ईरान के साथ चल रहे भू-राजनीतिक संघर्ष और उसके परिणामस्वरूप लगाए गए प्रतिबंधों ने 2023 में ईरान के उर्वरक निर्यात में भारी कमी ला दी है। विश्व के कुल उर्वरक निर्यात में लगभग 5% हिस्सेदारी रखने वाले ईरान के शिपमेंट में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों, खासकर UNSCR 2231 (2015), और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण 25% की गिरावट आई है। यह व्यवधान 2024-25 के अनाज कटाई मौसम से पहले कृषि इनपुट की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है, जिससे वैश्विक खाद्य सुरक्षा और भारत के कृषि उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ने का खतरा है, विशेषकर भारत की आयात निर्भरता को देखते हुए।
भारत अपनी उर्वरक जरूरतों का लगभग 20% ईरान और रूस से मिलाकर आयात करता है, जिससे यह आपूर्ति झटकों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। 2021 से 2023 के बीच उर्वरक की कीमतों में 30% की वृद्धि हुई है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत बढ़ी है और FAO के अनुमान के अनुसार वैश्विक अनाज उत्पादन में 10-15% की गिरावट का खतरा है। चूंकि भारत के कृषि GDP का 43% हिस्सा अनाज उत्पादन का है, इसलिए उर्वरक की निरंतर कमी खाद्य महंगाई को बढ़ा सकती है और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के लक्ष्यों को चुनौती दे सकती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – UN प्रतिबंधों का व्यापार और कृषि पर प्रभाव
- GS पेपर 3: अर्थव्यवस्था – उर्वरक बाजार के रुझान, कृषि इनपुट सब्सिडी और खाद्य सुरक्षा
- निबंध: भू-राजनीतिक संघर्ष और घरेलू खाद्य सुरक्षा पर उनके प्रभाव
उर्वरक व्यापार और खाद्य सुरक्षा से जुड़े कानूनी और नियामक ढांचे
भारत में उर्वरक के उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण को उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 के तहत नियंत्रित किया जाता है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत जारी किया गया है। यह व्यवस्था सरकार को उर्वरक की उपलब्धता पर नजर रखने और किसानों के लिए किफायती बनाए रखने की अनुमति देती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 सरकार को खाद्य उपलब्धता और किफायती कीमत सुनिश्चित करने का दायित्व देता है, जिससे उर्वरक आपूर्ति का खाद्य सुरक्षा से सीधा संबंध बनता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव, विशेषकर UNSCR 2231 (2015), ईरान के व्यापार, जिसमें उर्वरक निर्यात शामिल है, पर प्रतिबंध लगाते हैं। ये कानूनी उपाय ईरान की वैश्विक उर्वरक बाजारों में पूरी तरह भागीदारी को सीमित करते हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखलाओं और कीमतों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।
उर्वरक आपूर्ति में व्यवधान के आर्थिक पहलू
2023 में वैश्विक उर्वरक बाजार का मूल्य लगभग 200 अरब डॉलर था (विश्व बैंक)। हालांकि ईरान का 5% हिस्सा मामूली है, लेकिन उसके पोटाश और फॉस्फेट निर्यात महत्वपूर्ण हैं। रूस और बेलारूस मिलाकर वैश्विक पोटाश निर्यात का लगभग 30% हिस्सा रखते हैं, जो भू-राजनीतिक तनाव के बीच आपूर्ति जोखिम को और बढ़ाते हैं।
- भारत की उर्वरक आयात निर्भरता लगभग 40% है, जिसमें से 20% ईरान और रूस से आता है (रसायन और उर्वरक मंत्रालय, 2023)।
- 2022-23 में उर्वरक की कीमतों में 30% की वृद्धि हुई, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी और किसानों के लाभ मार्जिन कम हुए (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)।
- भारत की गेहूं और चावल की उपज, जो कुल अनाज उत्पादन का 50% से अधिक है, उर्वरक की उपलब्धता पर निर्भर है (कृषि सांख्यिकी, 2023)।
- FAO का अनुमान है कि उर्वरक की कमी से 2024-25 में वैश्विक अनाज उत्पादन में 10-15% की गिरावट हो सकती है, जिससे खाद्य असुरक्षा की आशंका बढ़ेगी।
उर्वरक आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा में संस्थागत भूमिका
अंतरराष्ट्रीय उर्वरक संघ (IFA) वैश्विक आपूर्ति और मांग की स्थिति पर नजर रखता है और निर्यात में व्यवधानों को ट्रैक करता है। खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) इनपुट की कमी के खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव का आकलन करता है। भारत में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय आयात, सब्सिडी और वितरण को नियंत्रित करता है, जबकि कृषि मंत्रालय के तहत अर्थशास्त्र और सांख्यिकी निदेशालय (DES) फसल उत्पादन के महत्वपूर्ण आंकड़े प्रदान करता है।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) उर्वरक की दक्षता और वैकल्पिक इनपुट पर शोध करता है ताकि आयात निर्भरता को कम किया जा सके। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा लगाए गए प्रतिबंध सीधे तौर पर ईरान की निर्यात क्षमता को प्रभावित करते हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारत की उर्वरक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करता है।
भारत और चीन के उर्वरक रणनीति की तुलना
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| आयात निर्भरता | लगभग 40% (20% ईरान और रूस से) | कम; मजबूत घरेलू उत्पादन क्षमता |
| सरकारी सब्सिडी | FY 2023-24 में 1.05 लाख करोड़ रुपये; लक्ष्यीकरण में कमी | मूल्य स्थिरता के लिए रणनीतिक भंडारण और सब्सिडी सुधार |
