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15 जनवरी 2024 को भारत सरकार ने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के माध्यम से परिधान और मेड-अप्स निर्यात पर राज्य करों की छूट (RoSCTL) योजना को 31 मार्च 2024 तक बढ़ाने की घोषणा की। यह योजना, जो विदेशी व्यापार नीति 2015-20 का अहम हिस्सा है, उन राज्य करों और शुल्कों की भरपाई करती है जो GST के तहत वापस नहीं किए जाते, जिससे वस्त्र क्षेत्र के निर्यात की लागत कम होती है। 2023-24 के लिए इस योजना के लिए 3,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो सरकार की निर्यात प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – निर्यात प्रोत्साहन, विदेशी व्यापार नीति, निर्यात पर GST का प्रभाव
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध – WTO के सब्सिडी और निर्यात प्रोत्साहन नियम
  • निबंध: आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में निर्यात प्रोत्साहनों की भूमिका

RoSCTL की कानूनी संरचना और संवैधानिक संदर्भ

RoSCTL योजना को विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 5 के तहत अधिसूचित किया गया है, जो DGFT को निर्यात प्रोत्साहन को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। यह योजना विदेशी व्यापार नीति 2015-20 के अंतर्गत आती है, जिसे व्यापार के बदलते स्वरूप के अनुसार संशोधित किया गया है। इसका उद्देश्य उन राज्य करों जैसे VAT, एंट्री टैक्स, और बिजली शुल्क की भरपाई करना है, जिन्हें केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 और एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 की धाराओं 54 और 55 के तहत वापस नहीं किया जाता। यद्यपि RoSCTL पर सुप्रीम कोर्ट के सीधे फैसले नहीं हैं, यह योजना WTO के सब्सिडी और काउंटरवेलिंग उपाय समझौता (SCM Agreement) के अनुरूप है, जो निर्यातित वस्तुओं पर करों की छूट को अनुमति देता है बशर्ते वह व्यापार को अनुचित रूप से प्रभावित न करे।

  • विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992: निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का कानूनी आधार।
  • GST अधिनियम, 2017: राज्य करों की वापसी पर प्रतिबंध, RoSCTL की आवश्यकता।
  • WTO SCM समझौता: निर्यात सब्सिडी और कर छूट के नियम निर्धारित करता है।

परिधान और मेड-अप्स निर्यात में RoSCTL की आर्थिक भूमिका

वित्तीय वर्ष 2023-24 में परिधान और मेड-अप्स क्षेत्र का निर्यात लगभग 18 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वस्तु निर्यात का लगभग 13% है (वाणिज्य मंत्रालय, 2024)। RoSCTL योजना निर्यातकों को FOB मूल्य के 3% से 5.5% तक की छूट देती है, जो उत्पाद श्रेणी पर निर्भर करती है, जिससे निर्यात लागत घटती है और वैश्विक बाजार में कीमत प्रतिस्पर्धा बढ़ती है। वस्त्र क्षेत्र में सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से 45 मिलियन से अधिक लोग रोजगाररत हैं, इसलिए यह योजना आजीविका और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है (टेक्सटाइल मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट, 2023)। 2023 में परिधान निर्यात में 12% की वृद्धि हुई, जिसका एक बड़ा कारण RoSCTL जैसे प्रोत्साहन हैं, जो GST के तहत वापस न किए जाने वाले राज्य करों की भरपाई करते हैं।

  • परिधान और मेड-अप्स निर्यात: वित्त वर्ष 2023-24 में 18 अरब डॉलर।
  • छूट दरें: FOB मूल्य का 3% से 5.5% उत्पाद वर्ग के अनुसार।
  • बजटीय आवंटन: योजना विस्तार के लिए 3,000 करोड़ रुपये।
  • रोजगार: वस्त्र और परिधान क्षेत्र में 45 मिलियन से अधिक।
  • निर्यात वृद्धि: 2023 में 12% वार्षिक वृद्धि।
  • राज्य करों की भरपाई: VAT, एंट्री टैक्स, बिजली शुल्क।

