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2024 की शुरुआत में भारतीय सेना का एक दल मिस्र में आयोजित भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'साइक्लोन' में हिस्सा लेने के लिए रवाना हुआ। यह अभ्यास भारत और मिस्र के बीच चल रहे द्विपक्षीय रक्षा सहयोग का हिस्सा है, जो असममित युद्ध, आतंकवाद विरोधी रणनीतियों और विशेष बलों के बीच आपसी तालमेल पर केंद्रित है (प्रेस सूचना ब्यूरो, 2024)। इस अभ्यास से दोनों देशों की सामरिक क्षमताओं में वृद्धि होती है और रणनीतिक रिश्ते मजबूत होते हैं, जो अफ्रीका और मध्य पूर्व में भारत की रक्षा कूटनीति के विस्तार को दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा – संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा कूटनीति, असममित युद्ध
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत-अफ्रीका द्विपक्षीय सहयोग, रणनीतिक साझेदारी
  • निबंध: भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना में रक्षा सहयोग की भूमिका

संयुक्त सैन्य अभ्यासों के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत में रक्षा और सैन्य संचालन संविधान के अनुच्छेद 246 और सूची I की प्रविष्टि 11 के तहत संघ सूची में आते हैं, जो संसद को रक्षा मामलों पर कानून बनाने का अधिकार देता है। डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1962 आपातकालीन स्थिति में सैन्य तैयारियों के लिए कानूनी प्रावधान प्रदान करता है। इंडियन आर्मी एक्ट, 1950 सेना के कर्मियों के आचरण और अनुशासन को नियंत्रित करता है, जिसमें विदेशों में अभ्यास के लिए तैनात जवान भी शामिल हैं। अभ्यास के दौरान संचालन संबंधी अधिकार आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA), 1958 के सेक्शन 4 द्वारा निर्धारित होते हैं, जो सीमित दायरे में सशस्त्र बलों को कार्रवाई करने का अधिकार देता है। डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP), 2020 खरीद प्रक्रिया को नियंत्रित करता है और तकनीकी साझेदारी व तालमेल को बढ़ावा देता है। सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (2002) के फैसले ने रक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की है।

भारत-मिस्र रक्षा सहयोग का आर्थिक पहलू

भारत का रक्षा बजट 2023-24 में 5.94 लाख करोड़ रुपये (~80 अरब अमेरिकी डॉलर) है, जो कुल सरकारी खर्च का 13.37% है (संघ बजट 2023-24)। मिस्र रक्षा पर लगभग 4.2 अरब अमेरिकी डॉलर वार्षिक खर्च करता है (SIPRI, 2023)। 'साइक्लोन' जैसे संयुक्त अभ्यास प्रशिक्षण संसाधनों और विशेषज्ञता के साझा उपयोग से लागत कम करते हैं, जो एकतरफा प्रशिक्षण की तुलना में अधिक प्रभावी होता है। भारत के रक्षा निर्यात में 2022-23 में 30% की वृद्धि हुई, जो 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा, जो रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है (रक्षा मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। ऐसे रणनीतिक साझेदारी रक्षा व्यापार, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त विकास परियोजनाओं के रास्ते खोलती हैं, जिससे दोनों देशों को आर्थिक और सामरिक लाभ होता है।

अभ्यास साइक्लोन में प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

  • भारतीय सेना: अभ्यास का संचालन करती है, विशेष बलों के तालमेल और असममित युद्ध रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करती है।
  • स्पेशल फोर्सेज कमांड: भारतीय सेना की असामान्य युद्ध में विशेषज्ञ इकाई, योजना और संचालन की जिम्मेदारी।
  • रक्षा मंत्रालय (MoD): नीति निर्धारण, रक्षा कूटनीति का समन्वय और संयुक्त अभ्यासों की निगरानी।
  • मिस्री सशस्त्र बल: मेजबान और साझेदार, मिस्र की जमीन पर अभ्यास की योजना और क्रियान्वयन।
  • प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB): अभ्यास से संबंधित आधिकारिक जानकारी का प्रसार।
  • स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (SIPRI): रक्षा व्यय पर विश्वसनीय आंकड़े प्रदान करता है।

