अप्रैल 2024 में भारत सरकार ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के माध्यम से परिधान और मेड-अप्स निर्यात के लिए राज्य और केंद्र सरकार के करों तथा शुल्कों की वापसी (RoSCTL) योजना का विस्तार किया है। यह योजना मूल रूप से विदेशी व्यापार नीति (FTP) 2015-20 के तहत शुरू की गई थी, जिसका मकसद उन अंतर्निहित राज्य और केंद्र सरकार के करों को वापस करना है जो अन्य माध्यमों से वापस नहीं होते, ताकि भारतीय निर्यात की लागत प्रतिस्पर्धात्मक बनी रहे। इस विस्तार के तहत अगले तीन वर्षों तक योजना जारी रहेगी, जो उत्पादन और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा देने की सरकार की रणनीति को जारी रखती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – निर्यात प्रोत्साहन, विदेशी व्यापार नीति, WTO समझौते
- GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – WTO अनुपालन और व्यापार समझौते
- निबंध: भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा में निर्यात प्रोत्साहनों की भूमिका
RoSCTL की कानूनी और संवैधानिक रूपरेखा
RoSCTL योजना विदेशी व्यापार नीति (FTP) 2015-20 के तहत अधिसूचित है और इसे DGFT द्वारा कस्टम्स एक्ट, 1962 की धारा 25 के अधिकारों के तहत लागू किया जाता है। यह योजना उन अंतर्निहित राज्य और केंद्र सरकार के करों और शुल्कों की वापसी करती है जो अन्य किसी माध्यम से वापस नहीं होते। यह वापसी विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सब्सिडी और काउंटरवेलिंग उपाय (ASCM) समझौते के अनुरूप है क्योंकि यह सीधे नकद सब्सिडी के बजाय शुल्क वापसी के रूप में दी जाती है, जिससे व्यापार विवादों से बचा जा सके। यह योजना पहले की राज्य शुल्क वापसी (ROSL) योजना की जगह लेती है और इसमें केंद्र सरकार के कर भी शामिल हैं, इसलिए यह अधिक व्यापक है।
- वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत DGFT द्वारा लागू
- कस्टम्स एक्ट, 1962 की धारा 25 के अंतर्गत संचालित
- WTO-ASCM के अनुरूप शुल्क वापसी प्रदान करती है, सीधे नकद सब्सिडी नहीं
- ROSL योजना की जगह लेकर केंद्र और राज्य करों को शामिल किया गया
RoSCTL विस्तार का आर्थिक महत्व
टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र भारत के GDP में लगभग 7% का योगदान देता है और 45 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करता है (टेक्सटाइल मंत्रालय, 2023)। वित्तीय वर्ष 2022-23 में भारत के परिधान निर्यात का मूल्य 18 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो पिछले पांच वर्षों में 8% की CAGR से बढ़ा है (टेक्सटाइल मंत्रालय वार्षिक रिपोर्ट 2023)। RoSCTL योजना परिधान निर्यात के FOB मूल्य पर 4.2% तक की वापसी दर प्रदान करती है, जिससे निर्यात लागत कम होती है और वैश्विक बाजारों में मूल्य प्रतिस्पर्धा बेहतर होती है। DGFT के अनुसार इस योजना के विस्तार से अगले तीन वर्षों में निर्यात में 10-12% की वार्षिक वृद्धि संभव है, जो भारत की वैश्विक टेक्सटाइल व्यापार में स्थिति को मजबूत करेगा।
- टेक्सटाइल क्षेत्र GDP में ~7% योगदान और 45 मिलियन रोजगार (टेक्सटाइल मंत्रालय, 2023)
- वित्तीय वर्ष 2022-23 में परिधान निर्यात USD 18 अरब, 5 वर्षों में 8% CAGR
- RoSCTL वापसी दरें FOB मूल्य पर 4.2% तक (DGFT अधिसूचना 2024)
