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भारत-वियतनाम संबंधों का उन्नयन: क्या, कब, कौन, कहाँ

सितंबर 2023 में वियतनाम के प्रधानमंत्री की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत और वियतनाम ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी के रूप में आधिकारिक तौर पर बढ़ा दिया। यह कदम 2016 के समग्र साझेदारी ढांचे और 2011 के रक्षा सहयोग समझौते पर आधारित है, जो आर्थिक, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करता है। इस साझेदारी का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करना, व्यापार बढ़ाना और संयुक्त नवाचार को प्रोत्साहित करना है, जो क्षेत्रीय महत्वाकांक्षी देशों के संतुलन के लिए रणनीतिक हितों के मेल को दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: भारत की विदेश नीति, दक्षिण पूर्व एशिया के साथ द्विपक्षीय संबंध, एक्ट ईस्ट नीति
  • GS पेपर 3: रक्षा सहयोग, आर्थिक कूटनीति
  • निबंध: इंडो-पैसिफिक में भारत की रणनीतिक साझेदारियां

भारत-वियतनाम संबंधों का संवैधानिक और कानूनी ढांचा

भारत की विदेश नीति केंद्र सरकार के कार्यकारी अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जिसका संचालन मुख्य रूप से विदेश मंत्रालय (MEA) करता है, जिसे संविधान के आर्टिकल 77 और 351 के तहत अधिकार प्राप्त हैं। द्विपक्षीय संधियों के लिए कोई विशिष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं है, लेकिन MEA इस ढांचे में विदेश नीति का निर्माण और क्रियान्वयन करता है। व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट, 1999 (FEMA) के तहत नियम बनाए गए हैं, जो सीमा पार निवेश और वाणिज्य को नियंत्रित करते हैं। रक्षा सहयोग डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर (DPP) 2020 के अनुसार होता है, जो खरीद और संयुक्त निर्माण की प्रक्रियाएं निर्धारित करता है। द्विपक्षीय कानूनी आधार में 2011 का रक्षा सहयोग समझौता और 2016 का समग्र साझेदारी फ्रेमवर्क शामिल हैं, जो हालिया उन्नयन की नींव हैं।

आर्थिक पहलू: व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय सहयोग

भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023 में लगभग 16.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले पांच वर्षों में करीब 15% की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाता है, जैसा कि भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया है। भारत वियतनाम का 10वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जो बढ़ती आर्थिक पारस्परिक निर्भरता को दर्शाता है। भारतीय प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 2023 तक वियतनाम में 1 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जो मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और विनिर्माण क्षेत्रों में केंद्रित है। साझेदारी का लक्ष्य 2027 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक बढ़ाना है। नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग से व्यापार में अतिरिक्त 5% GDP वृद्धि की उम्मीद है। साथ ही, रक्षा निर्माण में संयुक्त उद्यम अगले पांच वर्षों में 5 करोड़ डॉलर के निवेश को आकर्षित करने की संभावना है, जो रणनीतिक आर्थिक तालमेल को दर्शाता है।

मुख्य संस्थान जो द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाते हैं

  • विदेश मंत्रालय (MEA), भारत: वियतनाम के साथ कूटनीतिक संबंध और नीति निर्माण के लिए जिम्मेदार।
  • डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO): रक्षा तकनीक सहयोग और संयुक्त निर्माण पहलों को सुविधा प्रदान करता है।
  • फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI): द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और व्यावसायिक नेटवर्किंग को बढ़ावा देता है।
  • वियतनाम विदेश मंत्रालय: भारत के साथ कूटनीतिक संबंधों का समन्वय करता है।
  • वियतनाम राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय: रक्षा सहयोग और संयुक्त अभ्यासों की देखरेख करता है।
  • आसियान (ASEAN): इंडो-पैसिफिक रणनीतिक संदर्भ में भारत-वियतनाम संबंधों को प्रभावित करने वाला क्षेत्रीय बहुपक्षीय मंच।

