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परिचय: पैक्स सिलिका और भारत का रणनीतिक कदम

पैक्स सिलिका दिसंबर 2025 में अमेरिका के नेतृत्व में शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकों के लिए जरूरी ग्लोबल सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित और नवाचार से लैस करना है। इसकी स्थापना में ऑस्ट्रेलिया, इज़राइल, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूके, नीदरलैंड्स और यूएई जैसे देश शामिल हैं, जो मिलकर विश्व की 70% से अधिक सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता नियंत्रित करते हैं। भारत ने फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट के दौरान इस पहल में शामिल होकर सप्लाई चेन की कमजोरियों को कम करने और 2027 तक 200 अरब डॉलर से अधिक के डिजिटल अर्थव्यवस्था लक्ष्य को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा। (NASSCOM)

इस पहल में शामिल होने से उन्नत तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र और रणनीतिक साझेदारी का फायदा मिलेगा, लेकिन साथ ही डिजिटल उपनिवेशवाद के खतरे भी हैं। इसमें भारत की पश्चिमी नियंत्रित डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा गवर्नेंस ढांचे पर निर्भरता बढ़ सकती है, जिससे उसकी डिजिटल संप्रभुता और औद्योगिक स्वायत्तता सीमित हो सकती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी — डिजिटल संप्रभुता, सेमीकंडक्टर नीतियां, AI सप्लाई चेन
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध — भारत-अमेरिका तकनीकी गठबंधन, बहुपक्षीय तकनीकी शासन
  • निबंध: तकनीक और विकास, डिजिटल उपनिवेशवाद, डेटा गवर्नेंस

पैक्स सिलिका: उद्देश्य और रणनीतिक रूपरेखा

इस पहल का मुख्य लक्ष्य एक मजबूत, नवाचार-आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन बनाना है, जिसमें आवश्यक खनिज, सेमीकंडक्टर निर्माण और AI के लिए बुनियादी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह एकल स्रोतों पर निर्भरता कम करने और साझेदार देशों को तकनीकी मानकों तथा सप्लाई चेन सुरक्षा पर एकजुट करने का प्रयास करता है।

  • रणनीतिक स्तंभ: कच्चे माल, चिप निर्माण, सॉफ्टवेयर और AI प्लेटफॉर्म पर ध्यान।
  • सब्सिडी और निवेश का समन्वय: अमेरिका का CHIPS Act (2022) घरेलू चिप निर्माण के लिए 52 अरब डॉलर आवंटित करता है; भारत की PLI योजना सेमीकंडक्टर क्षमता विस्तार के लिए 76,000 करोड़ रुपये (~10 अरब डॉलर) प्रदान करती है।
  • शासन समन्वय: अमेरिका के वाणिज्य विभाग के नेतृत्व में पैक्स सिलिका संचालित; भारत में नीति आयोग और MeitY नीति और नियामक ढांचे का समन्वय करते हैं।

डिजिटल उपनिवेशवाद: परिभाषा और तरीके

डिजिटल उपनिवेशवाद एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें विकसित देश या बहुराष्ट्रीय कंपनियां डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा प्रवाह और तकनीकी मानकों पर नियंत्रण रखती हैं, जिससे कमजोर देशों के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभुत्व कायम होता है। यह पारंपरिक उपनिवेशवाद से अलग है क्योंकि इसमें क्षेत्रीय कब्जे के बजाय डेटा मालिकाना, एल्गोरिदम और प्लेटफॉर्म शासन के जरिये नियंत्रण होता है।

  • विदेशी प्लेटफॉर्म और क्लाउड सेवाओं पर निर्भरता तकनीकी असमानता को बढ़ावा देती है।
  • डेटा निकासी और सीमा-पार डेटा प्रवाह अक्सर पश्चिमी संस्थाओं के पक्ष में होते हैं।
  • मानक निर्धारण निकाय और बौद्धिक संपदा प्रणाली उभरती तकनीकों पर नियंत्रण को मजबूत करते हैं।

भारत का डिजिटल संप्रभुता पर कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत के संवैधानिक और कानूनी प्रावधान डिजिटल व्यापार, डेटा संरक्षण और संप्रभुता को नियंत्रित करने के लिए आधार प्रदान करते हैं:

  • अनुच्छेद 246 (संघ सूची) संसद को व्यापार और वाणिज्य सहित डिजिटल व्यापार पर कानून बनाने का अधिकार देता है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000: सेक्शन 43A संवेदनशील डेटा की सुरक्षा में विफलता पर मुआवजा अनिवार्य करता है; सेक्शन 72A गोपनीयता और निजता के उल्लंघन को अपराध मानता है।
  • व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 (प्रस्तावित) सीमा-पार डेटा प्रवाह को नियंत्रित करने और डेटा स्थानीयकरण लागू करने का प्रयास करता है, जो डेटा संप्रभुता को मजबूत करता है।
  • सुप्रीम कोर्ट का न्यायालयीन फैसला, जस्टिस के.एस. पुत्तस्वामी (सेवानिवृत्त) बनाम भारत संघ (2017) निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता देता है, जो डेटा संरक्षण और संप्रभुता के कानूनी आधार को मजबूत करता है।

