सेमीकंडक्टर, मिसाइल मार्गदर्शन और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों में आयात निर्भरता बनी हुई है। पूरी तरह से कार्यशील Integrated Theatre Command संरचना का अभाव संयुक्त संचालन की प्रभावशीलता में बाधा डालता है। पारदर्शिता और समय पर खरीद में सुधार के बावजूद चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • नौकरशाही देरी DRDO की नई चुनौतियों पर त्वरित प्रतिक्रिया को कम करती है।
  • निजी क्षेत्र की अनुसंधान भागीदारी वैश्विक स्तर से कम है, जिससे नवाचार सीमित होता है।
  • सेमीकंडक्टर और मार्गदर्शन प्रणालियों में तकनीकी अंतराल बरकरार हैं।
  • Integrated Theatre Commands पूरी तरह से कार्यान्वित नहीं होने से संचालन समन्वय में देरी होती है।

महत्त्व और आगे का रास्ता

  • 2025 तक Integrated Theatre Commands को लागू करना संयुक्त संचालन और संसाधन उपयोग के लिए जरूरी है।
  • निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की रक्षा अनुसंधान में भागीदारी बढ़ाकर नवाचार को तेज किया जा सकता है और आयात निर्भरता कम की जा सकती है।
  • सेमीकंडक्टर और मिसाइल मार्गदर्शन जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के देशी विकास पर ध्यान केंद्रित कर रणनीतिक स्वायत्तता हासिल करनी होगी।
  • खरीद में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने से दक्षता और जनविश्वास बढ़ेगा।
  • सिंदूर और ऐतिहासिक संघर्षों से मिली सीखों का उपयोग नीति और क्षमता विकास में निरंतर किया जाना चाहिए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. DPP 2020 सभी रक्षा खरीद के लिए 100% देशी खरीद को अनिवार्य करता है।
  2. इसने रक्षा अनुबंधों में देरी कम करने के लिए प्रक्रियात्मक सुधार किए हैं।
  3. Union of India v. Association for Democratic Reforms (2002) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने DPP में पारदर्शिता के प्रावधानों को प्रभावित किया है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि DPP 2020 100% देशी खरीद अनिवार्य नहीं करता, बल्कि देशी सामग्री बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि DPP 2020 ने खरीद प्रक्रिया में सुधार किए हैं और सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित पारदर्शिता नियम शामिल किए हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में Integrated Theatre Commands के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ये सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त संचालन बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं।
  2. ये 2018 से पूरी तरह से परिचालन में हैं।
  3. इनकी स्थापना संसाधन उपयोग और संचालन दक्षता में सुधार करेगी।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि Integrated Theatre Commands 2018 से नहीं बल्कि 2025 तक परिचालन में आने की उम्मीद है। कथन 1 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

भारतीय सशस्त्र बलों की 2047 के लिए रणनीतिक दृष्टि पर चर्चा करें, जिसमें ऐतिहासिक संघर्षों और सिंदूर मिसाइल जैसे देशी नवाचारों से मिली सीखों का उल्लेख करते हुए भारत की रक्षा आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को रेखांकित करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (शासन और सुरक्षा), पेपर 3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में कई रक्षा निर्माण इकाइयां हैं और यह सशस्त्र बलों को मानव संसाधन प्रदान करता है; स्थानीय स्टार्टअप राष्ट्रीय रक्षा नवाचार लक्ष्यों से जुड़ सकते हैं।
  • मेन पॉइंटर: राष्ट्रीय रक्षा आधुनिकीकरण को क्षेत्रीय औद्योगिक और मानव संसाधन योगदान के साथ जोड़ते हुए जवाब तैयार करें, जिसमें विकेंद्रीकरण और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर हो।
सिंदूर मिसाइल का भारत की रक्षा रणनीति में क्या महत्व है?

सिंदूर मिसाइल DRDO द्वारा विकसित एक देशी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जो भारत की सटीक हमले की क्षमता को बढ़ाती है। यह आत्मनिर्भरता और मिसाइल तकनीक में प्रगति का प्रतीक है, जो निरोध क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए अहम है।

Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 रक्षा खरीद को कैसे बेहतर बनाता है?

DPP 2020 ने नौकरशाही देरी कम करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, देशी सामग्री पर जोर दिया है और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से प्रभावित पारदर्शिता उपायों को लागू किया है, जिससे खरीद प्रक्रिया तेज और जवाबदेह बनी है।

Integrated Theatre Commands क्या हैं और क्यों महत्वपूर्ण हैं?

Integrated Theatre Commands ऐसे एकीकृत संचालन कमांड हैं जो सेना, नौसेना और वायुसेना की इकाइयों को एक कमांडर के अधीन लाकर संयुक्त संचालन, संचालन दक्षता और संसाधन उपयोग को बढ़ाते हैं। भारत इन्हें 2025 तक लागू करने की योजना बना रहा है।

कौन सा संवैधानिक प्रावधान रक्षा को केंद्र सरकार के अधिकार में रखता है?

Article 246 भारतीय संविधान में रक्षा को संघ सूची में रखता है, जिससे रक्षा मामलों पर केंद्र सरकार का पूर्ण विधायी और कार्यकारी अधिकार होता है।

भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में नौकरशाही देरी, निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी और उन्नत सेमीकंडक्टर तथा मिसाइल मार्गदर्शन प्रणालियों में आयात निर्भरता शामिल हैं, जो नवाचार और आत्मनिर्भरता को धीमा करती हैं।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us