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भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक भागीदारी का परिचय

भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक भागीदारी की रूपरेखा 2010 में Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) पर हस्ताक्षर के साथ तय हुई। यह द्विपक्षीय समझौता नई दिल्ली और सियोल के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को समेटे हुए है। 2026 तक, दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 26.8 बिलियन डॉलर का है, जिसमें दक्षिण कोरिया के पक्ष में बड़ा व्यापार असंतुलन नजर आता है। अब यह भागीदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती चुनौतियों और अवसरों को देखते हुए अपग्रेड की तैयारी में है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS-II: अंतरराष्ट्रीय संबंध – द्विपक्षीय समझौते, व्यापार भागीदारी, हिंद-प्रशांत भू-राजनीति
  • GS-III: अर्थव्यवस्था – व्यापार समझौतों का घरेलू उद्योगों पर प्रभाव, तकनीकी सहयोग
  • निबंध: भारत की रणनीतिक भागीदारी और आर्थिक कूटनीति एशिया में

भारत-दक्षिण कोरिया CEPA के कानूनी और संवैधानिक आधार

CEPA एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, लेकिन इसका घरेलू क्रियान्वयन भारत के कानूनों जैसे Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 के तहत होता है, जो व्यापार नीति और निर्यात-आयात नियम बनाता है। Information Technology Act, 2000 डिजिटल सहयोग के पहलुओं को संभालता है, खासकर India-Korea Digital Bridge पहल के तहत। विवाद समाधान के लिए Arbitration and Conciliation Act, 1996 लागू होता है। भारतीय संविधान के Article 253 के तहत संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए कानून बनाने का अधिकार है।

  • CEPA एक Free Trade Agreement नहीं है; यह वस्तुओं, सेवाओं और निवेश को बढ़ावा देता है।
  • विवाद समाधान प्रावधान समझौते के नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं, जिससे व्यापारिक झगड़े कम होते हैं।
  • डिजिटल सहयोग भारत के IT Act के अनुरूप है, जो डेटा और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा करता है।

आर्थिक पहलू: व्यापार असंतुलन और क्षेत्रीय सहयोग

भारत दक्षिण कोरिया से 21 बिलियन डॉलर का आयात करता है, जबकि दक्षिण कोरिया को 5.8 बिलियन डॉलर का निर्यात करता है, जिससे 15 बिलियन डॉलर से अधिक का व्यापार घाटा बनता है (वाणिज्य मंत्रालय, 2026)। CEPA ने 2010 के बाद पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 50% से अधिक बढ़ाया। अपग्रेड में सेमीकंडक्टर्स, शिपबिल्डिंग, स्टील और SMEs जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनका वैश्विक बाजार क्षमता 50 बिलियन डॉलर से ऊपर है।

  • India-Korea Digital Bridge AI और IT सेक्टर पर केंद्रित है, जिसमें 20% CAGR की उम्मीद है (NASSCOM, 2025)।
  • सतत विकास और बंदरगाह क्षेत्रों में MoUs से अवसंरचना और पर्यावरण सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
  • दक्षिण कोरिया भारत का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और पूर्वी एशिया से चौथा सबसे बड़ा निवेशक है (DPIIT, 2025)।

भागीदारी को मजबूत करने वाले संस्थागत ढांचे

इस साझेदारी के व्यापक एजेंडे का समन्वय कई संस्थान करते हैं:

  • भारत का वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय: व्यापार वार्ता और CEPA के क्रियान्वयन का नेतृत्व करता है।
  • कोरिया ट्रेड-इन्वेस्टमेंट प्रमोशन एजेंसी (KOTRA): भारत में कोरियाई निवेश और व्यापार को बढ़ावा देती है।
  • भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DeitY): डिजिटल सहयोग परियोजनाओं का समन्वय करता है।
  • भारत का विदेश मंत्रालय (MEA): कूटनीतिक और रणनीतिक पहलुओं की देखरेख करता है।
  • कोरिया का वाणिज्य, उद्योग और ऊर्जा मंत्रालय (MOTIE): व्यापार और औद्योगिक सहयोग का समकक्ष संस्थान है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत-दक्षिण कोरिया CEPA बनाम भारत-जापान CEPA

