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परिचय: ग्रेट निकोबार मसौदा योजना का संदर्भ और महत्व

ग्रेट निकोबार मसौदा योजना, जो 2024 की शुरुआत में जारी हुई, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर आर्थिक विकास का मुख्य इंजन पर्यटन को मानती है। इस योजना का नेतृत्व ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNDA) कर रही है, जो पर्यटन मंत्रालय (MoT) और अंडमान और निकोबार प्रशासन (ANITA) के साथ समन्वय में है। इसमें पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से बंदरगाह, हवाई अड्डे और आतिथ्य सुविधाओं जैसे बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है। लगभग 8,000 की आबादी (2011 की जनगणना) और 910 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस द्वीप का विकास भारत के 1.5 ट्रिलियन रुपये के घरेलू पर्यटन बाजार से जुड़ने का लक्ष्य रखता है, जिसमें अगले दस वर्षों में पर्यटन का द्वीप की GDP में 40% योगदान होने का अनुमान है।

यह पहल दोहरी दृष्टि से महत्वपूर्ण है: एक ओर यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप पर आर्थिक विकास को बढ़ावा देती है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय संवेदनशीलता और आदिवासी अधिकारों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करती है, क्योंकि ग्रेट निकोबार जैव विविधता से भरपूर और जनजातीय आबादी वाला क्षेत्र है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: आर्थिक विकास (पर्यटन अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा), पर्यावरण और पारिस्थितिकी (द्वीप पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता संरक्षण)
  • GS पेपर 1: भारतीय समाज (जनजातीय अधिकार, स्वदेशी समुदाय)
  • निबंध: द्वीप क्षेत्रों में विकास और पर्यावरणीय स्थिरता का संतुलन

आर्थिक अनुमान और संस्थागत भूमिकाएं

मसौदा योजना ग्रेट निकोबार में पर्यटन क्षेत्र में 12% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) का अनुमान लगाती है, जो राष्ट्रीय औसत 6.9% (पर्यटन मंत्रालय, 2023) से कहीं अधिक है। योजना के अनुसार 2034 तक 15,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे, साथ ही विदेशी पर्यटकों की संख्या में सालाना 25% की वृद्धि होगी। यह योजना भारत के व्यापक पर्यटन विकास के साथ तालमेल रखती है, जो 1.5 ट्रिलियन रुपये के घरेलू पर्यटन बाजार से जुड़ा है (आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24)।

  • पर्यटन मंत्रालय (MoT): पर्यटन विकास के लिए नीतियां बनाना, प्रचार और निगरानी।
  • ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNDA): बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं का कार्यान्वयन और नियंत्रण।
  • अंडमान और निकोबार प्रशासन (ANITA): स्थानीय शासन और जनजातीय परिषदों के साथ समन्वय।
  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC): पर्यावरणीय मंजूरी और नियामक निगरानी।
  • भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (ICFRE): पारिस्थितिक प्रभाव मूल्यांकन और अनुसंधान सहयोग।
  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA): जैव विविधता संरक्षण और सतत उपयोग की निगरानी।

विकास के लिए कानूनी और संवैधानिक ढांचे

यह योजना विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने वाले जटिल कानूनी ढांचे के अंतर्गत काम करती है:

  • संविधान का अनुच्छेद 243W स्थानीय शासन में पंचायत की भागीदारी को अनिवार्य करता है, जो ग्रेट निकोबार के जनजातीय परिषदों और स्थानीय निकायों पर लागू होता है।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौरान पर्यावरणीय सुरक्षा लागू करने का अधिकार MoEFCC को देता है।
  • वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (धारा 2 और 35) संरक्षित क्षेत्रों में गतिविधियों को नियंत्रित करता है, जो ग्रेट निकोबार के जैव विविधता हॉटस्पॉट के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा) विनियमन, 1956 स्वदेशी जनजातियों की सुरक्षा करता है, विस्थापन को सीमित करता है और विकास कार्यों के लिए सहमति अनिवार्य करता है।
  • तटीय क्षेत्र नियमन क्षेत्र (CRZ) अधिसूचना, 2019 बंदरगाह और पर्यटन बुनियादी ढांचे के लिए तटीय क्षेत्र प्रबंधन को नियंत्रित करती है।
  • वन संरक्षण अधिनियम, 1980 (धारा 2) वन भूमि के उपयोग में बदलाव के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक करता है, जो द्वीप के वन आवरण के लिए अहम है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले जैसे M.C. Mehta बनाम भारत संघ (1986) ने सतत विकास का सिद्धांत स्थापित किया है, जिसमें पर्यावरणीय प्रभाव आकलन और सावधानीपूर्वक उपाय अनिवार्य हैं।

