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EU के CBAM विस्तार का अवलोकन

1 जनवरी, 2028 से, यूरोपीय संघ अपने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को शुरूआती पांच क्षेत्रों से बढ़ाकर लगभग 180 अतिरिक्त उत्पादों तक फैलाने की योजना बना रहा है। यह विस्तार EU की व्यापक जलवायु रणनीति का हिस्सा है, जिसे यूरोपीय ग्रीन डील के तहत लागू किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 1990 के स्तर की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 55% की कमी लाना है। इस कदम से कार्बन लीक को रोकने के लिए पूरे निर्माण मूल्य श्रृंखला में कार्बन लागत को बराबर किया जाएगा, जिसमें फैब्रिकेटेड मेटल उत्पाद, मशीनरी पार्ट्स और एल्यूमीनियम कंटेनर शामिल हैं। इससे वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं को मजबूती मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के स्वरूप में बदलाव आएगा।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 3: पर्यावरण और पारिस्थितिकी (जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण समझौते), अर्थव्यवस्था (व्यापार नीतियां, कार्बन मूल्य निर्धारण)
  • GS पेपर 2: अंतरराष्ट्रीय संबंध (EU व्यापार नीतियां, WTO नियम)
  • निबंध: जलवायु परिवर्तन और वैश्विक शासन, व्यापार और पर्यावरण का संबंध

CBAM का कानूनी और संस्थागत ढांचा

CBAM का कानूनी आधार EU एमिशन ट्रेडिंग सिस्टम (EU ETS) निर्देश 2003/87/EC है, जिसे 2018 के निर्देश (EU) 2018/410 द्वारा संशोधित किया गया है, जो EU के भीतर कार्बन मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करता है। यह विस्तार 2019 में अपनाए गए EU ग्रीन डील के ढांचे के अनुरूप है, जो 2030 तक 55% उत्सर्जन कटौती के लक्ष्य को संस्थागत करता है। यह मैकेनिज्म वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के सिद्धांतों, खासकर गैर-भेदभाव और सीमा समायोजन नियमों के अनुरूप डिजाइन किया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून में विवाद से बचा जा सके।

  • यूरोपीय आयोग (EC): CBAM नियमों का प्रस्ताव और प्रवर्तन करता है।
  • यूरोपीय संसद (EP): CBAM संशोधनों को विधायी मंजूरी देती है।
  • यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी (EEA): उत्सर्जन और पर्यावरणीय प्रभावों की निगरानी करती है।
  • वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO): व्यापार नियमों के अनुपालन की देखरेख करता है।
  • अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA): कार्बन उत्सर्जन और ऊर्जा खपत के आंकड़े प्रदान करता है।

आर्थिक पहलू और प्रभाव

EU ETS वर्तमान में EU के कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 45% कवर करता है। शुरुआती CBAM में पांच क्षेत्र शामिल थे—सीमेंट, लोहा और इस्पात, एल्यूमीनियम, उर्वरक, और बिजली उत्पादन—जो कार्बन-गहन वस्तुओं में EU के लगभग 40% आयात का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रस्तावित विस्तार से 180 उत्पादों में फैब्रिकेटेड मेटल उत्पाद, ट्यूब, पाइप, फास्टनर, मशीनरी पार्ट्स, और एल्यूमीनियम कंटेनर शामिल होंगे, जो वार्षिक €100 बिलियन से अधिक के आयात को प्रभावित करेंगे (यूरोपीय आयोग, 2024)। विस्तार के बाद CBAM से वार्षिक €5-10 बिलियन की आय होने का अनुमान है, जो EU के बजट और जलवायु वित्त पोषण में योगदान देगा।

पैरामीटरशुरुआती CBAM (2023)विस्तारित CBAM (2028)टिप्पणी
कवर किए गए उत्पादों की संख्या5 क्षेत्रलगभग 180 उत्पादकच्चे माल से लेकर अर्ध-निर्मित और तैयार वस्तुएं
प्रभावित आयात मूल्यलगभग €40 बिलियन€100 बिलियन से अधिकव्यापार कवरेज में महत्वपूर्ण वृद्धि
कवर किए गए GHG उत्सर्जनकार्बन-गहन आयात का 40%निर्माण के निचले स्तरों तक विस्तारकार्बन लीक जोखिम को व्यापक रूप से संबोधित करता है
वार्षिक राजस्व अनुमान€1-3 बिलियन€5-10 बिलियनEU जलवायु पहलों के लिए निधि