आर्थिक पहलू: सेमीकंडक्टर बाजार और भारत की स्थिति

वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार का मूल्य 2023 में 726 अरब डॉलर था (Statista)। भारत का सेमीकंडक्टर आयात बिल 2023-24 में 24 अरब डॉलर तक पहुंच गया (वाणिज्य मंत्रालय), जबकि घरेलू उत्पादन क्षमता वैश्विक उत्पादन का 1% से भी कम है। यह निर्भरता भारत की पैक्स सिलिका में रुचि को समझाती है, साथ ही कमजोरियां भी उजागर करती है।

  • भारत के AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था क्षेत्र 2027 तक 200 अरब डॉलर से अधिक होने का अनुमान है, जो सुरक्षित सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर निर्भर हैं।
  • अमेरिका का CHIPS Act घरेलू चिप निर्माण को 52 अरब डॉलर की सब्सिडी देता है, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज होती है।
  • भारत की PLI योजना सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 76,000 करोड़ रुपये (~10 अरब डॉलर) आवंटित करती है ताकि आयात निर्भरता कम हो सके।

भारत की डिजिटल और सेमीकंडक्टर रणनीति में संस्थागत भूमिका

  • नीति आयोग: AI रणनीति और नीति निर्माण का समन्वय करता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY): डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का नियमन और घरेलू तकनीक विकास को बढ़ावा देता है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS): डिजिटल संप्रभुता और सुरक्षा पर रणनीतिक निगरानी करता है।
  • अमेरिका का वाणिज्य विभाग: पैक्स सिलिका पहल का नेतृत्व करता है और सहयोगी तकनीकी नीतियों का समन्वय करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU): वैश्विक डिजिटल मानकों को प्रभावित करता है जो भारत की तकनीकी संरेखण को प्रभावित करते हैं।

तुलनात्मक दृष्टिकोण: चीन का डिजिटल सिल्क रोड बनाम भारत का पैक्स सिलिका मॉडल

चीन का डिजिटल सिल्क रोड एक वैकल्पिक मॉडल है जो स्वदेशी सप्लाई चेन, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा को रणनीतिक संपत्ति के रूप में प्राथमिकता देता है। 2025 तक चीन के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता का 35% हिस्सा है, जबकि भारत का 1% से भी कम (चीन उद्योग एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, 2025)। इससे चीन को डिजिटल स्वायत्तता बढ़ाने और विदेशी निर्भरताओं को कम करने में मदद मिलती है।

पहलूभारत (पैक्स सिलिका)चीन (डिजिटल सिल्क रोड)
सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता<1% वैश्विक उत्पादन35% वैश्विक उत्पादन
डिजिटल संप्रभुता का दृष्टिकोणपश्चिमी नेतृत्व वाले पारिस्थितिकी तंत्र के साथ एकीकरण, उन्नत अर्थव्यवस्थाओं द्वारा निर्धारित मानकों पर निर्भरस्वदेशी सप्लाई चेन और इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण, घरेलू डेटा नियंत्रण
डेटा गवर्नेंसव्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक लंबित, स्थानीयकरण पर जोर; पैक्स सिलिका के सीमा-पार नियमों से संभावित टकरावकठोर डेटा स्थानीयकरण और राज्य नियंत्रण
रणनीतिक साझेदारियांअमेरिका नेतृत्व वाले देशों के साथ बहुपक्षीय गठबंधनबेल्ट एंड रोड देशों में द्विपक्षीय और बहुपक्षीय अवसंरचना निवेश

जोखिम और चुनौतियां: पैक्स सिलिका में डिजिटल उपनिवेशवाद

भारत की पैक्स सिलिका में भागीदारी निम्नलिखित कारणों से डिजिटल उपनिवेशवाद को बढ़ा सकती है:

  • तकनीकी निर्भरता: पश्चिमी मानकों और प्लेटफॉर्म का प्रभुत्व भारत के स्वायत्त AI पारिस्थितिकी तंत्र विकास को सीमित कर सकता है।
  • डेटा संप्रभुता संघर्ष: पैक्स सिलिका के सीमा-पार डेटा साझा करने के नियम भारत के डेटा स्थानीयकरण नीतियों से टकरा सकते हैं, जिससे निजता और नियंत्रण कमजोर हो सकता है।
  • नीति असंगति: राष्ट्रीय सुरक्षा, औद्योगिक प्रोत्साहन और डेटा गवर्नेंस के बीच समन्वय की कमी भारत की वार्ता स्थिति को कमजोर करती है।
  • आर्थिक असमानता: अमेरिका और भारत के बीच सब्सिडी असमानता और सीमित घरेलू क्षमता भारत की ताकत को सीमित करती है।

