अपडेट

सामाजिक सुरक्षा विस्तार और उभरती चुनौतियों का सिंहावलोकन

भारत ने Employees’ State Insurance Act, 1948 (ESI Act) जैसे कानूनों और PM-KISAN, MGNREGA जैसी योजनाओं के जरिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है। केंद्रीय बजट 2023-24 में सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए ₹2.5 लाख करोड़ आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष से 12% अधिक हैं। PM-KISAN वर्तमान में 11.8 करोड़ किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की राशि प्रदान करता है (कृषि मंत्रालय, 2023), जबकि ESI योजना लगभग 3.6 करोड़ औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों को कवर करती है (ESIC वार्षिक रिपोर्ट 2022-23)। इन विस्तारों के बावजूद, कृषि संकट बना हुआ है, जहां प्रति वर्ष लगभग 10,000 किसान आत्महत्या करते हैं (NCRB 2022), और लगभग 90% श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं (NSSO 2018), जो कल्याण के पर्याप्तता और समावेशन में गहरी खामियों को दर्शाता है।

UPSC प्रासंगिकता

सामाजिक सुरक्षा के लिए संवैधानिक और कानूनी ढांचा

अनुच्छेद 41 के निर्देशात्मक सिद्धांतों के तहत राज्य से बेरोजगारी, वृद्धावस्था और अक्षमता की स्थिति में सार्वजनिक सहायता प्रदान करने की जिम्मेदारी है। Employees’ State Insurance Act, 1948 (धारा 2(9) और 46) औपचारिक क्षेत्र के बीमित कर्मचारियों को स्वास्थ्य और नकद लाभ देता है। Unorganised Workers’ Social Security Act, 2008 अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अनिवार्य करता है, लेकिन लागू करने में असमानता बनी हुई है। Code on Social Security, 2020 विभिन्न कानूनों को एकीकृत करता है, जिसका उद्देश्य अनौपचारिक और गिग श्रमिकों तक कवरेज बढ़ाना है। MGNREGA, 2005 ग्रामीण इलाकों में 100 दिन का रोजगार गारंटी प्रदान करता है, जो ग्रामीण अनौपचारिक श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जाल है।

  • अनुच्छेद 41 न्यायसंगत नहीं है, लेकिन सामाजिक कल्याण नीति निर्धारण में मार्गदर्शक है।
  • ESI एक्ट केवल औपचारिक क्षेत्र के कर्मचारियों को कवर करता है, जिसमें योगदान और लाभ निर्धारित हैं।
  • अनौपचारिक श्रमिक अधिनियम सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास करता है, लेकिन सार्वभौमिक कवरेज में कमी है।
  • सामाजिक सुरक्षा कोड विखंडित कानूनों को एकीकृत कर कवरेज बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।
  • MGNREGA ग्रामीण भारत में रोजगार गारंटी और गरीबी उन्मूलन का साधन है।

आर्थिक पहलू: बजट, कवरेज और संकट के संकेतक

केंद्रीय बजट 2023-24 में सामाजिक सुरक्षा के लिए ₹2.5 लाख करोड़ का आवंटन वित्तीय प्राथमिकता को दर्शाता है। PM-KISAN के तहत 11.8 करोड़ किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की सीधे आय सहायता दी जाती है, लेकिन यह राशि कृषि जोखिम या बढ़ती लागतों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है। ESIC का कवरेज 3.6 करोड़ औपचारिक कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि अनौपचारिक क्षेत्र में 77% श्रमिक कार्यरत हैं (NSSO 2018)। MGNREGA ने 2022-23 में 2.5 बिलियन व्यक्ति-दिन रोजगार उत्पन्न किया, जो 2021-22 की तुलना में 15% अधिक है, यह ग्रामीण संकट और रोजगार की मांग को दर्शाता है। इसी बीच, NCRB के आंकड़े बताते हैं कि प्रति वर्ष लगभग 10,000 किसान आत्महत्या कर रहे हैं, जो nominal कवरेज के बावजूद कृषि संकट की गंभीरता को दिखाता है।

  • ₹2.5 लाख करोड़ का बजट आवंटन 12% की वृद्धि दर्शाता है, जो नीति पर जोर देता है।
  • PM-KISAN की ₹6,000 वार्षिक सहायता बिना शर्त और समान है, जोखिम आधारित भेदभाव नहीं है।
  • ESIC का औपचारिक क्षेत्र तक सीमित कवरेज अधिकांश अनौपचारिक श्रमिकों को बाहर रखता है।
  • MGNREGA के बढ़ते व्यक्ति-दिन ग्रामीण बेरोजगारी और संकट को दर्शाते हैं।
  • किसान आत्महत्या उच्च बनी हुई है, जो आय सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता में कमी दिखाती है।