अभ्यास साइक्लोन का संचालन और सामरिक फोकस

साइक्लोन अभ्यास असममित युद्ध, आतंकवाद विरोधी अभियान, बंधक रिहाई और शहरी युद्ध की स्थितियों में संयुक्त प्रशिक्षण पर जोर देता है। दोनों देशों के विशेष बल पारस्परिक प्रशिक्षण करते हैं ताकि तालमेल, खुफिया साझा करना और त्वरित तैनाती क्षमता बढ़े। अभ्यास में विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में सिम्युलेटेड ऑपरेशन शामिल हैं, जो मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में वास्तविक चुनौतियों को दर्शाते हैं। भारतीय सेना की सक्रिय ताकत का लगभग 10% हिस्सा विशेष बलों में है, जो असामान्य युद्ध को दी गई रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है (भारतीय सेना वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-मिस्र साइक्लोन बनाम यूएस-कोलंबिया जंगल युद्ध अभ्यास

पैरामीटरभारत-मिस्र साइक्लोनयूएस-कोलंबिया जंगल युद्ध अभ्यास
फोकस क्षेत्रअसममित युद्ध, आतंकवाद विरोधी, शहरी युद्धनशा विरोधी, जंगल युद्ध, खुफिया साझा करना
भौगोलिक क्षेत्ररेगिस्तान और शहरी क्षेत्रजंगल और पर्वतीय क्षेत्र
संचालन परिणामद्विपक्षीय तालमेल में सुधार, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोगसंचालन तत्परता में 25% वृद्धि, बेहतर खुफिया साझेदारी (यूएस DoD रिपोर्ट, 2023)
रणनीतिक जोरभारत-अफ्रीका संबंधों को मजबूत करना, असममित युद्ध क्षमतानशा तस्करी का मुकाबला, लैटिन अमेरिका में क्षेत्रीय स्थिरता

भारत के विशेष बलों के संयुक्त अभ्यास ढांचे में पहचानी गई कमियां

वर्ष 2023 में रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारत लगभग 50 से अधिक द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास करता है, लेकिन इन विविध अभ्यासों से प्राप्त अनुभवों को एकीकृत कर एक समग्र विशेष बल संचालन सिद्धांत विकसित करने में कमी है। इससे तालमेल मानकों में असंगति और अभ्यासों में सीखे गए सामरिक नवाचारों का पूर्ण उपयोग न हो पाना होता है। एक केंद्रीकृत ज्ञान भंडार और सिद्धांत समेकन तंत्र स्थापित करने से प्रभावशीलता और रणनीतिक प्रभाव बढ़ेगा।

