एआई से रोजगार में बदलाव के बीच आईएलओ की आजीवन सीखने की अपील
2023 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव से निपटने के लिए आजीवन सीखने को एक रणनीतिक उपाय बताया। ILO की Future of Work Report 2023 के अनुसार, 2030 तक AI के कारण विश्व में 400 मिलियन नौकरियां खत्म हो सकती हैं, जबकि 200 मिलियन नई नौकरियों का सृजन होगा, जिनके लिए उन्नत और लगातार बदलते कौशल की जरूरत होगी। संगठन लगातार कौशल विकास को बढ़ावा देता है ताकि तकनीकी प्रगति के अनुसार कार्यबल की क्षमता बनी रहे और बेरोजगारी तथा अधेरोजगारी की समस्या कम हो सके।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – AI का रोजगार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- GS पेपर 2: राजनीति – काम और शिक्षा के अधिकार से संबंधित संवैधानिक प्रावधान
- GS पेपर 1: सामाजिक मुद्दे – कौशल विकास और शिक्षा सुधार
- निबंध: प्रौद्योगिकी और रोजगार, कौशल विकास के लिए सरकारी पहल
भारत में आजीवन सीखने के लिए संवैधानिक और कानूनी आधार
भारतीय संविधान के Article 41 में राज्य को काम और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है, जो कौशल विकास नीतियों की नींव है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में आजीवन सीखने और निरंतर कौशल संवर्द्धन को स्पष्ट रूप से बढ़ावा दिया गया है ताकि नागरिक बदलते श्रम बाजार के लिए तैयार हो सकें। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Central Act 41 of 2020) के Sections 135-139 में पुनः कौशल विकास और अपस्किलिंग कार्यक्रमों को सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा बनाया गया है। इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 AI से जुड़े डेटा फ्रेमवर्क को नियंत्रित करता है, जो ऑटोमेशन से प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार पर असर डालता है।
- Article 41: काम और शिक्षा के अधिकार के लिए निर्देशात्मक सिद्धांत।
- NEP 2020: लचीले, मॉड्यूलर और आजीवन सीखने के रास्ते पर जोर।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: Sections 135-139 में कौशल विकास को अनिवार्य किया गया।
- IT Act 2000: AI के लिए डेटा और तकनीकी ढांचे का नियमन।
भारत में AI और आजीवन सीखने के आर्थिक पहलू
निति आयोग की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 2025 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे AI और डिजिटल कौशल वाले कामगारों की मांग तेज होगी। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम का अनुमान है कि 2025 तक वैश्विक स्तर पर 50% कर्मचारियों को पुनः कौशल विकास की जरूरत होगी क्योंकि AI और ऑटोमेशन उनके काम को प्रभावित करेंगे। भारतीय IT-BPM क्षेत्र, जिसमें 45 लाख से अधिक लोग काम करते हैं, में 30% नौकरियों के ऑटोमेशन का जोखिम है (NASSCOM Strategic Review 2023)। सरकार ने 2023-24 में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के लिए ₹3,500 करोड़ का बजट बढ़ाकर पुनः कौशल विकास को प्रोत्साहित किया है। राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन का लक्ष्य 2026 तक 6 करोड़ लोगों को डिजिटल कौशल में प्रशिक्षित करना है।
- डिजिटल अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार: 2025 तक $1 ट्रिलियन (निति आयोग, 2023)।
- संभावित नौकरी छंटनी: 2030 तक 400 मिलियन (ILO, 2023)।
- नई नौकरियां जिनमें उन्नत कौशल की जरूरत: 200 मिलियन (ILO, 2023)।
- पुनः कौशल विकास की जरूरत: 2025 तक 50% कार्यबल (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, 2023)।
- IT-BPM क्षेत्र में ऑटोमेशन जोखिम: 30% नौकरियां (NASSCOM, 2023)।
- MSDE बजट: 2023-24 में ₹3,500 करोड़।
- राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन: 2026 तक 6 करोड़ लोग।
आजिवन सीखने और AI अनुकूलन के लिए संस्थागत व्यवस्था
