2024 में भारत के उर्वरक संकट का परिचय
2024 की शुरुआत में भारत का उर्वरक क्षेत्र वैश्विक कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान के कारण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। फरवरी में यूरिया की कीमत $508 प्रति टन से बढ़कर अप्रैल 2024 तक $935 प्रति टन हो गई, जिसका कारण यूएस-इजरायल और ईरान के बीच तनाव से जुड़ा हॉर्मुज जलसंधि के आसपास का भू-राजनीतिक संकट है। भारत वार्षिक लगभग 39-40 मिलियन टन यूरिया का उपयोग करता है, जिसमें से 25% आयातित होता है, जो मुख्यतः खाड़ी देशों से आता है जो इन आयातों का लगभग 40% हिस्सा प्रदान करते हैं। साथ ही, घरेलू यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का 60% से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण जोखिम को बढ़ाता है।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था (कृषि, उद्योग, बुनियादी ढांचा), अंतरराष्ट्रीय संबंध (भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखलाएं)
- निबंध: वैश्विक भू-राजनीति का भारत के कृषि इनपुट और खाद्य सुरक्षा पर प्रभाव
- प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा: आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक सब्सिडी सुधार
उर्वरक विनियमन का संरचनात्मक और कानूनी ढांचा
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 सरकार को संकट के समय उर्वरकों की आपूर्ति और वितरण नियंत्रित करने का अधिकार देती है। इसी अधिनियम के तहत जारी फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर (FCO), 1985 गुणवत्ता मानकों और वितरण प्रणाली को नियंत्रित करता है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अंतर्गत उर्वरक विभाग (DoF) उर्वरक सब्सिडी योजना का संचालन करता है, जो वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, और वित्त वर्ष 2023-24 के लिए इसका बजट लगभग ₹1.05 लाख करोड़ है। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फर्टिलाइजर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन मामले में दिया गया निर्णय मूल्य निर्धारण और सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देता है, जिससे इस क्षेत्र के शासन संबंधी चुनौतियां सामने आई हैं।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955: संकट के दौरान उर्वरक आपूर्ति पर नियंत्रण की अनुमति।
- फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर, 1985: गुणवत्ता और वितरण के नियम तय करता है।
- उर्वरक विभाग: नीति निर्माण और सब्सिडी प्रबंधन।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्णय: मूल्य निर्धारण और सब्सिडी तंत्र में पारदर्शिता लागू करता है।
उर्वरक संकट के आर्थिक पहलू
भारत में उर्वरक खपत में यूरिया का हिस्सा लगभग 55% है, जो पोषक तत्वों के असंतुलित उपयोग को दर्शाता है। सब्सिडी नीति यूरिया को भारी प्रोत्साहन देती है, जिससे पोषक तत्व असंतुलन और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट होती है। सल्फर और अमोनिया जैसे कच्चे माल की वैश्विक कीमतों में 50% से अधिक की वृद्धि ने घरेलू उत्पादन लागत बढ़ा दी है। यूरिया का 25% आयात और LNG का 60% से अधिक आयात पश्चिम एशिया से होने के कारण भारत को दोहरे आपूर्ति जोखिम का सामना करना पड़ता है। उर्वरक सब्सिडी बजट भले ही बड़ा हो (FY 2023-24 में ₹1.05 लाख करोड़), यह वित्तीय संसाधनों पर दबाव डालता है और बाजार संकेतों को विकृत करता है, जिससे संतुलित उर्वरक उपयोग की ओर प्रोत्साहन कम होता है।
- वार्षिक यूरिया खपत: 39-40 मिलियन टन (MoC&F)।
- यूरिया आयात निर्भरता: 25%, जिसमें खाड़ी देश 40% की आपूर्ति करते हैं (DGFT)।
- कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि: सल्फर और अमोनिया की कीमतों में 50% से अधिक (FAI)।
- उर्वरक सब्सिडी बजट FY 2023-24: ₹1.05 लाख करोड़ (इकोनॉमिक सर्वे 2024)।
- यूरिया कुल उर्वरक खपत का 55% हिस्सा (कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय)।
