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परिचय: कल्पक्कम में FBTR की क्रिटिकलिटी

2024 में तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) ने क्रिटिकलिटी हासिल की, जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह रिएक्टर इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अंतर्गत विकसित और संचालित किया जाता है। FBTR की यह सफलता भारत की तेज गति से विकसित होती ब्रीडर रिएक्टर तकनीक को दर्शाती है। इस क्रिटिकलिटी से भारत के तीन-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को बल मिलेगा, जिसका उद्देश्य देश के प्रचुर थोरियम संसाधनों का उपयोग करना और यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम करना है।

UPSC से संबंधित

  • GS पेपर 3: विज्ञान और प्रौद्योगिकी – परमाणु ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा
  • GS पेपर 2: राजनीति – परमाणु ऊर्जा अधिनियम, नियामक ढांचा
  • निबंध: सतत ऊर्जा और भारत की तकनीकी नवाचार

FBTR के संचालन के लिए कानूनी और नियामक ढांचा

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 (धारा 3 और 4) केंद्र सरकार को परमाणु ऊर्जा के विकास और अनुसंधान को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। FBTR का संचालन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 और 5 के तहत पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों का पालन करता है, जो परमाणु प्रतिष्ठानों के लिए कड़े पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को अनिवार्य बनाता है। साथ ही, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) सुरक्षा और नियामक अनुपालन की देखरेख करता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड बनाम भारत संघ (2013) मामले में दिए गए आदेशों द्वारा भी मजबूती मिली है, जिसमें परमाणु परियोजनाओं में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और सार्वजनिक पारदर्शिता पर जोर दिया गया है।

FBTR के संचालन के आर्थिक पहलू

संघीय बजट 2023-24 में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए लगभग ₹13,000 करोड़ (लगभग 1.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर) आवंटित किए गए हैं, जिनमें फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भी शामिल हैं। DAE वार्षिक रिपोर्ट 2023 के अनुसार, FBTR की क्रिटिकलिटी से पारंपरिक थर्मल रिएक्टरों की तुलना में ईंधन उपयोग की दक्षता 60-70% तक बढ़ेगी। इससे अगले दशक में यूरेनियम आयात पर निर्भरता लगभग 30% तक कम होने की उम्मीद है, जिससे विदेशी मुद्रा में अरबों रुपए की बचत होगी। भारत 2031 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को 22,480 मेगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है, जिसमें फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

FBTR के विकास और संचालन में संस्थागत भूमिका

  • इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR): FBTR का मुख्य विकासकर्ता और संचालक, डिजाइन, परीक्षण और अनुसंधान के लिए जिम्मेदार।
  • परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE): नीति निर्धारण, वित्त पोषण और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रमों का समन्वय।
  • न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL): वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन और भविष्य में ब्रीडर रिएक्टरों की तैनाती।
  • परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB): नियामक देखरेख, सुरक्षा आश्वासन और पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करता है।

FBTR और भारत के परमाणु ईंधन से जुड़ी तकनीकी एवं संसाधन जानकारी

  • कल्पक्कम का FBTR 2024 की शुरुआत में क्रिटिकलिटी हासिल कर चुका है (The Hindu, 2024)।
  • फास्ट ब्रीडर रिएक्टर थोरियम-232 और यूरेनियम-238 का उपयोग करके फिसाइल पदार्थ (प्लूटोनियम-239) उत्पन्न करता है, जिससे ईंधन दक्षता 70% तक बढ़ती है (DAE वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
  • भारत के पास दुनिया के दूसरे सबसे बड़े थोरियम भंडार (~960,000 टन) हैं, जो मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में स्थित हैं (एटॉमिक मिनरल्स डायरेक्टरेट, 2022)।
  • वर्तमान में परमाणु ऊर्जा भारत की कुल बिजली उत्पादन में 3.22% योगदान देती है (CEA रिपोर्ट 2023)।
  • भारत की यूरेनियम आयात निर्भरता लगभग 85% है (वर्ल्ड न्यूक्लियर एसोसिएशन, 2023)।
  • FBTR तकनीक थर्मल रिएक्टर की तुलना में परमाणु कचरे की मात्रा लगभग 40% तक कम करती है (IGCAR तकनीकी बुलेटिन, 2023)।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत का FBTR बनाम फ्रांस के ब्रीडर रिएक्टर