| वैश्विक आपूर्ति झटकों पर प्रतिक्रिया | भू-राजनीतिक जोखिम और सीमित भंडार के कारण संवेदनशील | 2020 के बाद भंडारण और क्षमता विस्तार से झटकों को कम किया |
| अनाज उत्पादन पर प्रभाव (2023) | संभावित 10-15% गिरावट | कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद 5% वृद्धि |
भारत की उर्वरक सुरक्षा में मुख्य खामियां
ईरान और रूस जैसे भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील देशों पर भारत की अत्यधिक आयात निर्भरता कृषि क्षेत्र को बाहरी झटकों के प्रति कमजोर बनाती है। घरेलू उत्पादन क्षमता मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है और सब्सिडी प्रणाली में लक्षित सुधार की कमी है, जिससे संसाधनों की बर्बादी और वित्तीय दबाव बढ़ता है। ये सभी कारण मिलकर उर्वरक की कमी का खतरा बढ़ाते हैं, जो अनाज उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
महत्व और आगे की राह
- आयात निर्भरता कम करने के लिए घरेलू उर्वरक उत्पादन, विशेषकर पोटाश और फॉस्फेट, बढ़ाना आवश्यक है।
- सब्सिडी प्रणाली में सुधार कर उर्वरक के कुशल उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और वित्तीय बोझ कम किया जाना चाहिए।
- अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवधानों से निपटने के लिए रणनीतिक उर्वरक भंडार विकसित करना चाहिए।
- ICAR के नेतृत्व में वैकल्पिक पोषक तत्व स्रोतों और सटीक कृषि तकनीकों में निवेश बढ़ाना चाहिए।
- भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर प्रतिबंधों में ढील या वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग सुनिश्चित करने चाहिए।
- यह आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया गया है।
- यह भारत में उर्वरक के आयात, उत्पादन और वितरण को नियंत्रित करता है।
- यह सरकार को सभी किसानों को मुफ्त उर्वरक देने का निर्देश देता है।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के कारण 2023 में ईरान के उर्वरक निर्यात में 25% की कमी आई।
- ईरान वैश्विक उर्वरक निर्यात का लगभग 20% हिस्सा रखता है।
- भारत अपने उर्वरक का लगभग 20% ईरान और रूस से मिलाकर आयात करता है।
मुख्य प्रश्न
भू-राजनीतिक संघर्षों और प्रतिबंधों के कारण ईरान के उर्वरक निर्यात में आए व्यवधान का 2025 में भारत के अनाज उत्पादन और खाद्य सुरक्षा पर कैसे असर पड़ेगा, इसका विश्लेषण करें। ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए भारत को किन संस्थागत और नीतिगत कदमों को अपनाना चाहिए, इस पर चर्चा करें।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 (अर्थव्यवस्था और कृषि) – उर्वरक आपूर्ति और कृषि उत्पादकता
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड की कृषि उर्वरक आयात पर भारी निर्भर है; व्यवधान से चावल और मक्का की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो स्थानीय खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
- मुख्य बिंदु: उत्तर में झारखंड की आयात निर्भरता, संभावित उत्पादन हानि, और राज्य स्तर पर भंडारण एवं सब्सिडी सुधार की आवश्यकता को उजागर करें।
भारत में उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 की क्या भूमिका है?
उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया गया है, भारत में उर्वरक के उत्पादन, आपूर्ति, मूल्य निर्धारण और वितरण को नियंत्रित करता है ताकि किसानों के लिए उर्वरक उपलब्ध और किफायती बने रहें।
संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध ईरान के उर्वरक निर्यात को कैसे प्रभावित करते हैं?
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंध, खासकर UNSCR 2231 (2015), ईरान के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उर्वरक निर्यात को सीमित करते हैं, जिससे 2023 में 25% की गिरावट आई और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुईं।
भारत के उर्वरक आयात का कितना प्रतिशत ईरान और रूस से आता है?
भारत अपने उर्वरक आयात का लगभग 20% ईरान और रूस से मिलाकर प्राप्त करता है, जिससे यह उन देशों में भू-राजनीतिक व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
उर्वरक मूल्य वृद्धि भारतीय किसानों को कैसे प्रभावित करती है?
2022-23 में उर्वरक की कीमतों में 30% की वृद्धि से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ी है, जिससे लाभ मार्जिन कम हुए हैं और यदि कमी बनी रही तो अनाज उत्पादन में 10-15% तक गिरावट आ सकती है।
चीन ने उर्वरक आपूर्ति झटकों को कम करने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
चीन ने 2020 के बाद घरेलू उर्वरक उत्पादन क्षमता बढ़ाई और रणनीतिक भंडारण बनाए, जिससे वैश्विक मूल्य अस्थिरता के बावजूद 2023 में अनाज उत्पादन में 5% की वृद्धि हुई।
आधिकारिक स्रोत और विस्तृत अध्ययन
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
लर्नप्रो की संपादकीय सामग्री सिविल सेवा तैयारी में अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा शोधित और समीक्षित है। हमारे लेख सरकारी स्रोतों, NCERT पाठ्यपुस्तकों, मानक संदर्भ सामग्री और प्रतिष्ठित प्रकाशनों जैसे द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस और PIB से लिए गए हैं।
सामग्री को नवीनतम पाठ्यक्रम परिवर्तनों, परीक्षा पैटर्न और वर्तमान घटनाक्रमों के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। सुधार या प्रतिक्रिया के लिए admin@learnpro.in पर संपर्क करें।
