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परिचय: रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक स्वदेशी एआई विकास

साल 2023 में भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए घरेलू कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणालियों के विकास को तेज किया। इस पहल में Defence Research and Development Organisation (DRDO), Ministry of Defence (MoD) और NITI Aayog जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं, जो विदेशी तकनीक पर निर्भरता घटाकर राष्ट्रीय सुरक्षा की स्वायत्तता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। यह कदम Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 और Defence Production Policy 2020 के अनुरूप है, जो 'Make in India' और स्वदेशी तकनीक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस रणनीति का उद्देश्य भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में एआई के जरिए परिचालन दक्षता, लागत में कमी और नवाचार को बढ़ावा देना है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – रक्षा में एआई के उपयोग, Defence Procurement Procedure, स्वदेशी तकनीक
  • GS पेपर 2: राजनीति एवं शासन – रक्षा और एआई से संबंधित कानूनी ढांचे, Official Secrets Act, Information Technology Act
  • निबंध: प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता

स्वदेशी रक्षा एआई के लिए कानूनी और नीति ढांचा

Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 में स्वदेशी उत्पादों और तकनीकों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, जो सरकार के आत्मनिर्भरता अभियान का हिस्सा है। Defence Production Policy 2020 में उभरती तकनीकों जैसे एआई के स्वदेशी विकास पर विशेष जोर दिया गया है। Information Technology Act, 2000 (Section 69) डिजिटल संचार की वैध निगरानी और इंटरसेप्शन की अनुमति देता है, जो सुरक्षित एआई सिस्टम के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, Official Secrets Act, 1923 रक्षा-संबंधी संवेदनशील जानकारियों की गोपनीयता सुनिश्चित करता है, जिससे एआई सिस्टम के डिजाइन और परिचालन डेटा की सुरक्षा होती है। NITI Aayog द्वारा 2018 में जारी National AI Strategy में रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के नैतिक उपयोग और डेटा प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

  • DPP 2020: 'Make in India' और स्वदेशी खरीद पर जोर, रक्षा आधुनिकीकरण के लिए।
  • Defence Production Policy 2020: रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए एआई और उभरती तकनीकों में अनुसंधान एवं विकास।
  • IT Act 2000, Section 69: एआई आधारित निगरानी और साइबर सुरक्षा के लिए कानूनी आधार।
  • Official Secrets Act 1923: रक्षा एआई डेटा और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा।
  • NITI Aayog National AI Strategy: एआई के नैतिक उपयोग और क्षमता निर्माण के लिए रूपरेखा।

आर्थिक पहलू: बजट, बाजार संभावनाएं और लागत दक्षता

वित्त वर्ष 2023-24 के रक्षा बजट में ₹5.94 लाख करोड़ आवंटित किए गए, जिसमें अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए 12% की वृद्धि हुई है और एआई परियोजनाओं के लिए ₹1,200 करोड़ विशेष रूप से निर्धारित हैं। भारतीय एआई बाजार 2025 तक USD 7.8 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 20% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। DRDO के आकलन के अनुसार, रक्षा एआई सिस्टम आने वाले दशक में परिचालन लागत को 15% तक कम कर सकते हैं। वर्तमान में भारत रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स का 70% आयात करता है, जिसे 2030 तक 40% से नीचे लाने का लक्ष्य है। स्वदेशी एआई विकास निर्यात को भी बढ़ावा देगा, 2027 तक रक्षा एआई हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर निर्यात में 30% की वृद्धि कर USD 500 मिलियन का लक्ष्य रखा गया है।

  • 2023-24 रक्षा बजट: ₹5.94 लाख करोड़; R&D में 12% वृद्धि।
  • एआई-विशेष R&D आवंटन: ₹1,200 करोड़ (MoD बजट 2023)।
  • भारतीय एआई बाजार पूर्वानुमान: 2025 तक USD 7.8 बिलियन (NASSCOM 2023)।
  • परिचालन लागत बचत: 10 वर्षों में 15% तक (DRDO रिपोर्ट)।
  • रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स आयात निर्भरता: वर्तमान 70%; 2030 तक <40% लक्ष्य।
  • रक्षा एआई निर्यात अनुमान: 2027 तक USD 500 मिलियन (30% वृद्धि)।

