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भारत और श्रीलंका ने कोलंबो में द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास किया

अप्रैल 2024 में भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना ने कोलंबो में एक द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास आयोजित किया, जिसमें दोनों नौसेनाओं के 100 से अधिक कर्मी शामिल थे (The Hindu, अप्रैल 2024)। इस अभ्यास ने दोनों देशों के बीच समुद्री संबंधों को पुनः मजबूत किया और हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में नौसेनाओं की संयुक्त संचालन क्षमता, अंतरसंचालन और समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा दिया। यह कार्यक्रम भारत की श्रीलंका के साथ रणनीतिक संपर्क का हिस्सा है, जो IOR का एक महत्वपूर्ण तटीय राज्य है, और समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) की सुरक्षा तथा गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों से निपटने के साझा हितों को दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत की समुद्री कूटनीति, द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे।
  • GS पेपर 3: सुरक्षा – समुद्री सुरक्षा, नौसेना आधुनिकीकरण और हिंद महासागर में समुद्री डकैती विरोधी अभियान।
  • निबंध: हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री साझेदारियों का रणनीतिक महत्व।

भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग के कानूनी ढांचे

यह द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास भारत के Maritime Zones Act, 1976 के अनुरूप है, जो भारत के Exclusive Economic Zone (EEZ) और महाद्वीपीय शेल्फ पर अधिकारों को परिभाषित करता है और इन क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा लागू करने का कानूनी आधार देता है। भारत और श्रीलंका दोनों संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS), 1982 के पक्षकार हैं, जो समुद्री अधिकार क्षेत्र, नौवहन अधिकार और समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने जैसे खतरों से लड़ने के लिए सहयोग का अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा प्रदान करता है। UNCLOS अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और EEZ में संयुक्त अभियानों को संभव बनाता है, जो ऐसे द्विपक्षीय अभ्यासों के कानूनी आधार को मजबूत करता है।

  • Maritime Zones Act, 1976: भारत के EEZ और महाद्वीपीय शेल्फ अधिकारों को नियंत्रित करता है।
  • UNCLOS, 1982: दोनों देशों द्वारा अनुमोदित; समुद्री सहयोग और सुरक्षा अभियानों को सक्षम बनाता है।
  • अभ्यास तस्करी, समुद्री डकैती और अवैध मछली पकड़ने के खिलाफ कानून प्रवर्तन का समर्थन करता है।

समुद्री सुरक्षा सहयोग में आर्थिक हित

भारत का नौसेना आधुनिकीकरण बजट 2023-24 में लगभग INR 13,000 करोड़ (~USD 1.6 बिलियन) था, जो ब्लू वाटर क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा पर बढ़ते ध्यान को दर्शाता है (संघीय बजट 2023-24, रक्षा मंत्रालय)। श्रीलंका की समुद्री अर्थव्यवस्था GDP का लगभग 7% योगदान देती है, जो मछली पकड़ने, बंदरगाहों और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा की आर्थिक आवश्यकता को उजागर करता है (श्रीलंका मत्स्य और जलीय संसाधन विकास मंत्रालय, 2023)। भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय व्यापार का 60% से अधिक भाग समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है, जिससे निरंतर व्यापार के लिए समुद्री सुरक्षा की अहमियत बढ़ जाती है (विदेशी व्यापार महानिदेशालय, भारत, 2023)।

  • भारत का नौसेना बजट 2023-24 में 8.5% बढ़ा, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और क्षमताओं को प्राथमिकता दी गई।
  • श्रीलंका का EEZ लगभग 517,000 वर्ग किलोमीटर है, जो मछली पकड़ने और संसाधन सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है (श्रीलंका नौसेना वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री मार्ग द्विपक्षीय व्यापार का 60% से अधिक संभालते हैं।

भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग में संस्थागत भूमिका

भारतीय नौसेना (IN) द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास और समुद्री सुरक्षा गश्तों का संचालन करती है। श्रीलंका नौसेना (SLN) संयुक्त प्रशिक्षण और संचालन में साझेदार है, जिससे पारस्परिक क्षमताओं में वृद्धि होती है। भारत का रक्षा मंत्रालय (MoD) रक्षा सहयोग ढांचे और बजट आवंटन की देखरेख करता है, जबकि श्रीलंका का विदेश मंत्रालय कूटनीतिक संपर्क को सुविधाजनक बनाता है। भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) प्रशिक्षण और शोध के माध्यम से क्षमता निर्माण में मदद करता है। क्षेत्रीय स्तर पर, Indian Ocean Rim Association (IORA) समुद्री सहयोग के लिए बहुपक्षीय मंच प्रदान करता है, जो द्विपक्षीय प्रयासों को पूरा करता है।

