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परिचय: शहरी वायुमंडलीय अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय हरित तकनीक सहयोग

जनवरी 2024 में, डॉ. एम. रविचंद्रन, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के सचिव ने चेन्नई में अर्बन टेस्टबेड और एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी का उद्घाटन किया। यह केंद्र शहरी वायु प्रदूषण, खासकर कणों की गतिशीलता पर नजर रखने के लिए बनाया गया है, जिससे भारत की वायुमंडलीय अनुसंधान क्षमता मजबूत होगी। इसी दौरान, भारत और यूरोपीय संघ ने भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) वर्किंग ग्रुप-2 के तहत €15.2 मिलियन (लगभग ₹169 करोड़) की संयुक्त पहल शुरू की, जिसका मकसद इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी रीसाइक्लिंग तकनीकों को विकसित करना है। ये दोनों कदम भारत की सतत शहरी विकास और हरित तकनीक नेतृत्व की एकीकृत रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें घरेलू अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग दोनों शामिल हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन (पर्यावरण कानून, अंतरराष्ट्रीय संबंध - भारत-ईयू TTC)
  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी (शहरी प्रदूषण निगरानी, EV बैटरी रीसाइक्लिंग)
  • GS पेपर 2: स्वास्थ्य (स्वस्थ भारत पोर्टल और सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा प्रसार)
  • निबंध: सतत विकास, भारत की हरित तकनीक कूटनीति

अर्बन टेस्टबेड और एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी: वायुमंडलीय विज्ञान की क्षमता में वृद्धि

चेन्नई में नया स्थापित अर्बन टेस्टबेड और एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत संचालित है। यह केंद्र शहरी वायु प्रदूषण के मुख्य घटक, जैसे कण पदार्थ (PM2.5, PM10) और एयरोसोल की वास्तविक समय की निगरानी करता है। इससे शहरी वायु गुणवत्ता प्रबंधन और जलवायु लचीलापन के लिए सटीक डेटा उपलब्ध होगा।

  • शहरी प्रदूषण की गतिशीलता, एयरोसोल सांद्रता और रासायनिक संरचना की निगरानी करता है (PIB, 2024)
  • प्रदूषण के स्रोत, परिवहन और स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध का समर्थन करता है
  • राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक और स्वस्थ भारत पोर्टल से जुड़कर जनता तक जानकारी पहुंचाता है
  • 2023-24 में MoES के शहरी पर्यावरण परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन में 12% की वृद्धि हुई है (संघीय बजट 2023-24)

भारत-ईयू संयुक्त पहल: TTC वर्किंग ग्रुप-2 के तहत EV बैटरी रीसाइक्लिंग

भारत और यूरोपीय संघ की €15.2 मिलियन (लगभग ₹169 करोड़) की यह संयुक्त परियोजना टिकाऊ EV बैटरी रीसाइक्लिंग तकनीकों के विकास पर केंद्रित है, जो सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को बढ़ावा देती है। यह पहल भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) के अंतर्गत है, जो तकनीक सहयोग और व्यापार समन्वय के लिए स्थापित द्विपक्षीय मंच है। यह परियोजना भारत के EV बाजार में तेजी से बढ़ोतरी को देखते हुए बैटरी के अंत जीवन प्रबंधन की जरूरत को पूरा करती है, जिसकी CAGR 2023 से 2030 तक 44% रहने का अनुमान है।

  • लिथियम, कोबाल्ट, निकल और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री की पुनर्प्राप्ति के लिए उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीकों पर ध्यान केंद्रित
  • औपचारिक क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देकर अनौपचारिक और पर्यावरण के लिए हानिकारक रीसाइक्लिंग को कम करना
  • भारत के संशोधित बैटरियों (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2022 के अनुरूप, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत हैं
  • भारत के बैटरी रीसाइक्लिंग बाजार का मूल्य 2023 में $500 मिलियन था, जो 2030 तक $2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है (नीति आयोग, 2023)