भारत में AI के कारण रोजगार में हो रहे बदलावों का जवाब देने के लिए कई संस्थान काम कर रहे हैं। ILO वैश्विक श्रम मानकों और आजीवन सीखने के ढांचे प्रदान करता है। निति आयोग नीति निर्माण और कौशल विकास रणनीति पर मार्गदर्शन देता है। MSDE राष्ट्रीय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण और पुनः कौशल विकास कार्यक्रम चलाता है। NASSCOM IT क्षेत्र में AI के प्रभाव का विश्लेषण करता है और उद्योग के अनुरूप कौशल विकास की वकालत करता है। राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (NCVET) व्यावसायिक शिक्षा की गुणवत्ता और आजीवन सीखने के मानकों को नियंत्रित करता है।
- ILO: वैश्विक श्रम मानक और आजीवन सीखने का समर्थन।
- निति आयोग: AI नीति और कौशल विकास रणनीति।
- MSDE: कौशल प्रशिक्षण और पुनः कौशल विकास का कार्यान्वयन।
- NASSCOM: AI के प्रभाव और कार्यबल की तैयारियों पर उद्योग अंतर्दृष्टि।
- NCVET: व्यावसायिक शिक्षा और आजीवन सीखने का नियमन।
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम जर्मनी आजीवन सीखने और रोजगार में
| मापदंड | भारत | जर्मनी |
|---|---|---|
| युवा बेरोजगारी दर (2023) | 23.7% (ILO, 2023) | 5.6% (ILO, 2023) |
| व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली | खंडित, AI के साथ सीमित एकीकरण | ड्यूल सिस्टम: कक्षा और उद्योग प्रशिक्षण का संयोजन |
| आजीवन सीखने की पहुंच | अनौपचारिक और कमजोर वर्गों के लिए सीमित | संरचित, निरंतर और व्यापक पहुंच |
| AI और ऑटोमेशन के प्रभाव को कम करना | नए नीतिगत प्रयास, कार्यान्वयन में कमी | उद्योग की जरूरतों के अनुसार कौशल का प्रभावी मेल |
जर्मनी का ड्यूल व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली औपचारिक शिक्षा और उद्योग में प्रशिक्षुता को जोड़ती है, जिससे कौशल लगातार अपडेट होते हैं और युवा बेरोजगारी कम रहती है। इसके विपरीत, भारत में कौशल विकास कार्यक्रम AI तकनीकों के साथ पूरी तरह एकीकृत नहीं हैं और अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए आजीवन सीखने के रास्ते सीमित हैं, जिससे नौकरी छंटनी का खतरा बढ़ता है।
भारत के आजीवन सीखने के ढांचे में प्रमुख कमजोरियां
भारत के मौजूदा कौशल विकास प्रयास अक्सर AI और ऑटोमेशन की नई चुनौतियों को पूरी तरह समाहित नहीं करते, जिससे कार्यबल को भविष्य के लिए तैयार करना मुश्किल होता है। आजीवन सीखने के अवसर असमान रूप से वितरित हैं, खासकर अनौपचारिक और कमजोर वर्गों के लिए पहुंच में बाधाएं हैं। इसके अलावा, शैक्षिक संस्थानों, उद्योग और सरकार के बीच समन्वय कमजोर है, जिससे पाठ्यक्रमों को तकनीकी बदलावों के अनुरूप अपडेट करना कठिन होता है।
- प्रशिक्षण कार्यक्रमों में AI से जुड़े कौशल का अपर्याप्त समावेश।
- अनौपचारिक क्षेत्र और कमजोर वर्गों के लिए आजीवन सीखने की सीमित पहुंच।
- पाठ्यक्रम की प्रासंगिकता के लिए उद्योग-शिक्षा-सरकार समन्वय कमजोर।
- निरंतर सीखने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और प्रोत्साहन की कमी।
आगे का रास्ता: AI के प्रभाव से निपटने के लिए आजीवन सीखने को मजबूत बनाना
- व्यावसायिक और उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में AI और डिजिटल साक्षरता के मॉड्यूल शामिल करना।
- विशेषकर अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए मॉड्यूलर, लचीले आजीवन सीखने के प्लेटफॉर्म का विस्तार।
- कौशल विकास को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी बढ़ाना।
- लगातार अपस्किलिंग और रिस्किलिंग को प्रोत्साहित करने के लिए तकनीकी उपकरणों का उपयोग।
- कौशल अंतर और रोजगार परिणामों की निगरानी के लिए मजबूत मूल्यांकन तंत्र लागू करना।
- आजीवन सीखना मुख्यतः कार्यबल में शामिल होने से पहले की प्रारंभिक शिक्षा पर केंद्रित होता है।
- ILO का अनुमान है कि 2030 तक AI के कारण विश्व में 400 मिलियन नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
