दोस्तलिक 2024 अभ्यास का परिचय
साल 2024 की शुरुआत में भारतीय सेना का 250 सदस्यों का दल उज़्बेकिस्तान में आयोजित भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास 'दोस्तलिक' में हिस्सा लेने के लिए रवाना हुआ। यह अभ्यास 14 दिनों तक चलता है और मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों तथा संयुक्त सामरिक गतिविधियों पर केंद्रित है। यह अभ्यास भारत की 2018 में शुरू की गई 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के तहत सेंट्रल एशियाई देशों के साथ रक्षा सहयोग को मजबूत करने की पहल का नवीनतम चरण है।
दोस्तलिक अभ्यास भारत की सेंट्रल एशिया क्षेत्र में रणनीतिक पहुंच का प्रतीक है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग के लिए अहम है। यह नई दिल्ली की उज़्बेकिस्तान के साथ सैन्य तालमेल और खुफिया साझेदारी को गहरा करने की मंशा को दर्शाता है, जो भारत का सेंट्रल एशिया में पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: रक्षा – भारत की रक्षा कूटनीति, संयुक्त सैन्य अभ्यास, आतंकवाद विरोधी सहयोग
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत- सेंट्रल एशिया संबंध, रणनीतिक साझेदारी
- निबंध: भारत की सेंट्रल एशिया में बढ़ती भूमिका और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
संयुक्त सैन्य अभ्यासों पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा
भारत का दोस्तलिक अभ्यास में भाग लेना कई कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों के तहत होता है। Defence of India Act, 1917 (संशोधित) सैन्य अभियानों और अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। संविधान के अनुच्छेद 51 में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश है, जो भारत की रक्षा कूटनीति का आधार है।
रक्षा मंत्रालय (MoD) रक्षा सहयोग ढांचे के तहत निर्देश जारी करता है ताकि संयुक्त अभ्यास राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप हों। Defence Services Regulations (DSR), 1987, हालांकि सीधे अदालतों में मामला नहीं बने, ऐसे अभियानों के लिए परिचालन नियमावली प्रदान करते हैं।
भारत-उज़्बेकिस्तान रक्षा सहयोग के आर्थिक पहलू
वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत का रक्षा बजट लगभग INR 5.94 लाख करोड़ है, जिसमें लगभग 2.5% राशि अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और अभ्यासों के लिए निर्धारित है (संसद बजट 2023-24)। उज़्बेकिस्तान का रक्षा व्यय लगभग USD 1.2 बिलियन है (SIPRI, 2023)।
दोस्तलिक जैसे अभ्यासों के माध्यम से सैन्य संबंधों में वृद्धि रक्षा व्यापार और तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा दे सकती है। भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान में USD 2 बिलियन के आसपास है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023), जबकि भारत के सेंट्रल एशिया को रक्षा निर्यात में 2023 में 18% की वृद्धि हुई है (Defence Exports Promotion Council, 2023)। यह रक्षा सहयोग से आर्थिक लाभ की संभावनाओं को दर्शाता है।
दोस्तलिक अभ्यास में शामिल प्रमुख संस्थान
- भारतीय सेना: मुख्य कार्यान्वयन इकाई, 2024 अभ्यास के लिए 250 कर्मी तैनात।
- रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्माण, समन्वय और निगरानी।
- उज़्बेक रक्षा मंत्रालय: मेजबान और सह-आयोजक।
- इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (IDS): संचालन योजना और बलों के बीच समन्वय।
- रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW): रणनीतिक खुफिया सहायता।
- भारतीय सेना का सेंट्रल कमांड: भारतीय दल का नेतृत्व।
दोस्तलिक अभ्यास और भारत की सेंट्रल एशिया नीति
2015 से भारत ने सेंट्रल एशियाई देशों के साथ 15 से अधिक संयुक्त सैन्य अभ्यास किए हैं, जो क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करते हैं (MoD वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। उज़्बेकिस्तान, भारत का सेंट्रल एशिया में पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार, इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दोस्तलिक अभ्यास आतंकवाद विरोधी और संयुक्त सामरिक अभियानों पर केंद्रित है, जो उग्रवाद और सीमा पार आतंकवाद जैसी साझा सुरक्षा चुनौतियों को संबोधित करता है। यह भारत की व्यापक कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति के अनुरूप है, जो रक्षा सहयोग को कूटनीतिक और आर्थिक पहलों के साथ जोड़ती है।
तुलनात्मक अध्ययन: दोस्तलिक बनाम इंद्रा अभ्यास
| पहलू | भारत-उज़्बेकिस्तान दोस्तलिक | भारत-रूस इंद्रा |
|---|---|---|
| केंद्रित क्षेत्र | आतंकवाद विरोधी, संयुक्त सामरिक संचालन | आतंकवाद विरोधी, नौसेना, वायु सेना तालमेल |