आगे का रास्ता: सहयोग और संप्रभुता में संतुलन

  • PLI योजना के बेहतर क्रियान्वयन और तकनीकी हस्तांतरण के जरिए घरेलू सेमीकंडक्टर निर्माण को तेज करें।
  • व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक को अंतरराष्ट्रीय ढांचों के साथ सामंजस्यपूर्ण बनाएं, साथ ही डेटा संप्रभुता की सुरक्षा करें।
  • नीति आयोग, MeitY और NSCS के बीच समन्वय मजबूत कर सुरक्षा, औद्योगिक और डेटा नीतियों को एकीकृत करें।
  • पैक्स सिलिका के मानक निर्धारण में सक्रिय भूमिका निभाएं ताकि भारत के हितों के अनुकूल नियम बन सकें।
  • पश्चिमी गठबंधनों के अलावा अन्य साझेदारियों की खोज करें ताकि तकनीकी स्रोतों में विविधता लाई जा सके।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
पैक्स सिलिका के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. पैक्स सिलिका केवल सेमीकंडक्टर निर्माण पर केंद्रित अमेरिका की पहल है।
  2. भारत ने 2026 में AI सप्लाई चेन की सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने के लिए पैक्स सिलिका में शामिल हुआ।
  3. पैक्स सिलिका के सदस्य देशों के पास वैश्विक सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता का 70% से अधिक हिस्सा है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि पैक्स सिलिका सिर्फ सेमीकंडक्टर निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सिलिकॉन सप्लाई चेन के सभी हिस्से जैसे खनिज, सॉफ्टवेयर और AI प्लेटफॉर्म शामिल हैं। कथन 2 और 3 सही हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
डिजिटल उपनिवेशवाद के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. डिजिटल उपनिवेशवाद में विकसित देश या कंपनियां डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेटा पर नियंत्रण रखती हैं।
  2. यह क्षेत्रीय नियंत्रण के मामले में पारंपरिक उपनिवेशवाद के समान है।
  3. भारत के डेटा स्थानीयकरण कानून डिजिटल उपनिवेशवाद को रोकने के लिए डेटा संप्रभुता को मजबूत करते हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 2 गलत है क्योंकि डिजिटल उपनिवेशवाद पारंपरिक उपनिवेशवाद से अलग है, यह क्षेत्रीय कब्जे के बजाय डेटा और डिजिटल नेटवर्क के नियंत्रण पर केंद्रित है। कथन 1 और 3 सही हैं।

मेन प्रश्न

डिजिटल उपनिवेशवाद और डेटा संप्रभुता के संदर्भ में भारत की अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका पहल में भागीदारी की आलोचनात्मक समीक्षा करें। चुनौतियों पर चर्चा करें और भारत की डिजिटल स्वायत्तता की रक्षा के लिए सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी), पेपर 2 (शासन और अंतरराष्ट्रीय संबंध)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के खनिज संसाधन, जिनमें सिलिकॉन और रेयर अर्थ मेटल्स शामिल हैं, सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो स्थानीय खनन को राष्ट्रीय डिजिटल रणनीतियों से जोड़ते हैं।
  • मेन प्वाइंटर: उत्तरों में झारखंड की खनिज संपदा को भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं और पैक्स सिलिका जैसी पहलों के माध्यम से बाहरी निर्भरता के खतरों से जोड़कर तैयार करें।
पैक्स सिलिका पहल का मुख्य उद्देश्य क्या है?

पैक्स सिलिका का उद्देश्य एक सुरक्षित, मजबूत और नवाचार-आधारित वैश्विक सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन बनाना है, जिससे निर्भरताओं को कम करके सहयोगी देशों को बड़े पैमाने पर AI तकनीक विकसित करने में सक्षम बनाया जा सके।

डिजिटल उपनिवेशवाद वैश्विक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में कैसे प्रकट होता है?

डिजिटल उपनिवेशवाद विकसित देशों या कंपनियों द्वारा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, डेटा प्रवाह और तकनीकी मानकों पर नियंत्रण के माध्यम से प्रकट होता है, जिससे विकासशील देशों की डिजिटल स्वायत्तता सीमित होती है।

पैक्स सिलिका से संबंधित डेटा संरक्षण के लिए भारत में कौन-कौन से कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण हैं?

महत्वपूर्ण प्रावधानों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के सेक्शन 43A और 72A शामिल हैं, जो डेटा गोपनीयता की रक्षा करते हैं, साथ ही प्रस्तावित व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019, जो सीमा-पार डेटा प्रवाह को नियंत्रित करता है और डेटा स्थानीयकरण लागू करता है।

पैक्स सिलिका के संदर्भ में भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता क्यों चिंता का विषय है?

भारत की सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता वैश्विक उत्पादन का 1% से कम है, जिससे वह 95% से अधिक आयात पर निर्भर है, जो उसकी वार्ता क्षमता को कमजोर करता है और सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर करता है, भले ही वह पैक्स सिलिका में शामिल हो।

चीन का डिजिटल सिल्क रोड भारत के पैक्स सिलिका दृष्टिकोण से कैसे अलग है?

चीन का डिजिटल सिल्क रोड स्वदेशी सप्लाई चेन, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और कड़े डेटा नियंत्रण पर केंद्रित है ताकि डिजिटल संप्रभुता बढ़ाई जा सके, जबकि भारत की पैक्स सिलिका भागीदारी पश्चिमी नेतृत्व वाले पारिस्थितिकी तंत्र के साथ एकीकरण और बहुपक्षीय ढांचे पर निर्भर है।

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