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भारत में लोकतंत्र: वर्तमान स्थिति और चुनौतियां

विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत आज एक प्रणालीगत संकट से गुजर रहा है, जहां लोकतांत्रिक मानदंडों और संस्थाओं में लगातार गिरावट देखी जा रही है। स्वतंत्रता के बाद से संविधान में निहित Article 14 (समानता का अधिकार), Article 19 (स्वतंत्रता अभिव्यक्ति की), और Article 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) जैसे प्रावधान लोकतांत्रिक शासन के आधार रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में कार्यपालिका के अतिक्रमण, स्वायत्त संस्थाओं का राजनीतिकरण और नागरिक स्वतंत्रताओं में कमी के कारण ये सुरक्षा कवच कमजोर पड़ रहे हैं। Economist Intelligence Unit के Democracy Index के आंकड़ों के अनुसार भारत की रैंकिंग 2016 में 51वीं से गिरकर 2023 में 46वीं हो गई है, जबकि Freedom House ने भारत को 2023 में 67/100 अंक के साथ 'आंशिक रूप से स्वतंत्र' वर्ग में रखा है।

UPSC प्रासंगिकता

  • GS पेपर 2: राजनीति और शासन – संवैधानिक प्रावधान, मौलिक अधिकार, संस्थाओं की भूमिका
  • GS पेपर 2: शासन – लोकतंत्र की चुनौतियां, संस्थागत सुधार
  • निबंध पत्र: लोकतंत्र, उसकी चुनौतियां और संस्थागत मजबूती

संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा प्रावधानों पर दबाव

भारत का संविधान मौलिक अधिकारों और कार्यपालिका की शक्तियों पर नियंत्रण का प्रावधान करता है। Article 14 कानूनी समानता की गारंटी देता है; Article 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है, हालांकि Article 19(2) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं; Article 21 जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करता है। Representation of the People Act, 1951 के सेक्शन 123 भ्रष्ट चुनावी प्रथाओं को रोकते हैं, जबकि Prevention of Corruption Act, 1988 सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करता है।

न्यायपालिका के हस्तक्षेप जैसे Kesavananda Bharati v. State of Kerala (1973) मामले ने मूल संरचना सिद्धांत स्थापित किया, जो संसद को संविधान के मूल तत्वों में संशोधन की असीम शक्ति नहीं देता। Shreya Singhal v. Union of India (2015) के फैसले ने IT Act की धारा 66A को रद्द कर ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को पुनः स्थापित किया। इसके बावजूद हाल के निर्णय और कार्यपालिका की कार्रवाइयां न्यायिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कमजोर करने का संकेत देती हैं, जो संस्थागत गिरावट का परिचायक है।

शासन संबंधी चुनौतियों को दर्शाते आर्थिक संकेतक

आर्थिक आंकड़े भी लोकतांत्रिक स्वास्थ्य पर शासन की चुनौतियों को उजागर करते हैं। विश्व बैंक के अनुसार भारत की Ease of Doing Business रैंकिंग 2020 में 63 से गिरकर 2023 में 68 हो गई है, जो नियामक और संस्थागत अड़चनों को दर्शाता है। GDP वृद्धि दर FY22 में 8.7% से घटकर FY23 में 6.1% रह गई (Economic Survey 2023-24), जो आर्थिक मंदी का संकेत है।

Law and Justice मंत्रालय के लिए 2023-24 में बजट आवंटन ₹1,200 करोड़ था, जो कानूनी सुधारों की जरूरत के मुकाबले मामूली है। बढ़ती आर्थिक असमानता, जिसका Gini coefficient 35.7 (World Inequality Report 2022) है, लोकतांत्रिक समावेशन को कमजोर करती है क्योंकि यह आर्थिक शक्ति केंद्रित करती है और समान राजनीतिक भागीदारी को सीमित करती है।

संस्थागत कमजोरियां और राजनीतिकरण

प्रमुख लोकतांत्रिक संस्थाएं अपनी स्वायत्तता और प्रभावशीलता को लेकर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। संविधान द्वारा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का दायित्व संभालने वाली Election Commission of India (ECI) पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। Supreme Court of India (SCI), जो मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, विवादास्पद नियुक्तियों और फैसलों के कारण न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