पारिस्थितिक संवेदनशीलता और जोखिम

ग्रेट निकोबार पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है, जिसमें स्थानीय प्रजातियां और संरक्षित वन शामिल हैं। मसौदा योजना में पर्यटन पर जोर से आवासीय क्षेत्र के विखंडन, प्रवाल भित्ति क्षरण और ताजे पानी के स्रोतों पर दबाव बढ़ने का खतरा है यदि इसे नियंत्रित न किया गया। भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद (ICFRE) ने वन अधिकार अधिनियम, 2006 और जनजातीय संरक्षण कानूनों के अनुरूप कड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की आवश्यकता पर जोर दिया है।

मालदीव के अनुभव से पता चलता है कि पर्यटन आधारित द्वीप अर्थव्यवस्थाओं में पर्यावरणीय लागतें क्या हो सकती हैं: प्रवाल भित्ति का सफेद होना, ताजे पानी की कमी, और कचरा प्रबंधन की समस्याएं सामने आई हैं, जबकि 2023 में पर्यटन GDP का 30% से अधिक हिस्सा था और 1.7 मिलियन पर्यटक आए थे। ग्रेट निकोबार की योजना को ऐसी चुनौतियों से बचने के लिए टिकाऊ पर्यटन प्रथाओं को अपनाना होगा।

सामाजिक पहलू: जनजातीय अधिकार और स्थानीय शासन

द्वीप पर स्वदेशी जनजातियां रहती हैं, जिन्हें अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा) विनियमन, 1956 के तहत सुरक्षा मिली है। मसौदा योजना में जनजातीय सहमति तंत्र और अनुच्छेद 243W के तहत जनजातीय शासन के समावेशन का पर्याप्त उल्लेख नहीं है। विस्थापन और सांस्कृतिक क्षरण का खतरा तब तक बना रहेगा जब तक जनजातीय अधिकारों को पूरी तरह से शामिल नहीं किया जाता और सहभागी योजना नहीं बनाई जाती।

  • भूमि परिवर्तन या बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से पहले जनजातीय समुदायों से कानूनी रूप से परामर्श आवश्यक है।
  • स्थानीय पंचायतों और जनजातीय परिषदों को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
  • पर्यावरणीय सुरक्षा में पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को शामिल करना जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करेगा।

तुलना: ग्रेट निकोबार बनाम मालदीव पर्यटन मॉडल

पहलूग्रेट निकोबार द्वीपमालदीव
पर्यटन का GDP में योगदान2034 तक अनुमानित 40%2023 में 30%
पर्यटक आगमनसालाना 25% वृद्धि अपेक्षित2023 में 1.7 मिलियन
पारिस्थितिक चुनौतियांसंभावित प्रवाल भित्ति क्षरण, ताजे पानी की कमीप्रवाल सफेदी, ताजे पानी की कमी, कचरा प्रबंधन समस्याएं
नियामक ढांचाजनजातीय अधिकारों का समुचित समावेशन अधूरा, कड़े पर्यावरणीय प्रभाव आकलन लंबितस्थापित लेकिन तीव्र विकास से चुनौतीपूर्ण
रोजगार संभावनाएं15,000 नौकरियां अनुमानितमहत्वपूर्ण पर मौसमी और सेवा क्षेत्र केंद्रित