पहलूभारत का FBTR (कल्पक्कम)फ्रांस के फेनिक्स और सुपरफेनिक्स
संचालन काल1985 से FBTR, 2024 में उन्नत संस्करण की क्रिटिकलिटीफेनिक्स: 1973–2009; सुपरफेनिक्स: 1985–1997
ईंधन चक्रस्वदेशी डिजाइन, थोरियम-प्लूटोनियम प्रजनन पर केंद्रितमुख्य रूप से प्लूटोनियम-यूरेनियम प्रजनन, थोरियम शामिल नहीं
तकनीकी चुनौतियांक्रमिक सुधार, थोरियम चक्र के साथ समाकलन जारीतकनीकी और राजनीतिक कारणों से बार-बार बंदी
आर्थिक व्यवहार्यताईंधन दक्षता और कचरा कम करने से लागत प्रभावीउच्च परिचालन लागत के कारण अंततः बंद
रणनीतिक महत्वभारत के तीन-स्तरीय परमाणु कार्यक्रम के लिए आवश्यकदीर्घकालिक समर्थन की कमी के कारण बंद

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के विस्तार में चुनौतियां

तकनीकी प्रगति के बावजूद, भारत में फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों के वाणिज्यिक विस्तार में कई बाधाएं हैं। ईंधन पुनःप्रसंस्करण के लिए सीमित सुविधाएं ब्रीडर संचालन के लिए आवश्यक ईंधन चक्र को बाधित करती हैं। थोरियम ईंधन चक्र की बड़ी सुविधाएं अभी विकासाधीन हैं, जिससे थोरियम संसाधनों का पूर्ण उपयोग विलंबित हो रहा है। इसके विपरीत, रूस में समेकित बंद ईंधन चक्र संयंत्र संचालित हैं, जो ब्रीडर तकनीक के विस्तार को सुगम बनाते हैं। इन कमियों को दूर करना भारत के परमाणु ऊर्जा रोडमैप में FBTR की पूरी क्षमता को प्राप्त करने के लिए जरूरी है।

महत्व और आगे का रास्ता

  • FBTR की क्रिटिकलिटी से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, यूरेनियम आयात पर निर्भरता कम होगी और थोरियम संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
  • ईंधन उपयोग की दक्षता में सुधार और परमाणु कचरे की मात्रा में कमी से पर्यावरण और आर्थिक लागत कम होगी।
  • वाणिज्यिक विस्तार के लिए पुनःप्रसंस्करण और थोरियम ईंधन निर्माण सुविधाओं को मजबूत करना आवश्यक है।
  • सुरक्षा और नियामक ढांचे को भी विकास के साथ अपडेट करना होगा ताकि जनविश्वास और संचालन सुरक्षा बनी रहे।
  • वैश्विक फास्ट ब्रीडर कार्यक्रमों के साथ सहयोग से तकनीक में तेजी से सुधार और तैनाती में मदद मिल सकती है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. FBR तेज न्यूट्रॉन का उपयोग करके उपजाऊ पदार्थ को फिसाइल ईंधन में बदलते हैं।
  2. सभी तेज न्यूट्रॉन रिएक्टर ब्रीडर रिएक्टर होते हैं।
  3. भारत का FBTR थोरियम-232 का उपयोग करके यूरेनियम-233 उत्पन्न करता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि FBR तेज न्यूट्रॉन का उपयोग करके उपजाऊ समस्थानिकों से फिसाइल पदार्थ उत्पन्न करते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि सभी तेज न्यूट्रॉन रिएक्टर ब्रीडर नहीं होते। कथन 3 सही है; भारत का FBTR थोरियम-232 का उपयोग कर यूरेनियम-233 पैदा करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारत के परमाणु ईंधन चक्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. भारत की यूरेनियम आयात निर्भरता 80% से अधिक है।
  2. थोरियम-232 फिसाइल है और सीधे रिएक्टर ईंधन के रूप में उपयोग होता है।
  3. परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 राज्यों को परमाणु प्रतिष्ठानों को नियंत्रित करने का अधिकार देता है।

इनमें से कौन-से कथन सही हैं?