- विस्तार के बाद निर्यात वृद्धि 10-12% वार्षिक अनुमान (DGFT 2024)
- निर्यात प्रोत्साहन के लिए INR 3,000 करोड़ आवंटित (केंद्रीय बजट 2023-24)
RoSCTL कार्यान्वयन में संस्थागत भूमिकाएं
DGFT इस योजना के क्रियान्वयन की मुख्य एजेंसी है, जो अधिसूचनाएं जारी करता है और दावों का प्रबंधन करता है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय निर्यात नीतियों का निर्माण करता है और व्यापार प्रोत्साहन पहलों की देखरेख करता है। टेक्सटाइल मंत्रालय इस क्षेत्र के विकास का समन्वय करता है और निर्यातकों के साथ संपर्क बनाकर योजना के लाभों को पहुंचाने में मदद करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, WTO नियामक ढांचा प्रदान करता है जो सुनिश्चित करता है कि ऐसे निर्यात प्रोत्साहन वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप हों और काउंटरवेलिंग उपायों से बचा जा सके।
- DGFT: नीति लागू करना और अधिसूचना जारी करना
- वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय: नीति निर्माण और निगरानी
- टेक्सटाइल मंत्रालय: क्षेत्रीय समन्वय और निर्यात सुविधा
- WTO: ASCM समझौते के तहत निर्यात सब्सिडी का नियंत्रण
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम बांग्लादेश परिधान निर्यात प्रतिस्पर्धा
| पहलू | भारत | बांग्लादेश |
|---|---|---|
| वैश्विक परिधान निर्यात हिस्सा | 3.5% (UN Comtrade 2023) | 6% (विश्व बैंक 2023) |
| वार्षिक निर्यात वृद्धि दर | 8% CAGR (पिछले 5 वर्ष) | 15% (EBA योजना के बाद) |
| निर्यात प्रोत्साहन योजना | RoSCTL (4.2% तक टैक्स वापसी) | EU की Everything But Arms (EBA) के तहत शून्य-शुल्क पहुंच |
| टेक्सटाइल क्षेत्र में रोजगार | 45 मिलियन (टेक्सटाइल मंत्रालय, 2023) | ~4 मिलियन (विश्व बैंक 2023) |
| व्यापार बाधाएं | अंतर्निहित कर, उच्च लॉजिस्टिक्स लागत | EU बाजार में शुल्क मुक्त पहुंच |
इस तुलना से पता चलता है कि भारत की RoSCTL योजना अंतर्निहित करों को संबोधित करती है, जबकि बांग्लादेश की EBA योजना के तहत EU बाजार में बिना शुल्क की पहुंच से उसे टैरिफ लाभ मिलता है, जो निर्यात वृद्धि और वैश्विक बाजार हिस्सेदारी को बढ़ावा देता है।
RoSCTL और निर्यात प्रतिस्पर्धा में प्रमुख कमियां
RoSCTL अंतर्निहित राज्य और केंद्र सरकार के करों की वापसी तो करती है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी, सप्लाई चेन की जटिलता और उच्च लॉजिस्टिक्स लागत जैसी संरचनात्मक चुनौतियों को दूर नहीं करती। ये कारक भारतीय परिधान निर्यात की कुल लागत बढ़ाते हैं, जिससे वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ती है। बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में सुधार के बिना इस योजना का निर्यात प्रतिस्पर्धा पर प्रभाव सीमित रहेगा। साथ ही, योजना कुछ शुल्कों को कवर नहीं करती और अप्रत्यक्ष लागत जैसे अनुपालन और प्रमाणन खर्च शामिल नहीं करती।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमियों और उच्च लॉजिस्टिक्स लागत की भरपाई नहीं करती
- अप्रत्यक्ष निर्यात लागतों का सीमित कवरेज
- संरचनात्मक बाधाओं के कारण कुल प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है
- RoSCTL को बुनियादी ढांचा सुधारों के साथ जोड़ने की जरूरत
महत्व और आगे का रास्ता