प्रमुख संस्थान और उनकी भूमिकाएं
उर्वरक विभाग नीति और सब्सिडी प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) उद्योग डेटा और वकालत प्रदान करता है। रसायन और उर्वरक मंत्रालय विनियामक ढांचे की देखरेख करता है। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (FAO) वैश्विक उर्वरक बाजारों की निगरानी करता है और आपूर्ति बाधाओं की पूर्व चेतावनी देता है। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) LNG आपूर्ति को नियंत्रित करता है, जो घरेलू यूरिया उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।
- DoF: नीति और सब्सिडी प्रबंधन।
- FAI: उद्योग डेटा और बाजार वकालत।
- रसायन और उर्वरक मंत्रालय: विनियामक निगरानी।
- FAO: अंतरराष्ट्रीय बाजार मॉनिटरिंग।
- PNGRB: LNG आपूर्ति नियंत्रण।
भारत और चीन की उर्वरक नीतियों की तुलना
| पहलू | भारत | चीन |
|---|---|---|
| घरेलू उत्पादन | यूरिया की 75% मांग घरेलू उत्पादन से; 25% आयात | 90% से अधिक घरेलू उत्पादन; मजबूत आत्मनिर्भरता |
| आयात निर्भरता | यूरिया और LNG के लिए खाड़ी देशों पर उच्च निर्भरता | कम आयात निर्भरता; विविध स्रोत |
| पोषक तत्व उपयोग पैटर्न | यूरिया-केंद्रित, कुल उर्वरक खपत का 55% | संतुलित पोषक तत्व उपयोग, विविध उर्वरक |
| सब्सिडी नीति | यूरिया पर भारी सब्सिडी, अधिक उपयोग और वित्तीय बोझ | लक्षित सब्सिडी, संतुलित उर्वरक उपयोग और दक्षता को बढ़ावा |
| मूल्य झटकों के प्रति संवेदनशीलता | आयात निर्भरता और सब्सिडी विकृतियों के कारण उच्च | आत्मनिर्भरता और विविध पोषक तत्व प्रबंधन के कारण कम |
भारत के उर्वरक क्षेत्र की मुख्य कमजोरियां
- सब्सिडी-आधारित असंतुलन: यूरिया की भारी सब्सिडी अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा देती है, जिससे मिट्टी में पोषक तत्व असंतुलन और पर्यावरणीय गिरावट होती है।
- आयात निर्भरता: यूरिया और LNG के लिए उच्च आयात निर्भरता वैश्विक मूल्य अस्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिम को जन्म देती है।
- घरेलू उत्पादन क्षमता की कमी: घरेलू उर्वरक उत्पादन में निवेश की कमी आत्मनिर्भरता को सीमित करती है।
- वैकल्पिक पोषक तत्वों को बढ़ावा न देना: संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रोत्साहन न होना स्थायी कृषि में बाधा है।
- पारदर्शिता और शासन: सब्सिडी वितरण और मूल्य निर्धारण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अधिक पारदर्शिता की जरूरत है।
नीति सुझाव और आगे का रास्ता
- सब्सिडी संरचना में सुधार: उत्पाद-आधारित से पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी की ओर बदलाव कर संतुलित उर्वरक उपयोग और यूरिया पर निर्भरता कम करें।
- घरेलू उत्पादन बढ़ाएं: यूरिया और जटिल उर्वरकों के लिए उत्पादन क्षमता और तकनीक में निवेश करें।
- आयात स्रोतों में विविधता: भू-राजनीतिक जोखिम कम करने के लिए आयात भागीदारों को बढ़ाएं और वैकल्पिक कच्चे माल खोजें।
- मिट्टी स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा: समग्र पोषक तत्व प्रबंधन और जैविक उर्वरकों को प्रोत्साहित कर मिट्टी का संतुलन बहाल करें।
- नियामक निगरानी मजबूत करें: सब्सिडी प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाएं और गुणवत्ता मानकों को कड़ाई से लागू करें।
- यह आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत जारी किया गया है।
- यह भारत में उर्वरकों की गुणवत्ता और वितरण को नियंत्रित करता है।
- यह उर्वरकों की कीमतों को सीधे नियंत्रित करता है बिना उर्वरक विभाग की भागीदारी के।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
- भारत अपनी वार्षिक यूरिया खपत का लगभग 25% आयात करता है।
- भारत के LNG आयात का 60% से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है, जो यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक है।
- यूरिया भारत की कुल उर्वरक खपत का 40% से कम हिस्सा है।
इनमें से कौन-से कथन सही हैं?