2011 में हस्ताक्षरित भारत-जापान CEPA में व्यापार संतुलन बेहतर है, जहां निर्यात और आयात लगभग 17 बिलियन डॉलर के बराबर हैं (वाणिज्य मंत्रालय, 2026)। यह संतुलन जापान के तकनीक हस्तांतरण और भारतीय विनिर्माण में निवेश के कारण है, जो भारत-दक्षिण कोरिया के निरंतर व्यापार असंतुलन से अलग है।

पहलूभारत-दक्षिण कोरिया CEPAभारत-जापान CEPA
हस्ताक्षर वर्ष20102011
द्विपक्षीय व्यापार मात्रा (2026)26.8 बिलियन डॉलर34 बिलियन डॉलर
व्यापार संतुलनभारत आयात 21B; निर्यात 5.8B (असंतुलित)निर्यात और आयात लगभग 17B प्रत्येक (संतुलित)
मुख्य क्षेत्रसेमीकंडक्टर्स, शिपबिल्डिंग, स्टील, SMEsऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण
तकनीक हस्तांतरणसीमित; निवेश प्रवाह पर जोरमहत्वपूर्ण; विनिर्माण निवेश पर केंद्रित

रणनीतिक और भू-राजनीतिक प्रभाव

दक्षिण कोरिया की हिंद-प्रशांत भागीदारी भारत की Act East Policy और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के साथ मेल खाती है। यह साझेदारी उभरती तकनीकों और सतत विकास में सहयोग बढ़ाकर क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देती है। India-Korea Financial Forum और Economic Security Dialogue रणनीतिक आर्थिक सहयोग को संस्थागत रूप देते हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और तकनीकी सुरक्षा जैसे साझा मुद्दों को दर्शाते हैं।

  • दक्षिण कोरिया की Indo-Pacific पहलों में भागीदारी भारत की रणनीतिक पहुंच को पूरा करती है।
  • सेमीकंडक्टर्स में सहयोग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को दूर करता है।
  • पर्यावरण और ऊर्जा में संयुक्त फोकस सतत विकास के लक्ष्यों का समर्थन करता है।

मुख्य चुनौतियां और अंतर

व्यापार असंतुलन इस बात का संकेत है कि भारत के निर्यात में उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों की विविधता सीमित है, जो दक्षिण कोरिया के प्रभुत्व वाले क्षेत्र हैं। भारतीय निर्यात कम मूल्य वाले उत्पादों तक सीमित हैं, जिससे वार्ता में दबाव कम होता है। द्विपक्षीय वार्ताएं अक्सर कोरियाई निवेश और बाजार पहुंच को प्राथमिकता देती हैं, जबकि तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने पर कम ध्यान दिया जाता है।

  • भारत की सेमीकंडक्टर उद्योग दक्षिण कोरिया की वैश्विक स्थिति के मुकाबले अभी शुरुआती है।
  • कोरियाई आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की सीमित भागीदारी व्यापार वार्ता में ताकत कम करती है।
  • संरचनात्मक घाटे को दूर करने के लिए औद्योगिक सहयोग और तकनीक हस्तांतरण बढ़ाने की जरूरत है।

आगे का रास्ता: भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी को मजबूत बनाना

