अपडेट

भारत-आसियान व्यापार समझौते का अपडेट: कौन, क्या, कब, कहाँ

अप्रैल 2024 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ (ASEAN) 2024 के अंत तक अपने व्यापार समझौते को अपडेट करेंगे। यह घोषणा इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित ASEAN-India शिखर सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक में की गई। यह अपडेट 2009 में हस्ताक्षरित ASEAN-India Trade in Goods Agreement (AITIGA) को आधुनिक बनाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए किया जा रहा है, ताकि क्षेत्रीय और वैश्विक बदलती परिस्थितियों के अनुरूप व्यापार नियमों को विकसित किया जा सके।

यह कदम भारत के रणनीतिक उद्देश्य के अनुरूप है, जो क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना, व्यापार के दायरे को बढ़ाना और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के आर्थिक प्रभुत्व का संतुलन बनाने के लिए व्यापक व्यापार उदारीकरण और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत के व्यापार समझौते, आसियान संबंध, इंडो-पैसिफिक रणनीति
  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास – व्यापार नीति, क्षेत्रीय आर्थिक समाकलन, आपूर्ति श्रृंखला
  • निबंध: भारत की आसियान और इंडो-पैसिफिक आर्थिक संरचना में भूमिका

व्यापार समझौते का कानूनी और संवैधानिक ढांचा

भारत-आसियान व्यापार समझौते का अपडेट भारत की विदेशी व्यापार नीति 2015-20 के अंतर्गत आता है, जिसे 2024 तक बढ़ाया गया है, और इसे वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा लागू किया जाता है। मौजूदा समझौता, AITIGA, भारत और आसियान सदस्य देशों के बीच टैरिफ छूट और व्यापार सुविधा उपायों को नियंत्रित करता है।

जहां सीधे तौर पर संवैधानिक प्रावधान नहीं हैं, वहीं भारतीय संविधान के Article 246(3) के तहत विदेशी देशों के साथ व्यापार और वाणिज्य को संघ सूची में रखा गया है, जिससे संसद को कानून बनाने और केंद्र सरकार को ऐसे समझौतों पर बातचीत और लागू करने का अधिकार मिलता है। विदेश मंत्रालय (MEA) कूटनीतिक वार्ता का नेतृत्व करता है, जिसमें नीति आयोग और DGFT आर्थिक और व्यापार नीति के समन्वय के लिए सहयोग करते हैं।

आर्थिक प्रोफाइल और व्यापार गतिशीलता

भारत-आसियान द्विपक्षीय व्यापार 2022-23 में 125.6 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है (वाणिज्य मंत्रालय, 2023), जो भारत के कुल व्यापार का लगभग 11% है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)। आसियान भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसका संयुक्त GDP लगभग 3.6 ट्रिलियन डॉलर है (विश्व बैंक, 2023)।

  • भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक आसियान के साथ व्यापार 200 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए (MEA बयान, 2024)।
  • मुख्य लक्षित क्षेत्र हैं: फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और डिजिटल सेवाएं।
  • MEA के आसियान विभाग के माध्यम से भारत हर साल लगभग 1200 करोड़ रुपये आसियान कनेक्टिविटी और व्यापार सुविधा के लिए आवंटित करता है (संघ बजट 2023-24)।
  • पिछले पांच वर्षों में भारत के आसियान निर्यात में औसतन 8% वार्षिक वृद्धि हुई है (DGFT डेटा)।

प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिका

व्यापार समझौते के अपडेट में कई संस्थान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय करते हैं:

  • ASEAN सचिवालय (जकार्ता): आसियान के व्यापक व्यापार और आर्थिक नीतियों का समन्वय करता है।
  • विदेश मंत्रालय (MEA): कूटनीतिक वार्ता और नीति समन्वय का नेतृत्व करता है।
  • विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT): विदेशी व्यापार नीति लागू करता है और व्यापार सुविधा प्रबंधित करता है।
  • नीति आयोग: आर्थिक समाकलन और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पर रणनीतिक नीति सुझाव देता है।
  • आसियान सदस्य देश: प्रत्येक देश टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर समझौते के ढांचे में बातचीत करता है।