पर्यावरण और बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए कानूनी एवं संस्थागत ढांचा

भारत में पर्यावरण शासन कई महत्वपूर्ण कानूनों और संस्थाओं पर आधारित है, जो इन पहलों से जुड़े हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार देता है (धारा 3)। वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को वायु गुणवत्ता विनियमित करने के अधिकार देता है (धारा 17)। बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन बैटरियों (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2001 के तहत होता है, जिसे 2022 में EV बैटरी के जीवनचक्र प्रबंधन के लिए संशोधित किया गया है।

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES): वायुमंडलीय अनुसंधान और जलवायु निगरानी का संचालन करता है
  • भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD): एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी और अर्बन टेस्टबेड संचालित करता है
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB): प्रदूषण नियंत्रण और बैटरी अपशिष्ट नियमों का पालन सुनिश्चित करता है
  • स्वस्थ भारत पोर्टल: सार्वजनिक स्वास्थ्य डेटा और जागरूकता के लिए डिजिटल मंच, 2023 में उपयोग में 35% वृद्धि (MoHFW वार्षिक रिपोर्ट, 2023)
  • विदेशी योगदान नियंत्रण अधिनियम (FCRA), 2010: अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण और सहयोग के लिए नियम, भारत-ईयू TTC परियोजनाओं के लिए प्रासंगिक

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत की EV बैटरी रीसाइक्लिंग बनाम यूरोपीय संघ

पहलू भारत यूरोपीय संघ (EU)
नियामक ढांचा बैटरियों (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2022; EV बैटरी रीसाइक्लिंग के लिए व्यापक लागू मानक नहीं हैं सर्कुलर इकोनॉमी एक्शन प्लान (2020); 2030 तक 70% रीसाइक्लिंग दर अनिवार्य
रीसाइक्लिंग अवसंरचना प्रारंभिक अवस्था में, औपचारिक क्षेत्र विखंडित; अनौपचारिक रीसाइक्लिंग प्रचलित मजबूत अवसंरचना, प्रमाणित रीसाइक्लर और कड़ी निगरानी
बाजार आकार (2023) $500 मिलियन, 2030 तक $2 बिलियन होने का अनुमान (नीति आयोग) मल्टी-बिलियन यूरो बाजार, परिपक्व सर्कुलर इकोनॉमी तंत्र
अंतरराष्ट्रीय सहयोग भारत-ईयू TTC के तहत €15.2 मिलियन की संयुक्त पहल, तकनीक और मानकों के विकास के लिए वैश्विक मानक और तकनीकी नवाचार में अग्रणी

महत्व और आगे का रास्ता

  • अर्बन टेस्टबेड और एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी से भारत की शहरी वायु प्रदूषण निगरानी और प्रबंधन क्षमता में सुधार होगा, जिससे नीति निर्माण में तथ्यात्मक आधार मिलेगा।
  • भारत-ईयू TTC सहयोग से यूरोपीय संघ की उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीक भारत के EV बैटरी रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को तेजी से विकसित करने में मदद करेगी, जो सतत EV बाजार विकास के लिए जरूरी है।
  • भारत के बैटरी रीसाइक्लिंग ढांचे में सुधार के लिए नियामक प्रवर्तन और औपचारिक क्षेत्र को प्रोत्साहन देना आवश्यक है।
  • पर्यावरण निगरानी (MoES, IMD) और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म (स्वस्थ भारत पोर्टल) का समन्वय शहरी लचीलापन और नागरिक जागरूकता बढ़ाएगा।
  • TTC के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाकर तकनीक हस्तांतरण, मानक सामंजस्य और हरित तकनीकों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत-ईयू EV बैटरी रीसाइक्लिंग पहल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह पहल भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) वर्किंग ग्रुप-2 के तहत वित्त पोषित है।
  2. भारत वर्तमान में 2030 तक EV बैटरियों के लिए 70% रीसाइक्लिंग दर अनिवार्य करता है।
  3. यह पहल टिकाऊ रीसाइक्लिंग तकनीकों और सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल विकसित करने का लक्ष्य रखती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि यह पहल TTC वर्किंग ग्रुप-2 के तहत है। कथन 2 गलत है; भारत वर्तमान में 70% रीसाइक्लिंग दर अनिवार्य नहीं करता, यह EU का लक्ष्य है। कथन 3 सही है क्योंकि परियोजना टिकाऊ रीसाइक्लिंग तकनीकों पर केंद्रित है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
चेन्नई के अर्बन टेस्टबेड और एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह केंद्र केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा संचालित है।
  2. यह कण पदार्थ और शहरी प्रदूषण की गतिशीलता की निगरानी करता है।
  3. इसकी स्थापना का संबंध 2023-24 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के बजट आवंटन में वृद्धि से है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है; यह ऑब्जर्वेटरी IMD द्वारा MoES के अंतर्गत संचालित है, CPCB द्वारा नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं।

