परिचय: अमेरिका में गेहूं जैव प्रौद्योगिकी में नवाचार
अमेरिकी शोधकर्ता संकर (Hybrid) और जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) गेहूं की नई किस्में विकसित कर रहे हैं ताकि पैदावार की गिरावट और कीटों की चुनौतियों से निपटा जा सके। 2023 तक अमेरिका में संकर गेहूं की खेती लगभग 5% तक बढ़ चुकी है (USDA Crop Report)। वहीं, 2025-2027 के बीच वाणिज्यिक GM गेहूं के बाजार में आने की संभावना है (USDA Biotechnology Regulatory Services)। इन तकनीकों से 10-15% तक पैदावार बढ़ाने का लक्ष्य है, जिससे अमेरिकी गेहूं क्षेत्र को सालाना करीब 500 मिलियन डॉलर का लाभ हो सकता है। इस प्रक्रिया में जीन एडिटिंग और संकरण का उपयोग कर गेहूं की उपज और टिकाऊपन को बेहतर बनाया जा रहा है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: जैव प्रौद्योगिकी, कृषि, आर्थिक विकास
- निबंध: कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका
- प्रारंभिक परीक्षा: संकर और GM फसलों में अंतर; भारत में GM फसलों के नियामक ढांचे
जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलें: तकनीकी परिचय
GM फसलों में सीधे डीएनए में बदलाव कर कीट प्रतिरोध, हर्बिसाइड सहिष्णुता या पोषण सुधार जैसे गुण जोड़े जाते हैं। इसके लिए जीन की पहचान, अलगाव और जीन गन या एग्रोबैक्टीरियम जैसे तरीकों से जीन ट्रांसफर किया जाता है। GM फसलें ट्रांसजेनिक (विभिन्न प्रजातियों से जीन), सिसजेनिक (एक ही प्रजाति से जीन) या मल्टीट्रेट स्टैकिंग के रूप में हो सकती हैं। विश्व में हर्बिसाइड सहिष्णुता और कीट प्रतिरोध GM फसलों के प्रमुख गुण हैं (ISAAA 2023)।
- 2023 तक GM फसलें विश्व में 190 मिलियन हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई जा रही हैं (ISAAA)।
- भारत में केवल Bt कपास को GM फसल के रूप में मंजूरी मिली है, जिसमें Bacillus thuringiensis के जीन होते हैं जो गुलाबी बॉलवर्म से सुरक्षा देते हैं।
- संकर फसलें नियंत्रित संकरण के जरिए उत्पन्न होती हैं, जो आनुवंशिक स्तर पर डीएनए को बदलती नहीं हैं, लेकिन हेटेरोसिस के कारण पैदावार और ताकत बढ़ाती हैं।
भारत का GM फसलों के लिए नियामक ढांचा
Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (Section 3, Rules 1989) के तहत भारत में GM फसलों की वाणिज्यिक मंजूरी का शीर्ष निकाय है। Seeds Act, 1966 बीज प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए लागू है। Bt कपास की सफलता के बावजूद, भारत ने गेहूं सहित अन्य GM खाद्य फसलों को मंजूरी नहीं दी है, जो नियामक सतर्कता, जैव सुरक्षा चिंताओं और शासन की जटिलताओं के कारण है।
- GEAC पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के अंतर्गत काम करता है।
- Bt बैंगन और DMH-11 सरसों की मंजूरी प्रक्रिया लंबित है।
- भारत की राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी विकास रणनीति (2015-2020) में GM फसलों सहित जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान के लिए INR 8,000 करोड़ (~USD 1 बिलियन) आवंटित किए गए।
आर्थिक प्रभाव और बाज़ार की स्थिति
वैश्विक संकर गेहूं बाजार 2027 तक USD 1.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 7.5% की वार्षिक वृद्धि दर है (MarketWatch 2023)। भारत में Bt कपास ने पैदावार 24% और किसानों की आय 50% तक बढ़ाई है (ISAAA 2022)। वहीं, अमेरिका में गेहूं की पैदावार लगभग 50 बुशेल प्रति एकड़ स्थिर है। संकर और GM गेहूं 10-15% तक पैदावार बढ़ा सकते हैं, जिससे अमेरिकी किसानों को सालाना 500 मिलियन डॉलर का लाभ हो सकता है। भारत में गेहूं की पैदावार वृद्धि दर 0.9% प्रति वर्ष है, जो वैश्विक मक्का की 2.5% दर से कम है (FAO 2023), इसलिए नवाचार की जरूरत है।
GM फसलों के नियमन में संस्थागत भूमिका
- GEAC (भारत): GM फसलों की वाणिज्यिक मंजूरी और जैव सुरक्षा मूल्यांकन करता है।
- USDA-APHIS (अमेरिका): फील्ड ट्रायल और वाणिज्यिकरण का नियमन करता है, पौध स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित।
- EPA (अमेरिका): पर्यावरण सुरक्षा देखता है, विशेषकर कीट-प्रतिरोधी फसलों के लिए।
- FDA (अमेरिका): GM उत्पादों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- ISAAA: जैव प्रौद्योगिकी फसलों के वैश्विक डेटा और प्रभाव प्रदान करता है।
भारत और अमेरिका के नियामक ढांचे की तुलना
| पहलू | संयुक्त राज्य अमेरिका | भारत |
|---|---|---|
| नियामक ढांचा | 1986 का समन्वित फ्रेमवर्क जिसमें USDA-APHIS, EPA, FDA शामिल हैं | पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत GEAC, बीज अधिनियम द्वारा प्रमाणन |
| मंजूरी की गति | सुगम और तेज, वाणिज्यिकरण में तेजी | सावधानीपूर्ण, जटिल और विलंबित प्रक्रिया |