RoSCTL के क्रियान्वयन में संस्थागत भूमिकाएं और सहयोग

DGFT इस योजना को लागू करने और अधिसूचित करने वाली मुख्य संस्था है, जो वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आती है। टेक्सटाइल मंत्रालय क्षेत्रीय विकास और रोजगार सृजन में सहयोग करता है और DGFT के साथ मिलकर निर्यात प्रोत्साहनों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाता है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) निर्यात आंकड़े और बाजार जानकारी प्रदान करता है, जिससे नीति निर्धारण में सुधार होता है। GST काउंसिल अप्रत्यक्ष कर संरचना को नियंत्रित करती है, जो उन राज्य करों को प्रभावित करती है जिन्हें RoSCTL के माध्यम से भरा जाता है।

  • DGFT: योजना का अधिसूचना और प्रशासन।
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय: नीति निर्धारण और निगरानी।
  • टेक्सटाइल मंत्रालय: क्षेत्र विकास और रोजगार पर ध्यान।
  • APEDA: निर्यात डेटा और बाजार खुफिया।
  • GST काउंसिल: कर संरचना और राज्य करों का प्रबंधन।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत की RoSCTL बनाम बांग्लादेश की निर्यात रिबेट योजना

2018 से 2023 के बीच बांग्लादेश के परिधान निर्यात क्षेत्र ने 15% वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जो भारत के 12% से अधिक है। इसका एक कारण बांग्लादेश की व्यापक निर्यात रिबेट योजना है, जो शुल्क वापसी और नकद प्रोत्साहन के माध्यम से embedded करों की पूरी भरपाई करती है और सभी क्षेत्रों में समान लाभ देती है। इसके विपरीत, भारत की RoSCTL योजना राज्यवार कर संरचनाओं में भिन्नता के कारण सभी embedded करों की समान रूप से भरपाई नहीं कर पाती, जिससे क्षेत्रीय असमानताएं उत्पन्न होती हैं। साथ ही, RoSCTL की अस्थायी प्रकृति निर्यातकों के लिए अनिश्चितता पैदा करती है, जबकि बांग्लादेश की योजना स्थायी है।

पहलूभारत (RoSCTL)बांग्लादेश (निर्यात रिबेट योजना)
निर्यात वृद्धि दर (2018-2023)12% वार्षिक15% वार्षिक
Embedded करों की भरपाईआंशिक, राज्य अनुसार भिन्नव्यापक, समान
योजना अवधिअस्थायी, समय-समय पर नवीनीकरणस्थायी शुल्क वापसी
छूट दरेंFOB मूल्य का 3% से 5.5%अधिकतर उच्च और समावेशी
निर्यात प्रतिस्पर्धा पर प्रभावमध्यम, क्षेत्रीय असमानताएंउच्च, निर्यातकों में समान

RoSCTL के क्रियान्वयन में चुनौतियां और कमियां

RoSCTL योजना सभी राज्यों में समान रूप से embedded करों की भरपाई नहीं कर पाती, जिससे उच्च कर वाले राज्यों के निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा कमजोर होती है। अस्थायी योजना होने के कारण निर्यातकों को दीर्घकालीन निवेश में अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, छूट दरें प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम हो सकती हैं, जिससे भारत का वैश्विक परिधान निर्यात बाजार में हिस्सा घट सकता है। योजना के जटिल अनुपालन और दस्तावेजीकरण की मांगें छोटे और मध्यम निर्यातकों के लिए बाधा बनती हैं।

  • राज्य कर संरचनाओं में भिन्नता के कारण क्षेत्रीय असमानताएं।
  • अस्थायी योजना की वजह से अनिश्चितता।
  • छूट दरें प्रतिस्पर्धी देशों से कम।
  • जटिल अनुपालन प्रक्रिया छोटे निर्यातकों के लिए चुनौती।