मुख्य प्रश्न

चेन्नई में अर्बन टेस्टबेड और एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी के उद्घाटन तथा भारत-ईयू संयुक्त EV बैटरी रीसाइक्लिंग पहल कैसे भारत की सतत शहरी विकास और हरित तकनीक उन्नयन की एकीकृत रणनीति को दर्शाती हैं, इस पर चर्चा करें। (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (पर्यावरण और पारिस्थितिकी), पेपर 3 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के बढ़ते शहरी केंद्रों में वायु प्रदूषण की समस्या है; शहरी वायुमंडलीय निगरानी स्थानीय नीतियों के लिए उपयोगी होगी। राज्य के खनिज संसाधन (जैसे लिथियम, कोबाल्ट) EV बैटरी आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो बैटरी रीसाइक्लिंग पहलों से जुड़ते हैं।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर में झारखंड के शहरी प्रदूषण, संसाधन क्षमता, और तकनीक व अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से सतत विकास के लाभों को जोड़ें।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की शहरी प्रदूषण प्रबंधन में क्या भूमिका है?

MoES वायुमंडलीय अनुसंधान का संचालन करता है और IMD के माध्यम से अर्बन टेस्टबेड और एयरोसोल ऑब्जर्वेटरी जैसी निगरानी सुविधाएं चलाता है, जो वायु गुणवत्ता प्रबंधन और जलवायु लचीलापन के लिए आवश्यक डेटा प्रदान करती हैं।

भारत में EV बैटरी रीसाइक्लिंग को नियंत्रित करने वाले कानूनी प्रावधान क्या हैं?

बैटरियों (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2022 के तहत, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आते हैं, EV बैटरियों के संग्रहण, भंडारण और रीसाइक्लिंग का प्रबंधन किया जाता है।

भारत-ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (TTC) क्या है?

TTC एक द्विपक्षीय मंच है, जो भारत और EU के बीच व्यापार और तकनीक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है, जिसमें 2024 में शुरू हुई EV बैटरी रीसाइक्लिंग जैसी संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं।

चेन्नई के अर्बन टेस्टबेड का सार्वजनिक स्वास्थ्य में क्या योगदान है?

यह केंद्र कण पदार्थ और प्रदूषण की निगरानी करता है, जिसका डेटा स्वस्थ भारत पोर्टल जैसे मंचों के साथ साझा होता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य निगरानी और जागरूकता में मदद मिलती है।

भारत के सतत विकास के लिए EV बैटरी रीसाइक्लिंग क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत के EV बाजार की 44% CAGR से बढ़ोतरी के कारण, रीसाइक्लिंग पर्यावरणीय जोखिम कम करती है, महत्वपूर्ण सामग्री की पुनर्प्राप्ति करती है और सर्कुलर इकोनॉमी के लक्ष्यों को पूरा करती है, जो शहरी और औद्योगिक विकास के लिए जरूरी है।

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