| GM फसल अपनाना | सोयाबीन और मक्का में 90% से अधिक | केवल Bt कपास वाणिज्यिक रूप से मंजूर |
| पारदर्शिता और वैज्ञानिक आधार | स्पष्ट दिशानिर्देश, विज्ञान आधारित जोखिम मूल्यांकन | एकीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया का अभाव, नियामक अनिश्चितता |
भारत की जैव प्रौद्योगिकी नीति में मुख्य कमी
भारत में GM खाद्य फसलों जैसे गेहूं के लिए एकीकृत, पारदर्शी और विज्ञान आधारित नियामक प्रक्रिया का अभाव है। इससे मंजूरी में देरी, किसानों में अनिश्चितता और पैदावार व आय बढ़ाने के अवसर गंवाए जा रहे हैं। अमेरिका में बहु-एजेंसी समन्वय और स्पष्ट नियामक मार्ग होने से नवाचार तेजी से अपनाया जाता है और बाजार में तेजी आती है।
महत्व और आगे का रास्ता
- भारत को GEAC की प्रक्रियाओं को सरल और विज्ञान आधारित मंजूरी के लिए समयबद्ध बनाना चाहिए।
- MoEF&CC, कृषि मंत्रालय और खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों के बीच समन्वित नियामक ढांचा अपनाना चाहिए ताकि शासन में फूट कम हो।
- अमेरिका के संकर और GM गेहूं वाणिज्यिकरण से सीख लेकर पैदावार में सुधार और जलवायु अनुकूलता पर ध्यान देना चाहिए।
- किसानों और उपभोक्ताओं में विश्वास बढ़ाने के लिए सार्वजनिक जागरूकता और जैव सुरक्षा संचार को मजबूत करना चाहिए।
- भारत की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप संकर और GM गेहूं के अनुसंधान एवं विकास में निवेश बढ़ाना चाहिए ताकि खाद्य सुरक्षा मजबूत हो।
- संकर फसलों में पौधे के जीनोम में सीधे विदेशी जीन डाले जाते हैं।
- GM फसलें ट्रांसजेनिक या सिसजेनिक हो सकती हैं, जो डाले गए जीन के स्रोत पर निर्भर करता है।
- संकर फसलें नियंत्रित संकरण के जरिए हेटेरोसिस का लाभ उठाती हैं बिना आणविक स्तर पर डीएनए बदले।
- Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) कृषि मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 GM फसलों की मंजूरी का कानूनी आधार है।
- Seeds Act, 1966 भारत में बीज प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण करता है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
संकर और जेनेटिकली मॉडिफाइड गेहूं ने अमेरिका में कृषि उत्पादकता बढ़ाने में क्या भूमिका निभाई है, इसका आलोचनात्मक विश्लेषण करें और भारत के जैव प्रौद्योगिकी नियामक ढांचे में सुधार के लिए अमेरिका से क्या सीख ली जा सकती है, इस पर चर्चा करें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (GS: विज्ञान और प्रौद्योगिकी), पेपर 3 (कृषि और आर्थिक विकास)
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की कृषि में गेहूं महत्वपूर्ण फसल है; उन्नत किस्मों को अपनाने से स्थानीय किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होगी।
- मुख्य बिंदु: भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र की नियामक चुनौतियों पर चर्चा करें और झारखंड की कृषि नीतियों में संकर और GM फसलों को शामिल करने के तरीके बताएं।
संकर गेहूं और जेनेटिकली मॉडिफाइड गेहूं में क्या अंतर है?
संकर गेहूं दो अलग-अलग आनुवंशिक रेखाओं के क्रॉसब्रीडिंग से बनता है, जिससे हेटेरोसिस का लाभ मिलता है और पैदावार बढ़ती है, लेकिन इसमें सीधे डीएनए में बदलाव नहीं होता। जेनेटिकली मॉडिफाइड गेहूं में सीधे जीन डाले या संपादित किए जाते हैं ताकि कीट प्रतिरोध या हर्बिसाइड सहिष्णुता जैसे गुण जोड़े जा सकें।
भारत में Genetic Engineering Appraisal Committee (GEAC) की क्या भूमिका है?
GEAC पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत सबसे उच्च नियामक निकाय है, जो भारत में जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों की वाणिज्यिक रिलीज की मंजूरी देता है।
भारत ने गेहूं जैसे GM खाद्य फसलों को मंजूरी देने में सतर्कता क्यों बरती है?
भारत का नियामक ढांचा जटिल और पारदर्शिता की कमी वाला है, जिससे जैव सुरक्षा चिंताएं, सार्वजनिक विरोध और मंजूरी में देरी होती है, भले ही खाद्य सुरक्षा के लिए लाभ संभावित हों।
अमेरिका का GM फसल नियामक ढांचा भारत से कैसे अलग है?
अमेरिका में USDA-APHIS, EPA और FDA की समन्वित प्रणाली है, जो स्पष्ट, विज्ञान आधारित और तेज मंजूरी प्रक्रिया प्रदान करती है, जिससे GM फसलों का तेजी से वाणिज्यीकरण और व्यापक अपनापन होता है।
भारत के किसानों को Bt कपास से क्या आर्थिक लाभ मिले हैं?
Bt कपास ने भारत में पैदावार 24% और किसानों की आय 50% तक बढ़ाई है, साथ ही कीटनाशकों के उपयोग में भारी कमी आई है (ISAAA 2022, GEAC वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 26 March 2026 | अंतिम अपडेट: 8 April 2026
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