Central Bureau of Investigation (CBI) राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण भ्रष्टाचार की जांच में प्रभावहीन साबित हो रही है। Press Council of India (PCI) और National Human Rights Commission (NHRC) ने पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की रिपोर्ट की है, NCRB के आंकड़ों के अनुसार 2022 में पत्रकारों के खिलाफ अपराधों में 15% की वृद्धि हुई। स्वतंत्र मीडिया संस्थानों में 2015 से 2023 के बीच 20% की कमी आई है (PTI), जो लोकतांत्रिक स्थान के सिकुड़ने का संकेत है।

संस्थामंडेटवर्तमान चुनौतियांलोकतंत्र पर प्रभाव
Election Commission of Indiaस्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करानापक्षपात के आरोप, कार्रवाई में देरीचुनावी विश्वसनीयता में कमी
Supreme Court of Indiaसंविधान का पालन और अधिकारों की रक्षाराजनीतिकरण, विवादास्पद फैसलेन्यायिक स्वतंत्रता पर प्रश्न
Central Bureau of Investigationभ्रष्टाचार और अपराधों की जांचराजनीतिक हस्तक्षेपकानून प्रवर्तन कमजोर
Press Council of Indiaमीडिया स्वतंत्रता की निगरानीस्वतंत्र मीडिया में गिरावटप्रेस स्वतंत्रता में कमी
National Human Rights Commissionमानवाधिकारों की रक्षासीमित प्रवर्तन शक्तिमानवाधिकार उल्लंघन जारी

तुलनात्मक अध्ययन: भारत बनाम नॉर्वे

नॉर्वे विश्व में लगातार शीर्ष लोकतंत्र के रूप में स्थान रखता है, 2023 के EIU Democracy Index में 9.81/10 स्कोर के साथ। इसकी लोकतांत्रिक मजबूती मजबूत संस्थागत संतुलन, उच्च मीडिया स्वतंत्रता (Reporters Without Borders में 1वां स्थान), और सक्रिय नागरिक भागीदारी पर आधारित है। इसके विपरीत, भारत की रैंकिंग और स्कोर संस्थागत क्षरण और नागरिक स्वतंत्रताओं में कमी के कारण पिछड़ते जा रहे हैं।

पहलूभारतनॉर्वे
EIU Democracy Index (2023)46वां, लगभग 6.9 स्कोर1वां, 9.81 स्कोर
प्रेस स्वतंत्रता (Reporters Without Borders)150वां1वां
न्यायिक स्वतंत्रताराजनीतिकरण के कारण चुनौतियांमजबूत, स्वतंत्र न्यायपालिका
नागरिक भागीदारीमतदाता turnout 67.4% (2019)मतदाता turnout > 75%

संरचनात्मक कमजोरियां जो लोकतंत्र को कमजोर करती हैं

सबसे बड़ी कमी संवैधानिक सुरक्षा प्रावधानों के प्रवर्तन में है, जो कार्यपालिका के अतिक्रमण को रोकते हैं। ECI और न्यायपालिका जैसे स्वायत्त संस्थाओं का राजनीतिकरण लोकतंत्र के लिए जरूरी संतुलन प्रणाली को कमजोर करता है। प्रभावी जवाबदेही तंत्र के अभाव में कार्यपालिका का प्रभुत्व बढ़ता है, जिससे लोकतांत्रिक मानदंडों को नुकसान पहुंचता है।