  • भारतीय नौसेना: अभ्यास, समुद्री गश्त और क्षमता निर्माण का संचालन।
  • श्रीलंका नौसेना: संयुक्त संचालन और प्रशिक्षण सहयोगी।
  • MoD भारत और विदेश मंत्रालय श्रीलंका: नीति और कूटनीतिक समन्वय।
  • IMU: समुद्री सुरक्षा शिक्षा और शोध।
  • IORA: क्षेत्रीय समुद्री सहयोग मंच।

अभ्यास के परिचालन और सुरक्षा परिणाम

इस डाइविंग अभ्यास ने खोज और बचाव, माइन काउंटरमेजर और जलमग्न निगरानी जैसे जलमग्न संचालन में अंतरसंचालन क्षमता बढ़ाई। यह समुद्री क्षेत्र की सामूहिक जागरूकता और समुद्री डकैती, तस्करी और अवैध मछली पकड़ने जैसे खतरों के खिलाफ त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं में योगदान देता है। 2023 में हिंद महासागर में समुद्री डकैती की घटनाओं में 15% कमी आई, जिसका एक कारण भारत और श्रीलंका सहित IOR देशों के बीच बेहतर नौसैनिक सहयोग है (International Maritime Bureau, 2024)। भारत हर साल IOR देशों के साथ 20 से अधिक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास करता है, जो क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता दर्शाता है (भारतीय नौसेना वार्षिक रिपोर्ट 2023)।

  • अभ्यास में 100 से अधिक कर्मी शामिल थे, जो डाइविंग और जलमग्न संचालन की अंतरसंचालन क्षमता पर केंद्रित था।
  • 2023 में हिंद महासागर में समुद्री डकैती में 15% कमी नौसैनिक सहयोग के कारण।
  • भारत-श्रीलंका के अभ्यास भारत की व्यापक IOR समुद्री सुरक्षा रणनीति का हिस्सा हैं।

तुलनात्मक नजरिया: भारत-श्रीलंका बनाम अमेरिका-जापान समुद्री सहयोग

पहलू भारत-श्रीलंका सहयोग अमेरिका-जापान सहयोग
अभ्यासों की आवृत्ति वार्षिक द्विपक्षीय अभ्यास, डाइविंग और गश्त सहित सालाना कई उन्नत अभ्यास, जैसे 'Keen Sword'
तकनीकी समाकलन मूल अंतरसंचालन, सीमित एकीकृत कमांड सिस्टम उच्च विकसित एकीकृत कमांड और नियंत्रण प्रणाली
प्रतिक्रिया समय सुधार क्रमिक सुधार, कोई औपचारिक त्वरित प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल नहीं समुद्री संकटों में 30% तेज संयुक्त प्रतिक्रिया समय (US DoD, 2023)
औपचारिक समझौते गुप्त सूचना साझा करने और संयुक्त गश्त के लिए कोई औपचारिक द्विपक्षीय सुरक्षा समझौता नहीं व्यापक सुरक्षा संधियाँ और खुफिया साझा करने के ढांचे

महत्वपूर्ण कमी: औपचारिक समुद्री सुरक्षा समझौते का अभाव

बार-बार अभ्यास होने के बावजूद, भारत और श्रीलंका के बीच कोई औपचारिक द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा समझौता नहीं है, जो खुफिया साझा करने, संयुक्त गश्त और तस्करी तथा अवैध मछली पकड़ने जैसे गैर-पारंपरिक खतरों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया के नियम स्पष्ट करता हो। यह कमी उभरते समुद्री सुरक्षा खतरों का त्वरित और प्रभावी मुकाबला करने में सहयोग की दक्षता को सीमित करती है। ऐसे समझौतों को औपचारिक रूप देने से विश्वास मजबूत होगा, परिचालन समन्वय बेहतर होगा और असममित खतरों के खिलाफ प्रभावी रोकथाम सुनिश्चित होगी।

  • कोई औपचारिक खुफिया साझा करने या संयुक्त गश्त प्रोटोकॉल नहीं।
  • गैर-पारंपरिक खतरों के प्रति त्वरित समन्वित प्रतिक्रिया सीमित।
  • औपचारिक समझौता परिचालन तालमेल और समुद्री शासन को मजबूत करेगा।

