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भारत ने CINBAX-II 2026 के लिए कंबोडिया में सेना भेजी

फरवरी 2026 में भारत ने कंबोडिया में दूसरी बार आयोजित होने वाले द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास CINBAX-II में हिस्सा लेने के लिए अपनी सेना का एक दल भेजा। इस अभ्यास में दोनों पक्षों से लगभग 150 सैनिक शामिल होते हैं, जो आतंकवाद विरोधी अभियानों और जंगल युद्ध की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करता है। रॉयल कंबोडियन सशस्त्र बलों (RCAF) के मेजबानी में यह अभ्यास 2024 के पहले संस्करण का विस्तार है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के रक्षा संबंधों को और गहरा करने की मंशा को दर्शाता है। यह तैनाती भारत की Act East Policy के तहत सैन्य कूटनीति को प्राथमिकता देने और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की रणनीतिक सोच को प्रतिबिंबित करती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: रक्षा, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन – अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और संयुक्त अभ्यास
  • GS पेपर 2: भारत और उसके पड़ोसी – भारत की Act East Policy और क्षेत्रीय सुरक्षा गतिशीलता
  • निबंध: भारत की विकसित होती रक्षा कूटनीति और क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका प्रभाव

तैनाती के लिए कानूनी और संवैधानिक आधार

विदेशों में संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए भारतीय सैनिकों की तैनाती Defence of India Act, 1962 और Army Act, 1950 के तहत नियंत्रित होती है, जो सशस्त्र बलों के प्रशासन और अनुशासन का ढांचा प्रदान करते हैं। इसके अतिरिक्त, Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 की धारा 3 विदेशी संस्थाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग को नियंत्रित करती है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लक्ष्यों का पालन सुनिश्चित होता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है, जो इस तरह के अभ्यासों में भारत की भागीदारी का संवैधानिक आधार है।

  • Defence of India Act, 1962: बाहरी अभियानों में सशस्त्र बलों की तैनाती और संचालन को नियंत्रित करता है।
  • Army Act, 1950: भारतीय सेना के अनुशासन और प्रशासन के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
  • Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010: रक्षा सहयोग में विदेशी योगदान और सहयोग को नियंत्रित करता है।
  • Article 51, Constitution of India: अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने का निर्देश देता है।

भारत-कंबोडिया रक्षा सहयोग के आर्थिक पहलू

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत का रक्षा बजट लगभग ₹6.5 लाख करोड़ है, जिसमें से लगभग 3.5% अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और संयुक्त अभ्यासों के लिए आवंटित है (Economic Survey 2024)। कंबोडिया जैसे ASEAN सदस्य देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत करना रक्षा व्यापार को बढ़ावा दे सकता है, जो Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) के अनुसार 2023 में $2.3 बिलियन था। भारत के ASEAN देशों को रक्षा निर्यात में 2023 में 12% की वृद्धि हुई है, जो $450 मिलियन तक पहुंचा। CINBAX-II जैसे अभ्यासों के माध्यम से तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा मिल सकता है, जो 'Make in India' रक्षा पहल के लिए सहायक है।

  • ₹6.5 लाख करोड़ का 2025-26 रक्षा बजट; 3.5% अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए निर्धारित।
  • 2023 में ASEAN के साथ रक्षा व्यापार $2.3 बिलियन (SIPRI)।
  • भारत के ASEAN को रक्षा निर्यात में 12% वृद्धि, $450 मिलियन तक पहुंचा।
  • संयुक्त अभ्यास तकनीकी हस्तांतरण और अनुसंधान को बढ़ावा देते हैं, जिससे स्वदेशी रक्षा निर्माण को लाभ होता है।

CINBAX-II 2026 में शामिल मुख्य संस्थान

भारतीय सेना संयुक्त अभ्यास के परिचालन पक्षों को संभालती है, जिसमें सैनिकों की तैनाती और सामरिक प्रशिक्षण का समन्वय शामिल है। रक्षा मंत्रालय (MoD) अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग के लिए नीति बनाता और निगरानी करता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तकनीकी साझेदारी और नवाचार में सहयोग कर सकता है। बहुपक्षीय स्तर पर, ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक (ADMM) क्षेत्रीय रक्षा संवाद का मंच है, जबकि रॉयल कंबोडियन सशस्त्र बल (RCAF) मेजबान और साझेदार के रूप में कार्य करता है।

  • भारतीय सेना: सामरिक क्रियान्वयन और सैनिक तैनाती।
  • रक्षा मंत्रालय: नीति निर्माण और प्रशासनिक निगरानी।
  • DRDO: तकनीकी सहयोग और नवाचार।
  • ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक: क्षेत्रीय रक्षा सहयोग मंच।
  • रॉयल कंबोडियन सशस्त्र बल: मेजबान देश और संयुक्त अभ्यास साझेदार।