सामाजिक सुरक्षा और कृषि कल्याण में संस्थागत भूमिका

Employees’ State Insurance Corporation (ESIC) औपचारिक कर्मचारियों के लिए ESI लाभ प्रदान करता है, जिसमें स्वास्थ्य और नकद लाभ शामिल हैं। श्रम और रोजगार मंत्रालय सामाजिक सुरक्षा कोड की नीति और क्रियान्वयन की देखरेख करता है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय PM-KISAN और संबंधित योजनाओं का संचालन करता है। NABARD ग्रामीण ऋण और विकास में सहायता करता है, जो कृषि क्षेत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। NITI Aayog डेटा आधारित नीति सिफारिशें प्रदान करता है, जबकि National Crime Records Bureau (NCRB) किसान आत्महत्या जैसे संकट संकेतकों की निगरानी करता है, जिससे लक्षित हस्तक्षेप संभव होते हैं।

  • ESIC का फोकस औपचारिक कर्मचारियों पर है, जो अनौपचारिक क्षेत्र को सीमित करता है।
  • श्रम मंत्रालय का सामाजिक सुरक्षा कोड विखंडित योजनाओं को एकीकृत करने का प्रयास है।
  • कृषि मंत्रालय सीधे आय सहायता प्रदान करता है, लेकिन शर्तीयता या जोखिम प्रबंधन की कमी है।
  • NABARD के ग्रामीण ऋण कार्यक्रम सामाजिक सुरक्षा के वित्तीय पक्ष को मजबूत करते हैं।
  • NITI Aayog का डेटा विश्लेषण साक्ष्य आधारित नीति निर्माण में मदद करता है।

तुलनात्मक अध्ययन: भारत की सामाजिक सुरक्षा बनाम ब्राजील की Bolsa Família

पहलूभारत (PM-KISAN, MGNREGA)ब्राजील (Bolsa Família)
कवरेजPM-KISAN 11.8 करोड़ किसान परिवारों को कवर करता है; MGNREGA ग्रामीण गरीबों को लक्षित करता हैदेश भर में 14 मिलियन से अधिक परिवार
सहायता का प्रकारबिना शर्त नकद हस्तांतरण (₹6,000 वार्षिक); वेतन रोजगार गारंटीस्वास्थ्य और शिक्षा की शर्तों से जुड़ा शर्तीय नकद हस्तांतरण
गरीबी पर प्रभावकृषि संकट में सीमित कमी; किसान आत्महत्या जारीअत्यधिक गरीबी में 27% कमी (2004-2014) विश्व बैंक 2015 के अनुसार
लक्षित तंत्रव्यापक या सार्वभौमिक, सीमित शर्तीयतालक्षित और शर्तीय, मानव पूंजी विकास को प्रोत्साहित करता है
सामाजिक सुरक्षा एकीकरणविखंडित योजनाएं, सीमित पोर्टेबिलिटी और अनौपचारिक श्रमिक समावेशनएकीकृत सामाजिक सहायता, निगरानी और मूल्यांकन के साथ

कवरेज और पर्याप्तता में संरचनात्मक कमियां

नाममात्र कवरेज के विस्तार के बावजूद, भारत में सामाजिक सुरक्षा में गंभीर खामियां हैं। लाभों की पोर्टेबिलिटी सीमित है, जिससे प्रवासी मजदूरों को परेशानी होती है। PM-KISAN और MGNREGA के लाभ राशि बढ़ती लागत और आय की अस्थिरता के मुकाबले अपर्याप्त हैं। अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिक, जो 90% से अधिक हैं, अक्सर ESI जैसी औपचारिक योजनाओं से बाहर रह जाते हैं। साथ ही, नकद हस्तांतरणों में स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े शर्तों का अभाव उनके प्रभाव को कम करता है। ये कमियां संकट को कम करने और समावेशी कल्याण सुनिश्चित करने के उद्देश्य को कमजोर करती हैं।

  • पोर्टेबिलिटी की कमी प्रवासी अनौपचारिक श्रमिकों के लिए बाधा है।
  • अपर्याप्त लाभ राशि आय सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ है।
  • अनौपचारिक क्षेत्र का बहिष्कार सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सीमित करता है।
  • बिना शर्त योजनाएं मानव पूंजी सुधार के लिए प्रोत्साहन नहीं देतीं।
  • विखंडित कार्यान्वयन प्रशासनिक दक्षता और प्रभाव को कम करता है।

