पृष्ठभूमि: गायब होने की घटना और उसका कारण
साल 2024 की शुरुआत में, राजस्थान के डेजर्ट नेशनल पार्क में गंभीर रूप से संकटग्रस्त महान भारतीय बस्टर्ड (GIB) की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने एक चूजे के अचानक गायब होने की सूचना दी। शुरू में शिकार या शिकारी के हमले की आशंका जताई गई, लेकिन बाद की जांच में पता चला कि चूजा स्वाभाविक रूप से उड़ान सीख चुका था और इसलिए वह जमीन पर निगरानी वाले क्षेत्र से दूर हो गया था (Indian Express, 2024)। यह घटना संरक्षण निगरानी के तहत प्रजाति-विशेष व्यवहारों की समझ में आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है।
महान भारतीय बस्टर्ड, जिसे वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 (संशोधित 2002) की अनुसूची I में शामिल किया गया है, भारत की प्रमुख प्रजातियों में से एक है, जिसकी जंगली आबादी 250 से भी कम है (MoEFCC, 2023)। इसके संरक्षण के लिए सटीक निगरानी बेहद जरूरी है क्योंकि यह प्रजाति आवास क्षरण और मानवजनित खतरों के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: जैव विविधता - प्रजाति संरक्षण, वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972, आवास प्रबंधन
- GS पेपर 2: पर्यावरण शासन में संस्थानों की भूमिका
- निबंध: भारत में प्रमुख प्रजातियों के संरक्षण की चुनौतियां
महान भारतीय बस्टर्ड संरक्षण के लिए कानूनी ढांचा
वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 की धारा 9 और 38A के तहत अनुसूची I की प्रजातियों सहित GIB को कड़ी सुरक्षा दी गई है, जिसमें शिकार और व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 आवासों पर प्रभाव डालने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने का व्यापक अधिकार प्रदान करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48A के तहत राज्य को वनस्पति और जीव-जंतुओं की सुरक्षा का निर्देश दिया गया है, जो कानूनी जिम्मेदारियों को और मजबूत करता है।
राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम, 2002 जैव विविधता प्रबंधन समितियों के माध्यम से संरक्षण को बढ़ावा देता है, वहीं सुप्रीम कोर्ट के T.N. Godavarman Thirumulpad v. Union of India (1997) जैसे फैसले आवास संरक्षण को प्रजाति के अस्तित्व के लिए अनिवार्य मानते हैं। ये कानूनी प्रावधान GIB संरक्षण के लिए बहु-स्तरीय संरचना तैयार करते हैं।
महान भारतीय बस्टर्ड संरक्षण के आर्थिक पहलू
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 2023-24 वित्तीय वर्ष में एकीकृत वन्यजीव आवास विकास योजना के तहत लगभग ₹25 करोड़ GIB संरक्षण के लिए आवंटित किए हैं। यह राशि आवास पुनर्स्थापन, शिकार रोधी उपायों और स्थानीय समुदायों के जुड़ाव के लिए उपयोग की जा रही है।
राजस्थान में GIB से जुड़ा इको-टूरिज्म सालाना लगभग ₹150 करोड़ का आर्थिक लाभ उत्पन्न करता है (राजस्थान वन विभाग, 2023), जो स्थानीय समुदायों को संरक्षण में भागीदारी के लिए प्रेरित करता है। हालांकि, पिछले पांच वर्षों में आवास पुनर्स्थापन और निगरानी प्रयासों में वृद्धि के कारण संचालन लागत में 15% की बढ़ोतरी हुई है।
