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परिचय: भारत-यूके FTA की शुरुआत और रणनीतिक संदर्भ

भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता (FTA) मई 2024 तक लागू होने वाला है, जो द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है। ब्रेक्सिट के बाद बातचीत के जरिए तैयार यह समझौता भारत और यूके के बीच व्यापार और निवेश को गहरा करने का लक्ष्य रखता है। इस समझौते में वस्तुओं पर शुल्क में छूट और सेवाओं के लिए बेहतर बाजार पहुंच शामिल है, खासकर फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, वस्त्र और ऑटोमोबाइल पुर्जों जैसे क्षेत्रों में। यूके, भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और दूसरा सबसे बड़ा FDI स्रोत है, जो इस समझौते की रणनीतिक आर्थिक अहमियत को दर्शाता है।

UPSC से प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत के द्विपक्षीय व्यापार समझौते, ब्रेक्सिट के बाद यूके के साथ संबंध
  • GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – विदेशी व्यापार नीति, FTA का GDP और क्षेत्रीय विकास पर प्रभाव
  • निबंध: भारत के रणनीतिक आर्थिक साझेदारी और व्यापार कूटनीति

भारत-यूके FTA का कानूनी ढांचा

यह FTA भारत के विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 5 और 6 के तहत आता है, जो केंद्र सरकार को व्यापार समझौते करने का अधिकार देती हैं। यह WTO के व्यापार सुविधा समझौता (2013) के अनुरूप है, जो बहुपक्षीय व्यापार नियमों के पालन को सुनिश्चित करता है। यूके में, ट्रेड एक्ट 2021 ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार समझौतों के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 246 (विधायी शक्तियों का वितरण) और अनुच्छेद 253 (अंतरराष्ट्रीय संधियों के लिए संसद की विधायी शक्तियां) इस समझौते के घरेलू क्रियान्वयन के लिए मार्गदर्शक हैं।

  • विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 5 और 6: केंद्र सरकार को व्यापार समझौते करने का अधिकार
  • ट्रेड एक्ट 2021 (यूके): ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार समझौतों के लिए कानूनी आधार
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 और 253: विधायी अधिकार और संधि कार्यान्वयन
  • WTO व्यापार सुविधा समझौता: कस्टम प्रक्रियाओं और व्यापार सुविधा मानक

आर्थिक स्थिति और व्यापार की गतिशीलता

2023 में भारत-यूके द्विपक्षीय व्यापार लगभग $33 बिलियन रहा, जिसमें भारत का निर्यात $18 बिलियन और आयात $15 बिलियन था (वाणिज्य मंत्रालय, भारत, 2024)। यह FTA पांच वर्षों में व्यापार को 42% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, खासकर फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएं, वस्त्र और ऑटोमोबाइल पुर्जे जैसे उच्च संभावित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए। यूके भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और दूसरा सबसे बड़ा FDI स्रोत है, जिसकी कुल निवेश राशि 2023 तक $45 बिलियन है (DPIIT)। समझौता 85% वस्तुओं पर तुरंत शुल्क खत्म करेगा और दस वर्षों में इसे 95% तक बढ़ाएगा, जिससे भारत के GDP में 0.5% और यूके के GDP में 0.3% की वृद्धि हो सकती है (आर्थिक सर्वेक्षण 2024)।

  • द्विपक्षीय व्यापार: $33 बिलियन (2023)
  • भारत का यूके को निर्यात: $18 बिलियन (2023)
  • भारत का यूके से आयात: $15 बिलियन (2023)
  • यूके: भारत का 5वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और 2रा सबसे बड़ा FDI स्रोत ($45 बिलियन कुल)
  • शुल्क कटौती: 85% तुरंत, 95% दस वर्षों में
  • GDP पर प्रभाव: भारत +0.5%, यूके +0.3%

