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अंतरिक्ष मलबे का तेजी से बढ़ना: तथ्य और प्रभाव

2023 तक, पृथ्वी की कक्षाओं में 10 सेंटीमीटर से बड़े 34,000 से अधिक ट्रैक किए गए मलबे और अनुमानित 1 सेंटीमीटर से छोटे 128 मिलियन मलबे के टुकड़े मौजूद हैं (ESA Space Debris Office, NASA Orbital Debris Program Office)। ये मलबा बंद हुए उपग्रहों, इस्तेमाल हो चुके रॉकेट चरणों, टकराव से टूटे हिस्सों और विशेष रूप से 2007 में हुए चीनी ASAT परीक्षण से उत्पन्न हुआ, जिसने 3,000 से अधिक ट्रैक करने योग्य टुकड़े बनाए (NASA)। इस मलबे की बढ़ती घनता संचार, नेविगेशन और पृथ्वी अवलोकन जैसे महत्वपूर्ण उपग्रहों के संचालन को खतरे में डाल रही है, जिससे टकराव और सेवा बाधाओं के कारण हर साल अरबों रुपये के नुकसान का खतरा है।

2010 के बाद से भारत ने 300 से अधिक उपग्रह लॉन्च किए हैं (ISRO Annual Report 2023), लेकिन अंतरिक्ष मलबे को कम करने और कक्षाओं के सतत उपयोग को बढ़ावा देने वाले शासन तंत्र इस बढ़ती गतिविधि के अनुरूप विकसित नहीं हुए हैं। यह असंतुलन अंतरिक्ष सुरक्षा और स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, पर्यावरण प्रदूषण, सुरक्षा चुनौतियां
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – अंतरिक्ष शासन, संधियां, और भारत की भूमिका
  • निबंध: प्रौद्योगिकी और शासन, बाहरी अंतरिक्ष में पर्यावरणीय स्थिरता

अंतरिक्ष मलबे के लिए कानूनी और संस्थागत ढांचा

भारत में अंतरिक्ष शासन मुख्यतः Indian Space Research Organisation Act, 1969 के तहत होता है, जो ISRO के कार्यों को परिभाषित करता है लेकिन मलबे को कम करने या निजी क्षेत्र के नियमन के लिए कोई प्रावधान नहीं रखता। वर्तमान में विचाराधीन Space Activities Bill इस कमी को दूर करने का प्रयास करता है, जिसमें निजी खिलाड़ियों के नियमन, मलबे को कम करने और दायित्व के प्रावधान शामिल हैं, लेकिन यह अभी तक पारित नहीं हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, Outer Space Treaty (1967) और Liability Convention (1972) शांति पूर्ण उपयोग और क्षति के लिए दायित्व के मूल सिद्धांत स्थापित करते हैं, लेकिन ये विशेष रूप से अंतरिक्ष मलबे को संबोधित नहीं करते। UN Committee on the Peaceful Uses of Outer Space (COPUOS) मलबे को कम करने के लिए गैर-बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी करता है, लेकिन इनके पालन की कोई सख्त व्यवस्था नहीं है। इसलिए, कोई बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि मलबे को हटाने या सक्रिय रूप से कम करने के लिए मौजूद नहीं है।

प्रमुख संस्थाएं और उनकी भूमिका

  • ISRO: भारत के अंतरिक्ष मिशनों और उपग्रह लॉन्च का संचालन करता है, लेकिन यह कोई नियामक संस्था नहीं है।
  • IN-SPACe: 2020 में स्थापित, यह भारत में निजी और व्यावसायिक अंतरिक्ष गतिविधियों को लाइसेंसिंग और अनुपालन के तहत नियंत्रित करता है, लेकिन मलबे से संबंधित नियामक ढांचा अभी विकसित हो रहा है।
  • UN COPUOS: अंतरराष्ट्रीय संवाद और दिशानिर्देश प्रदान करता है, लेकिन इसके पास प्रवर्तन शक्ति नहीं है।
  • NASA: Space Surveillance Network (SSN) संचालित करता है, जो 27,000 से अधिक वस्तुओं को ट्रैक करता है और 2001 से Orbital Debris Mitigation Standard Practices (ODMSP) लागू कर रहा है।
  • ESA: सक्रिय मलबा हटाने के मिशन और नीति ढांचे विकसित करता है, जो कक्षीय भीड़ को नियंत्रित करने के वैश्विक प्रयासों में योगदान देता है।