संस्थागत भूमिकाएं और निगरानी की चुनौतियां
मुख्य संस्थाओं में नीति और वित्त पोषण के लिए MoEFCC, वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (WII), और आवास प्रबंधन के लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) शामिल हैं, जो GIB के आवासीय क्षेत्रों के लिए दिशानिर्देश प्रदान करती है। राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के राज्य वन विभाग जमीन पर संरक्षण और निगरानी का कार्य करते हैं।
बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) समुदाय जुड़ाव और जागरूकता अभियानों में मदद करती है। इन प्रयासों के बावजूद, निगरानी के मुख्य तरीके दृश्य अवलोकन और मैनुअल ट्रैकिंग पर आधारित हैं, जो प्राकृतिक व्यवहारों जैसे उड़ान सीखना (fledging) को गलत समझ सकते हैं, जैसा हाल ही में चूजे के गायब होने के मामले में देखा गया।
जनसंख्या और खतरे से जुड़ी जानकारी
- जंगली GIB की आबादी 250 से कम अनुमानित (MoEFCC, 2023)।
- राजस्थान में बेहतर निगरानी के कारण चूजों के बचाव दर में 12% सुधार (WII वार्षिक रिपोर्ट, 2023)।
- GIB चूजों के उड़ान शुरू करने की औसत उम्र लगभग 45 दिन (BNHS क्षेत्रीय अध्ययन, 2022)।
- वोल्टेज लाइन से टकराव वयस्क GIB मृत्यु का 40% कारण (MoEFCC, 2023)।
- GIB के आवास वाले राज्यों में आवास क्षरण की दर लगभग 3.5% प्रति वर्ष (वन सर्वेक्षण ऑफ इंडिया, 2022)।
- स्थानीय समुदाय आधारित संरक्षण कार्यक्रमों में पिछले तीन वर्षों में 30% की भागीदारी वृद्धि (NTCA रिपोर्ट, 2023)।
तुलनात्मक अध्ययन: भारत और UAE के बस्टर्ड संरक्षण
| पहलू | भारत (महान भारतीय बस्टर्ड) | UAE (हौबारा बस्टर्ड) |
|---|---|---|
| जनसंख्या प्रवृत्ति | घटती हुई; 250 से कम | बढ़ती हुई; एक दशक में 25% वृद्धि |
| निगरानी तकनीकें | मुख्य रूप से मैनुअल ट्रैकिंग और दृश्य अवलोकन | सैटेलाइट टेलीमेट्री और GPS ट्रैकिंग |
| समुदाय सहभागिता | BNHS और NTCA के माध्यम से 30% वृद्धि | स्थानीय हितधारकों के लिए प्रोत्साहन आधारित कार्यक्रम |
| वित्तपोषण | MoEFCC योजनाओं के तहत ₹25 करोड़ वार्षिक | निजी-सरकारी साझेदारी के साथ प्रति व्यक्ति अधिक निवेश |
| खतरे कम करने के उपाय | वोल्टेज लाइन टकराव, आवास क्षरण जारी | पावर लाइन इंसुलेशन और आवास पुनर्स्थापन सक्रिय |
निगरानी और संरक्षण में महत्वपूर्ण कमियां
भारत में दृश्य और मैनुअल निगरानी पर निर्भरता प्राकृतिक व्यवहारों की गलत व्याख्या करती है, जिससे गलत सूचना फैलती है और संरक्षण में देरी होती है। सैटेलाइट टेलीमेट्री, AI आधारित छवि पहचान और ड्रोन निगरानी जैसी उन्नत तकनीकों का कम उपयोग हो रहा है।
तकनीक के समावेश से वास्तविक समय में ट्रैकिंग और डेटा की सटीकता बढ़ेगी, जिससे शिकार और पावर लाइन टकराव जैसे खतरों के खिलाफ सक्रिय कदम उठाए जा सकेंगे। साथ ही, समुदाय प्रोत्साहन और क्षमता निर्माण से स्थानीय संरक्षण में सुधार होगा।
महत्व और आगे की राह
- GIB के विशेषकर चूजों की गतिविधियों की सटीक निगरानी के लिए उन्नत टेलीमेट्री और AI उपकरण अपनाएं, ताकि गलत अलर्ट कम हों और डेटा गुणवत्ता बेहतर हो।
- MoEFCC, WII, NTCA और राज्य वन विभागों के बीच संस्थागत समन्वय मजबूत करें ताकि संरक्षण रणनीतियां एकीकृत हों।
