Exercise PEACEFUL MISSION का परिचय
Exercise PEACEFUL MISSION शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के तहत हर दो साल में आयोजित होने वाला एक बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास है। इसका छठा संस्करण 13 से 25 सितंबर 2021 तक रूस के ओरेनबर्ग क्षेत्र में संपन्न हुआ, जिसमें एससीओ के सभी सदस्य देश—भारत, चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान—ने हिस्सा लिया (आधिकारिक एससीओ प्रेस रिलीज, 2021)। यह अभ्यास आतंकवाद विरोधी और शांति स्थापना क्षमताओं को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिससे यूरेशिया में सामरिक समन्वय और आपसी तालमेल मजबूत होता है।
यह अभ्यास एससीओ के भीतर बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों का उदाहरण है, जो पश्चिमी सैन्य गठबंधनों से अलग क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के सामूहिक समाधान को दर्शाता है। इससे एससीओ की यूरेशिया में सुरक्षा संरचना के रूप में भूमिका मजबूत होती है, जिसमें आतंकवाद विरोध, शांति स्थापना और बहुराष्ट्रीय कमांड क्षमताओं पर जोर दिया जाता है।
UPSC से प्रासंगिकता
- GS पेपर II: अंतरराष्ट्रीय संबंध – भारत की एससीओ में भागीदारी, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, बहुपक्षीय सैन्य कूटनीति
- GS पेपर III: सुरक्षा – आतंकवाद विरोधी, रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे
- निबंध: भारत की रणनीतिक साझेदारियां और यूरेशियाई भू-राजनीति में बढ़ती भूमिका
एससीओ के ढांचे में रणनीतिक महत्व
Exercise PEACEFUL MISSION एससीओ के आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता को व्यवहार में लाता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मुख्य खतरे हैं। यह अभ्यास बहुराष्ट्रीय टुकड़ियों के कमांड और नियंत्रण क्षमताओं को बढ़ाता है, जिससे असममित खतरों के खिलाफ सामंजस्यपूर्ण प्रतिक्रिया संभव होती है। यह एससीओ के चार्टर में निहित आपसी विश्वास और सुरक्षा सहयोग के सिद्धांतों के अनुरूप है।
- आतंकवादी समूहों को बेअसर करने और बंधक बचाव अभियानों के लिए संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभ्यास पर विशेष ध्यान।
- शांति स्थापना परिदृश्यों से संयुक्त राष्ट्र के तहत मिशनों के लिए आपसी तालमेल बेहतर होता है, जो एससीओ की वैश्विक शांति स्थापना में महत्वाकांक्षी भूमिका को दर्शाता है।
- सदस्य देशों के बीच सैन्य संपर्कों को मजबूत करता है, जिससे रणनीतिक हितों में विविधता के बावजूद अविश्वास कम होता है।
भारत की कानूनी और संस्थागत रूपरेखा
भारत की Exercise PEACEFUL MISSION में भागीदारी उसके घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे के अनुरूप है जो सैन्य संचालन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नियंत्रित करते हैं। Defence of India Act, 1962 और Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए संवैधानिक आधार प्रदान करते हैं, जिनमें यह अभ्यास बाहरी सहयोग को बढ़ावा देता है।
Ministry of Defence Act, 1950 के तहत रक्षा मंत्रालय को अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों का समन्वय करने का अधिकार है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा लक्ष्यों के साथ रणनीतिक तालमेल सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा, यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VI के सिद्धांतों के अनुरूप है, जो शांतिपूर्ण विवाद समाधान और शांति स्थापना प्रयासों में सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
आर्थिक पहलू और रक्षा व्यय
हालांकि यह मुख्य रूप से सुरक्षा पहल है, Exercise PEACEFUL MISSION अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक स्थिरता को भी बढ़ावा देता है क्योंकि यह यूरेशिया में व्यापार और निवेश के लिए आवश्यक शांति को सुनिश्चित करता है। एससीओ के सदस्य देश वैश्विक GDP का 20% से अधिक और यूरेशियाई भूभाग का लगभग 40% नियंत्रित करते हैं (World Bank, 2021)।
| देश | रक्षा बजट 2021 | अभ्यास में भूमिका |
|---|---|---|
| भारत | ₹5.25 लाख करोड़ (केंद्र बजट 2021) | सक्रिय प्रतिभागी, आतंकवाद विरोधी और शांति स्थापना पर केंद्रित |
| रूस | ~$65 बिलियन (SIPRI, 2021) | छठे संस्करण का मेज़बान और आयोजक, प्रमुख योगदानकर्ता |
| चीन | ~$209 बिलियन (SIPRI, 2021) | मुख्य प्रतिभागी, संयुक्त परिचालन रणनीतियों को मजबूत करता है |
| पाकिस्तान | ~$11.4 बिलियन (SIPRI, 2021) | प्रतिभागी, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर ध्यान |
रक्षा बजट इस बात का संकेत देते हैं कि एससीओ के सदस्य बड़े पैमाने पर ऐसे अभ्यासों को जारी रखने में सक्षम हैं, जो क्षेत्र में रक्षा उत्पादन और तकनीकी आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित करते हैं।
NATO के सैन्य अभ्यासों से तुलना
| पहलू | Exercise PEACEFUL MISSION (SCO) | Defender Europe 21 (NATO) |
|---|---|---|