कार्बन लीक और मूल्य श्रृंखला कवरेज

कार्बन लीक तब होता है जब उत्पादन उन क्षेत्रों से स्थानांतरित हो जाता है जहां कड़े जलवायु नियम हैं, ऐसे क्षेत्रों की ओर जहां नियम कम सख्त हैं, जिससे उत्सर्जन कटौती के प्रयास कमजोर पड़ते हैं। CBAM का विस्तार इसे रोकने के लिए कच्चे माल से आगे जाकर निर्माण के निचले स्तरों तक कार्बन मूल्य निर्धारण को बढ़ाता है, जिससे उत्सर्जन-गहन उत्पादन चरणों के EU के बाहर स्थानांतरण के रास्ते बंद हो जाते हैं। कार्बन लेखांकन में उपभोक्ता से पहले के स्क्रैप उत्सर्जन को शामिल करने से भी इस मैकेनिज्म की सीमा और सटीक हो जाती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में अंतर्निहित कार्बन का बेहतर आकलन संभव होता है।

तुलनात्मक अध्ययन: EU CBAM बनाम कनाडा का OBPS

कनाडा का आउटपुट-बेस्ड प्राइसिंग सिस्टम (OBPS) भी कार्बन लीक को संबोधित करता है, जिसमें औद्योगिक उत्सर्जकों पर कार्बन लागत लगाई जाती है और व्यापार-प्रभावित क्षेत्रों को रिबेट दिए जाते हैं। EU के सीमा कर के विपरीत, कनाडा घरेलू मूल्य निर्धारण प्रणाली का उपयोग करता है जो उद्योगों के भीतर उत्सर्जन तीव्रता को कम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। 2019 से 2023 के बीच, कनाडा ने कवर किए गए क्षेत्रों में उत्सर्जन तीव्रता में 15% की कमी हासिल की (Environment and Climate Change Canada, 2024)। EU का CBAM सीधे आयातों पर अंतर्निहित कार्बन के आधार पर कर लगाता है, जिससे EU उत्पादकों के लिए प्रतिस्पर्धा का स्तर बराबर रखा जाता है।

विशेषताEU CBAMकनाडा OBPS
मैकेनिज्म प्रकारआयातों पर सीमा कार्बन करघरेलू कार्बन मूल्य निर्धारण और आउटपुट-आधारित रिबेट
कवरेजकार्बन-गहन आयात और EU उत्पादक (ETS के तहत)औद्योगिक उत्सर्जक जिनका व्यापार जोखिम है
कार्बन लीक निवारणप्रत्यक्ष आयात लागत समायोजनप्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए रिबेट
उत्सर्जन कटौती प्रभावआयात लागत बराबरी के माध्यम से अप्रत्यक्ष2019-2023 में उत्सर्जन तीव्रता में 15% कमी

कार्यान्वयन में चुनौतियां और जोखिम

CBAM की सफलता सटीक कार्बन लेखांकन और आयातित वस्तुओं में अंतर्निहित उत्सर्जन की पुष्टि पर निर्भर करती है। जटिल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं और विकासशील देशों से सीमित उत्सर्जन डेटा सत्यापन में बड़ी चुनौतियां पैदा करते हैं। इससे WTO नियमों के तहत विवाद और लागू करने में देरी हो सकती है। साथ ही, सीमा शुल्क अधिकारियों और निर्यातकों पर प्रशासनिक बोझ बढ़ सकता है, जो व्यापार प्रवाह और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

भारत के लिए प्रभाव

  • व्यापार प्रतिस्पर्धा: भारत के इस्पात, एल्यूमीनियम और फैब्रिकेटेड मेटल उत्पादों के निर्यात पर लागत बढ़ने का दबाव पड़ेगा, जिससे EU बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
  • कार्बन लेखांकन क्षमता: भारतीय निर्यातकों को CBAM की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्सर्जन डेटा की पारदर्शिता और सत्यापन प्रणाली मजबूत करनी पड़ सकती है।
  • नीतिगत प्रतिक्रिया: भारत घरेलू कार्बन मूल्य निर्धारण और हरित तकनीकों को तेजी से अपनाकर CBAM के प्रभावों को कम करने की रणनीति अपना सकता है।
  • कूटनीतिक संवाद: भारत को WTO अनुपालन सुनिश्चित करने और विकासशील देशों के संक्रमण के लिए समर्थन मांगने हेतु बहुपक्षीय संवाद में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