मुख्य प्रश्न
वैश्विक आपूर्ति बाधाओं के बीच भारत के उर्वरक संकट के कारणों और परिणामों की समीक्षा करें। भारत की संवेदनशीलता कम करने और सतत उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नीति सुझाव दें। (250 शब्द)
झारखंड और JPSC से प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 3 – कृषि और संबद्ध क्षेत्र; पेपर 2 – आर्थिक विकास और योजना
- झारखंड दृष्टिकोण: झारखंड की कृषि यूरिया आधारित उर्वरकों पर निर्भर है; आपूर्ति में व्यवधान स्थानीय किसानों की उत्पादकता और लागत को प्रभावित करता है।
- मुख्य बिंदु: सब्सिडी सुधार और आपूर्ति श्रृंखला कमजोरियों का झारखंड की कृषि उत्पादन और मिट्टी स्वास्थ्य पर प्रभाव चर्चा करें।
भारत में यूरिया की खपत इतनी अधिक क्यों है?
भारत की उर्वरक सब्सिडी नीति यूरिया को अन्य पोषक तत्वों की तुलना में सस्ता बनाती है, जिससे इसका अत्यधिक उपयोग होता है। यूरिया कुल उर्वरक खपत का 55% हिस्सा है, जो पोषक तत्व असंतुलन और मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट का कारण बनता है।
आवश्यक वस्तु अधिनियम का उर्वरक विनियमन में क्या योगदान है?
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 सरकार को संकट के दौरान उर्वरक की आपूर्ति, वितरण और मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करने का अधिकार देती है ताकि उपलब्धता सुनिश्चित हो और जमाखोरी रोकी जा सके।
भू-राजनीतिक तनाव भारत के उर्वरक आपूर्ति को कैसे प्रभावित करते हैं?
भारत यूरिया का 25% और LNG का 60% से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, जो भू-राजनीतिक रूप से अस्थिर क्षेत्र है। हॉर्मुज जलसंधि के आसपास के संघर्ष आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा डालते हैं और कीमतों में वृद्धि करते हैं, जिससे घरेलू उर्वरक उपलब्धता और लागत प्रभावित होती है।
भारत में उर्वरक सब्सिडी नीतियों के आर्थिक परिणाम क्या हैं?
सब्सिडी बाजार कीमतों को विकृत करती है, यूरिया के अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा देती है, वित्तीय बजट (FY 2023-24 में ₹1.05 लाख करोड़) पर दबाव डालती है, और संतुलित पोषक तत्व उपयोग को हतोत्साहित करती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता गिरती है और कृषि स्थिरता कम होती है।
चीन की उर्वरक नीति भारत से कैसे अलग है?
चीन आत्मनिर्भरता पर जोर देता है, जहां 90% से अधिक उत्पादन घरेलू है, पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग होता है, और लक्षित सब्सिडी नीति से संतुलित उर्वरक उपयोग और दक्षता को बढ़ावा मिलता है। इससे चीन की वैश्विक मूल्य झटकों के प्रति संवेदनशीलता भारत की तुलना में कम है।
आधिकारिक स्रोत एवं आगे पढ़ाई
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 21 April 2026 | अंतिम अपडेट: 26 April 2026
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