परिचय: कवरेज में विस्तार और जारी आर्थिक संकट
भारत ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज में महत्वपूर्ण विस्तार देखा है। 2023 तक कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) लगभग 3.6 करोड़ मजदूरों को कवर करता है, जबकि पीएम-किसान 11.5 करोड़ से अधिक किसानों को प्रति वर्ष ₹6,000 की आर्थिक मदद देता है। इन उपलब्धियों के बावजूद, असंगठित और संगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूरों के बीच आर्थिक संकट गहरा गया है, जिसे 2023 में 7.2% की बढ़ती बेरोजगारी दर और औसतन 6.5% की महंगाई दर से देखा जा सकता है। यह स्थिति लाभ की पर्याप्तता, लक्ष्य निर्धारण और क्रियान्वयन में मौजूदा प्रणालीगत कमियों को उजागर करती है।
UPSC प्रासंगिकता
- GS पेपर 2: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं, संवैधानिक प्रावधान (निर्देशक सिद्धांत, अनुच्छेद 41)
- GS पेपर 3: भारतीय अर्थव्यवस्था – सामाजिक सुरक्षा, श्रम बाजार, असंगठित क्षेत्र की चुनौतियां
- निबंध: भारत में सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संकट
सामाजिक सुरक्षा का कानूनी और संवैधानिक ढांचा
राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 41 के तहत राज्य पर बेरोजगारी, वृद्धावस्था और बीमारी की स्थिति में सार्वजनिक सहायता प्रदान करने का दायित्व है। कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (ESI अधिनियम) की धारा 2(12) और 46 के अंतर्गत संगठित क्षेत्र के बीमित मजदूरों को स्वास्थ्य और नकद लाभ की गारंटी दी गई है। असंगठित मजदूरों के लिए असंगठित मजदूर सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 के तहत राज्यों को कल्याण बोर्ड स्थापित करना अनिवार्य है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ने कई कानूनों को एकीकृत कर सभी श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार करने का प्रयास किया है, लेकिन क्रियान्वयन में अभी भी कमियां हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ओल्गा टेलिस बनाम बॉम्बे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (1985) के फैसले में जीविका के अधिकार को अनुच्छेद 21 का अभिन्न हिस्सा माना, जिससे सामाजिक सुरक्षा का संवैधानिक आधार मजबूत हुआ।
- अनुच्छेद 41: बेरोजगारी और वृद्धावस्था में सार्वजनिक सहायता का निर्देशक सिद्धांत
- ESI अधिनियम, 1948: संगठित क्षेत्र के मजदूरों को स्वास्थ्य और नकद लाभ
- असंगठित मजदूर सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008: असंगठित मजदूरों के लिए कल्याण बोर्ड
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020: सामाजिक सुरक्षा कानूनों का एकीकरण
- ओल्गा टेलिस मामला: अनुच्छेद 21 के तहत जीविका का अधिकार
आर्थिक पहलू: कवरेज, संकट और महंगाई
संघीय बजट 2023-24 में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए ₹1.45 लाख करोड़ आवंटित किए गए, जो वित्तीय प्रतिबद्धता में वृद्धि दर्शाता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू पीएम-किसान योजना 11.5 करोड़ से अधिक किसानों को सीधे ₹6,000 वार्षिक आर्थिक सहायता देती है। ESIC 3.6 करोड़ संगठित क्षेत्र के मजदूरों को कवर करता है, लेकिन असंगठित क्षेत्र, जो NSSO 2018 के अनुसार श्रम शक्ति का 80% है, अभी भी बड़े पैमाने पर अनकवर है। 2023 में 7.2% की बढ़ती बेरोजगारी और औसत 6.5% की महंगाई ने वास्तविक आय को कम कर दिया है, जिससे nominal कवरेज के विस्तार के बावजूद आर्थिक संकट और बढ़ा है।
- सामाजिक सुरक्षा के लिए ₹1.45 लाख करोड़ आवंटित (संघीय बजट 2023-24)
- पीएम-किसान योजना 11.5 करोड़ किसानों को ₹6,000/वर्ष देती है (कृषि मंत्रालय, 2023)