| मुख्य फोकस | आतंकवाद विरोध, शांति स्थापना, क्षेत्रीय स्थिरता | तेजी से तैनाती, सामूहिक सुरक्षा, निवारण |
| भू-राजनीतिक संदर्भ | यूरेशियाई बहुध्रुवीय सुरक्षा माहौल | पश्चिमी गठबंधन, ट्रांसअटलांटिक सुरक्षा |
| कमांड संरचना | कोई स्थायी संयुक्त कमांड नहीं; अस्थायी समन्वय | एकीकृत कमांड और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र |
| आयोजन आवृत्ति | 2007 से द्विवार्षिक | वार्षिक या अधिक बार |
| परिधि | बहुराष्ट्रीय, एससीओ सदस्य विविध सिद्धांतों के साथ | बहुराष्ट्रीय, NATO सदस्य और साझेदार |
Exercise PEACEFUL MISSION का आतंकवाद विरोधी और शांति स्थापना पर जोर एससीओ की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है, जो NATO के सामूहिक रक्षा और त्वरित तैनाती के फोकस से अलग है। स्थायी संयुक्त कमांड की कमी के कारण एससीओ की वास्तविक समय की परिचालन क्षमता NATO से कम है।
महत्वपूर्ण कमियां और सीमाएं
- स्थायी संयुक्त कमांड संरचना का अभाव त्वरित निर्णय लेने और परिचालन समेकन को प्रभावित करता है।
- एकीकृत त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र न होने से वास्तविक समय की आपात स्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया सीमित रहती है।
- एससीओ के सदस्यों के बीच सैन्य सिद्धांतों और रणनीतिक हितों की विविधता तालमेल में बाधक है।
- विशेषकर चीन-भारत और रूस-अन्य सदस्यों के बीच भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धाएं गहरे सैन्य एकीकरण को रोकती हैं।
महत्व और आगे का रास्ता
- Exercise PEACEFUL MISSION आतंकवाद और शांति स्थापना की चुनौतियों से निपटने में एससीओ की क्षेत्रीय सुरक्षा भूमिका को मजबूत करता है।
- भारत की भागीदारी यूरेशिया में उसकी रणनीतिक मौजूदगी को बढ़ाती है, जिससे रूस और चीन के साथ संतुलित संबंध बनते हैं।
- स्थायी संयुक्त कमांड और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को संस्थागत रूप देना परिचालन तत्परता और संकट प्रबंधन में सुधार लाएगा।
- सैन्य सिद्धांतों और संचार प्रोटोकॉल को मानकीकृत करके तालमेल बढ़ाया जा सकता है।
- रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को बढ़ावा देकर स्वदेशी क्षमताओं और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत किया जा सकता है।
- यह शंघाई सहयोग संगठन के तहत आयोजित होने वाला द्विवार्षिक सैन्य अभ्यास है।
- यह मुख्य रूप से पश्चिमी सहयोगियों के बीच त्वरित तैनाती और सामूहिक रक्षा पर केंद्रित है।
- भारत इस अभ्यास में आतंकवाद विरोधी और शांति स्थापना सहयोग के तहत भाग लेता है।
- भारत की भागीदारी सीधे Defence of India Act, 1962 द्वारा नियंत्रित होती है।
- Ministry of Defence Act, 1950 रक्षा मंत्रालय को अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों का समन्वय करने का अधिकार देता है।
- यह अभ्यास संयुक्त राष्ट्र चार्टर, विशेषकर अध्याय VI के शांतिपूर्ण विवाद समाधान सिद्धांतों के अनुरूप है।
मुख्य प्रश्न
विवरण करें कि Exercise PEACEFUL MISSION एससीओ के सदस्य देशों के बीच रणनीतिक सैन्य सहयोग को कैसे दर्शाता है और इसका यूरेशिया में क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे पर क्या प्रभाव पड़ता है। (250 शब्द)
Exercise PEACEFUL MISSION का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य एससीओ के सदस्य देशों के बीच आतंकवाद विरोधी और शांति स्थापना के लिए बहुराष्ट्रीय सैन्य सहयोग को बढ़ाना है। यह क्षेत्रीय सुरक्षा खतरों के खिलाफ सामंजस्यपूर्ण और प्रभावी प्रतिक्रिया के लिए परिचालन और कमांड क्षमताओं को मजबूत करता है।
Exercise PEACEFUL MISSION में कौन-कौन से देश भाग लेते हैं?
इस अभ्यास में एससीओ के सभी सदस्य देश भाग लेते हैं, जिनमें भारत, चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। यह अभ्यास सदस्य देशों में बारी-बारी से आयोजित किया जाता है।
Exercise PEACEFUL MISSION कितनी बार आयोजित होता है?
यह अभ्यास 2007 से हर दो साल में आयोजित किया जा रहा है, और इसका छठा संस्करण 2021 में हुआ था।
Exercise PEACEFUL MISSION की प्रमुख सीमाएं क्या हैं?
इस अभ्यास में स्थायी संयुक्त कमांड और एकीकृत त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र का अभाव है, जिससे वास्तविक समय में परिचालन तालमेल और त्वरित तैनाती की क्षमता सीमित रहती है, जो पश्चिमी गठबंधनों जैसे NATO के मुकाबले कमज़ोर है।
Exercise PEACEFUL MISSION भारत के घरेलू कानूनी ढांचे से कैसे मेल खाता है?
भारत की भागीदारी Defence of India Act, 1962 और Armed Forces (Special Powers) Act, 1958 के अंतर्गत आती है, जो आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों को नियंत्रित करते हैं। Ministry of Defence Act, 1950 रक्षा मंत्रालय को ऐसे अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों का समन्वय करने का अधिकार देता है।
स्रोत: LearnPro Editorial | सामान्य अध्ययन | प्रकाशित: 16 September 2021 | अंतिम अपडेट: 1 April 2026
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