आर्थिक दांव और कक्षीय भीड़ के खतरे

वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2021 में 469 अरब डॉलर थी और 2040 तक 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है (Bryce Space and Technology Report 2022)। भारत का अंतरिक्ष बजट 2023-24 में 13,949 करोड़ रुपये (~1.7 बिलियन डॉलर) है (Union Budget 2023-24)। उपग्रह सेवाएं दूरसंचार, GPS नेविगेशन, मौसम पूर्वानुमान और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रीढ़ हैं।

कक्षीय मलबा इन सेवाओं को टकराव के जोखिम से खतरे में डालता है, जिससे उपग्रह विफल हो सकते हैं और मलबे की संख्या में और वृद्धि हो सकती है (Kessler Syndrome)। इससे सेवा बाधा और उपग्रह प्रतिस्थापन के कारण संभावित आर्थिक नुकसान हर साल अरबों में हो सकता है, जो अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की वृद्धि और विश्वसनीयता को प्रभावित करता है।

तुलनात्मक शासन: भारत बनाम अमेरिका और ESA

पहलूअमेरिकाभारतयूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA)
अंतरिक्ष मलबे की ट्रैकिंगSpace Surveillance Network 27,000 से अधिक वस्तुओं को ट्रैक करता हैसीमित स्वदेशी ट्रैकिंग; अंतरराष्ट्रीय डेटा पर निर्भरसक्रिय ट्रैकिंग और अनुसंधान क्षमता
नियामक ढांचा2001 से Orbital Debris Mitigation Standard Practices (ODMSP); निजी खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय कानूनSpace Activities Bill ड्राफ्ट में; IN-SPACe निजी क्षेत्र को नियंत्रित करता हैमलबे को कम करने और हटाने के मिशनों के लिए नीति ढांचे
प्रवर्तन तंत्रबाध्यकारी राष्ट्रीय नियम और अनुपालन निगरानीअभी तक बाध्यकारी घरेलू प्रवर्तन नहींस्वैच्छिक अनुपालन; EU सदस्य राज्यों के साथ काम करता है
सक्रिय मलबा हटानाअनुसंधान और पायलट परियोजनाएं जारीसीमित पहल; तकनीकी विकास प्रारंभिक चरण मेंहटाने के मिशनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का विकास

अंतरिक्ष मलबे शासन में महत्वपूर्ण नीति अंतर

  • मलबे को कम करने और हटाने के लिए कोई बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि नहीं है।
  • भारत के पास मलबे को कम करने, सक्रिय हटाने और निजी अंतरिक्ष खिलाड़ियों के लिए दायित्व के लिए व्यापक घरेलू कानून नहीं है।
  • सीमित स्वदेशी मलबे ट्रैकिंग ढांचा स्थिति जागरूकता और टकराव से बचाव को सीमित करता है।
  • वैश्विक शासन विखंडित है और गैर-बाध्यकारी दिशानिर्देशों पर आधारित है, जिससे अनुपालन और प्रवर्तन असंगत होता है।
  • सक्रिय मलबा हटाने की तकनीकी चुनौतियां और उच्च लागत बड़े पैमाने पर अभी तक हल नहीं हुई हैं।

