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गुजरात में मध्याह्न भोजन योजना: वर्तमान रुझान और चुनौतियां

2021 से 2023 के बीच गुजरात में मध्याह्न भोजन योजना में एक विरोधाभासी स्थिति देखी गई। बजट आवंटन 300 करोड़ से बढ़कर 345 करोड़ रुपये हो गया, यानी 15% की वृद्धि हुई, लेकिन प्रतिदिन परोसे जाने वाले भोजन की संख्या करीब 10% घटकर 1.2 करोड़ से 1.08 करोड़ रह गई (गुजरात राज्य बजट दस्तावेज 2023; गुजरात शिक्षा विभाग वार्षिक रिपोर्ट 2023)। यह गिरावट Article 21A के तहत योजना के संवैधानिक समर्थन और National Food Security Act, 2013 के तहत कानूनी दायित्व के बावजूद हुई। यह असमानता खरीद प्रक्रिया, बढ़ती लागत और प्रशासनिक कमियों को दर्शाती है, जो गुजरात में योजना के क्रियान्वयन को प्रभावित कर रही हैं।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय और कल्याण योजनाएं — मध्याह्न भोजन योजना के क्रियान्वयन और चुनौतियां
  • GS पेपर 2: राजनीति विज्ञान — Article 21A के तहत संवैधानिक प्रावधान
  • निबंध: सार्वजनिक नीति और सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं

मध्याह्न भोजन योजना का संवैधानिक और कानूनी ढांचा

मध्याह्न भोजन योजना Article 21A के तहत संचालित होती है, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है। National Food Security Act (NFSA), 2013 की धारा 4 के तहत बच्चों को पोषण सहायता देना कानूनी दायित्व है, जिससे मध्याह्न भोजन योजना एक अधिकार के रूप में स्थापित हुई। यह योजना केंद्र सरकार के Ministry of Education (MoE) द्वारा National Programme of Nutritional Support to Primary Education (NP-NSPE) के तहत 1995 से संचालित है। गुजरात केंद्र की गाइडलाइंस के अनुसार राज्य स्तर पर इसे लागू करता है, जिसका निरीक्षण गुजरात राज्य शिक्षा विभाग करता है।

बढ़ते खर्च और घटते भोजन संख्या के आर्थिक कारण

गुजरात की मध्याह्न भोजन योजना का बजट वित्त वर्ष 2021-22 में 300 करोड़ था, जो 2023-24 में बढ़कर 345 करोड़ रुपये हो गया, यानी 15% की वृद्धि (गुजरात राज्य बजट 2023)। इसके बावजूद, इसी अवधि में भोजन वितरण 10% घटकर 1.2 करोड़ से 1.08 करोड़ हो गया (गुजरात शिक्षा विभाग वार्षिक रिपोर्ट 2023)। इसके पीछे मुख्य कारण खाद्य महंगाई और प्रशासनिक खर्चों में वृद्धि है।

  • खाद्य महंगाई: 2022-23 में गुजरात में खाद्य महंगाई 8.5% बढ़ी, जिससे अनाज और अन्य सामग्री की खरीद लागत बढ़ी (Ministry of Statistics and Programme Implementation)।
  • प्रति भोजन लागत: 2021 से 2023 के बीच प्रति भोजन की लागत 5.50 रुपये से बढ़कर 6.20 रुपये हो गई, जो महंगाई और गुणवत्ता सुधार को दर्शाती है (गुजरात शिक्षा विभाग)।
  • प्रशासनिक खर्च: खरीद और लॉजिस्टिक्स में बदलाव से प्रशासनिक खर्च 12% बढ़े, जिसमें परिवहन और भंडारण पर 20% अधिक खर्च हुआ, जिससे भोजन वितरण की दक्षता प्रभावित हुई (गुजरात राज्य लेखा परीक्षा रिपोर्ट 2023; गुजरात शिक्षा विभाग)।