स्वदेशी रक्षा एआई को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख संस्थान

DRDO रक्षा अनुप्रयोगों के लिए एआई अनुसंधान और विकास का नेतृत्व करता है, जिसमें 2023 से पांच सीमा क्षेत्रों में तैनात Project NETRA जैसे एआई आधारित निगरानी सिस्टम शामिल हैं। DRDO की Centre for Artificial Intelligence and Robotics (CAIR) प्रयोगशाला सैन्य उपयोग के लिए एआई और रोबोटिक्स में विशेषज्ञता रखती है। Bharat Electronics Limited (BEL) एआई-सक्षम रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स विकसित करता है। Defence Innovation Organisation (DIO) स्टार्ट-अप और निजी क्षेत्र के सहयोग को बढ़ावा देता है, और 2023 तक 50 से अधिक एआई केंद्रित रक्षा स्टार्ट-अप का समर्थन कर चुका है। NITI Aayog नीति मार्गदर्शन और राष्ट्रीय एआई रणनीति तैयार करता है, जबकि Ministry of Defence नीति, बजट और खरीद प्रक्रिया की देखरेख करता है।

  • DRDO: मुख्य एआई अनुसंधान एजेंसी; Project NETRA जैसे प्रोजेक्ट का नेतृत्व।
  • CAIR: DRDO की एआई और रोबोटिक्स में विशेषज्ञ प्रयोगशाला।
  • BEL: एआई-सक्षम रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स विकास।
  • DIO: स्टार्ट-अप का पोषण, नवाचार भागीदारी को बढ़ावा।
  • NITI Aayog: राष्ट्रीय एआई रणनीति और नैतिक दिशा-निर्देश।
  • MoD: नीति निर्माण, बजट आवंटन, खरीद प्रक्रिया।

डेटा और प्रदर्शन संकेतक

ऑक्सफोर्ड इनसाइट्स के 2023 के Government AI Readiness Index में भारत 54.3/100 स्कोर के साथ दुनिया में 10वें स्थान पर है। 2020 से 2023 के बीच एआई-सक्षम रक्षा हार्डवेयर का आयात 18% घटा है, जो स्वदेशी क्षमताओं में सुधार दर्शाता है। DRDO का Project NETRA पांच सीमा क्षेत्रों में परिचालन में है, जो व्यावहारिक एआई एकीकरण का उदाहरण है। Defence Innovation Organisation ने 50 से अधिक एआई केंद्रित स्टार्ट-अप को बढ़ावा दिया है, जिससे निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है। ये आंकड़े स्वदेशी रक्षा एआई विकास में निरंतर प्रगति को दर्शाते हैं।

संकेतकभारत (2023)चीन (2023)
वार्षिक सैन्य एआई R&D निवेशलगभग USD 200 मिलियनलगभग USD 2 बिलियन
रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में आयात निर्भरता70%, 2030 तक <40% लक्ष्य20% से कम
एआई-सक्षम निगरानी तैनातीProject NETRA पांच सीमा क्षेत्रों मेंसीमाओं पर व्यापक एआई-सक्षम ड्रोन और निगरानी
एआई तैयारी रैंकिंग (Oxford Insights)10वां स्थान (54.3/100)5वां स्थान (60 से ऊपर)
नैतिक एआई और डेटा गोपनीयता पर जोरउच्च, NITI Aayog रणनीति के तहतकम, त्वरित तैनाती प्राथमिकता