| पैमाना और अवधि | 250 कर्मी, 14 दिन | बड़ा पैमाना, बहु-क्षेत्रीय, वार्षिक अभ्यास |
| रक्षा व्यापार प्रभाव | उभरता हुआ, सेंट्रल एशिया को 18% वृद्धि | स्थापित, 5 वर्षों में 25% द्विपक्षीय व्यापार वृद्धि |
| रणनीतिक महत्व | सेंट्रल एशिया संबंध मजबूत करना, आतंकवाद विरोधी | बहु-आयामी रक्षा कूटनीति, वैश्विक रणनीतिक साझेदारी |
महत्वपूर्ण कमी: सेंट्रल एशिया में स्थायी सैन्य मौजूदगी का अभाव
संयुक्त अभ्यासों में वृद्धि के बावजूद, भारत के पास सेंट्रल एशिया में कोई स्थायी सैन्य अड्डा या लॉजिस्टिक केंद्र नहीं है। इससे चीन की तुलना में, जिसने बेल्ट एंड रोड पहल के तहत सुविधाएं स्थापित की हैं, भारत की त्वरित तैनाती और निरंतर सैन्य उपस्थिति सीमित होती है।
यह कमी भारत की क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को बाधित करती है, जो उसकी सेंट्रल एशिया नीति में एक रणनीतिक चुनौती है।
रणनीतिक महत्व और आगे की राह
- दोस्तलिक अभ्यास भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच तालमेल और आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को बढ़ाता है, जिससे साझा सुरक्षा खतरों का मुकाबला बेहतर होता है।
- यह भारत की रक्षा कूटनीति को मजबूत करता है और कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति के तहत आर्थिक व रणनीतिक जुड़ाव को पूरा करता है।
- भारत को सेंट्रल एशिया में त्वरित तैनाती के लिए लॉजिस्टिक समर्थन समझौते या स्थायी सुविधाएं स्थापित करने पर विचार करना चाहिए।
- सेंट्रल एशियाई देशों को शामिल करते हुए बहुपक्षीय अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को और मजबूत कर सकते हैं।
- इन अभ्यासों से उत्पन्न रक्षा व्यापार के अवसरों का लाभ उठाकर द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को गहरा किया जा सकता है।
- दोस्तलिक एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास है जिसमें भारत, उज़्बेकिस्तान और रूस शामिल हैं।
- यह अभ्यास मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी और संयुक्त सामरिक संचालन पर केंद्रित है।
- भारत के पास उज़्बेकिस्तान में दोस्तलिक अभ्यास के लिए स्थायी सैन्य अड्डा है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- 2023 में भारत के सेंट्रल एशिया को रक्षा निर्यात में 18% वृद्धि हुई।
- 2018 से भारत ने सेंट्रल एशिया में स्थायी लॉजिस्टिक हब स्थापित कर लिया है।
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51 भारत के अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा प्रयासों का मार्गदर्शन करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत-उज़्बेकिस्तान संयुक्त सैन्य अभ्यास दोस्तलिक की रणनीतिक महत्ता पर चर्चा करें, खासकर भारत की सेंट्रल एशिया नीति के संदर्भ में। यह अभ्यास भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी क्षमताओं को कैसे मजबूत करता है? (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और रक्षा
- झारखंड का नजरिया: झारखंड भारतीय सेना में योगदान देता है, जिसमें संयुक्त अभ्यासों में तैनात इकाइयां शामिल हैं; भारत की रक्षा कूटनीति को समझना उम्मीदवारों को रणनीतिक सुरक्षा उत्तर तैयार करने में मदद करता है।
- मुख्य बिंदु: भारत की सेंट्रल एशिया में रणनीतिक पहुंच, आर्थिक संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा पर प्रभाव को उजागर करें, झारखंड की राष्ट्रीय रक्षा में भूमिका से जोड़ते हुए।
दोस्तलिक अभ्यास का मुख्य फोकस क्या है?
दोस्तलिक अभ्यास मुख्य रूप से आतंकवाद विरोधी अभियानों और भारतीय तथा उज़्बेक सैन्य बलों के बीच 14 दिनों तक चलने वाले संयुक्त सामरिक अभ्यासों पर केंद्रित है।
भारत संयुक्त सैन्य अभ्यास जैसे दोस्तलिक किस कानूनी ढांचे के तहत करता है?
भारत संयुक्त सैन्य अभ्यास Defence of India Act, 1917 (संशोधित), रक्षा मंत्रालय के Defence Cooperation Framework के तहत दिशानिर्देश, और Defence Services Regulations, 1987 के तहत करता है।
दोस्तलिक अभ्यास भारत की कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति से कैसे जुड़ा है?
दोस्तलिक अभ्यास कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीति को व्यवहार में लाता है, जिससे उज़्बेकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग, सामरिक तालमेल और आतंकवाद विरोधी सहयोग बढ़ता है।
संयुक्त अभ्यासों के बावजूद भारत के लिए सेंट्रल एशिया में कौन सी रणनीतिक चुनौती बनी हुई है?
भारत के पास सेंट्रल एशिया में कोई स्थायी सैन्य अड्डा या लॉजिस्टिक हब नहीं है, जिससे त्वरित तैनाती और निरंतर सैन्य उपस्थिति सीमित होती है, खासकर चीन के मुकाबले।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
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