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत-आसियान बनाम आसियान-चीन व्यापार संबंध

पहलूभारत-आसियानआसियान-चीन
व्यापार मात्रा (2023)125.6 अरब डॉलर684 अरब डॉलर
व्यापार समझौते की स्थितिमौजूदा समझौते (AITIGA 2009) का अपडेटगहरे समेकन के साथ व्यापक समझौते मौजूद
वार्ता की चुस्तीतुलनात्मक रूप से चुस्त, 2024 तक अपडेट अपेक्षितस्थापित लेकिन चीन की प्रमुख भूमिका के कारण जटिल
फोकस क्षेत्रमाल, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापननिर्माण, अवसंरचना, डिजिटल व्यापार
सेवाएं और डिजिटल व्यापारसीमित प्रावधान, सुधार की आवश्यकताअधिक व्यापक उदारीकरण

भारत-आसियान व्यापार समझौते में प्रमुख कमियां

प्रगति के बावजूद, भारत का आसियान के साथ व्यापार समझौता सेवाओं के उदारीकरण और डिजिटल व्यापार के व्यापक प्रावधानों में कमी रखता है, जो चीन और जापान के साथ आसियान के समझौतों में मौजूद हैं। यह कमी भारत की ई-कॉमर्स, डेटा प्रवाह और सीमा-पार डिजिटल सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता को सीमित करती है।

  • वर्तमान AITIGA मुख्य रूप से वस्तुओं के व्यापार पर केंद्रित है, सेवाओं और निवेश पर सीमित कवरेज है।
  • डिजिटल अर्थव्यवस्था सहयोग अभी प्रारंभिक स्तर पर है; डेटा स्थानीयकरण, सीमा-पार डेटा प्रवाह या ई-कॉमर्स सुविधा पर कोई बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं नहीं हैं।
  • गैर-टैरिफ बाधाएं और नियामक असमानताएं बनी हुई हैं, जो आपूर्ति श्रृंखला के सुचारू समाकलन को प्रभावित करती हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

2024 के अंत तक भारत-आसियान व्यापार समझौते का अपडेट करना आर्थिक समाकलन को गहरा करने और भारत की इंडो-पैसिफिक आर्थिक संरचना में भूमिका बढ़ाने की रणनीतिक पहल है। इससे चीन से आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य की प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए डिजिटल व्यापार में सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • सेवाओं के व्यापक उदारीकरण और डिजिटल व्यापार के प्रावधानों को शामिल करें ताकि वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हो सके।
  • गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और बाजार पहुंच को सुगम बनाने के लिए नियामक समन्वय बढ़ाएं।
  • फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाओं और कृषि में भारत की ताकतों का उपयोग करके निर्यात को बढ़ावा दें।
  • नीति कार्यान्वयन में समन्वय के लिए MEA, DGFT और नीति आयोग के बीच संस्थागत सहयोग मजबूत करें।
  • चीन के प्रभुत्व के बीच भारत की भू-राजनीतिक प्रभाव और आर्थिक मौजूदगी को मजबूत करने के लिए अपडेटेड समझौते का उपयोग करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-आसियान व्यापार समझौते के अपडेट के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. ASEAN-India Trade in Goods Agreement 2009 में हस्ताक्षरित हुआ था।
  2. भारत की विदेशी व्यापार नीति 2015-20 व्यापार समझौते के अपडेट से असंबंधित है।
  3. संविधान के Article 246(3) के तहत केंद्र सरकार को विदेशी देशों के साथ व्यापार पर कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि AITIGA 2009 में हस्ताक्षरित हुआ था। कथन 2 गलत है क्योंकि भारत की विदेशी व्यापार नीति 2015-20 (जो 2024 तक बढ़ाई गई है) व्यापार सुविधा और समझौते के अपडेट के लिए प्रासंगिक है। कथन 3 सही है क्योंकि Article 246(3) विदेशी देशों के साथ व्यापार को संघ सूची में रखता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के आसियान और चीन के साथ व्यापार संबंधों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. 2022-23 में भारत का आसियान के साथ व्यापार लगभग 125 अरब डॉलर था।
  2. आसियान-चीन का व्यापार भारत-आसियान के व्यापार से कम है।
  3. भारत का आसियान के साथ व्यापार समझौता चीन के समान व्यापक डिजिटल व्यापार प्रावधानों को शामिल करता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि भारत-आसियान व्यापार 2022-23 में 125.6 अरब डॉलर था। कथन 2 गलत है क्योंकि 2023 में आसियान-चीन का व्यापार 684 अरब डॉलर था, जो भारत-आसियान से अधिक है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत के समझौते में डिजिटल व्यापार के प्रावधान सीमित हैं, जबकि आसियान-चीन के समझौतों में व्यापक हैं।

