परिचय: कपास की पैदावार बढ़ाने के लिए सरकार ने 5,659 करोड़ रुपये की योजना को दी मंजूरी
मार्च 2024 में भारत सरकार ने पूरे देश में कपास की पैदावार बढ़ाने के उद्देश्य से 5,659 करोड़ रुपये की पांच साल की योजना को मंजूरी दी। इस पहल का नेतृत्व कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (MoA&FW) करेगा, जिसका लक्ष्य 2029 तक कपास की औसत पैदावार को लगभग 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 700-800 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाना है। इस मिशन का मकसद कृषि उत्पादकता में सुधार, किसानों की आय बढ़ाना और भारत की वैश्विक कपास निर्यात में स्थिति मजबूत करना है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (कृषि उत्पादकता, सरकारी योजनाएं, निर्यात प्रतिस्पर्धा)
- GS पेपर 2: केंद्र-राज्य संबंध (कृषि राज्य विषय होने के कारण और केंद्र की भूमिका)
- निबंध: ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसान कल्याण
कपास उत्पादन पर संवैधानिक और कानूनी ढांचा
कृषि संविधान की सातवीं अनुसूची के राज्य सूची की प्रविष्टि 14 के अंतर्गत आती है, जिससे कृषि विकास की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों की होती है। हालांकि, केंद्र सरकार को संघ सूची की प्रविष्टि 33 के तहत अंतर-राज्यीय व्यापार और वाणिज्य पर नियंत्रण का अधिकार प्राप्त है, जिससे केंद्र कृषि विपणन और निर्यात में पहल कर सकता है। यह मिशन संशोधित Essential Commodities Act, 1955 के अनुरूप है, जो बाजार नियमन को बेहतर बनाता है और आपूर्ति श्रृंखला की असमानताओं को कम करता है।
साथ ही, यह योजना विभिन्न राज्यों के Agricultural Produce Market Committee (APMC) Acts के तहत चल रहे सुधारों के साथ मेल खाती है, जो कृषि बाजारों को उदार बनाने और मूल्य निर्धारण प्रणाली को सुधरने पर केंद्रित हैं। मिशन के उद्देश्य National Mission on Sustainable Agriculture (NMSA) के तहत National Action Plan on Climate Change (NAPCC), 2008 के साथ भी जुड़ते हैं, जो जलवायु-प्रतिरोधी कपास खेती को बढ़ावा देते हैं।
आर्थिक पहलू: बजट, पैदावार लक्ष्य और निर्यात क्षमता
5,659 करोड़ रुपये का आवंटन पांच वर्षों में औसतन 1,132 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगा, जो वैज्ञानिक हस्तक्षेप, विस्तार सेवाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित रहेगा। 2023 में भारत ने लगभग 36 मिलियन बाल कपास का उत्पादन किया, जो विश्व उत्पादन का 24% हिस्सा है (USDA Foreign Agricultural Service 2023)। कपास भारत के GDP में लगभग 2.5% का योगदान देता है और 60 लाख से अधिक किसानों का रोजगार प्रदान करता है (Agricultural Census 2020)।
पैदावार को 500 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 700-800 किलोग्राम तक लाने से उत्पादन 40-60% तक बढ़ सकता है, जिससे निर्यात में 15-20% की वृद्धि संभव होगी, जो वर्तमान में 7.5 बिलियन डॉलर का है (Cotton Association of India 2023)। इससे विदेशी मुद्रा आय बढ़ेगी और बेहतर उत्पादकता व बाजार पहुंच के जरिये ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार होगा।
कपास पैदावार मिशन के प्रमुख संस्थान
- Cotton Corporation of India (CCI): किसानों को मूल्य अस्थिरता से बचाने के लिए खरीद, मूल्य स्थिरीकरण और बाजार हस्तक्षेप की जिम्मेदारी।
- Indian Council of Agricultural Research (ICAR): उच्च उपज और कीट-प्रतिरोधी कपास किस्मों पर अनुसंधान एवं विकास का नेतृत्व।
- Ministry of Agriculture and Farmers Welfare (MoA&FW): नीति निर्धारण, धन आवंटन और हितधारकों के बीच समन्वय।
- Central Institute for Cotton Research (CICR): आनुवंशिक सुधारित किस्मों और एकीकृत कीट प्रबंधन तकनीकों का विकास।
- State Agricultural Universities (SAUs): क्षेत्रीय विस्तार कार्यक्रम और किसान प्रशिक्षण जो स्थानीय कृषि-जलवायु के अनुसार होते हैं।
तुलनात्मक अध्ययन: चीन के कपास पैदावार सुधार कार्यक्रम से सीखें
2015 से 2020 के बीच, चीन के कपास अनुसंधान संस्थान ने एक पैदावार सुधार कार्यक्रम लागू किया, जिससे औसत पैदावार 600 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 900 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो गई। यह आनुवंशिक रूप से बेहतर किस्मों और यंत्रिकीकरण के माध्यम से संभव हुआ, जिसके परिणामस्वरूप निर्यात 25% बढ़ा और किसानों की आय में 30% की वृद्धि हुई (FAO 2021)। भारत की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों के कारण इन तकनीकों को क्षेत्र-विशिष्ट अनुसंधान और विस्तार सहायता के साथ अपनाना होगा।
| मापदंड | भारत (2023) | चीन (2015-2020) |
|---|---|---|
| औसत कपास पैदावार (किग्रा/हेक्टेयर) | ~500 | 600 से 900 (कार्यक्रम के बाद) |
| उत्पादन मात्रा (मिलियन बाल) | 36 | ~35 (लगभग) |
| निर्यात वृद्धि | लक्षित +15-20% | प्राप्त +25% |