तुलनात्मक विश्लेषण: भारत और चीन की सैन्य एआई रणनीतियां

चीन की Military-Civil Fusion रणनीति एआई को रक्षा में तेजी से एकीकृत कर रही है, जिसके लिए लगभग USD 2 बिलियन वार्षिक सैन्य एआई R&D बजट है। वह सीमा क्षेत्रों में एआई-सक्षम ड्रोन और निगरानी प्रणालियों का व्यापक उपयोग करता है, जिससे परिचालन क्षमता तेजी से बढ़ी है। भारत की रणनीति अधिक सतर्क और नैतिक एआई उपयोग, डेटा गोपनीयता तथा आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है, जो Defence Procurement Procedure 2020 के तहत स्वदेशी विकास को प्राथमिकता देती है। भारत तेजी से अधिग्रहण के बजाय रणनीतिक स्वायत्तता और शासन मानदंडों को महत्व देता है।

  • चीन सैन्य एआई R&D में भारत से 10 गुना अधिक निवेश करता है।
  • चीन की एआई तैनाती तेज और व्यापक है, नैतिकता पर कम ध्यान।
  • भारत नैतिक एआई, डेटा गोपनीयता और स्वदेशी तकनीक पर जोर देता है।
  • भारत की रक्षा एआई रणनीति कई संस्थानों के समन्वित विकास पर आधारित है।
  • चीन की Military-Civil Fusion नागरिक और सैन्य एआई तकनीक की सीमाएं धुंधली करती है।

स्वदेशी रक्षा एआई विकास में चुनौतियां और महत्वपूर्ण खामियां

भारत के पास एकीकृत राष्ट्रीय रक्षा एआई नियामक ढांचा नहीं है जो डेटा प्रबंधन, नैतिक एआई मानकों और संस्थागत समन्वय को जोड़ सके, जिससे विकास टुकड़ों में बंटा हुआ और धीमा हो रहा है। रक्षा एआई में विशेषज्ञ कुशल कार्यबल की कमी विस्तार और नवाचार की गति को सीमित करती है। इसके अलावा, जटिल खरीद प्रक्रिया और निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी तकनीक के तेजी से अवशोषण में बाधा डालती है। ये कमियां भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धियों, खासकर चीन की तेज़ी से बढ़ती सैन्य एआई क्षमता से मेल खाने में रोड़ा बन रही हैं।

  • एकीकृत राष्ट्रीय रक्षा एआई नियामक ढांचे का अभाव।
  • टुकड़ों में बंटा हुआ डेटा प्रबंधन और नैतिक एआई मानक।
  • रक्षा एआई के लिए कुशल कार्यबल की कमी।
  • धीमी नौकरशाही खरीद प्रक्रिया और सीमित निजी क्षेत्र सहभागिता।
  • परिचालन तैनाती के लिए स्वदेशी एआई तकनीकों के विस्तार में चुनौतियां।

महत्त्व और आगे का रास्ता

रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी एआई सिस्टम का विकास भारत की रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाता है, विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करता है और घरेलू नवाचार को प्रोत्साहित करता है। डेटा प्रबंधन और नैतिक मानकों को एकीकृत करने के लिए नियामक ढांचे को मजबूत करना जरूरी है। रक्षा एआई पर केंद्रित कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा नवाचार को तेज करेगा। DPP 2020 के तहत स्वदेशी एआई तकनीकों को प्राथमिकता देते हुए खरीद प्रक्रिया को सरल बनाना अपनाने की गति बढ़ाएगा। DRDO, DIO, BEL और स्टार्ट-अप के बीच बेहतर सहयोग से इस पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।