FTA को सुचारू बनाने वाले मुख्य संस्थान

FTA के वार्ता और क्रियान्वयन में कई संस्थान शामिल हैं। भारत में डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) व्यापार नीति बनाता है और कार्यान्वयन देखता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय वार्ता रणनीति का समन्वय करता है। यूके में, डिपार्टमेंट फॉर इंटरनेशनल ट्रेड (DIT) और डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस एंड ट्रेड (DBT) व्यापार प्रचार और FTA प्रवर्तन संभालते हैं। विश्व व्यापार संगठन (WTO) वैश्विक व्यापार नियमों के पालन और विवाद समाधान के लिए बहुपक्षीय ढांचा प्रदान करता है।

  • DGFT (भारत): व्यापार नीति निर्माण और क्रियान्वयन
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय (भारत): व्यापार वार्ता का समन्वय
  • DIT और DBT (यूके): व्यापार समझौते की वार्ता और प्रचार
  • WTO: बहुपक्षीय व्यापार नियम और विवाद समाधान

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-यूके FTA बनाम भारत-EU BTIA वार्ता

ब्रेक्सिट के बाद यूके को मिली व्यापार नीति स्वतंत्रता के कारण भारत-यूके FTA को तेज शुल्क छूट और सेवा क्षेत्र में बेहतर पहुंच मिली है, जबकि भारत-EU के व्यापक व्यापार और निवेश समझौते (BTIA) की बातचीत 2013 से रुकी हुई है। BTIA में नियामक और शुल्क विवादों के कारण प्रगति बाधित रही है। यूके का दक्षिण कोरिया के साथ FTA तीन वर्षों में व्यापार 20% बढ़ाने का उदाहरण है, जो लचीले द्विपक्षीय समझौतों के तहत तेज व्यापार वृद्धि की संभावना दिखाता है।

पहलूभारत-यूके FTAभारत-EU BTIA
वार्ता की स्थितिसमाप्त, मई 2024 में लागू2013 से रुकी हुई
शुल्क छूट85% तुरंत, 95% चरणबद्धविवादों के कारण सीमित प्रगति
सेवा क्षेत्र की पहुंचब्रेक्सिट के बाद यूके की लचीलापन से बेहतरEU के नियामक ढांचे से प्रतिबंधित
व्यापार वृद्धि के प्रमाण5 वर्षों में 42% वृद्धि का अनुमानवार्ता के ठहराव के कारण अनिश्चित
संस्थागत लचीलापनउच्च (यूके की स्वतंत्र व्यापार नीति)कम (EU के अधिप्रादेशीय नियम)

संरचनात्मक चुनौतियां: गैर-शुल्क बाधाएं और नियामक भिन्नता

भारत-यूके FTA की एक बड़ी कमी गैर-शुल्क बाधाओं (NTBs) पर पर्याप्त ध्यान न देना है, जैसे कि उत्पाद मानकों, प्रमाणन प्रक्रियाओं और नियामक व्यवस्थाओं में भिन्नताएं। ये NTBs भारतीय निर्यात को विकसित बाजारों में, खासकर फार्मास्यूटिकल्स और वस्त्र क्षेत्र में, सीमित करती रही हैं। यदि नियामक सहयोग और विवाद समाधान के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था नहीं बनी तो शुल्क में छूट का लाभ सीमित रह सकता है।

  • NTBs में उत्पाद मानक, परीक्षण और प्रमाणन की भिन्नताएं शामिल हैं
  • भारतीय निर्यातकों को अनुपालन संबंधी चुनौतियां, जिससे लागत बढ़ती है
  • FTA में NTBs के समन्वय के लिए स्पष्ट संस्थागत ढांचा नहीं
  • NTBs के कारण व्यापार विवाद की संभावना

महत्व और आगे का रास्ता

भारत-यूके FTA एक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी है, जो द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को काफी बढ़ा सकती है, जिससे भारत की आर्थिक वृद्धि और यूके के ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार विविधीकरण को बल मिलेगा। अधिकतम लाभ के लिए दोनों देशों को NTBs को दूर करने के लिए बेहतर नियामक सहयोग और विवाद समाधान तंत्र विकसित करना होगा। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र की पहुंच बढ़ाना और MSME की भागीदारी को बढ़ावा देना समावेशी विकास के लिए जरूरी होगा। शुल्क चरणबद्ध समाप्ति और व्यापार प्रभाव की निरंतर निगरानी भविष्य की वार्ता और नीतिगत सुधारों के लिए मार्गदर्शक होगी।

