अपडेट

गहरी तकनीक अवसंरचना पर सरकार की पहल: एक परिचय

साल 2023 में भारत सरकार ने उद्योग के साथ साझेदारी में गहरी तकनीक अवसंरचना विकसित करने की रणनीतिक पहल की घोषणा की। इसका मकसद उन्नत तकनीक के विकास और उसके बाजार में प्रवेश के बीच की दूरी को कम कर देश के नवाचार तंत्र को मजबूत बनाना है। इस पहल में मुख्य रूप से Department of Science and Technology (DST), Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY), और Department of Biotechnology (DBT) शामिल हैं। यह योजना Science and Technology Policy 2020 और Industrial Policy Resolution 2020 के अनुरूप है, जो उद्योग-शिक्षा संस्थान सहयोग और गहरी तकनीक नवाचार पर जोर देती है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – नवाचार तंत्र, अर्थव्यवस्था – औद्योगिक नीति और अवसंरचना
  • GS पेपर 2: राजनीति – वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर संवैधानिक प्रावधान (Article 51A(h))
  • निबंध: प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने में सरकार की भूमिका

गहरी तकनीक अवसंरचना के लिए कानूनी और नीतिगत ढांचा

भारतीय संविधान के Article 51A(h) के तहत नागरिकों के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना अनिवार्य है, जो गहरी तकनीक नवाचार को बढ़ावा देने में सरकार के प्रयासों की नींव है। Science and Technology Policy 2020 में एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और जैव प्रौद्योगिकी जैसे गहरी तकनीक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। Industrial Policy Resolution 2020 उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर सहयोग को प्रोत्साहित करती है ताकि नवाचार का व्यावसायीकरण आसान हो सके। डिजिटल अवसंरचना के लिए Information Technology Act, 2000 लागू है, जबकि National Policy on Electronics 2019 (NPE 2019) घरेलू उत्पादन और अनुसंधान को बढ़ावा देती है। Technology Development Board Act, 1995 प्रौद्योगिकी के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है, जिससे प्रयोगशाला से बाजार तक का रास्ता आसान होता है।

भारत के गहरी तकनीक तंत्र के आर्थिक पहलू

NASSCOM 2023 के अनुसार भारत का गहरी तकनीक बाजार 2025 तक 70 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो 15% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है। केंद्रीय बजट 2023-24 में Startup India के तहत गहरी तकनीक स्टार्टअप और अवसंरचना के लिए 1,500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। भारत का वर्तमान R&D व्यय GDP का 0.8% है (Economic Survey 2023), जिसे 2030 तक 2% तक बढ़ाने का लक्ष्य है। वैश्विक स्तर पर, 2023 में गहरी तकनीक में निवेश 15 अरब डॉलर था, जिसमें भारत का हिस्सा लगभग 5% है (PitchBook 2023)। क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बढ़त के लिए सरकार ने National Mission on Quantum Technologies and Applications (NM-QTA) के तहत पांच वर्षों में 8,000 करोड़ रुपये का बजट रखा है। उच्च तकनीक उत्पादों के निर्यात में 2022-23 में 12% की वृद्धि हुई है, जो भारत की उन्नत तकनीक उत्पादन क्षमता को दर्शाता है।

गहरी तकनीक अवसंरचना के प्रमुख संस्थान

  • Department of Science and Technology (DST): नीतियां बनाना और गहरी तकनीक R&D को फंडिंग देना।
  • Department of Biotechnology (DBT): जैव प्रौद्योगिकी अवसंरचना और नवाचार तंत्र का समर्थन।
  • Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY): डिजिटल गहरी तकनीक अवसंरचना का नेतृत्व।
  • Technology Development Board (TDB): स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता।
  • NITI Aayog: नवाचार क्लस्टर के लिए बहु-क्षेत्रीय नीति समन्वय।
  • Invest India: उद्योग साझेदारी और विदेशी निवेश को बढ़ावा देना।

भारत बनाम चीन: गहरी तकनीक अवसंरचना की तुलना

पहलूभारतचीन
नीति पहलScience and Technology Policy 2020, National Mission on Quantum TechnologiesMade in China 2025 पहल
निवेश का पैमाना1,500 करोड़ (स्टार्टअप), 8,000 करोड़ (क्वांटम मिशन)2015 से गहरी तकनीक क्षेत्रों में अरबों डॉलर का निवेश
वृद्धि दर15% CAGR का अनुमान2015-2022 के बीच AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में 20% वार्षिक वृद्धि
उद्योग-शिक्षा सहयोगविभाजित, विकासशील क्लस्टरएकीकृत नवाचार क्लस्टर और सुव्यवस्थित नियम
वैश्विक बाजार हिस्सेदारीगहरी तकनीक निवेश में 5%निर्माण और निर्यात में वैश्विक अग्रणी

भारत के गहरी तकनीक तंत्र की प्रमुख चुनौतियां

भारत में गहरी तकनीक तंत्र को बड़े पैमाने पर विस्तार में बाधाएं हैं, खासकर उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग के अभाव और पर्याप्त वित्त पोषण की कमी के कारण। चीन की तरह एकीकृत नवाचार क्लस्टर और सरल नियामक ढांचा भारत में विकसित नहीं हो पाया है। उद्यम पूंजी प्रवाह अपेक्षाकृत कम है, जिससे व्यावसायीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ता है। नियामक जटिलताएं और अवसंरचना की कमी उत्पाद विकास में देरी करती हैं।