आगे का रास्ता: समावेशन और पर्याप्तता को बढ़ाना

  • सामाजिक सुरक्षा लाभों की पोर्टेबिलिटी बढ़ाकर प्रवासी और अनौपचारिक श्रमिकों को शामिल किया जाए।
  • PM-KISAN और MGNREGA के लाभ राशि को मुद्रास्फीति और जीवनयापन लागत के अनुसार बढ़ाया जाए।
  • स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी शर्तीयता को शामिल कर दीर्घकालिक परिणाम सुधारे जाएं।
  • श्रम, कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के बीच संस्थागत समन्वय मजबूत किया जाए।
  • NITI Aayog और NCRB के डेटा विश्लेषण का उपयोग लक्षित हस्तक्षेप और संकट की निगरानी के लिए किया जाए।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Employees’ State Insurance Act, 1948 के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह औपचारिक क्षेत्र के बीमित व्यक्तियों को स्वास्थ्य और नकद लाभ प्रदान करता है।
  2. यह भारत के 90% से अधिक श्रमिकों को कवर करता है, जिसमें अनौपचारिक श्रमिक भी शामिल हैं।
  3. इस अधिनियम का प्रशासन Employees’ State Insurance Corporation (ESIC) द्वारा किया जाता है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि ESI औपचारिक क्षेत्र के बीमित व्यक्तियों को स्वास्थ्य और नकद लाभ देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि ESI केवल लगभग 3.6 करोड़ औपचारिक श्रमिकों को कवर करता है, न कि 90% से अधिक अनौपचारिक श्रमिकों को। कथन 3 सही है क्योंकि ESIC इस अधिनियम का प्रशासन करता है।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
PM-KISAN योजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. यह एक शर्तीय नकद हस्तांतरण योजना है जो किसान की शिक्षा स्तर से जुड़ी है।
  2. यह पात्र किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 प्रदान करती है।
  3. यह भारत में लगभग 11.8 करोड़ किसान परिवारों को कवर करती है।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि PM-KISAN बिना शर्त नकद हस्तांतरण योजना है। कथन 2 और 3 कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सही हैं।

मुख्य प्रश्न

भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज के बढ़ने और कृषि संकट के बढ़ने के विरोधाभास की आलोचनात्मक समीक्षा करें। कल्याण संरचना में मौजूद संरचनात्मक कमियों पर चर्चा करें और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की पर्याप्तता और समावेशन बढ़ाने के लिए सुझाव दें।

झारखंड और JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2: सामाजिक कल्याण और ग्रामीण विकास
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड की बड़ी अनौपचारिक कार्यशक्ति और कृषि अर्थव्यवस्था में समान संकट के पैटर्न हैं; MGNREGA राज्य में रोजगार का मुख्य स्रोत है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड की MGNREGA निर्भरता, प्रवासी मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा पोर्टेबिलिटी की चुनौतियां, और राज्य-विशिष्ट किसान संकट डेटा पर प्रकाश डालें।
Employees’ State Insurance Act, 1948 का कवरेज क्षेत्र क्या है?

ESI Act औपचारिक क्षेत्र के उन कर्मचारियों को कवर करता है जिनकी आय एक निर्धारित वेतन सीमा से कम है, और उन्हें स्वास्थ्य व नकद लाभ प्रदान करता है। 2022-23 तक, यह लगभग 3.6 करोड़ बीमित व्यक्तियों को कवर करता है, जबकि अनौपचारिक क्षेत्र, जो 90% से अधिक श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है, इसमें शामिल नहीं है (ESIC वार्षिक रिपोर्ट 2022-23, NSSO 2018)।

PM-KISAN किसानों को कैसे समर्थन देता है और इसकी सीमाएं क्या हैं?

PM-KISAN 11.8 करोड़ किसान परिवारों को प्रति वर्ष ₹6,000 की बिना शर्त सीधे आय सहायता प्रदान करता है। सीमाओं में बढ़ती इनपुट लागतों के मुकाबले अपर्याप्त लाभ राशि और उत्पादकता या जोखिम प्रबंधन को प्रोत्साहित करने वाली शर्तीयता का अभाव शामिल है (कृषि मंत्रालय, 2023)।

MGNREGA ग्रामीण रोजगार में क्या भूमिका निभाता है?

MGNREGA ग्रामीण परिवारों को 100 दिन का वेतन रोजगार गारंटी देता है, जिसने 2022-23 में 2.5 बिलियन व्यक्ति-दिन रोजगार उत्पन्न किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15% अधिक है। यह ग्रामीण संकट और जीविका समर्थन की बढ़ती मांग को दर्शाता है (ग्रामीण विकास मंत्रालय)।

सामाजिक सुरक्षा विस्तार के बावजूद कृषि संकट क्यों बना हुआ है?

लगातार जारी कृषि संकट का कारण अपर्याप्त लाभ स्तर, अनौपचारिक और प्रवासी श्रमिकों का बहिष्कार, पोर्टेबिलिटी की कमी, और समेकित जोखिम प्रबंधन उपायों का अभाव है। लगभग 10,000 वार्षिक किसान आत्महत्या इन संरचनात्मक खामियों को उजागर करती हैं (NCRB 2022)।

ब्राजील की Bolsa Família भारत की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से कैसे अलग है?

Bolsa Família स्वास्थ्य और शिक्षा की शर्तों से जुड़ी शर्तीय नकद हस्तांतरण प्रदान करता है, जो 14 मिलियन से अधिक परिवारों को कवर करता है और 2004-2014 के बीच अत्यधिक गरीबी में 27% की कमी लाया (विश्व बैंक 2015)। इसके विपरीत, भारत की योजनाएं जैसे PM-KISAN मुख्यतः बिना शर्त और विखंडित हैं, जो उनके रूपांतरणीय प्रभाव को सीमित करता है।

हमारे कोर्स

72+ बैच

हमारे कोर्स
Contact Us