आगे का रास्ता: लोकतांत्रिक मजबूती को बढ़ावा देना

  • ECI, CBI और न्यायपालिका जैसी संस्थाओं की स्वायत्तता और क्षमता को पारदर्शी नियुक्तियों और निश्चित कार्यकाल के जरिए मजबूत किया जाए।
  • संवैधानिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए कानूनी सुधारों और प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बजट आवंटन बढ़ाया जाए।
  • पत्रकारों पर हमलों को रोकने के लिए कानूनों का कड़ाई से पालन कर प्रेस स्वतंत्रता की रक्षा की जाए और स्वतंत्र मीडिया का समर्थन किया जाए।
  • लोकतांत्रिक अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के लिए नागरिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
  • Representation of the People Act, 1951 के तहत भ्रष्ट चुनावी प्रथाओं को रोकने के लिए चुनावी सुधार लागू किए जाएं।

अभ्यास प्रश्न

📝 प्रारंभिक अभ्यास
भारतीय संविधान के Article 19 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. Article 19 अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता बिना किसी प्रतिबंध के प्रदान करता है।
  2. Article 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
  3. Shreya Singhal v. Union of India (2015) में सुप्रीम कोर्ट ने IT Act की धारा 66A को Article 19 का उल्लंघन मानकर रद्द कर दिया।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2 और 3
  • cकेवल 1 और 3
  • d1, 2 और 3 सभी
उत्तर: (b)
कथन 1 गलत है क्योंकि Article 19 की स्वतंत्रताएं Article 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने Section 66A को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन मानकर रद्द किया।
📝 प्रारंभिक अभ्यास
Kesavananda Bharati मामले के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
  1. इसने संसद को संविधान संशोधन की शक्ति सीमित करने वाला मूल संरचना सिद्धांत स्थापित किया।
  2. इस मामले ने संसद को संविधान के किसी भी हिस्से में असीम संशोधन की अनुमति दी।
  3. यह निर्णय 1973 में दिया गया था।
  • aकेवल 1 और 2
  • bकेवल 2
  • cकेवल 1 और 3
  • dकेवल 3
उत्तर: (c)
कथन 1 सही है क्योंकि इस मामले ने मूल संरचना सिद्धांत स्थापित किया। कथन 2 गलत है क्योंकि संसद की शक्ति असीमित नहीं है। कथन 3 सही है, निर्णय 1973 में आया था।

मेन प्रश्न

भारत में संवैधानिक सुरक्षा कवच के क्षरण और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कमजोरी कैसे एक अस्थायी चुनौती नहीं बल्कि प्रणालीगत संकट का संकेत हैं, इस पर चर्चा करें। लोकतांत्रिक मजबूती बहाल करने के उपाय सुझाएं। (250 शब्द)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Kesavananda Bharati मामले में स्थापित मूल संरचना सिद्धांत क्या है?

Kesavananda Bharati v. State of Kerala (1973) के फैसले ने यह सिद्ध किया कि संसद संविधान की मूल संरचना या आवश्यक तत्वों में संशोधन नहीं कर सकती, जिससे Article 368 के तहत संशोधन की शक्ति सीमित हो जाती है।

Economist Intelligence Unit के Democracy Index में भारत की रैंकिंग हाल ही में कैसे बदली है?

भारत की रैंकिंग 2016 में 51वीं से गिरकर 2023 में 46वीं हो गई है, जो संस्थागत क्षरण और नागरिक स्वतंत्रताओं में कमी के कारण लोकतांत्रिक मानकों में गिरावट को दर्शाता है।

भारत में Election Commission का लोकतंत्र में क्या योगदान है?

Election Commission of India स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करता है, जैसा कि संविधान में निर्धारित है।

Article 19(2) के तहत किन-किन प्रतिबंधों को उचित माना गया है?

Article 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं जो संप्रभुता, सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता, नैतिकता या मानहानि के हित में हों।

भारत में लोकतंत्र को प्रभावित करने वाली शासन संबंधी चुनौतियों को दर्शाने वाले आर्थिक संकेतक कौन से हैं?

भारत की Ease of Doing Business रैंकिंग में गिरावट (2020 में 63 से 2023 में 68), GDP वृद्धि दर में मंदी (FY22 में 8.7% से FY23 में 6.1%), और बढ़ती आर्थिक असमानता (Gini coefficient 35.7) शासन की कमजोरियों और लोकतांत्रिक समावेशन पर प्रभाव को दर्शाते हैं।

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