| किसान आय वृद्धि | अनुमानित | 30% वृद्धि |
| मुख्य हस्तक्षेप | किस्म विकास, विस्तार, बाजार सुधार | आनुवंशिक बीज, यंत्रिकीकरण, एकीकृत कीट प्रबंधन |
मिशन की प्रभावशीलता में बाधक संरचनात्मक चुनौतियां
कृषि विस्तार प्रणाली में विखंडन के कारण नई तकनीकों को छोटे कपास किसानों तक पहुंचाने में देरी होती है। सस्ती ऋण सुविधा और फसल बीमा की कमी भी बेहतर इनपुट और जोखिम प्रबंधन में बाधा डालती है। इन कमजोरियों के कारण मिशन की सफलता पर असर पड़ सकता है, भले ही वित्तीय संसाधन और वैज्ञानिक प्रगति बढ़ाई गई हो।
इन कमियों को दूर करने के लिए विस्तार नेटवर्क को मजबूत करना, डिजिटल सलाहकार सेवाओं को जोड़ना और कपास किसानों के लिए वित्तीय समावेशन बढ़ाना जरूरी है। केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय भी अहम है क्योंकि कृषि संवैधानिक रूप से राज्य विषय है और बाजार सुधारों में एकरूपता आवश्यक है।
महत्व और आगे की राह
- कपास की पैदावार बढ़ाना किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के भारत के लक्ष्य से मेल खाता है।
- वैज्ञानिक नवाचार के साथ-साथ विस्तार, ऋण और बाजार पहुंच में संस्थागत सुधार जरूरी हैं।
- चीन जैसे सफल अंतरराष्ट्रीय मॉडल को अपनाने के लिए भारत की विविध कृषि-जलवायु के अनुसार अनुकूलन आवश्यक है।
- MoA&FW, ICAR, SAUs और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है।
- उत्पादकता, आय और निर्यात प्रदर्शन को मापने के लिए निगरानी और मूल्यांकन तंत्र बनाए जाने चाहिए ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो।
- कृषि संघ सूची का विषय है, जिससे केंद्र एकतरफा पैदावार वृद्धि योजनाएं लागू कर सकता है।
- Essential Commodities Act, 1955 में 2020 में संशोधन से कपास के बाजार नियमन में सुधार हुआ है।
- Cotton Corporation of India मुख्य रूप से कपास की नई किस्मों के अनुसंधान और विकास के लिए जिम्मेदार है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है जिसका वैश्विक हिस्सा 30% से अधिक है।
- कपास की पैदावार 700-800 किग्रा/हेक्टेयर तक बढ़ाने से निर्यात में 20% तक वृद्धि हो सकती है।
- चीन के कपास पैदावार सुधार कार्यक्रम में यंत्रिकीकरण और आनुवंशिक रूप से बेहतर किस्में शामिल थीं।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
भारत सरकार के 5,659 करोड़ रुपये के पांच साल के कपास पैदावार बढ़ाने मिशन के महत्व पर चर्चा करें, खासकर कृषि उत्पादकता, किसान आय और निर्यात प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में। किन संरचनात्मक चुनौतियों से इसकी सफलता बाधित हो सकती है और उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है? (250 शब्द)
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 (कृषि और ग्रामीण विकास)
- झारखंड परिप्रेक्ष्य: गढ़वा और लातेहार जैसे जिलों में कपास की खेती होती है; पैदावार सुधार से आदिवासी किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हो सकता है।
- मुख्य बिंदु: राज्य के विस्तार सेवाओं में विखंडन और ऋण की पहुंच जैसी चुनौतियों को उजागर करें, और केंद्र की योजनाओं के साथ समन्वय का सुझाव दें।
नई सरकार की योजना के तहत कपास की लक्षित पैदावार क्या है?
यह मिशन औसत कपास पैदावार को लगभग 500 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़ाकर 700-800 किग्रा/हेक्टेयर तक पांच वर्षों में बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जैसा कि कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने 2024 में घोषित किया है।
भारत में कपास अनुसंधान और विकास के लिए मुख्य संस्थान कौन-कौन से हैं?
Indian Council of Agricultural Research (ICAR) और Central Institute for Cotton Research (CICR) उच्च उपज और कीट-प्रतिरोधी कपास किस्मों के अनुसंधान और विकास के लिए जिम्मेदार हैं।
Essential Commodities Act, 1955 कपास बाजार नियमन से कैसे जुड़ा है?
2020 के संशोधन ने सरकार को कपास की आपूर्ति और कीमतों को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के अधिकार दिए हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता कम होती है और किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है।
भारत चीन के कपास पैदावार सुधार कार्यक्रम से क्या सीख सकता है?
भारत चीन की आनुवंशिक रूप से बेहतर किस्मों और यंत्रिकीकरण का उपयोग अपनाकर, साथ ही एकीकृत कीट प्रबंधन को जोड़कर अपने विविध कृषि-जलवायु क्षेत्रों के अनुसार तकनीकों को अनुकूलित कर सकता है।
कृषि जैसे विषय में केंद्र की योजनाओं के लिए क्यों होती है चुनौतियां?
कृषि मुख्य रूप से राज्य सूची का विषय है, लेकिन केंद्र अंतर-राज्यीय व्यापार के तहत हस्तक्षेप कर सकता है। प्रभावी केंद्र योजनाओं के लिए राज्यों के साथ समन्वय और APMC जैसे राज्य कानूनों के अनुरूपता जरूरी है।
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