महत्व और आगे की राह

  • संयुक्त R&D और तकनीकी हस्तांतरण को प्रोत्साहित कर उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत करना।
  • सार्वजनिक-निजी वित्त पोषण के जरिए R&D व्यय को GDP के 2% लक्ष्य तक बढ़ाना।
  • वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के आधार पर एकीकृत नवाचार क्लस्टर विकसित करना और नियामक सरलता सुनिश्चित करना।
  • उद्यम पूंजी की उपलब्धता बढ़ाना और गहरी तकनीक के लिए विशेष फंड बनाना।
  • मौजूदा संस्थाओं जैसे TDB और Invest India का उपयोग व्यावसायीकरण और विदेशी सहयोग के लिए करना।
  • एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत में गहरी तकनीक अवसंरचना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. National Policy on Electronics 2019 गहरी तकनीक के निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देती है।
  2. Technology Development Board Act, 1995 डिजिटल अवसंरचना शासन के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
  3. Science and Technology Policy 2020 गहरी तकनीक नवाचार और उद्योग-शिक्षा सहयोग पर जोर देती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि NPE 2019 गहरी तकनीक के निर्माण और अनुसंधान को बढ़ावा देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि Technology Development Board Act, 1995 तकनीक के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता देता है, डिजिटल अवसंरचना शासन IT Act, 2000 के अंतर्गत आता है। कथन 3 सही है क्योंकि Science and Technology Policy 2020 गहरी तकनीक नवाचार और उद्योग-शिक्षा सहयोग पर जोर देती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के गहरी तकनीक बाजार और निवेश के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत का गहरी तकनीक बाजार 2025 तक 70 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, CAGR 15% के साथ।
  2. National Mission on Quantum Technologies and Applications का बजट 5 वर्षों में 8,000 करोड़ रुपये है।
  3. 2023 तक भारत वैश्विक गहरी तकनीक निवेश में लगभग 20% योगदान देता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (a)
कथन 1 NASSCOM 2023 के अनुमान के अनुसार सही है। कथन 2 सरकार के बजट आवंटन के आधार पर सही है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत का हिस्सा वैश्विक गहरी तकनीक निवेश में लगभग 5% है, 20% नहीं (PitchBook 2023)।

मेन प्रश्न

भारत सरकार की उद्योग के साथ मिलकर गहरी तकनीक अवसंरचना बनाने की पहल का महत्व बताइए। यह पहल भारत के नवाचार तंत्र में मौजूद खामियों को कैसे दूर कर सकती है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को कैसे बढ़ावा दे सकती है? अपने उत्तर में संबंधित नीतियों और आर्थिक आंकड़ों का उदाहरण दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 3 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, आर्थिक विकास
  • झारखंड का नजरिया: झारखंड के उभरते हुए IT पार्क और जैव प्रौद्योगिकी केंद्र केंद्रीय गहरी तकनीक अवसंरचना पहलों से स्थानीय उद्योग विकास में लाभ उठा सकते हैं।
  • मेन पॉइंटर: उत्तर में यह बताएं कि झारखंड कैसे राष्ट्रीय गहरी तकनीक मिशनों के साथ जुड़कर राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा दे सकता है।
गहरी तकनीक क्या है और यह सामान्य तकनीक स्टार्टअप से कैसे अलग है?

गहरी तकनीक उन स्टार्टअप और तकनीकों को कहते हैं जो गहन वैज्ञानिक या इंजीनियरिंग नवाचारों पर आधारित होती हैं, जैसे AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री। सामान्य तकनीक स्टार्टअप्स जो मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर या उपभोक्ता ऐप्स पर केंद्रित होते हैं, की तुलना में गहरी तकनीक में लंबे अनुसंधान और विकास चक्र और बड़े पूंजी निवेश की जरूरत होती है।

भारत में गहरी तकनीक अवसंरचना विकास के लिए कौन-कौन सी सरकारी नीतियां हैं?

प्रमुख नीतियों में Science and Technology Policy 2020, Industrial Policy Resolution 2020, National Policy on Electronics 2019, और National Mission on Quantum Technologies and Applications शामिल हैं। ये नीतियां R&D फंडिंग, उद्योग-शिक्षा सहयोग और निर्माण प्रोत्साहन के लिए आधार प्रदान करती हैं।

Technology Development Board गहरी तकनीक के व्यावसायीकरण में क्या भूमिका निभाता है?

Technology Development Board (TDB) स्टार्टअप और उद्यमों को स्वदेशी तकनीकों के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता और अनुदान प्रदान करता है, जिससे प्रयोगशाला शोध से बाजार उत्पाद तक का फासला कम होता है।

भारत का R&D व्यय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कैसा है और इसके लक्ष्य क्या हैं?

2023 में भारत का R&D व्यय GDP का 0.8% है, जो विकसित देशों की तुलना में कम है। सरकार का लक्ष्य इसे 2030 तक GDP के 2% तक बढ़ाना है ताकि नवाचार और गहरी तकनीक क्षमताओं को बढ़ावा दिया जा सके।

भारत का वैश्विक गहरी तकनीक निवेश में हिस्सा कैसा है?

2023 तक भारत का वैश्विक गहरी तकनीक निवेश में हिस्सा लगभग 5% है, जो चीन और अमेरिका जैसे वैश्विक नेताओं की तुलना में कम है, जिससे विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us