महत्व और आगे का रास्ता

  • CBAM विस्तार EU की व्यापक जलवायु कार्रवाई के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है, जो पूरी निर्माण मूल्य श्रृंखला को कवर करता है।
  • यह अन्य अर्थव्यवस्थाओं के लिए कार्बन लागत को व्यापार नीतियों में शामिल करने का उदाहरण स्थापित करता है, जिससे वैश्विक व्यापार मानदंडों में बदलाव आ सकता है।
  • भारत और अन्य विकासशील देशों को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए मजबूत कार्बन लेखांकन प्रणाली बनानी होगी और स्वच्छ तकनीकों में निवेश करना होगा।
  • कार्बन मूल्य निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है ताकि व्यापार विवादों से बचा जा सके।
  • CBAM की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता के लिए निरंतर निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग जरूरी होगी।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
EU कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. CBAM केवल EU के घरेलू उत्पादकों पर लागू होता है जो EU ETS के तहत आते हैं।
  2. CBAM का उद्देश्य अंतर्निहित उत्सर्जन के आधार पर आयातों पर कर लगाकर कार्बन लीक को रोकना है।
  3. CBAM विस्तार में कच्चे माल के अलावा फैब्रिकेटेड मेटल उत्पाद और मशीनरी पार्ट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि CBAM केवल EU के घरेलू उत्पादकों पर नहीं बल्कि आयातित वस्तुओं पर भी लागू होता है। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि CBAM अंतर्निहित कार्बन के आधार पर आयातों पर कर लगाता है और विस्तार में निचले स्तर के उत्पाद शामिल हैं।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
EU CBAM के कानूनी आधार के बारे में निम्नलिखित पर विचार करें:
  1. CBAM EU Emissions Trading System Directive 2003/87/EC के तहत स्थापित है।
  2. CBAM फ्रेमवर्क WTO के गैर-भेदभाव नियमों के खिलाफ है।
  3. EU ग्रीन डील CBAM विस्तार के लिए नीति संदर्भ प्रदान करता है।
  • aकेवल 1
  • bऔर (c) केवल
  • cकेवल
  • aऔर (c) केवल
उत्तर: (d)
कथन 1 और 3 सही हैं; CBAM EU ETS निर्देश पर आधारित है और EU ग्रीन डील इसकी विस्तार की नीति दिशा देता है। कथन 2 गलत है क्योंकि CBAM WTO नियमों के अनुरूप बनाया गया है।

मुख्य प्रश्न

यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के विस्तार के विकासशील देशों, विशेषकर भारत पर प्रभावों का समालोचनात्मक विश्लेषण करें। इस संदर्भ में भारत द्वारा अपनाई जा सकने वाली चुनौतियां और रणनीतिक प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करें।

झारखंड एवं JPSC प्रासंगिकता

  • JPSC पेपर: पेपर 2 (अंतरराष्ट्रीय संबंध), पेपर 3 (पर्यावरण और अर्थव्यवस्था)
  • झारखंड का दृष्टिकोण: झारखंड के इस्पात और धातु उद्योगों को CBAM के कारण लागत दबाव का सामना करना पड़ सकता है, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
  • मुख्य बिंदु: झारखंड के औद्योगिक प्रोफाइल, स्वच्छ उत्पादन तकनीकों की जरूरत और अंतरराष्ट्रीय कार्बन मानकों को पूरा करने के लिए नीति समर्थन को उजागर करते हुए उत्तर तैयार करें।
EU के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म का मुख्य उद्देश्य क्या है?

CBAM का मुख्य उद्देश्य EU ETS के तहत आने वाले EU के घरेलू उत्पादकों और आयातित वस्तुओं के बीच कार्बन लागत को बराबर करके कार्बन लीक को रोकना है, जिससे वैश्विक स्तर पर स्वच्छ उत्पादन को प्रोत्साहन मिले और EU के जलवायु लक्ष्यों की रक्षा हो सके।

EU CBAM का कानूनी आधार कौन से निर्देश हैं?

CBAM EU Emissions Trading System Directive 2003/87/EC के तहत स्थापित है, जिसे Directive (EU) 2018/410 द्वारा संशोधित किया गया है, और यह 2019 में अपनाए गए EU ग्रीन डील के ढांचे में शामिल है।

CBAM विस्तार से भारत के निर्यात पर क्या प्रभाव पड़ता है?

विस्तार से इस्पात और फैब्रिकेटेड मेटल उत्पादों जैसे क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों के लिए अनुपालन आवश्यकताएं बढ़ जाएंगी, जिससे लागत बढ़ सकती है और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए बेहतर कार्बन लेखांकन और स्वच्छ तकनीकों को अपनाना जरूरी होगा।

विकासशील देशों के लिए CBAM क्या चुनौतियां लाता है?

विकासशील देशों को सटीक कार्बन लेखांकन, अंतर्निहित उत्सर्जन की पुष्टि, प्रशासनिक बोझ और संभावित व्यापार विवाद जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो लागू करने में देरी और निर्यात प्रवाह पर असर डाल सकते हैं।

कनाडा का आउटपुट-बेस्ड प्राइसिंग सिस्टम EU के CBAM से कैसे अलग है?

कनाडा का OBPS घरेलू कार्बन मूल्य निर्धारण का उपयोग करता है और उद्योगों के भीतर उत्सर्जन तीव्रता को कम करने के लिए आउटपुट-आधारित रिबेट प्रदान करता है, जबकि EU का CBAM आयातों पर अंतर्निहित कार्बन के आधार पर सीमा कर लगाता है ताकि कार्बन लीक रोका जा सके।

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