- ESI 3.6 करोड़ मजदूरों को कवर करता है (ESIC वार्षिक रिपोर्ट 2022-23)
- असंगठित क्षेत्र: श्रम शक्ति का 80% (NSSO 2018)
- बेरोजगारी दर: 7.2% (CMIE डेटा, 2023)
- महंगाई: औसत 6.5% (MOSPI)
संस्थागत संरचना और क्रियान्वयन चुनौतियां
कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ESI अधिनियम के तहत लाभों का प्रबंधन करता है, जबकि श्रम और रोजगार मंत्रालय सामाजिक सुरक्षा नीतियों का निर्माण और निगरानी करता है। राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड असंगठित मजदूर कल्याण अधिनियम के तहत क्रियान्वयन की देखरेख करता है। केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) श्रम बाजार के आंकड़े उपलब्ध कराता है। इन संस्थागत व्यवस्थाओं के बावजूद योजनाओं में खंडितता, लाभों की खराब पोर्टेबिलिटी और लाभार्थियों के एकीकृत वास्तविक समय डेटा की कमी के कारण बहिष्कार और प्रभावी राहत में बाधाएं आती हैं।
- ESIC: ESI अधिनियम के तहत स्वास्थ्य और नकद लाभ प्रबंधित करता है
- श्रम और रोजगार मंत्रालय: नीति निर्माण और क्रियान्वयन
- राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड: असंगठित क्षेत्र के कल्याण की देखरेख
- CSO: नीति समायोजन के लिए श्रम बाजार आंकड़े उपलब्ध कराता है
- कृषि मंत्रालय: पीएम-किसान योजना लागू करता है
तुलनात्मक विश्लेषण: भारत बनाम ब्राजील की बोस्ला फैमिलिया
| पहलू | भारत | ब्राजील (बोस्ला फैमिलिया) |
|---|---|---|
| कवरेज | असंगठित क्षेत्र लगभग अनकवर; ESI के तहत 3.6 करोड़ संगठित मजदूर; पीएम-किसान के तहत 11.5 करोड़ किसान | 14 मिलियन से अधिक निम्न-आय परिवार कवर |
| लाभ का प्रकार | निष्प条件 नकद हस्तांतरण (पीएम-किसान); स्वास्थ्य और नकद लाभ (ESI) | शिक्षा और स्वास्थ्य अनुपालन से जुड़े शर्तीय नकद हस्तांतरण |
| गरीबी पर प्रभाव | खंडितता और बहिष्कार के कारण सीमित | गरीबी में 27% कमी (विश्व बैंक, 2020) |
| क्रियान्वयन | कई योजनाएं, पात्रता में ओवरलैप, डेटा एकीकरण कमजोर | एकीकृत लाभार्थी डेटाबेस और शर्तीयताएं लक्ष्य निर्धारण सुनिश्चित करती हैं |
भारत के सामाजिक सुरक्षा ढांचे में प्रणालीगत खामियां
भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली कई योजनाओं में बंटी हुई है, जिनमें पात्रता के मानदंड ओवरलैप करते हैं। असंगठित मजदूर, जो श्रम शक्ति का बड़ा हिस्सा हैं, पहचान की कमी और लाभों की पोर्टेबिलिटी न होने के कारण पर्याप्त सुरक्षा से वंचित हैं। लाभार्थियों का एकीकृत डेटाबेस न होने से वास्तविक समय मॉनिटरिंग संभव नहीं हो पाती, जिससे बहिष्कार की त्रुटियां होती हैं। साथ ही, लाभ राशि महंगाई के साथ नहीं बढ़ती, जिससे आर्थिक संकट कम करने में उनकी भूमिका कमजोर पड़ती है।
- खंडित योजनाएं और ओवरलैपिंग पात्रता
- असंगठित मजदूरों (80% श्रम शक्ति) की अपर्याप्त कवरेज
- राज्यों और नौकरियों के बीच लाभों की खराब पोर्टेबिलिटी
- एकीकृत वास्तविक समय लाभार्थी डेटा की कमी
- महंगाई के कारण लाभों की अपर्याप्तता
आगे का रास्ता: लाभों की पर्याप्तता और लक्ष्य निर्धारण में सुधार
बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच कवरेज के विस्तार के बावजूद, भारत को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक मंच पर एकीकृत करना चाहिए, जिसमें लाभार्थी डेटा भी एकीकृत हो। खासकर असंगठित मजदूरों के लिए राज्यों के बीच लाभों की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करनी होगी। ब्राजील की बोस्ला फैमिलिया की तरह शर्तीय नकद हस्तांतरण से लक्ष्य निर्धारण बेहतर होगा और मानव पूंजी विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। लाभ राशि का महंगाई के अनुसार समय-समय पर पुनरीक्षण आवश्यक है ताकि वास्तविक आय सहायता बनी रहे। राज्य कल्याण बोर्डों को मजबूत करना और डिजिटल आधारभूत संरचना का उपयोग क्रियान्वयन दक्षता बढ़ाएगा।
- सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का एकीकरण और लाभार्थी डेटाबेस का निर्माण
- असंगठित मजदूरों के लिए लाभों की पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करना
- लक्ष्य निर्धारण के लिए शर्तीय नकद हस्तांतरण लागू करना
- लाभों को महंगाई से जोड़कर उनकी पर्याप्तता बनाए रखना
- राज्य कल्याण बोर्डों और डिजिटल वितरण तंत्र को सशक्त बनाना
- यह संगठित क्षेत्र के बीमित व्यक्तियों को स्वास्थ्य और नकद लाभ प्रदान करता है।
- यह अधिनियम असंगठित मजदूरों के लिए राज्य स्तर पर कल्याण बोर्ड स्थापित करने का प्रावधान करता है।
- कर्मचारी राज्य बीमा निगम इस अधिनियम के तहत लाभों का प्रबंधन करता है।
- यह किसानों को बिना शर्त नकद हस्तांतरण प्रदान करती है।
- यह योजना श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा लागू की जाती है।
- 2023 तक यह 11 करोड़ से अधिक किसानों को कवर करती है।
मुख्य प्रश्न
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के बढ़ने और मजदूरों के बीच आर्थिक संकट के बढ़ने के विरोधाभास का आलोचनात्मक विश्लेषण करें। वर्तमान सामाजिक सुरक्षा ढांचे में प्रणालीगत कमियों पर चर्चा करें और लाभों की पर्याप्तता तथा लक्ष्य निर्धारण सुधारने के लिए उपाय सुझाएं।
झारखंड और JPSC प्रासंगिकता
- JPSC पेपर: पेपर 2 - सामाजिक कल्याण और श्रम नीतियां
- झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड में असंगठित श्रम शक्ति अधिक है और सामाजिक सुरक्षा तक सीमित पहुंच है; असंगठित मजदूर सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के तहत राज्य कल्याण बोर्ड कम सक्रिय हैं।
- मुख्य बिंदु: झारखंड के असंगठित क्षेत्र की चुनौतियां, प्रवासी मजदूरों के लिए लाभों की पोर्टेबिलिटी की जरूरत, और राज्य स्तर पर क्रियान्वयन की समस्याएं।
भारत में कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम (ESI अधिनियम) की कवरेज क्या है?
ESIC वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार, ESI अधिनियम लगभग 3.6 करोड़ मुख्यतः संगठित क्षेत्र के मजदूरों को कवर करता है।
PM-KISAN किसानों को किस प्रकार सहायता प्रदान करता है?
PM-KISAN कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू की जाने वाली योजना है, जो 11.5 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की बिना शर्त सीधे आय सहायता देती है।
भारत में सामाजिक सुरक्षा का संवैधानिक प्रावधान क्या है?
राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 41 के तहत राज्य पर बेरोजगारी, वृद्धावस्था, बीमारी और अक्षमता की स्थिति में सार्वजनिक सहायता सुनिश्चित करने का दायित्व है।
भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में बहिष्कार त्रुटियां क्यों होती हैं?
बहिष्कार त्रुटियां योजनाओं के खंडित होने, पात्रता के ओवरलैप, एकीकृत लाभार्थी डेटाबेस की कमी और लाभों की खराब पोर्टेबिलिटी के कारण होती हैं, जो खासकर असंगठित मजदूरों को प्रभावित करती हैं।
ब्राजील की बोस्ला फैमिलिया कार्यक्रम भारत की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से कैसे अलग है?
बोस्ला फैमिलिया शिक्षा और स्वास्थ्य अनुपालन से जुड़ी शर्तीय नकद हस्तांतरण प्रदान करती है, 14 मिलियन से अधिक परिवारों को कवर करती है और गरीबी में 27% की कमी लायी है, जबकि भारत की योजनाएं मुख्यतः बिना शर्त और खंडित हैं।
आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ाई
लर्नप्रो संपादकीय मानकों के बारे में
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