  • राष्ट्रीय रक्षा एआई नियामक और नैतिक ढांचा स्थापित करें।
  • रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष एआई कौशल विकास का विस्तार करें।
  • सार्वजनिक-निजी साझेदारी और स्टार्ट-अप पोषण को बढ़ावा दें।
  • DPP 2020 के तहत स्वदेशी एआई को प्राथमिकता देते हुए खरीद प्रक्रिया सरल बनाएं।
  • MoD, DRDO, DIO और NITI Aayog के बीच समन्वय बढ़ाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Defence Procurement Procedure (DPP) 2020 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. DPP 2020 रक्षा खरीद में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देता है।
  2. DPP 2020 एआई-सक्षम रक्षा प्रणालियों के आयात को बिना प्रतिबंध के अनुमति देता है।
  3. DPP 2020 'Make in India' पहल के अनुरूप आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि DPP 2020 स्वदेशी प्राथमिकता देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि DPP 2020 आत्मनिर्भरता के लिए आयात सीमित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि DPP 2020 'Make in India' के अनुरूप है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Project NETRA के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह DRDO द्वारा विकसित AI आधारित निगरानी प्रणाली है।
  2. यह 2023 तक पांच सीमा क्षेत्रों में परिचालित है।
  3. यह NITI Aayog द्वारा विकसित एक नागरिक एआई अनुप्रयोग है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; Project NETRA DRDO की AI आधारित निगरानी प्रणाली है। कथन 2 सही है; यह पांच सीमा क्षेत्रों में तैनात है। कथन 3 गलत है; यह नागरिक अनुप्रयोग नहीं है और न ही NITI Aayog द्वारा विकसित है।

मुख्य प्रश्न

भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए स्वदेशी एआई सिस्टम विकसित करने के महत्व की विवेचना करें। मुख्य चुनौतियों पर चर्चा करें और एआई एकीकरण के माध्यम से आत्मनिर्भरता और परिचालन दक्षता बढ़ाने के उपाय सुझाएं।

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (विज्ञान और प्रौद्योगिकी), पेपर 3 (शासन और सुरक्षा)
  • झारखंड का योगदान: झारखंड में DRDO प्रयोगशालाएं और BEL जैसे रक्षा निर्माण इकाइयां हैं, जो स्वदेशी रक्षा एआई परियोजनाओं में योगदान देती हैं।
  • मुख्य बिंदु: राष्ट्रीय रक्षा एआई पारिस्थितिकी तंत्र में झारखंड की भूमिका और स्थानीय कौशल विकास पहलों को उजागर करें।
स्वदेशी रक्षा एआई विकास में DRDO की भूमिका क्या है?

DRDO रक्षा अनुप्रयोगों के लिए एआई में अनुसंधान और विकास का नेतृत्व करता है, जिसमें Project NETRA जैसे AI आधारित निगरानी सिस्टम शामिल हैं जो सीमा क्षेत्रों में तैनात हैं। यह CAIR जैसी विशेष प्रयोगशालाओं को भी संचालित करता है जो एआई और रोबोटिक्स में विशेषज्ञता रखती हैं।

Defence Procurement Procedure 2020 स्वदेशी एआई सिस्टम का समर्थन कैसे करता है?

DPP 2020 रक्षा खरीद में स्वदेशी उत्पादों और तकनीकों को प्राथमिकता देता है, 'Make in India' पहल के अनुरूप आयात निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए।

रक्षा में स्वदेशी एआई सिस्टम के आर्थिक लाभ क्या हैं?

स्वदेशी एआई सिस्टम परिचालन लागत को 15% तक कम करते हैं, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स में आयात निर्भरता को 70% से घटाकर 2030 तक 40% से नीचे लाने में मदद करते हैं, और रक्षा एआई निर्यात में 30% वृद्धि के साथ 2027 तक USD 500 मिलियन का लक्ष्य रखते हैं।

राष्ट्रीय एआई रणनीति कौन सा संस्थान बनाता है जो रक्षा से संबंधित है?

NITI Aayog ने 2018 में राष्ट्रीय एआई रणनीति तैयार की, जो रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के नैतिक उपयोग और नीति रूपरेखा प्रदान करती है।

भारत में स्वदेशी रक्षा एआई विकास की मुख्य चुनौतियां क्या हैं?

मुख्य चुनौतियों में एकीकृत नियामक ढांचे का अभाव, टुकड़ों में बंटा हुआ डेटा प्रबंधन, कुशल रक्षा एआई कार्यबल की कमी, धीमी खरीद प्रक्रिया, और सीमित निजी क्षेत्र भागीदारी शामिल हैं।

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