डाटा स्नैपशॉट: भारत-वियतनाम द्विपक्षीय आंकड़े

परिमाणभारत-वियतनाम (2023)स्रोत
द्विपक्षीय व्यापार16.5 अरब डॉलरभारत का वाणिज्य मंत्रालय
वियतनाम के व्यापारिक साझेदारों में भारत की रैंक10वां सबसे बड़ावियतनाम उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय
वियतनाम में भारतीय FDI1 अरब डॉलर से अधिकDPIIT, भारत
रक्षा सहयोग समझौते2011 एवं 2023 में उन्नतMEA आधिकारिक रिलीज़
2027 तक व्यापार लक्ष्य25 अरब डॉलरMEA रणनीतिक रोडमैप
प्रस्तावित रक्षा निर्माण निवेश5 करोड़ डॉलर (5 वर्ष)DRDO रिपोर्ट

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-वियतनाम बनाम भारत-जापान आर्थिक साझेदारी

भारत-जापान समग्र आर्थिक साझेदारी समझौता (CEPA) 2011 में हुआ था, जिसने द्विपक्षीय व्यापार को 2023 में 35 अरब डॉलर से ऊपर पहुंचा दिया, जो भारत-वियतनाम से लगभग दोगुना है। जापान की उन्नत तकनीकी आधार और उच्च-मूल्य विनिर्माण क्षेत्रों ने आर्थिक समेकन और तकनीक हस्तांतरण को तेज किया है। इसके विपरीत, भारत-वियतनाम संबंध तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन अभी भी पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित हैं। यह तुलना दिखाती है कि भारत-वियतनाम सहयोग को उच्च तकनीकी उद्योगों, डिजिटल नवाचार और मूल्य संवर्धित विनिर्माण पर अधिक ध्यान देना होगा ताकि समान आर्थिक गति हासिल की जा सके।

पहलूभारत-वियतनामभारत-जापान
रणनीतिक फ्रेमवर्क वर्ष2016 (समग्र साझेदारी)2011 (CEPA)
2023 द्विपक्षीय व्यापार16.5 अरब डॉलर35 अरब डॉलर
FDI फोकसफार्मा, आईटी, विनिर्माणऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी
तकनीक हस्तांतरणसीमित, प्रारंभिकउन्नत, संस्थागत
रक्षा सहयोग2011 से समझौते, संयुक्त निर्माण उभर रहा हैव्यापक, तकनीक साझा करना शामिल