  • CEPA को अपग्रेड कर उच्च तकनीक क्षेत्रों में भारतीय निर्यात के लिए मजबूत प्रावधान शामिल करें।
  • सेमीकंडक्टर्स, AI और हरित तकनीकों में संयुक्त अनुसंधान और विकास परियोजनाएं बढ़ाएं।
  • औद्योगिक सहयोग समिति जैसे संस्थागत तंत्रों का उपयोग कर विनिर्माण संबंधों को गहरा करें।
  • SME सहयोग को प्रोत्साहित कर निर्यात विविधीकरण और मूल्य संवर्धन बढ़ाएं।
  • रणनीतिक संवादों को मजबूत कर हिंद-प्रशांत में आर्थिक और सुरक्षा हितों को संतुलित करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-दक्षिण कोरिया CEPA के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. CEPA एक Free Trade Agreement है जो भारत और दक्षिण कोरिया के बीच सभी वस्तुओं पर शुल्क समाप्त करता है।
  2. CEPA के तहत विवाद समाधान Arbitration and Conciliation Act, 1996 द्वारा नियंत्रित होता है।
  3. भारतीय संविधान का Article 253 संसद को CEPA जैसे अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि CEPA एक Free Trade Agreement नहीं है; यह वस्तुओं, सेवाओं और निवेश को बढ़ावा देता है लेकिन सभी वस्तुओं पर शुल्क समाप्त नहीं करता। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि Arbitration and Conciliation Act, 1996 विवाद समाधान के लिए लागू होता है और Article 253 संसद को अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने का अधिकार देता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-दक्षिण कोरिया व्यापार संबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत के पास सेमीकंडक्टर्स के निर्यात के कारण दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार अधिशेष है।
  2. India-Korea Digital Bridge AI, सेमीकंडक्टर्स और IT क्षेत्रों पर केंद्रित है।
  3. दक्षिण कोरिया भारत का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और पूर्वी एशिया से चौथा सबसे बड़ा निवेशक है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत का दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार घाटा है, अधिशेष नहीं। कथन 2 और 3 NASSCOM और DPIIT के आंकड़ों के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति के संदर्भ में भारत-दक्षिण कोरिया विशेष रणनीतिक भागीदारी के महत्व की जांच करें। व्यापार असंतुलन से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा करें और आर्थिक तथा तकनीकी सहयोग बढ़ाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर II – अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक विकास
  • झारखंड दृष्टिकोण: CEPA अपग्रेड के तहत झारखंड के स्टील और SME क्षेत्रों में दक्षिण कोरियाई निवेश की संभावना।
  • मुख्य बिंदु: कैसे झारखंड के खनिज संसाधन और औद्योगिक आधार कोरियाई तकनीक और निवेश आकर्षित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकते हैं।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) क्या है?

CEPA 2010 में हस्ताक्षरित द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौता है, जिसका उद्देश्य भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है, जिसमें शुल्क कम करना, निवेश को आसान बनाना और सेवा व्यापार को प्रोत्साहित करना शामिल है।

भारत के दक्षिण कोरिया के साथ व्यापार असंतुलन का कारण क्या है?

भारत दक्षिण कोरिया से उच्च मूल्य वाली तकनीकी वस्तुएं जैसे सेमीकंडक्टर्स और ऑटोमोबाइल आयात करता है, जबकि भारत के निर्यात कम मूल्य वाले उत्पादों तक सीमित हैं, जिससे व्यापार घाटा होता है।

भारत-दक्षिण कोरिया CEPA के क्रियान्वयन के लिए कौन से भारतीय कानून लागू होते हैं?

Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 व्यापार नीति के लिए, Information Technology Act, 2000 डिजिटल सहयोग के लिए, और Arbitration and Conciliation Act, 1996 विवाद समाधान के लिए लागू होते हैं।

India-Korea Digital Bridge पहल में कौन से क्षेत्र प्राथमिकता में हैं?

यह पहल Artificial Intelligence (AI), सेमीकंडक्टर्स और सूचना प्रौद्योगिकी पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य इन तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में नवाचार और संयुक्त विकास को बढ़ावा देना है।

भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी हिंद-प्रशांत भू-राजनीति में कैसे योगदान देती है?

आर्थिक सहयोग और रणनीतिक संवादों को बढ़ाकर यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और साझा सुरक्षा हितों का समर्थन करती है, जो भारत की Act East Policy के अनुरूप है।

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