मुख्य प्रश्न

2024 के अंत तक भारत द्वारा आसियान के साथ अपने व्यापार समझौते को अपडेट करने के रणनीतिक और आर्थिक प्रभावों पर चर्चा करें। इस प्रक्रिया में भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं, इसका विश्लेषण करें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध और आर्थिक विकास)
  • झारखंड दृष्टिकोण: बेहतर व्यापार सुविधा के माध्यम से झारखंड के खनिज और विनिर्मित वस्तुओं के आसियान बाजारों में निर्यात को बढ़ावा देने की संभावना।
  • मुख्य बिंदु: भारत-आसियान व्यापार संबंधों के सुधार से झारखंड के औद्योगिक विकास और रोजगार पर प्रभाव, विशेष रूप से अवसंरचना कनेक्टिविटी पर जोर।
ASEAN-India Trade in Goods Agreement (AITIGA) क्या है?

AITIGA 2009 में भारत और आसियान सदस्य देशों के बीच हस्ताक्षरित एक व्यापार समझौता है, जो वस्तुओं के व्यापार में टैरिफ छूट और व्यापार सुविधा को बढ़ावा देता है। यह भारत और आसियान देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।

भारत 2024 में आसियान के साथ व्यापार समझौते को क्यों अपडेट कर रहा है?

भारत व्यापार समझौते को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें सेवाओं, डिजिटल अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन जैसे व्यापक प्रावधान शामिल हों, ताकि 2030 तक व्यापार को 200 अरब डॉलर तक बढ़ाया जा सके और चीन के क्षेत्रीय आर्थिक प्रभुत्व का संतुलन बनाया जा सके।

भारत-आसियान व्यापार समझौते के अपडेट में कौन-कौन से मंत्रालय शामिल हैं?

विदेश मंत्रालय कूटनीतिक वार्ता का नेतृत्व करता है, विदेश व्यापार महानिदेशालय व्यापार नीति को लागू करता है, और नीति आयोग रणनीतिक आर्थिक सुझाव प्रदान करता है।

भारतीय संविधान के Article 246(3) का विदेशी व्यापार समझौतों से क्या संबंध है?

Article 246(3) विदेशी देशों के साथ व्यापार और वाणिज्य को संघ सूची में रखता है, जिससे संसद और केंद्र सरकार को अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों पर कानून बनाने और बातचीत करने का अधिकार मिलता है।

भारत के आसियान व्यापार समझौते में मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में सेवाओं के उदारीकरण और डिजिटल व्यापार के सीमित प्रावधान, गैर-टैरिफ बाधाएं और नियामक असमानताएं शामिल हैं, साथ ही आसियान के चीन और जापान के साथ गहरे समेकन के कारण प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है।

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