संस्थागत भूमिकाएं और क्रियान्वयन में अड़चनें

Ministry of Education (MoE) योजना का केंद्रीय नोडल एजेंसी है, जबकि गुजरात राज्य शिक्षा विभाग इसका क्रियान्वयन और निगरानी करता है। अनाज की आपूर्ति Food Corporation of India (FCI) द्वारा की जाती है और पोषण संबंधी समन्वय Integrated Child Development Services (ICDS) करता है। खर्च और क्रियान्वयन की गुणवत्ता की जांच Comptroller and Auditor General of India (CAG) करता है।

  • केंद्रीकृत खरीद: गुजरात की केंद्रीकृत खरीद प्रणाली लॉजिस्टिक्स की जटिलता और लागत बढ़ाती है, जिससे देरी और अक्षमता होती है।
  • लॉजिस्टिकल चुनौतियां: बढ़े हुए परिवहन और भंडारण खर्च से भोजन के लिए उपलब्ध धन कम होता है, जिसके कारण बजट बढ़ने के बावजूद भोजन की संख्या घटती है।
  • प्रशासनिक अक्षमताएं: बढ़े हुए खर्च और प्रक्रिया में देरी समय पर भोजन वितरण में बाधा डालती है और योजना की पहुंच घटाती है।

तुलनात्मक अध्ययन: गुजरात और तमिलनाडु की मध्याह्न भोजन योजनाएं

तमिलनाडु की योजना गुजरात से अलग मॉडल अपनाती है, जिसने महंगाई के बावजूद भोजन की संख्या को बनाए रखा या बढ़ाया है। वहां विकेंद्रीकृत खरीद और सामुदायिक रसोईयां संचालित होती हैं, जो लागत कम करती हैं और वितरण दक्षता बढ़ाती हैं।

पहलूगुजराततमिलनाडु
बजट वृद्धि (2021-23)15% वृद्धि (300 से 345 करोड़)महंगाई के अनुरूप मध्यम वृद्धि
भोजन संख्या (2021-23)10% की गिरावट (1.2 करोड़ से 1.08 करोड़)5% की वृद्धि
खरीद मॉडलFCI के माध्यम से केंद्रीकृत खरीदविकेंद्रीकृत खरीद, सामुदायिक रसोईयां
प्रति भोजन लागत5.50 से 6.20 रुपये तक बढ़ीस्थिर, स्थानीय स्रोत और पैमाने की बचत के कारण
प्रशासनिक खर्च12% की वृद्धिस्थानीय प्रबंधन के कारण कम खर्च
वितरण दक्षता पर प्रभावलॉजिस्टिक्स और भंडारण लागत से दक्षता घटती हैबेहतर दक्षता और समय पर वितरण

संरचनात्मक कमजोरी: केंद्रीकृत खरीद और इसके परिणाम

गुजरात की केंद्रीकृत खरीद प्रणाली एक मुख्य कमजोरि है। इससे परिवहन और भंडारण लागत बढ़ती है, अनाज की आपूर्ति में देरी होती है और प्रशासनिक खर्च अधिक होते हैं। इन कारणों से बजट बढ़ने के बावजूद भोजन की संख्या कम हो रही है। इसके विपरीत, तमिलनाडु का विकेंद्रीकृत मॉडल लागत कम करता है और वितरण समय में सुधार करता है, जिससे फंड का बेहतर उपयोग होता है।