परिचालन और रणनीतिक तथ्य

CINBAX-II 2026 भारत-कंबोडिया द्विपक्षीय अभ्यास का दूसरा संस्करण है, जो 2024 में पहली बार आयोजित हुआ था (The Hindu, 2024)। पिछले पांच वर्षों में भारत ने विश्व स्तर पर 60 से अधिक संयुक्त सैन्य अभ्यास किए हैं (MoD Annual Report 2023)। इस अभ्यास में दोनों पक्षों से लगभग 150 सैनिक शामिल होते हैं, जो आतंकवाद विरोधी और जंगल युद्ध की तकनीकों पर ध्यान देते हैं, जो दक्षिण-पूर्व एशियाई भौगोलिक परिस्थितियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। कंबोडिया का रक्षा बजट 2023 में लगभग $300 मिलियन था (SIPRI)। भारत की Look East और Act East नीतियों के तहत ASEAN के साथ सैन्य संबंध 2018 से 25% बढ़े हैं (MEA Annual Report 2023)।

  • CINBAX-II 2024 के अभ्यास पर आधारित है, परिचालन समझ को बढ़ाता है।
  • दोनों पक्षों से 150 सैनिक, आतंकवाद विरोधी और जंगल युद्ध में प्रशिक्षण।
  • पिछले पांच वर्षों में भारत के 60+ वैश्विक संयुक्त अभ्यास रक्षा कूटनीति के विस्तार को दर्शाते हैं।
  • कंबोडिया का $300 मिलियन रक्षा बजट सीमित पर रणनीतिक क्षमता दर्शाता है।
  • Act East Policy के तहत 2018 से ASEAN के साथ सैन्य संपर्क में 25% वृद्धि।

भारत-कंबोडिया द्विपक्षीय अभ्यास बनाम चीन के बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास

पहलूभारत-कंबोडिया (CINBAX)चीन (SCO Peace Mission)
पैमानालगभग 300 सैनिक (द्विपक्षीय)5,000+ सैनिक (बहुपक्षीय)
क्षेत्रआतंकवाद विरोधी, जंगल युद्धआतंकवाद विरोधी, संयुक्त युद्ध अभ्यास, रसद
बारंबारताहर दो साल में (2024 से)2005 से हर 2-3 साल में
संस्थागत ढांचाद्विपक्षीय समझौते, सीमित फॉलो-अपएकीकृत SCO रक्षा सहयोग, निरंतर तंत्र
भू-राजनीतिक पहुंचदक्षिण-पूर्व एशिया केंद्रितमध्य और दक्षिण एशिया, व्यापक यूरेशिया

महत्वपूर्ण कमी: निरंतर फॉलो-अप और संस्थागतरण

भारत के CINBAX जैसे द्विपक्षीय संयुक्त अभ्यासों में अक्सर संस्थागत ज्ञान साझा करने और तकनीकी हस्तांतरण के लिए मजबूत फॉलो-अप तंत्र की कमी होती है। इससे लंबी अवधि में परिचालन सामंजस्य और रणनीतिक लाभ सीमित रह जाते हैं, जो चीन के शंघाई सहयोग संगठन के तहत एकीकृत रक्षा सहयोग के मुकाबले कम प्रभावी है। निरंतर जुड़ाव के बिना, भारत इन अभ्यासों की पूरी क्षमता का उपयोग करके व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा साझेदारियां बनाने में पिछड़ सकता है।

  • औपचारिक ज्ञान भंडार और संयुक्त सिद्धांत विकास की कमी।
  • अभ्यास के बाद तकनीकी हस्तांतरण समझौतों का अभाव।
  • चीन के SCO अभ्यासों के विपरीत, जिनमें संयुक्त योजना और निरंतर प्रशिक्षण चक्र शामिल हैं।

रणनीतिक महत्व और आगे का रास्ता

CINBAX-II 2026 भारत की Act East Policy के अनुरूप दक्षिण-पूर्व एशिया में सैन्य कूटनीति को मजबूत करने की रणनीतिक मंशा को दर्शाता है। यह अभ्यास सामरिक सामंजस्य को बढ़ाता है और ASEAN साझेदारों के साथ विश्वास बनाता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के संतुलित ढांचे में योगदान देता है। लाभों को अधिकतम करने के लिए, भारत को फॉलो-अप तंत्र को संस्थागत बनाना चाहिए, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना चाहिए और अभ्यासों के पैमाने और क्षेत्र को बढ़ाना चाहिए। कंबोडिया के साथ रक्षा संबंध मजबूत करना भारत के व्यापक भू-राजनीतिक उद्देश्य, विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में सहायक होगा।