भारत-वियतनाम सहयोग में मुख्य चुनौतियां

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हरित ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के लिए कोई व्यापक संस्थागत व्यवस्था नहीं है।
  • चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की तुलना में राज्य समर्थित नवाचार संरचना सीमित है, जो वियतनाम में नवाचार केंद्र और बुनियादी ढांचा निवेश के जरिए अधिक प्रभावी है।
  • व्यापार और निवेश अभी भी पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित हैं, उच्च-मूल्य और ज्ञान-गहन उद्योगों में पर्याप्त पैठ नहीं है।
  • दोनों पक्षों के कई एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से संयुक्त परियोजनाओं के तेजी से क्रियान्वयन में बाधा आती है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी भारत की एक्ट ईस्ट नीति को मजबूत करती है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक प्रमुख ASEAN सदस्य के साथ संबंधों को गहरा करती है।
  • संयुक्त रक्षा निर्माण और तकनीक सहयोग बढ़ाने से रणनीतिक स्वायत्तता और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन में सुधार होगा।
  • AI, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में अनुसंधान एवं विकास सहयोग के लिए संस्थागत व्यवस्था स्थापित करना साझेदारी को भविष्य के लिए तैयार करेगा।
  • ASEAN और क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों का लाभ उठाकर रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
  • जन-जन संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर स्थायी द्विपक्षीय संबंधों की नींव रखी जा सकती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-वियतनाम उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह 2016 के समग्र साझेदारी ढांचे पर आधारित होकर 2023 में आधिकारिक रूप से बढ़ाई गई।
  2. 2023 तक भारत वियतनाम का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
  3. साझेदारी में संयुक्त रक्षा निर्माण निवेश पर भी ध्यान दिया गया है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि उन्नयन 2023 में 2016 के फ्रेमवर्क पर हुआ। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत वियतनाम का 10वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, सबसे बड़ा नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि साझेदारी में 5 करोड़ डॉलर के संयुक्त रक्षा निर्माण निवेश शामिल हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के विदेशी संबंधों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के बारे में विचार करें:
  1. आर्टिकल 77 राष्ट्रपति को सीधे विदेशी मामलों का संचालन करने का अधिकार देता है।
  2. आर्टिकल 351 हिंदी के प्रचार को बढ़ावा देता है लेकिन विदेश नीति से संबंधित नहीं है।
  3. विदेश मंत्रालय राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में विदेश नीति का क्रियान्वयन करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि आर्टिकल 77 राष्ट्रपति को कार्यकारी शक्ति देता है, लेकिन विदेशी मामलों का संचालन प्रधानमंत्री नेतृत्व वाली सरकार करती है। कथन 2 सही है; आर्टिकल 351 हिंदी प्रचार से संबंधित है, विदेश नीति से नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि MEA सरकार के अधिकार क्षेत्र में विदेश नीति का क्रियान्वयन करता है।

मेन प्रश्न

2023 में भारत-वियतनाम संबंधों के उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी में बदलने के रणनीतिक और आर्थिक महत्व का विश्लेषण करें। मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करें और उभरते क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध और भारतीय विदेश नीति)
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज संसाधन और औद्योगिक आधार वियतनाम के विनिर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में भारतीय निवेश से लाभान्वित हो सकते हैं, खासकर तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से।
  • मेन प्वाइंट: भारत की विदेश नीति को क्षेत्रीय आर्थिक लाभों से जोड़ते हुए उत्तर तैयार करें, जिसमें झारखंड की द्विपक्षीय औद्योगिक सहयोग में भूमिका पर प्रकाश डाला जाए।
भारत और वियतनाम के बीच उन्नत समग्र रणनीतिक साझेदारी क्या है?

यह 2023 में स्थापित एक उन्नत द्विपक्षीय ढांचा है, जो 2016 की समग्र साझेदारी से आगे बढ़कर आर्थिक, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करता है और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक संबंधों को मजबूत बनाता है।

भारत के संवैधानिक प्रावधानों में कौन-से आर्टिकल विदेश नीति क्रियान्वयन से जुड़े हैं?

आर्टिकल 77 कार्यकारी शक्ति राष्ट्रपति को देता है, जबकि आर्टिकल 351 हिंदी प्रचार से संबंधित है; विदेश नीति प्रधानमंत्री नेतृत्व वाली सरकार के तहत विदेश मंत्रालय द्वारा संचालित होती है।

वियतनाम में भारतीय निवेश के प्रमुख क्षेत्र कौन से हैं?

फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और विनिर्माण वे मुख्य क्षेत्र हैं जहां 2023 तक भारतीय FDI 1 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।

भारत-वियतनाम व्यापार की तुलना भारत-जापान व्यापार से कैसे होती है?

2023 में भारत-वियतनाम का व्यापार 16.5 अरब डॉलर था, जबकि भारत-जापान का व्यापार 35 अरब डॉलर से अधिक था, जो जापान की अधिक उन्नत आर्थिक समेकन और तकनीक हस्तांतरण को दर्शाता है।

भारत-वियतनाम सहयोग में मुख्य अंतराल क्या हैं?

साझेदारी में AI और हरित ऊर्जा में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास और तकनीक हस्तांतरण के लिए संस्थागत व्यवस्था का अभाव है, साथ ही चीन की राज्य समर्थित नवाचार पहलों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

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