कपास उत्पादकता मिशन का परिचय
मार्च 2024 में भारत सरकार ने कपास उत्पादकता मिशन को ₹5,659.22 करोड़ के बजट आवंटन के साथ मंजूरी दी। इस योजना की घोषणा श्री शिवराज सिंह चौहान ने की, जिसका उद्देश्य प्रमुख कपास उत्पादन वाले राज्यों में कपास की उत्पादकता बढ़ाना है। यह पहल कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत लागू की जाएगी और इसका लक्ष्य वर्तमान औसत लगभग 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर पांच वर्षों में 700 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पहुंचाना है। यह कदम कपास क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वपूर्ण नीति हस्तक्षेप है, जो भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और निर्यात क्षमता के लिए अहम है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (कृषि विकास, निर्यात प्रतिस्पर्धा)
- GS पेपर 2: केंद्र-राज्य संबंध (कृषि राज्य विषय बनाम केंद्रीय योजनाएं)
- निबंध: कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सरकारी पहलों की भूमिका
कपास क्षेत्र का संवैधानिक और कानूनी ढांचा
कृषि, भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची में प्रविष्टि 14 के अंतर्गत आता है, जो इसे मुख्य रूप से राज्य विषय बनाता है। हालांकि, केंद्र सरकार कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के माध्यम से कृषि विकास के लिए योजनाएं चलाती है। कपास उत्पादकता मिशन इसी संघीय ढांचे के तहत काम करता है, जिसमें केंद्र सरकार धन और नीति मार्गदर्शन देती है जबकि राज्य कृषि विभाग कार्यान्वयन का जिम्मा संभालते हैं।
यह मिशन आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के अनुरूप है, विशेषकर धारा 3 और 6 के तहत, जो कपास के व्यापार, भंडारण और मूल्य नियंत्रण को नियंत्रित करते हैं ताकि जमाखोरी रोकी जा सके और बाजार स्थिरता बनी रहे। इसके अलावा यह राज्य स्तर के कृषि उत्पाद बाजार समिति (APMC) अधिनियम के तहत कपास विपणन सुधारों के साथ भी तालमेल रखता है। मिशन का नियामक और संचालन ढांचा केंद्र सरकार के निरीक्षण को राज्य स्तर के बाजार सुधारों के साथ जोड़ता है।
कपास उत्पादकता मिशन के आर्थिक पहलू
₹5,659.22 करोड़ के बजट का लक्ष्य पांच वर्षों में कपास उत्पादन को 20-25% बढ़ाना है, जिसके लिए पैदावार को 500 से 700 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाना आवश्यक है। भारत ने 2022-23 में 37.5 मिलियन बैल कपास का उत्पादन किया, जो कृषि GDP में लगभग 6% का योगदान देता है (कपास सलाहकार बोर्ड)। कपास क्षेत्र 60 लाख से अधिक किसानों का समर्थन करता है और जिन्निंग, स्पिनिंग, वस्त्र निर्माण जैसी सहायक उद्योगों में लगभग 6 करोड़ लोगों को रोजगार देता है (वस्त्र मंत्रालय, 2023)।
भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 25% हिस्सा बनाता है, लेकिन सालाना केवल करीब 6 मिलियन बैल निर्यात करता है (APEDA, 2023)। इस मिशन का उद्देश्य उत्पादकता और गुणवत्ता सुधार के माध्यम से निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है, जिससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ेगी और भारत की वैश्विक कपास बाजार में स्थिति मजबूत होगी।
मिशन से जुड़े प्रमुख संस्थान
- प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB): सरकारी घोषणाओं का आधिकारिक माध्यम।
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (MoA&FW): नीति निर्माण, वित्तपोषण और निगरानी।
- कपास निगम ऑफ इंडिया (CCI): मूल्य स्थिरीकरण और खरीद के जरिए किसानों के हितों की रक्षा।
- कपास सलाहकार बोर्ड (CAB): आंकड़ा संग्रह, विश्लेषण और परामर्श।
- कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA): निर्यात प्रोत्साहन और गुणवत्ता मानकों का पालन।
- राज्य कृषि विभाग: जमीन स्तर पर कार्यान्वयन, किसान संपर्क और क्षमता विकास।
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम चीन का कपास पुनरुद्धार कार्यक्रम
| पहलू | भारत की कपास उत्पादकता मिशन | चीन का कपास पुनरुद्धार कार्यक्रम (2015-2020) |
|---|---|---|
| बजट | ₹5,659.22 करोड़ (~700 मिलियन USD) | 1 बिलियन USD से अधिक |
| ध्यान केंद्रित क्षेत्र | उत्पादकता सुधार, तकनीक अपनाना, स्थिरता | उच्च उपज वाली किस्में, यांत्रिकीकरण, गुणवत्ता सुधार |
| उत्पादकता वृद्धि | लक्ष्य: 40% वृद्धि (500 से 700 किग्रा/हेक्टेयर) | प्राप्ति: 15% वृद्धि |