आगे का रास्ता: दक्षता और भोजन कवरेज बढ़ाना

  • लॉजिस्टिक खर्च और देरी कम करने के लिए विकेंद्रीकृत खरीद अपनाएं।
  • भोजन की गुणवत्ता और वितरण गति बढ़ाने के लिए स्थानीय सामुदायिक रसोईयां मजबूत करें।
  • रियल-टाइम निगरानी और ऑडिट के जरिए अड़चनों की पहचान कर प्रशासनिक खर्च घटाएं।
  • महंगाई और बढ़ती लागत के अनुसार बजट आवंटन में लचीलापन लाएं।
  • FCI, राज्य विभागों और ICDS के बीच बेहतर समन्वय से आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मध्याह्न भोजन योजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह योजना भारत के संविधान के Article 21A के तहत अनिवार्य है।
  2. National Food Security Act, 2013, स्कूलों में बच्चों को पोषण सहायता कानूनी रूप से अनिवार्य करता है।
  3. यह योजना केवल Ministry of Women and Child Development द्वारा लागू की जाती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि Article 21A निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है, जिसके तहत यह योजना संचालित होती है। कथन 2 भी सही है क्योंकि NFSA, 2013 पोषण सहायता को कानूनी रूप देता है। कथन 3 गलत है क्योंकि योजना केवल Ministry of Women and Child Development द्वारा नहीं, बल्कि Ministry of Education द्वारा लागू की जाती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
मध्याह्न भोजन योजनाओं में खरीद मॉडल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. केंद्रीकृत खरीद लॉजिस्टिकल लागत और देरी बढ़ाती है।
  2. विकेंद्रीकृत खरीद सामुदायिक रसोईयों को लागत कम करने और वितरण सुधारने में मदद करती है।
  3. केंद्रीकृत खरीद हमेशा विकेंद्रीकृत खरीद से अधिक प्रभावी होती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
गुजरात और तमिलनाडु के उदाहरणों के आधार पर कथन 1 और 2 सही हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि केंद्रीकृत खरीद हर स्थिति में अधिक प्रभावी नहीं होती।

मुख्य प्रश्न

बजट आवंटन बढ़ने के बावजूद गुजरात में मध्याह्न भोजन वितरण में कमी के कारणों का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। राज्य इस योजना की दक्षता कैसे बढ़ा सकता है? (250 शब्द)

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2: शासन और सामाजिक कल्याण योजनाएं
  • झारखंड का संदर्भ: झारखंड में भी मध्याह्न भोजन वितरण में लॉजिस्टिकल अक्षमताओं और बढ़ती खाद्य महंगाई की चुनौतियां हैं, जिससे गुजरात का अनुभव तुलनात्मक नीति अध्ययन के लिए उपयोगी है।
  • मुख्य बिंदु: उत्तर में संवैधानिक दायित्व, खरीद चुनौतियां, महंगाई का प्रभाव और विकेंद्रीकृत खरीद तथा स्थानीय निगरानी को बढ़ावा देने के सुझाव शामिल करें।
मध्याह्न भोजन योजना का संवैधानिक प्रावधान क्या है?

मध्याह्न भोजन योजना Article 21A के तहत संचालित होती है, जो 6 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार देता है।

National Food Security Act, 2013 का मध्याह्न भोजन योजना से क्या संबंध है?

National Food Security Act, 2013 की धारा 4 के तहत शैक्षणिक संस्थानों में बच्चों को पोषण सहायता, जिसमें मध्याह्न भोजन भी शामिल है, कानूनी रूप से अनिवार्य है।

गुजरात में बजट बढ़ने के बावजूद मध्याह्न भोजन संख्या में कमी क्यों आई?

बढ़ती खाद्य महंगाई, प्रशासनिक खर्चों में वृद्धि और केंद्रीकृत खरीद प्रणाली की वजह से लॉजिस्टिकल अड़चनें आईं, जिससे भोजन वितरण कम हुआ।

तमिलनाडु ने किस खरीद मॉडल से मध्याह्न भोजन संख्या बढ़ाई या बनाए रखी?

तमिलनाडु विकेंद्रीकृत खरीद मॉडल अपनाता है, जिसमें सामुदायिक रसोईयां संचालित होती हैं, जो लागत कम करती हैं और वितरण दक्षता बढ़ाती हैं।

मध्याह्न भोजन योजना के खर्च का लेखा परीक्षा कौन करता है?

Comptroller and Auditor General of India (CAG) इस योजना के खर्च और क्रियान्वयन की जांच करता है।

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