  • aकेवल 1
  • bकेवल 1 और 3
  • cकेवल 2
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (a)
कथन 1 सही है; भारत लगभग 85% यूरेनियम आयात करता है। कथन 2 गलत है; थोरियम-232 उपजाऊ है, फिसाइल नहीं, इसे यूरेनियम-233 में परिवर्तित करना पड़ता है। कथन 3 भी गलत है; परमाणु ऊर्जा अधिनियम के तहत नियामक अधिकार केंद्र सरकार के पास हैं, न कि राज्यों के।

मुख्य प्रश्न

कल्पक्कम में फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर की हालिया क्रिटिकलिटी उपलब्धि का भारत के तीन-स्तरीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के संदर्भ में महत्व पर चर्चा करें। इसके आर्थिक और रणनीतिक प्रभावों के साथ-साथ फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक के विस्तार में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें।

झारखंड और JPSC से संबंध

  • JPSC पेपर: पेपर 2 – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, ऊर्जा क्षेत्र
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में यूरेनियम खनन होता है; परमाणु ईंधन चक्र में विकास से स्थानीय संसाधन उपयोग और रोजगार पर प्रभाव पड़ता है।
  • मुख्य बिंदु: परमाणु ईंधन चक्र की प्रगति को क्षेत्रीय संसाधन प्रबंधन, ऊर्जा सुरक्षा और झारखंड के आर्थिक लाभ से जोड़कर उत्तर तैयार करें।
फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर में क्रिटिकलिटी हासिल करने का क्या महत्व है?

क्रिटिकलिटी का मतलब है कि रिएक्टर में स्व-संचालित परमाणु श्रृंखला प्रतिक्रिया शुरू हो गई है, जिससे यह अपने से अधिक फिसाइल पदार्थ उत्पन्न कर सकता है। यह उपलब्धि रिएक्टर की परिचालन तत्परता और भारत के ईंधन स्थिरता के लिए आवश्यक ब्रीडर तकनीक की पुष्टि करती है।

FBTR भारत की यूरेनियम आयात निर्भरता को कैसे कम करता है?

FBTR तेज न्यूट्रॉन का उपयोग करके यूरेनियम-238 और थोरियम-232 जैसे उपजाऊ समस्थानिकों को फिसाइल पदार्थ में बदलता है, जिससे ईंधन की दक्षता 70% तक बढ़ जाती है। इससे घरेलू संसाधनों का अधिकतम उपयोग होता है और आयातित यूरेनियम की जरूरत कम होती है।

भारत में FBTR जैसे परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मुख्य कानूनी प्रावधान क्या हैं?

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 केंद्र सरकार को परमाणु ऊर्जा विकास को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 पर्यावरण सुरक्षा सुनिश्चित करता है। AERB सुरक्षा मानकों की निगरानी करता है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों से मजबूती मिली है।

भारत की परमाणु ऊर्जा रणनीति में थोरियम का क्या महत्व है?

भारत के पास दुनिया के दूसरे सबसे बड़े थोरियम भंडार (~960,000 टन) हैं। थोरियम-232 उपजाऊ होता है और ब्रीडर रिएक्टरों में इसे फिसाइल यूरेनियम-233 में बदला जा सकता है, जिससे स्थायी और स्वदेशी परमाणु ईंधन चक्र संभव होता है।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक के विस्तार में भारत को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?

चुनौतियों में ईंधन पुनःप्रसंस्करण क्षमता की कमी, थोरियम ईंधन निर्माण सुविधाओं के विकास में देरी, और वाणिज्यिक स्तर पर विस्तार के लिए सुरक्षा तथा नियामक ढांचे का सुदृढ़ीकरण शामिल हैं।

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