- राष्ट्रीय डिजिटल साक्षरता मिशन का लक्ष्य 2026 तक भारत में 6 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करना है।
- संविधान का Article 41 काम और शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करता है।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में कौशल विकास और पुनः कौशल विकास के प्रावधान शामिल हैं।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 सीधे आजीवन सीखने के कार्यक्रमों को नियंत्रित करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के रोजगार पर प्रभाव को कम करने में आजीवन सीखने की भूमिका का मूल्यांकन करें। आजीवन सीखने के लिए मौजूदा संवैधानिक, कानूनी और संस्थागत ढांचे पर चर्चा करें और उनके क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों की पहचान करें। AI के कारण नौकरी छंटनी से निपटने के लिए आजीवन सीखने को मजबूत करने के उपाय सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (Governance और सामाजिक मुद्दे) – कौशल विकास और रोजगार नीतियां
- झारखंड का परिप्रेक्ष्य: झारखंड का बड़ा अनौपचारिक कार्यबल और जनजातीय आबादी आजीवन सीखने और डिजिटल कौशल तक पहुंच में बाधाओं का सामना कर रही है, जिससे AI के कारण नौकरी छंटनी का खतरा बढ़ता है।
- मुख्य बिंदु: राज्य-विशेष चुनौतियों को उजागर करना, समावेशी आजीवन सीखने के कार्यक्रमों की जरूरत और झारखंड के व्यावसायिक प्रशिक्षण में AI कौशल के समावेश पर जोर।
ILO के ढांचे के अनुसार आजीवन सीखना क्या है?
आजीवन सीखना उस निरंतर, स्वैच्छिक और स्वयं प्रेरित ज्ञान और कौशल अर्जन को कहते हैं जो पूरे जीवन में बदलती नौकरी की जरूरतों, खासकर तकनीकी बदलावों जैसे AI के कारण, के अनुसार खुद को ढालने के लिए किया जाता है (ILO Future of Work Report, 2023)।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आजीवन सीखने को कैसे बढ़ावा देती है?
NEP 2020 लचीले, मॉड्यूलर शिक्षा प्रणाली की वकालत करती है जिसमें कई प्रवेश और निकास बिंदु होते हैं, जो निरंतर कौशल विकास और आजीवन सीखने को प्रोत्साहित करते हैं ताकि सीखने वाले बदलती आर्थिक मांगों के लिए तैयार हो सकें।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के कौशल विकास से जुड़े मुख्य प्रावधान क्या हैं?
सामाजिक सुरक्षा संहिता के Sections 135-139 में अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए कौशल विकास, पुनः कौशल विकास और अपस्किलिंग को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल करना अनिवार्य किया गया है ताकि उनकी रोजगार योग्यता बढ़ाई जा सके।
भारत का मौजूदा कौशल विकास ढांचा AI चुनौतियों के मुकाबले क्यों अपर्याप्त है?
यह उभरती AI तकनीकों के साथ पूरी तरह समन्वित नहीं है, अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए पहुंच सीमित है और संबंधित पक्षों के बीच समन्वय कमजोर है, जिससे निरंतर और समावेशी आजीवन सीखने के अवसर सीमित रह जाते हैं।
भारत जर्मनी के व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रणाली से क्या सीख सकता है?
जर्मनी की ड्यूल प्रणाली औपचारिक शिक्षा को उद्योग में प्रशिक्षुता के साथ जोड़ती है, जिससे कौशल लगातार श्रम बाजार की जरूरतों के अनुरूप रहते हैं और ऑटोमेशन के बावजूद युवा बेरोजगारी कम रहती है।
अधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई के लिए
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
लर्नप्रो की संपादकीय सामग्री सिविल सेवा तैयारी में अनुभवी विषय विशेषज्ञों द्वारा शोधित और समीक्षित है। हमारे लेख सरकारी स्रोतों, NCERT पाठ्यपुस्तकों, मानक संदर्भ सामग्री और प्रतिष्ठित प्रकाशनों जैसे द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस और PIB से लिए गए हैं।
सामग्री को नवीनतम पाठ्यक्रम परिवर्तनों, परीक्षा पैटर्न और वर्तमान घटनाक्रमों के अनुसार नियमित रूप से अपडेट किया जाता है। सुधार या प्रतिक्रिया के लिए admin@learnpro.in पर संपर्क करें।