| निर्यात प्रभाव | लक्ष्य: 6 मिलियन बैल से अधिक निर्यात | प्राप्ति: निर्यात मात्रा में 10% वृद्धि |
| कार्यान्वयन | केंद्र-राज्य समन्वय, टुकड़े-टुकड़े भूमि स्वामित्व की समस्या | मजबूत केंद्रीकृत नीति, यांत्रिकीकृत फार्म |
मुख्य चुनौतियां और नीति अंतर
पर्याप्त वित्तीय संसाधनों के बावजूद मिशन को संरचनात्मक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। टुकड़े-टुकड़े भूमि स्वामित्व से पैमाने की अर्थव्यवस्था और यांत्रिकीकरण की संभावना कम होती है। ठंडा भंडारण सुविधाएं अपर्याप्त हैं, जिससे कटाई के बाद गुणवत्ता संरक्षण सीमित रहता है। उन्नत बायोटेक्नोलॉजी और ऋण सुविधाओं तक पहुंच छोटे और सीमांत किसानों के लिए असमान है। ये समस्याएं चीन की यांत्रिकीकरण और केंद्रीकृत समर्थन वाली समेकित नीति से अलग हैं, जो सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देती हैं।
महत्व और आगे का रास्ता
- किसानों को ऋण और बायोटेक्नोलॉजी इनपुट तक बेहतर पहुंच देना फसल उपज के लक्ष्यों के लिए जरूरी होगा।
- ठंडा भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला में निवेश कटाई के बाद के नुकसान को कम कर सकता है।
- राज्य और केंद्र के बीच समन्वय मजबूत कर APMC अधिनियमों के अंतर्गत नियामक और बाजार सुधारों को एकसाथ लाना होगा।
- टुकड़े-टुकड़े भूमि की समस्या से निपटने के लिए यांत्रिकीकरण और डिजिटल विस्तार सेवाओं को बढ़ावा देना आवश्यक है।
- APEDA जैसे निर्यात प्रोत्साहन एजेंसियों का उपयोग कर गुणवत्ता मानकों और वैश्विक बाजार पहुंच को बेहतर बनाना होगा।
- कृषि, संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत संघ विषय है।
- मिशन का लक्ष्य कपास की पैदावार को 500 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़ाकर 700 किग्रा/हेक्टेयर करना है।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 कपास के व्यापार और भंडारण को नियंत्रित करता है।
- भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है, जो विश्व उत्पादन का 25% हिस्सा देता है।
- कपास निगम ऑफ इंडिया निर्यात प्रोत्साहन के लिए जिम्मेदार है।
- कृषि उत्पाद बाजार समिति अधिनियम राज्य स्तर पर कपास विपणन को नियंत्रित करता है।
मुख्य प्रश्न
₹5,659.22 करोड़ की कपास उत्पादकता मिशन के उद्देश्य और चुनौतियों पर चर्चा करें और इसके भारत की कृषि अर्थव्यवस्था और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर संभावित प्रभाव का मूल्यांकन करें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 – कृषि और ग्रामीण विकास
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में कपास की खेती के क्षेत्र उभर रहे हैं; इस मिशन का उत्पादन सुधार किसानों के लिए लाभकारी होगा।
- मुख्य बिंदु: राज्य विशेष कृषि चुनौतियों, केंद्र की योजनाओं की भूमिका और निर्यात आधारित विकास की संभावनाओं को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
कपास उत्पादकता मिशन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मिशन का उद्देश्य पांच वर्षों में कपास की पैदावार को 500 से बढ़ाकर 700 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना है, जिससे उत्पादन, किसानों की आय और निर्यात प्रतिस्पर्धा में वृद्धि हो।
भारत में कृषि किस संवैधानिक प्रावधान के अंतर्गत आती है?
कृषि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के राज्य सूची की प्रविष्टि 14 के अंतर्गत एक राज्य विषय है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम का कपास से क्या संबंध है?
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 कपास के व्यापार, भंडारण और मूल्य नियंत्रण को नियंत्रित करता है ताकि जमाखोरी रोकी जा सके और बाजार में स्थिरता बनी रहे।
कपास निर्यात प्रोत्साहन की जिम्मेदारी किस संस्था की है?
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) कपास निर्यात को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करता है और बाजार पहुंच को सुविधाजनक बनाता है।
कपास उत्पादकता मिशन के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
मुख्य चुनौतियों में टुकड़े-टुकड़े भूमि स्वामित्व, अपर्याप्त ठंडा भंडारण, बायोटेक्नोलॉजी और ऋण की सीमित पहुंच, तथा केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय शामिल हैं।
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