महत्ता और आगे का रास्ता

RoSCTL योजना का विस्तार सरकार की वस्त्र क्षेत्र में निर्यात प्रतिस्पर्धा और रोजगार बनाए रखने की रणनीतिक प्राथमिकता को दर्शाता है। योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए नीति निर्माताओं को छूट दरों को राज्यों के बीच समन्वित करने और इसे स्थायी बनाने पर विचार करना चाहिए। अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाकर MSMEs की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की योजनाओं से सीख लेकर भारत अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत कर सकता है और विदेशी मुद्रा अर्जन बढ़ा सकता है।

  • राज्यों के बीच छूट दरों का समन्वय कर क्षेत्रीय असमानताएं कम करें।
  • RoSCTL को स्थायी निर्यात प्रोत्साहन योजना बनाने पर विचार करें।
  • MSMEs के लिए दस्तावेजीकरण और अनुपालन सरल बनाएं।
  • प्रतिस्पर्धी देशों की योजनाओं से तुलना कर बेहतर रणनीति अपनाएं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
RoSCTL योजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. RoSCTL निर्यात पर embedded केंद्रीय और राज्य करों की भरपाई करता है।
  2. RoSCTL विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत संचालित होता है।
  3. यह योजना WTO के सब्सिडी नियमों के पूर्ण अनुरूप है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि RoSCTL केवल embedded राज्य करों की भरपाई करता है, केंद्रीय करों की नहीं। कथन 2 सही है क्योंकि यह योजना विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 के तहत संचालित होती है। कथन 3 सही है क्योंकि RoSCTL को WTO SCM समझौते के अनुरूप डिजाइन किया गया है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
निर्यात प्रोत्साहनों पर GST के प्रभाव के बारे में विचार करें:
  1. GST निर्यात पर embedded राज्य करों की पूरी वापसी की अनुमति देता है।
  2. RoSCTL को GST के तहत embedded राज्य करों की गैर-वापसी की पूर्ति के लिए शुरू किया गया था।
  3. RoSCTL के तहत remission दरों का निर्धारण GST काउंसिल करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 2 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि GST embedded राज्य करों जैसे VAT और एंट्री टैक्स की वापसी नहीं करता। कथन 2 सही है क्योंकि RoSCTL इसी कमी को पूरा करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि RoSCTL की remission दरें DGFT द्वारा अधिसूचित की जाती हैं, GST काउंसिल द्वारा नहीं।

मेन प्रश्न

भारत के परिधान और मेड-अप्स निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में RoSCTL योजना की भूमिका पर चर्चा करें। इसके आर्थिक प्रभाव और चुनौतियों का विश्लेषण करें तथा वैश्विक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में इसकी प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए सुझाव दें।

RoSCTL योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

RoSCTL योजना का मुख्य उद्देश्य परिधान और मेड-अप्स निर्यात पर VAT, एंट्री टैक्स, और बिजली शुल्क जैसे embedded राज्य करों की भरपाई करना है, जो GST के तहत वापस नहीं किए जाते, जिससे निर्यात लागत कम हो और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़े।

RoSCTL योजना किस कानूनी प्रावधान के तहत अधिसूचित की गई है?

RoSCTL को विदेशी व्यापार नीति 2015-20 के तहत विदेशी व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा विदेशी व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 5 के अनुसार अधिसूचित किया गया है।

RoSCTL GST कानूनों के साथ कैसे मेल खाती है?

RoSCTL उन embedded राज्य करों की भरपाई करती है जो केंद्रीय और एकीकृत GST अधिनियम, 2017 के तहत वापस नहीं किए जाते, जिससे GST के कारण उत्पन्न इस अंतर को पूरा किया जाता है।

RoSCTL योजना विस्तार के आर्थिक लाभ क्या हैं?

इस विस्तार से निर्यात में वृद्धि (2023 में 12% वार्षिक), वस्त्र क्षेत्र में 45 मिलियन से अधिक रोजगार का संरक्षण, और निर्यात लागत कम होने से विदेशी मुद्रा अर्जन में वृद्धि होती है।

RoSCTL योजना के प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?

चुनौतियों में राज्य कर संरचनाओं में क्षेत्रीय असमानताएं, योजना की अस्थायी प्रकृति से अनिश्चितता, प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम remission दरें, और जटिल अनुपालन प्रक्रिया शामिल हैं।

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