आगे का रास्ता: विकास और स्थिरता का संतुलन

  • वन अधिकार अधिनियम, 2006 और जनजातीय संरक्षण कानूनों के अनुरूप व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन तंत्र लागू करें, इससे पहले कि परियोजनाओं को मंजूरी दी जाए।
  • अनुच्छेद 243W के तहत पंचायतों के माध्यम से जनजातीय भागीदारी को मजबूत करें ताकि सहमति और लाभ साझा सुनिश्चित हो सके।
  • पर्यटक संख्या पर सीमाएं, पर्यावरण के अनुकूल बुनियादी ढांचा और कचरा प्रबंधन प्रणाली सहित टिकाऊ पर्यटन प्रथाओं को अपनाएं।
  • MoT, MoEFCC, GNDA और जनजातीय निकायों के बीच समन्वय बढ़ाएं ताकि एकीकृत योजना बन सके।
  • मालदीव की पारिस्थितिक चुनौतियों से सीख लेकर पर्यावरणीय क्षरण और संसाधन दबाव को रोकने के उपाय करें।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
ग्रेट निकोबार मसौदा योजना के पर्यटन विकास के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. योजना अगले 10 वर्षों में द्वीप की GDP में पर्यटन के 40% योगदान का अनुमान लगाती है।
  2. वन संरक्षण अधिनियम, 1980 द्वीप होने के कारण ग्रेट निकोबार पर लागू नहीं होता।
  3. अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा) विनियमन, 1956 स्वदेशी जनजातियों को विस्थापन से बचाता है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है क्योंकि मसौदा योजना अगले 10 वर्षों में पर्यटन के 40% GDP योगदान का अनुमान लगाती है। कथन 2 गलत है क्योंकि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 सभी वन भूमि उपयोग परिवर्तन पर लागू होता है, जिसमें द्वीप भी शामिल हैं। कथन 3 सही है क्योंकि 1956 का विनियमन स्वदेशी जनजातियों को विस्थापन से बचाता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
ग्रेट निकोबार के पर्यटन विकास में संस्थागत भूमिकाओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करता है।
  2. पर्यटन मंत्रालय (MoT) पारिस्थितिक प्रभाव आकलन के लिए जिम्मेदार है।
  3. ग्रेट निकोबार डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNDA) परियोजना कार्यान्वयन और निगरानी का कार्य करती है।
  • aकेवल 1 और 3
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; MoEFCC पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करता है। कथन 2 गलत है; पारिस्थितिक प्रभाव आकलन ICFRE और MoEFCC द्वारा किया जाता है, MoT द्वारा नहीं। कथन 3 सही है; GNDA परियोजना के कार्यान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी रखती है।

मुख्य प्रश्न

ग्रेट निकोबार मसौदा योजना में पर्यटन को मुख्य विकास चालक के रूप में अपनाने का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। इसके कानूनी, पारिस्थितिक और सामाजिक चुनौतियों पर चर्चा करें और द्वीप क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित करने के उपाय सुझाएं।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 - आर्थिक विकास और पर्यावरण
  • झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड के जनजातीय शासन और वन अधिकार मुद्दे विकास परियोजनाओं में स्वदेशी अधिकारों के समावेशन के लिए तुलनात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
  • मुख्य बिंदु: उत्तरों में संवैधानिक जनजातीय संरक्षण, पर्यावरणीय सुरक्षा, और संसाधन समृद्ध क्षेत्रों में सहभागी शासन की आवश्यकता को उजागर करें।
ग्रेट निकोबार मसौदा योजना में पर्यटन का अनुमानित आर्थिक प्रभाव क्या है?

मसौदा योजना अगले 10 वर्षों में ग्रेट निकोबार की GDP में पर्यटन के 40% योगदान का अनुमान लगाती है, जिसमें पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये का निवेश और 2034 तक 15,000 नौकरियों का सृजन शामिल है।

ग्रेट निकोबार में स्वदेशी जनजातियों को विस्थापन से कौन से कानून बचाते हैं?

अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह (आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा) विनियमन, 1956 स्वदेशी जनजातियों को विस्थापन से बचाता है और विकास कार्यों के लिए उनकी सहमति आवश्यक करता है।

ग्रेट निकोबार में पर्यटन बुनियादी ढांचे के विकास को नियंत्रित करने वाले पर्यावरणीय कानून कौन से हैं?

मुख्य कानूनों में पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, वन संरक्षण अधिनियम, 1980, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972, और तटीय क्षेत्र नियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2019 शामिल हैं, जो पर्यावरणीय मंजूरी और प्रभाव आकलन की मांग करते हैं।

ग्रेट निकोबार मसौदा योजना की तुलना मालदीव के पर्यटन मॉडल से कैसे की जा सकती है?

दोनों GDP में पर्यटन पर निर्भर हैं, लेकिन मालदीव को प्रवाल भित्ति क्षरण और ताजे पानी की कमी जैसी गंभीर पारिस्थितिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो ग्रेट निकोबार में टिकाऊ प्रथाओं की आवश्यकता को दर्शाता है।

ग्रेट निकोबार में पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करने वाली संस्था कौन सी है?

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करने वाली प्रमुख संस्था है।

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