महत्व और आगे का रास्ता

  • द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास भारत-श्रीलंका रणनीतिक साझेदारी और IOR में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करते हैं।
  • संयुक्त प्रशिक्षण के जरिए अंतरसंचालन बढ़ाने से समुद्री डकैती, तस्करी और समुद्री आपदाओं पर सामूहिक प्रतिक्रिया बेहतर होती है।
  • स्पष्ट खुफिया साझा करने वाले औपचारिक समुद्री सुरक्षा समझौतों का होना आवश्यक है ताकि उभरते गैर-पारंपरिक खतरों का प्रभावी मुकाबला हो सके।
  • प्रौद्योगिकी और संयुक्त कमांड सिस्टम में निवेश से प्रतिक्रिया समय तेज और परिचालन एकीकरण बढ़ेगा।
  • IORA जैसे बहुपक्षीय ढांचे का उपयोग द्विपक्षीय प्रयासों को पूरा करने और क्षेत्रीय समुद्री शासन को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून सम्मेलन (UNCLOS), 1982 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. UNCLOS तटीय राज्य के लिए 200 समुद्री मील तक के Exclusive Economic Zones (EEZ) स्थापित करने का कानूनी आधार प्रदान करता है।
  2. UNCLOS किसी भी देश को बिना पूर्व अनुमति के दूसरे देश के EEZ में सैन्य अभ्यास करने की अनुमति देता है।
  3. भारत और श्रीलंका दोनों UNCLOS के पक्षकार हैं।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि UNCLOS EEZ को 200 समुद्री मील तक परिभाषित करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि UNCLOS के तहत दूसरे राज्य के EEZ में सैन्य अभ्यास के लिए अनुमति आवश्यक है। कथन 3 सही है; भारत और श्रीलंका दोनों ने UNCLOS को अनुमोदित किया है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत और श्रीलंका के बीच खुफिया साझा करने वाले औपचारिक द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा समझौते मौजूद हैं।
  2. कोलंबो में द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास में दोनों नौसेनाओं के 100 से अधिक कर्मी शामिल थे।
  3. भारत हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ सालाना 20 से अधिक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास करता है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि कोई औपचारिक समुद्री सुरक्षा समझौता नहीं है। कथन 2 और 3 आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग के रणनीतिक महत्व की जांच करें, विशेषकर क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने में द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास की भूमिका पर प्रकाश डालें। मौजूदा कमियों की चर्चा करें और इस साझेदारी को मजबूत करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा अध्ययन
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड का रणनीतिक स्थान खनिज और औद्योगिक केंद्र के रूप में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर निर्भर है, जो अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की अर्थव्यवस्था को IOR में समुद्री सुरक्षा से जोड़ता है।
  • मुख्य बिंदु: भारत के आर्थिक हितों के लिए समुद्री सुरक्षा का रणनीतिक महत्व और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए उत्तर तैयार करें।
भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या है?

मुख्य उद्देश्य भारतीय और श्रीलंका नौसेनाओं के बीच जलमग्न संचालन जैसे डाइविंग, खोज और बचाव, और माइन काउंटरमेजर में अंतरसंचालन बढ़ाना है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग मजबूत हो।

Maritime Zones Act, 1976 भारत की समुद्री सुरक्षा से कैसे जुड़ा है?

Maritime Zones Act, 1976 भारत के EEZ और महाद्वीपीय शेल्फ पर अधिकार निर्धारित करता है, जो समुद्री सुरक्षा, संसाधन प्रबंधन और इन क्षेत्रों में संचालन के लिए कानूनी आधार प्रदान करता है।

हिंद महासागर क्षेत्र भारत और श्रीलंका के लिए क्यों रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है?

IOR समुद्री संचार मार्गों के कारण महत्वपूर्ण है, जो भारत-श्रीलंका व्यापार का 60% से अधिक संभालते हैं, साथ ही समृद्ध समुद्री संसाधन और वैश्विक ऊर्जा व वस्तुओं के आवागमन के लिए मार्ग होने के कारण समुद्री सुरक्षा साझा प्राथमिकता है।

वर्तमान भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग की सीमाएं क्या हैं?

वर्तमान सीमाओं में स्पष्ट खुफिया साझा करने और संयुक्त गश्त के नियमों वाले औपचारिक द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा समझौते का अभाव शामिल है, जो उभरते गैर-पारंपरिक समुद्री खतरों के प्रति त्वरित समन्वित प्रतिक्रिया को सीमित करता है।

नौसेना सहयोग के कारण हिंद महासागर में समुद्री डकैती में हाल ही में क्या बदलाव आया है?

2023 में हिंद महासागर में समुद्री डकैती की घटनाओं में 15% की कमी आई है, जिसका श्रेय भारत और श्रीलंका समेत IOR देशों के बीच बढ़े हुए नौसैनिक सहयोग और संयुक्त गश्त को जाता है।

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