  • NTBs और नियामक भिन्नताओं को दूर करने के लिए संस्थागत तंत्र मजबूत करें
  • सेवा और डिजिटल व्यापार के लिए बाजार पहुंच बढ़ाएं
  • MSME को द्विपक्षीय व्यापार में शामिल करने को प्रोत्साहित करें
  • व्यापार प्रवाह और GDP प्रभाव की निगरानी करें ताकि नीति में सुधार हो सके
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. FTA भारत के विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के अंतर्गत संचालित है।
  2. यूके का ट्रेड एक्ट 2021 ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार समझौतों के लिए कानूनी अधिकार नहीं देता।
  3. FTA तुरंत 95% वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि विदेशी व्यापार अधिनियम की धारा 5 और 6 केंद्र सरकार को व्यापार समझौते करने का अधिकार देती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि यूके ट्रेड एक्ट 2021 ब्रेक्सिट के बाद के व्यापार समझौतों के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि FTA तुरंत 85% वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करता है, 95% नहीं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-यूके व्यापार संबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यूके भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
  2. भारत-यूके FTA से पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में 40% से अधिक वृद्धि होने की उम्मीद है।
  3. भारत-यूके FTA में गैर-शुल्क बाधाओं को पूरी तरह संबोधित किया गया है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 2
  • bकेवल 1 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 गलत है; यूके भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। कथन 2 सही है; FTA से पांच वर्षों में 42% तक व्यापार वृद्धि का लक्ष्य है। कथन 3 गलत है क्योंकि FTA में गैर-शुल्क बाधाओं को पूरी तरह संबोधित नहीं किया गया है।

मुख्य प्रश्न

2024 में लागू होने वाले भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के आर्थिक और कानूनी प्रभावों पर चर्चा करें। शुल्क छूट और गैर-शुल्क बाधाओं पर विशेष ध्यान देते हुए संभावित लाभ और चुनौतियों का विश्लेषण करें।

झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: GS पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध), GS पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और व्यापार)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज और विनिर्माण क्षेत्र, खासकर इस्पात और ऑटोमोबाइल पुर्जों में, यूके बाजार पहुंच से लाभान्वित हो सकते हैं।
  • मुख्य बिंदु: FTA के तहत झारखंड के निर्यात संभावनाओं को उजागर करते हुए राज्य स्तर पर व्यापार सुविधा बढ़ाने की जरूरत पर जोर दें।
भारत को भारत-यूके FTA में शामिल होने का कानूनी आधार क्या है?

भारत का विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992, विशेष रूप से धारा 5 और 6, केंद्र सरकार को भारत-यूके FTA जैसे व्यापार समझौते करने का अधिकार देता है।

भारत-यूके FTA से शुल्क दरों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

यह समझौता 85% वस्तुओं पर तुरंत शुल्क समाप्त करता है और 10 वर्षों के भीतर 95% वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करने की योजना बनाता है, जिससे व्यापार प्रवाह में वृद्धि होगी।

भारत-यूके FTA के प्रमुख आर्थिक क्षेत्र कौन से हैं?

प्रमुख क्षेत्र हैं फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, वस्त्र और ऑटोमोबाइल पुर्जे, जो द्विपक्षीय व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

भारत-यूके FTA में गैर-शुल्क बाधाओं को क्यों संबोधित करना जरूरी है?

गैर-शुल्क बाधाएं जैसे अलग-अलग मानक और प्रमाणन प्रक्रियाएं भारतीय निर्यात को रोकती हैं, इसलिए प्रभावी व्यापार उदारीकरण के लिए नियामक सहयोग जरूरी है।

भारत-यूके FTA की तुलना भारत-EU BTIA से कैसे की जा सकती है?

भारत-यूके FTA को ब्रेक्सिट के बाद यूके की स्वतंत्र व्यापार नीति का लाभ मिला है, जिससे शुल्क छूट और सेवा क्षेत्र की पहुंच तेज हुई है, जबकि भारत-EU BTIA की वार्ता रुकी हुई है।

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