RoSCTL का विस्तार रोजगार और विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण इस श्रम-प्रधान क्षेत्र में निर्यात वृद्धि को बनाए रखने की एक सोच-समझकर की गई नीति पहल है। यह भारत के वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के व्यापक लक्ष्य से मेल खाती है। हालांकि, योजना के फायदों का पूरा लाभ उठाने के लिए सरकार को बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन दक्षता में निवेश करना होगा। साथ ही, योजना के दायरे को बढ़ाकर अधिक शुल्कों को शामिल करना और इसे उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों जैसे PLI योजना के साथ जोड़ना प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा सकता है।
- RoSCTL विस्तार परिधान निर्यात वृद्धि और रोजगार को समर्थन देता है
- बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में सुधार आवश्यक
- योजना के कवरेज में अप्रत्यक्ष लागतों को शामिल करें
- RoSCTL को अन्य निर्यात प्रोत्साहन और विनिर्माण योजनाओं के साथ जोड़ा जाए
- RoSCTL निर्यातकों को सीधे नकद सब्सिडी प्रदान करती है।
- यह विदेशी व्यापार नीति के तहत अधिसूचित है और DGFT द्वारा लागू की जाती है।
- RoSCTL राज्य और केंद्र सरकार के अंतर्निहित करों और शुल्कों की वापसी करती है।
इनमें से कौन से कथन सही हैं?
- भारत के परिधान निर्यात का वैश्विक बाजार हिस्सा बांग्लादेश से बड़ा है।
- RoSCTL योजना अंतर्निहित करों की भरपाई करती है लेकिन लॉजिस्टिक्स लागत पर असर नहीं डालती।
- बांग्लादेश EU के EBA योजना के तहत टैरिफ मुक्त पहुंच का लाभ उठाता है।
इनमें से कौन से कथन सही हैं?
मेन प्रश्न
RoSCTL योजना के उद्देश्य, कानूनी रूपरेखा और भारत के परिधान निर्यात पर इसके आर्थिक प्रभाव पर चर्चा करें। योजना की सीमाओं का विश्लेषण करें और वैश्विक टेक्सटाइल बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उपाय सुझाएं।
RoSCTL योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
RoSCTL योजना का उद्देश्य परिधान और मेड-अप्स निर्यात पर अंतर्निहित राज्य और केंद्र सरकार के करों तथा शुल्कों की वापसी करना है, जो अन्य माध्यमों से वापस नहीं होते, ताकि भारतीय निर्यात की लागत प्रतिस्पर्धात्मक बनी रहे।
RoSCTL योजना किन कानूनी प्रावधानों के तहत अधिसूचित है?
RoSCTL योजना विदेशी व्यापार नीति (FTP) 2015-20 के तहत अधिसूचित है और DGFT इसे कस्टम्स एक्ट, 1962 की धारा 25 के अधिकारों के अंतर्गत लागू करता है।
RoSCTL WTO नियमों के अनुरूप कैसे है?
RoSCTL योजना नकद सब्सिडी के बजाय अंतर्निहित करों की वापसी प्रदान करती है, जो WTO के सब्सिडी और काउंटरवेलिंग उपाय (ASCM) समझौते के अनुरूप है, इसलिए इसे प्रतिबंधित निर्यात सब्सिडी के रूप में नहीं माना जाता।
RoSCTL योजना के विस्तार के मुख्य आर्थिक लाभ क्या हैं?
इस विस्तार से निर्यात में वार्षिक 10-12% की वृद्धि संभव है, टेक्सटाइल क्षेत्र में 45 मिलियन से अधिक लोगों के रोजगार को बनाए रखा जाता है और भारत के वैश्विक परिधान निर्यात में हिस्सेदारी बढ़ती है।
RoSCTL योजना की मुख्य सीमाएं क्या हैं?
RoSCTL योजना बुनियादी ढांचे की कमियों, उच्च लॉजिस्टिक्स लागत और अप्रत्यक्ष निर्यात खर्चों को संबोधित नहीं करती, जो भारत की कुल निर्यात प्रतिस्पर्धा को सीमित करती हैं।
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