  • अभ्यास के बाद ज्ञान साझा करने और संयुक्त सिद्धांत विकास को संस्थागत बनाएं।
  • DRDO सहयोग के तहत संयुक्त अनुसंधान और तकनीकी हस्तांतरण बढ़ाएं।
  • अभ्यासों के पैमाने और जटिलता को बढ़ाकर बहुपक्षीय ASEAN साझेदारों को शामिल करें।
  • क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिए रक्षा कूटनीति का प्रभावी उपयोग करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
CINBAX-II 2026 संयुक्त अभ्यास के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. CINBAX-II में ASEAN देशों की बहुपक्षीय भागीदारी होती है।
  2. यह अभ्यास आतंकवाद विरोधी और जंगल युद्ध की रणनीतियों पर केंद्रित है।
  3. भारत की CINBAX-II के लिए तैनाती Defence of India Act, 1962 के तहत होती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि CINBAX-II एक द्विपक्षीय अभ्यास है, बहुपक्षीय नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि यह आतंकवाद विरोधी और जंगल युद्ध पर केंद्रित है। कथन 3 भी सही है क्योंकि भारत की तैनाती Defence of India Act, 1962 के तहत होती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के सैन्य अभ्यासों के बारे में विचार करें:
  1. भारत के कंबोडिया के साथ संयुक्त अभ्यास चीन के SCO Peace Mission अभ्यासों से बड़े पैमाने पर हैं।
  2. भारत की Act East Policy ने 2018 से ASEAN के साथ सैन्य संपर्कों को 25% बढ़ाया है।
  3. चीन के SCO अभ्यासों में एकीकृत रक्षा सहयोग और निरंतर फॉलो-अप शामिल हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत के कंबोडिया के साथ संयुक्त अभ्यास लगभग 300 सैनिकों के हैं, जबकि चीन के SCO Peace Mission अभ्यास 5,000 से अधिक सैनिकों के हैं। कथन 2 और 3 MEA और SIPRI रिपोर्ट के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत की कंबोडिया के साथ CINBAX-II जैसे द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों में भागीदारी उसके Act East Policy और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में कैसे योगदान देती है? ऐसे अभ्यासों की सीमाओं पर चर्चा करें और उनके रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए सुझाव दें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध), पेपर 3 (रक्षा और सुरक्षा)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में कई भारतीय सेना प्रशिक्षण केंद्र हैं; भारत के बाहरी सैन्य जुड़ाव को समझना स्थानीय रक्षा भर्ती और रणनीतिक जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • मुख्य बिंदु: भारत की बाहरी सैन्य कूटनीति को आंतरिक सुरक्षा तैयारी और क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़कर उत्तर तैयार करें, झारखंड की प्रशिक्षण और मानव संसाधन भूमिका को उजागर करें।
CINBAX क्या है और CINBAX-II का क्या मतलब है?

CINBAX भारत-कंबोडिया द्विपक्षीय संयुक्त सैन्य अभ्यास है। CINBAX-II 2026 में आयोजित दूसरा संस्करण है, जो आतंकवाद विरोधी और जंगल युद्ध पर केंद्रित है और भारतीय सेना तथा रॉयल कंबोडियन सशस्त्र बलों के बीच सामंजस्य बढ़ाता है।

भारत विदेशों में संयुक्त अभ्यास के लिए सैनिकों की तैनाती किन कानूनी प्रावधानों के तहत करता है?

भारत की विदेशों में सैनिक तैनाती मुख्य रूप से Defence of India Act, 1962 और Army Act, 1950 के तहत नियंत्रित होती है। इसके अलावा, Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग को नियंत्रित करता है।

CINBAX-II भारत की Act East Policy से कैसे जुड़ा है?

CINBAX-II भारत की Act East Policy को व्यवहार में लाता है, जो ASEAN देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत करता है, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाता है और दक्षिण-पूर्व एशियाई सेनाओं के साथ सामरिक सामंजस्य बढ़ाता है।

भारत के कंबोडिया के साथ सैन्य सहयोग के आर्थिक प्रभाव क्या हैं?

सैन्य सहयोग रक्षा व्यापार को बढ़ावा देता है, जो 2023 में ASEAN के साथ $2.3 बिलियन था, तकनीकी हस्तांतरण को आसान बनाता है और 'Make in India' पहल के तहत संयुक्त अनुसंधान एवं विकास को समर्थन देता है, जिससे रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिलता है।

भारत के द्विपक्षीय अभ्यास चीन के बहुपक्षीय अभ्यासों से कैसे अलग हैं?

भारत के CINBAX जैसे द्विपक्षीय अभ्यासों में सैनिकों की संख्या कम होती है और फॉलो-अप तंत्र सीमित होते हैं, जबकि चीन के SCO Peace Mission अभ्यासों में हजारों सैनिक शामिल होते हैं और एकीकृत रक्षा सहयोग तथा निरंतर जुड़ाव होता है।

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