- तकनीकी समेकन और आवास पुनर्स्थापन के लिए मौजूदा ₹25 करोड़ से अधिक वित्तीय संसाधन आवंटित करें।
- UAE के हौबारा बस्टर्ड संरक्षण मॉडल की तरह समुदाय प्रोत्साहन कार्यक्रम लागू करें ताकि स्थानीय भागीदारी बढ़े और खतरे कम हों।
- पावर लाइन सुरक्षा और आवास संरक्षण के लिए कानूनी प्रवर्तन सख्त करें, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का लाभ उठाएं।
- वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972, महान भारतीय बस्टर्ड को अनुसूची I में वर्गीकृत करता है।
- GIB चूजों की मृत्यु का प्रमुख कारण पावर लाइन टकराव है।
- राष्ट्रीय जैव विविधता अधिनियम, 2002, समुदाय आधारित संरक्षण प्रयासों का समर्थन करता है।
- भारत में मुख्य निगरानी विधि मैनुअल ट्रैकिंग और दृश्य अवलोकन है।
- भारत में GIB के लिए सैटेलाइट टेलीमेट्री व्यापक रूप से अपनाई गई है।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी उपकरण भारत में कम उपयोग में हैं।
मुख्य प्रश्न
भारत में महान भारतीय बस्टर्ड की आबादी की निगरानी में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा करें और संरक्षण परिणामों को बेहतर बनाने के लिए संस्थागत एवं तकनीकी उपाय सुझाएं। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 - पर्यावरण और पारिस्थितिकी
- झारखंड दृष्टिकोण: यद्यपि झारखंड में GIB नहीं पाया जाता, इसके संरक्षण से मिली सीख स्थानीय संकटग्रस्त प्रजातियों की निगरानी और आवास संरक्षण में लागू की जा सकती है।
- मुख्य बिंदु: प्रजाति-विशेष निगरानी, कानूनी ढांचे और समुदाय की भागीदारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए उत्तर तैयार करें, झारखंड के वन प्रबंधन चुनौतियों के साथ समानताएं बनाएं।
महान भारतीय बस्टर्ड की वर्तमान अनुमानित जंगली आबादी क्या है?
MoEFCC के 2023 के आंकड़ों के अनुसार, महान भारतीय बस्टर्ड की जंगली आबादी 250 से कम अनुमानित है।
भारत में महान भारतीय बस्टर्ड की सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कानूनी प्रावधान हैं?
यह प्रजाति वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट, 1972 (संशोधित 2002) की अनुसूची I में संरक्षित है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और संविधान के अनुच्छेद 48A के तहत अतिरिक्त सुरक्षा प्राप्त है।
महान भारतीय बस्टर्ड वयस्कों की मृत्यु का प्रमुख कारण क्या है?
MoEFCC, 2023 के अनुसार, वोल्टेज लाइन टकराव वयस्क महान भारतीय बस्टर्ड मृत्यु का लगभग 40% कारण है।
UAE के हौबारा बस्टर्ड संरक्षण कार्यक्रम में भारत के GIB प्रयासों से क्या भिन्नताएं हैं?
UAE में सैटेलाइट टेलीमेट्री और समुदाय प्रोत्साहन कार्यक्रमों का उपयोग किया जाता है, जिससे एक दशक में 25% जनसंख्या वृद्धि हुई है, जबकि भारत में उन्नत तकनीक का सीमित उपयोग और कम प्रोत्साहन आधारित समुदाय सहभागिता है।
GIB चूजे के गायब होने की गलत व्याख्या किस प्राकृतिक व्यवहार के कारण हुई?
चूजे ने उड़ान सीख ली थी (fledged) और निगरानी क्षेत्र से दूर चला गया था, जिसे पहले गायब होना समझा गया था।
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