रणनीतिक महत्व और आगे का रास्ता

  • साइक्लोन अभ्यास भारत की रक्षा कूटनीति को मजबूत करता है और अफ्रीका व मध्य पूर्व में उसकी मौजूदगी बढ़ाता है।
  • यह आतंकवाद और असामान्य खतरों से निपटने के लिए आवश्यक असममित युद्ध क्षमताओं को बढ़ाता है।
  • मिस्री सशस्त्र बलों के साथ तालमेल और विश्वास निर्माण को आसान बनाता है, जो क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है।
  • रक्षा व्यापार, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास के अवसर खोलता है, जो भारत के रक्षा निर्यात लक्ष्यों के अनुरूप हैं।
  • विविध संयुक्त अभ्यासों से अधिकतम लाभ के लिए सिद्धांत समेकन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'साइक्लोन' के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह मुख्य रूप से भारत और मिस्र के बीच पारंपरिक बड़े पैमाने के युद्ध पर केंद्रित है।
  2. यह अभ्यास असममित युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों में तालमेल बढ़ाता है।
  3. यह रक्षा खरीद और संयुक्त प्रशिक्षण प्रोटोकॉल के लिए डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP), 2020 के तहत संचालित होता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि यह अभ्यास पारंपरिक बड़े युद्ध पर नहीं, बल्कि असममित युद्ध पर केंद्रित है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि अभ्यास असममित युद्ध में तालमेल बढ़ाता है और DAP, 2020 के तहत आता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
रक्षा सहयोग अभ्यासों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के बारे में विचार करें:
  1. अनुच्छेद 246 और सूची I की प्रविष्टि 11 संघ सरकार को रक्षा मामलों पर कानून बनाने का अधिकार देती है।
  2. आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA), 1958, संयुक्त अभ्यासों के दौरान सशस्त्र बलों को असीमित संचालन अधिकार देता है।
  3. इंडियन आर्मी एक्ट, 1950, संयुक्त अभ्यासों के दौरान कर्मियों के आचरण और अनुशासन को नियंत्रित करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 संविधान के अनुसार सही है। कथन 2 गलत है क्योंकि AFSPA सीमित दायरे में ही संचालन अधिकार देता है, असीमित नहीं। कथन 3 सही है क्योंकि इंडियन आर्मी एक्ट आचरण और अनुशासन को नियंत्रित करता है।

मुख्य प्रश्न

भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'साइक्लोन' भारत की रणनीतिक रक्षा कूटनीति को कैसे दर्शाता है और असममित युद्ध में क्षमता निर्माण में इसका क्या योगदान है? द्विपक्षीय सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना पर इसके प्रभावों का विश्लेषण करें। (250 शब्द)

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सुरक्षा
  • झारखंड का कोण: झारखंड में कई भारतीय सेना प्रशिक्षण केंद्र हैं जहाँ विशेष बल प्रशिक्षण पाते हैं, जो साइक्लोन जैसे संयुक्त अभ्यासों से विकसित सिद्धांतों से अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।
  • मेन प्वाइंटर: उत्तर देते समय संयुक्त अभ्यासों की भूमिका पर जोर दें जो भारत की रक्षा तैयारी को बेहतर बनाते हैं, स्थानीय सैन्य ढांचे और झारखंड में रोजगार के अवसरों से जोड़ते हैं।
भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास 'साइक्लोन' का मुख्य फोकस क्या है?

यह अभ्यास असममित युद्ध, आतंकवाद विरोधी, बंधक रिहाई और भारतीय व मिस्री विशेष बलों के बीच तालमेल बढ़ाने पर केंद्रित है।

भारत में ऐसे संयुक्त सैन्य अभ्यास किन कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होते हैं?

यह अभ्यास अनुच्छेद 246, सूची I की प्रविष्टि 11, डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट 1962, इंडियन आर्मी एक्ट 1950, AFSPA 1958 (सेक्शन 4), और डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत होते हैं।

साइक्लोन अभ्यास भारत के रक्षा निर्यात में कैसे योगदान देता है?

यह रणनीतिक साझेदारी और तालमेल को मजबूत करता है, जिससे रक्षा व्यापार और तकनीकी हस्तांतरण के अवसर बढ़ते हैं, जो 2022-23 में भारत के रक्षा निर्यात में 30% की वृद्धि का समर्थन करता है।

भारत के विशेष बलों के संयुक्त अभ्यास ढांचे में कौन सी संस्थागत कमी है?

भारत के पास एक एकीकृत सिद्धांत नहीं है जो विभिन्न द्विपक्षीय अभ्यासों से सीखे गए पाठों को समेटे, जिससे तालमेल में असंगति और सामरिक नवाचारों का कम उपयोग होता है।

साइक्लोन अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना को कैसे मजबूत करता है?

यह द्विपक्षीय विश्वास बढ़ाता है, असममित युद्ध क्षमताओं को सुधारता है और खुफिया साझेदारी को बढ़ावा देकर भारत, मिस्र और व्यापक क्षेत्र के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करता है।

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