महत्व और आगे का रास्ता

  • भारत को Space Activities Bill को शीघ्र पारित करना चाहिए, जिसमें मलबे को कम करने, दायित्व और निजी क्षेत्र के नियमन के प्रावधान शामिल हों।
  • संचालन सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्वदेशी अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता और मलबे ट्रैकिंग बुनियादी ढांचे में निवेश जरूरी है।
  • COPUOS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में सक्रिय भागीदारी और नेतृत्व से बाध्यकारी मलबे कम करने वाली संधियों के लिए दबाव बढ़ाना चाहिए।
  • सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से सक्रिय मलबा हटाने की तकनीकों में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना चाहिए।
  • भविष्य में मलबे के निर्माण को कम करने के लिए उपग्रह डिजाइन, लॉन्च और जीवनकाल के अंत के नियमों में मलबा कम करने के मानदंड शामिल किए जाने चाहिए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
अंतरिक्ष मलबे शासन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Outer Space Treaty (1967) हस्ताक्षरकर्ता देशों को सक्रिय रूप से अंतरिक्ष मलबे हटाने का स्पष्ट निर्देश देता है।
  2. UN Committee on the Peaceful Uses of Outer Space (COPUOS) अंतरिक्ष मलबे कम करने के लिए गैर-बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी करता है।
  3. भारत के पास वर्तमान में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों और मलबे कम करने के लिए व्यापक घरेलू कानून है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि Outer Space Treaty सक्रिय मलबा हटाने का स्पष्ट आदेश नहीं देता। कथन 2 सही है क्योंकि COPUOS गैर-बाध्यकारी दिशानिर्देश जारी करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि भारत का Space Activities Bill अभी ड्राफ्ट में है और पारित नहीं हुआ है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के अंतरिक्ष शासन संस्थानों के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. ISRO भारत में निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
  2. IN-SPACe निजी क्षेत्र की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने और नियंत्रित करने के लिए स्थापित किया गया है।
  3. ISRO Indian Space Research Organisation Act, 1969 के तहत संचालित होता है।

इनमें से कौन-सा/से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि ISRO निजी खिलाड़ियों का नियमन नहीं करता। कथन 2 सही है क्योंकि IN-SPACe निजी क्षेत्र को नियंत्रित करता है। कथन 3 सही है क्योंकि ISRO 1969 के अधिनियम के तहत संचालित होता है।

मुख्य प्रश्न

अंतरिक्ष मलबे द्वारा सतत अंतरिक्ष गतिविधियों को होने वाली चुनौतियों की समीक्षा करें और भारत के अंतरिक्ष शासन तंत्र में इन चुनौतियों को संबोधित करने में मौजूद खामियों का विश्लेषण करें। भारत की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मलबे कम करने की कोशिशों में भूमिका मजबूत करने के लिए सुझाव दें। (250 शब्द)

अंतरिक्ष मलबा क्या है और यह चिंता का विषय क्यों है?

अंतरिक्ष मलबा बंद हुए उपग्रहों, उपयोग किए गए रॉकेट चरणों और टकराव से उत्पन्न टूटे हुए टुकड़ों से बनता है जो पृथ्वी की कक्षा में घूमते हैं। यह सक्रिय उपग्रहों से टकराव का खतरा पैदा करता है, अंतरिक्ष सुरक्षा को प्रभावित करता है और केसलर सिंड्रोम के कारण कक्षाओं को अनुपयोगी बना सकता है।

कौन-कौन सी अंतरराष्ट्रीय संधियां अंतरिक्ष गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं?

Outer Space Treaty (1967) शांति पूर्ण उपयोग और दायित्व के सिद्धांत स्थापित करता है। Liability Convention (1972) क्षति के लिए दायित्व को संबोधित करता है। दोनों संधियां विशेष रूप से अंतरिक्ष मलबे को कम करने को नियंत्रित नहीं करतीं।

भारत में IN-SPACe की भूमिका क्या है?

IN-SPACe, 2020 में स्थापित, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता और नियंत्रित करता है, जिसमें लाइसेंसिंग और अनुपालन शामिल है, लेकिन मलबे से जुड़ा नियामक ढांचा अभी विकसित हो रहा है।

अमेरिका अंतरिक्ष मलबे का प्रबंधन कैसे करता है?

अमेरिका Space Surveillance Network संचालित करता है जो 27,000 से अधिक वस्तुओं को ट्रैक करता है और 2001 से Orbital Debris Mitigation Standard Practices (ODMSP) लागू कर रहा है, जिससे मलबे जनित घटनाओं में 30% की कमी आई है।

केसलर सिंड्रोम क्या है?

NASA के वैज्ञानिक डोनाल्ड केसलर ने 1978 में प्रस्तावित, यह सिद्धांत है कि कक्षा में टकराव की एक श्रृंखला मलबे की संख्या को तेजी से बढ़ा सकती है, जिससे कुछ कक्षाएं उपग्रहों के लिए अनुपयोगी हो सकती हैं।

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